Wednesday, 20 June 2018, 5:13 AM

मेरी कलम से

पिता की छाया में मिलता है सुकून

Updated on 18 June, 2018, 6:25
◆ रश्मि सक्सेना ◆ हिम्मत है चट्टान सी , ज़ज़्बों का तूफ़ान । पूरे करते हैं पिता , बच्चों के अरमान ।।   बचपन से लेकर जवान होने तक इस बारे में कभी हम सोचते ही नहीं है । हमें तो बस उस समय ये लगता है कि हम जो भी मांगें वो हमें... आगे पढ़े

शिखर का सूनापन और एक संत का जाना

Updated on 13 June, 2018, 7:04
 राजेश बादल  हृदयविदारक ख़बर । भय्यूजी ने आत्महत्या कर ली । यक़ीन नही होता । परेशान थे । यह तो पता था । लेकिन निजी जिंदगी की कलह इतना बड़ा क़दम उठाने पर मजबूर कर देगी - कल्पना से परे था । चन्द रोज़ पहले मुम्बई के होटल सहारा में रात... आगे पढ़े

साहित्य से बनाएं बच्चों को दोस्त

Updated on 9 June, 2018, 8:38
   सीमा शिवहरे "सुमन"    भोपाल     बच्चे  कच्ची माटी की तरह होते हैं ।इन्हें जिस आकार में भी चाहो ढाला जा सकता है । जब बच्चों का भविष्य इस उम्र तक, हमारे हाथ में है तो क्यों ना उन्हें अच्छे साहित्य की सौगात देकर उनके व्यक्तित्व को प्रभावी बनाया जाय। साहित्यकारों... आगे पढ़े

.....जब चिड़ियाघर में खुशी से चहक उठे बंदियों के बच्चे...

Updated on 2 June, 2018, 8:19
विनीता तिवारी सुख की अनुभूति तब होती है जब मासूमों के चेहरों पर खुशी झलकती हो। क्योंकि बच्चे कभी बनावटी खुशी जाहिर नहीं करते। यदि वे सच में खुश हैं तो ये पता लग जाता है उनके चेहरे से।वाकया करीब एक महीने पहले का है। मैं इंदौर में  महिला जेल परिसर... आगे पढ़े

दादा-नानी से अनौपचारिक शिक्षा

Updated on 30 May, 2018, 8:44
    संध्या रायचौधरी   हमारे समय में स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां ढाई -तीन महीने की होती थीं और उन दिनों में नानी,दादा ,मामा मौसी यानी किसी न किसी रिश्तेदार के घर जाना तय रहता था।  जीभरकर मौज-मस्ती, खेलकूद , खाना-पीना तो पूरे समय चलता ही था लेकिन खेल-खेल में दादा-नानी हमारी पढ़ाई... आगे पढ़े

लोकतंत्र को मिली दो बूँद जीवन की !

Updated on 20 May, 2018, 9:27
दरअसल / कीर्ति राणा भाजपा के नाटक का ऐसा दुखद अंत होगा, ये राज्यपाल से लेकर नरेंद्र भाई, अमित भाई के लाखों लाख भक्तों ने भी नहीं सोचा होगा। मिठाई के डिब्बे खोल ही नहीं पाए, सुबह से ही बधाई गीत बजाने को आतुर चैनलों को मन मसोसकर शास्त्रीय संगीत... आगे पढ़े

हिंदी के माथे की बिंदी मिट गई, दादा बालकवि बैरागी चले गए

Updated on 14 May, 2018, 0:34
• स्मृति शेष/ कीर्ति राणा मौत भी कभी कभी ख़ास दिन चुनती है किसी को अपने साथ ले जाने के लिए, दादा बालकवि बैरागी के लिए उसने चुना भी तो विश्व मातृ दिवस। नौजवान पीढ़ी को ललकारने वाला और सूरज से भी प्दारश्दान करने का साहस रखने वाला मालवा का ऐसा... आगे पढ़े

भ्रूण हत्या ? एक आव्हान “

Updated on 8 May, 2018, 10:47
रीता मानके तेलंग “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते तत्र रमन्ते देवताः” अर्थात जहा नारियों की पूजा की जाती है ,वही देवता निवास करते हैं। परंतु भारत एक ऐसा अनोखा देश है जहां नारियों की पूजा तो होती नहीं किन्तु देवता जरूर वास करते हैं वो भी कण कण में ! इस अनादर के चलते... आगे पढ़े

*शुभस्थ शीघ्रम "

Updated on 6 May, 2018, 12:46
  अनुपमा अनुश्री     निरंतर बढ़ते अपराध दुराचार,  भ्रष्टाचार  की खबरों से  अखबार स्याह हो चुके है। भारतीय सभ्यता संस्कृति , संस्कारों जीवन मूल्यॊं पर लगा कलंक भारत की छवि को धूमिल कर रहा है विश्व पटल पर। आज भयाक्रांत है  हमारी बेटियां, नन्ही बच्चियों, स्कूली छात्राओं  के माता पिता अपने बच्चों की... आगे पढ़े

राहुल मंदिरों में जाने की क्यों कर रहे हैं नौटंकी

Updated on 5 May, 2018, 11:41
प्रशांत रायचौधरी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का मंदिर दर मंदिर जाकर प्रणाम करना केवल राजनैतिक नौटंकी है। वे चुनावी फायदे के लिए ही मंदिरों की खाक छान रहे हैं। खुद को शिवभक्त बताने वाले राहुल क्या कांग्रेस पार्टी को अपने परनाना जवाहरलाल नेहरू की छद्म सेक्युलर और हिंदु विरोधी विरासत से... आगे पढ़े

हर गांव बिजली पहुंचाने का प्रधानमंत्री का दावा सत्य से परे

Updated on 3 May, 2018, 11:59
प्रशांत रायचौधरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह ऐलान किया कि देश के सभी गांव विद्युतीकृत कर दिये गए हैं। अब वे हर घर में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य तय कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद कई लोगों  ने उनके दावे को चुनौती दी है।   सरकार की परिभाषा के मुताबिक... आगे पढ़े

विधि आयोग की सिफारिश रंग लाएगी

Updated on 22 April, 2018, 14:01
प्रशांत रायचौधरी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड पर नकैल कसने का सिलसिला जारी है। विधि आयोग ने सरकार से सिफारिश की है कि बीसीसीआई को आरटीआई के दायरे में लाया जाए। आयोग का कहना है कि बीसीसीआई सरकारी संस्था की तरह ही है।  जब दूसरे खेल संघ आरटीआई के दायरे में आते... आगे पढ़े

दिल तो बच्चा है जी... ...

Updated on 16 April, 2018, 14:00
संध्या रायचौधरी  गाने की यह लाइनें हमारी जिंदगी में सटीक बैठती हैं। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे हम छोटी बुद्धि वाले होते जाते हैं। हम गंभीर प्रवृत्ति वाले हो जाते हैं और बातों को हल्के, में नहीं लेते हैं। बात-बात पर गुस्सा, झुंझलाहट दिखाते हैं, जबकि अपनी जवानी... आगे पढ़े

मांगें माफी खुद से मन से

Updated on 11 April, 2018, 13:52
// संध्या रायचौधरी कन्फेशन, पाप स्वीकृति या अपराध कबूल का चलन हर काल में, हर समाज में और धर्म में रहा है, चाहे प्रकारांतर से ही सही। कन्फेशन बॉक्स के आगे बैठकर ही कन्फेशन किया जाता हो यह जरूरी नहीं, सबके अपने-अपने तरीके हो सकते हैं आत्मस्वीकृति के। सच पूछा जाए... आगे पढ़े