Saturday, 18 January 2020, 12:39 PM

साहित्य

शुभ-शगुन

Updated on 13 January, 2020, 0:34
अर्चना  मंडलोई…… बरसों की तपस्या आज फलीभूत होने जा रही थी । दस वर्ष का पीयूष और पलक तो उससे भी छोटी पाँच वर्ष की ही थी ।तब एक कार एक्सीडेंट में पति चल बसे थे। पैंतालिस साल की उम्र में वैधव्य । कठिन संघर्षों के वे दिन उसकी आँखों में चलचित्र... आगे पढ़े

रंगों की मकर संक्रांति

Updated on 11 January, 2020, 1:58
शोभारानी तिवारी  मकर संक्रांति का पर्व आया मिलजुलकर पर्व मनाएंगे।  तिल गुड़ की मीठास संग,  हम खुशी जताएंगे।  मौज-मस्ती करेंगे हम,  मन में विश्वास जगायेंगे,  रंग बिरंगी पतंग डोर संग,  आसमान में उड़ाएंगे।  स्वर्णिम किरणों को छूने,  लहराकर ऊपर चढ़ जाए,  इंद्रधनुष रंगों में रंगकर,  तूफानों में नाच दिखाएं , मंजिल का तो पता नहीं,  नील गगन की रानी कहलाए,  आसमान में बेखबर,  आजादी संग... आगे पढ़े

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:33

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:27

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:25

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:23

आओ रखें नए कदम....

Updated on 30 December, 2019, 23:33
◆ रश्मि सक्सेना ◆ आओ रखें नए वर्ष में कदम । हर तरफ हो रोशनी और दूर हो ये तम ।। गिले-शिकवों को छोड़कर । ग़मों से बंधन तोड़कर।। पकड़ कर ख़ुशी का हाथ। मुस्कानों को लेकर साथ।। आओ रखें नए वर्ष में कदम....   माता-पिता का रखना ख़याल। थोड़ा सा वक़्त थोड़ी सी देखभाल।। मीठे बोलों से अपने बहलाना । वादा... आगे पढ़े

नववर्ष का स्वागत

Updated on 30 December, 2019, 23:32
डॉ. अंजुल कंसल"कनुप्रिया" नववर्ष का स्वागत बारम्बार वंदन अभिनंदन हर्ष अपार   आनंदमय उत्कर्ष नवल हो हर पल नव उल्लास भरा हो नव आशा अभिलाषा का संचार नववर्ष का स्वागत बारम्बार ।।   नव रचना,नव उमंग सहर्ष हो नव उडान,भाव संदेश नया हो हर हृदय हो आशीष और प्यार नववर्ष का स्वागत बारम्बार।।   गीत संगीत की मधुर तरंग हो राग अनुराग का स्वर संगम... आगे पढ़े

अभिनंदन

Updated on 29 December, 2019, 21:44
शोभा रानी तिवारी नए वर्ष का करें अभिनंदन , आओ मिलकर खुशी मनाएं,  शुरू करें फिर से नवजीवन , बीते कल को भूल जाएं । हर रंग के फूल यहां पर , यह धरती एक बगीचा है,  एक विधा की परछाई  हम , ना कोई ऊंचा नीचा है, स्वर्णिम किरणें आसमान से,  रोली लेकर आई हैं , प्रकृति ने अपने... आगे पढ़े

बदचलन

Updated on 27 December, 2019, 22:41
हरिशंकर परसाई: एक बाड़ा था. बाड़े में तेरह किराएदार रहते थे. मकान मालिक चौधरी साहब पास ही एक बंगले में रहते थे. एक नए किराएदार आए. वे डिप्टी कलेक्टर थे. उनके आते ही उनका इतिहास भी मोहल्ले में आ गया था. वे इसके पहले ग्वालियर में थे. वहां दफ़्तर की लेडी... आगे पढ़े

नानाजी का इनाम

Updated on 27 December, 2019, 22:39
वन्दना यादव मम्मी से ओट बनाकर नानाजी हम भाई-बहनों से गुफ्तगू कर रहे थे। मम्मी कनखियों से हमारी ओर देख भर लेती। कुछ समय बाद एकांत पाकर मम्मी ने उत्सुकता की पोटली खोली, ‘सबसे अलग बैठकर नाना से क्या बातें हो रही थी?’ भाई-बहनों में बड़ी होने के कारण उत्तर मुझे... आगे पढ़े

समीक्षा- * सिलवटें * लघुकथा संकलन

Updated on 14 December, 2019, 0:13
                 समीक्षक - वन्दना पुणतांबेकर      विचारों का महकता गुलदस्ता                         सिलवटें जब मेरे हाथ में आई तो इतनी आकर्षक लगी कि शब्दों में कहना असम्भव है।इतनी सारी लेखिकाओं का लेखन सृजन देखकर मन की भवनाएं भावविभोर हो गई।कई रंगों के विचारों का एक महकता गुलदस्ता हाथों में थामे में महक... आगे पढ़े

साहित्यकार हरेराम वाजपेयी को साहित्य भूषण सम्मान

Updated on 5 December, 2019, 1:08
 -मालवा के साहित्यकार श्रीधर जोशी की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम -शहर के साहित्यकारों ने विचार साझा किए -विचार प्रवाह मंच के सदस्यों द्वारा कविता पाठ इंदौर. मालवा के वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार  स्व. पंडित श्रीधर जोशी की प्रथम पुण्य स्मृति में साहित्य भूषण सम्मान साहित्यकार हरेराम वाजपेयी  को  प्रदान किया गया। विचार प्रवाह... आगे पढ़े

सपना

Updated on 16 November, 2019, 0:13
आरती चित्तौड़ा (जयपुर) सर्द रात में हवा अपनी रफ्तार से चल रही थी। सभी ने अपनी हैसियत के मुताबिक गर्म कपड़े पहन रखे थे। बाजार में रौनक आम दिनों की तरह थी। गरम  गरम  दूध जलेबी, गाजर का हलवा, गराडू, मूंगफली और  कढाई में ऊबलता दूध ये सब चीजें देखकर खाने को... आगे पढ़े

मानव-मूल्य

Updated on 16 November, 2019, 0:03
डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी (उदयपुर) वह चित्रकार अपनी सर्वश्रेष्ठ कृति को निहार रहा था। चित्र में गांधीजी के तीनों बंदरों  को विकासवाद के सिद्दांत के अनुसार बढ़ते क्रम में मानव बनाकर दिखाया गया था।उसके एक मित्र ने कक्ष में प्रवेश किया और चित्रकार को उस चित्र को निहारते देख उत्सुकता से... आगे पढ़े

बेटी बचाओ

Updated on 10 November, 2019, 23:11
अदिति सिंह भदौरिया  जैसे ही मालिनी जी ने मंच पर कदम रखा तभी तालियों की गूँज ने उनका स्वागत किया ओर होता भी क्यों न आखिर वो शहर कि सम्मानित समाज सेविका थी ओर आज का विषय भी संवेदनशील था( बेटी बताओ) उनके भाषण एवं उनके कार्य लोगों को जीवन की... आगे पढ़े

वेणी वाली दुर्गा '

Updated on 10 November, 2019, 23:08
स्वाति 'सखि'जोशी (पुणे) देवी मंदिर के आहते में सजी छोटी सी दुकान पर स्मिता सामान ले रही थी। हार, फूल, नारियल,धूप, कपूर, प्रसाद सब ले लिया था, तभी वहाँ रखी लाल रंग की जरी बाॅर्डर की साडी पर उसकी नज़र पडी , कुछ कहने के लिये मुडी, तो देखा पति सतीश... आगे पढ़े

बरकत

Updated on 10 November, 2019, 23:05
 पिंकी तिवारी रियांश अब पूरे पाँच साल का हो गया था । घर में सबका लाडला और बहुत नटखट ।कभी दीवारों पर अपनी कलाकारी दिखाता तो कभी सोफे के हैंडल पर चढ़कर टीवी देखता ।इस बार तो रियांश की मम्मी को उसके जन्मदिन पर तोहफे के रूप में एक सलाह भी... आगे पढ़े

सुनो

Updated on 10 November, 2019, 23:04
..../ देवेन्द्र बंसल ख़ुशहाली आ रही है  उसे अपने पास बैठना नाराज़ मत करना दूसरे का घर छोड़कर बड़ी उम्मीद से आई है  कितने दिन रुकेगी पता नही  लेकिन जहाँ जाती हैं वहाँ क़िस्मत बदल देती है  जहाँ से आती हैं  उनकी भी बदल जाती हैं आप अच्छें लगे तो रुकेगी नहीं तो फिर नया घर ढूँढेगी यहीं तो लीला है देवेन्द्र जो प्रभु ने बनाई हैं मुसाफ़िरों की दुनिया में  यही ज़िंदगी बसाई हैं   ... आगे पढ़े

..... बरखा रानी ...

Updated on 1 October, 2019, 23:55
 " मीनू मांणक " उमड़-घुमड़ घनघोर घटा । चमक-दमक गरजी बिजुरिया ।। मंद-मस्त बादल झूमते । संग हवा के उड़ते जायें ।। राह तकती , प्यासी धरती । ताक रही , आस लगाए ।। सूखी नदियाँ , सूखे झरने । प्यासे हैं , सब प्राणी ।। अब तो बरसो , बरखा रानी । क्यों सूखी गरज पर तरसाती हो ।। गरज-गरज... आगे पढ़े

'' घर''

Updated on 1 October, 2019, 23:53
   कुमुद दुबे,   इन्दौर कंकरीट का मकान जिसे लोग घर कहते है बिखरे-बिखरे है लोग  उसे परिवार कहते हैं.. ना बच्चों की किलकारी ना सासु-माँ का दुलार  ना दुलार भरी फटकार रिश्तों से दूर सब कटे-कटे रहते हैं कंकरीट का मकान जिसे लोग घर कहते हैं... ना ननंद की तकरार ना नन्दोई की मनुहार ना ससुर के पदचाप ना आगमन की खंकार ना बहू की... आगे पढ़े

"आडम्बर "

Updated on 1 October, 2019, 23:51
आशा जाकड़ (9754969496) "अजी सुनिए ,मम्मी की फोटो  बड़ी करवा दीजिए  ,मुझे  ड्राइंग  रूम में  लगाना है और चंदन की बड़ी माला भी ले आना।" "हां - हां  करवा दूंगा ।"कहकर दिलीप सीढियां  उतरने लगा और सोचने लगा कि  जबतक मां जीवित रही तब तक कभी मां से ढंग से बातचीत नहीं ... आगे पढ़े

शिक्षक

Updated on 5 September, 2019, 10:49
शोभा रानी तिवारी/ अंधकार था मेरा जीवन , मैं मूर्ख अज्ञान था , चैतन्य प्राणी होने पर भी, मैं सबसे अंजान था , जिसने दिशा का ज्ञान कराया,  मानो उसका एहसान , इसीलिए तो सब करते हैं , शिक्षक का सम्मान।  हम गीली मिट्टी के पुतले , हर पल उन्होंने हमें संभाला , हाथों से आकृति बनाई , फिर सांचों में  हमको... आगे पढ़े

गुरुवर वाणी

Updated on 5 September, 2019, 10:47
शिक्षक दिवस / मनीषा व्यास  कौन है वह ? ✍🏻✍🏻 बाल मन की जिज्ञासा को  जो करता है शांत  पल पल आशाओं की  जो भरता है उड़ान , कौन है वह ?  ✍🏻✍🏻 ज़िंदग़ी के सफ़र को  जो कर देता है आसान ख़ुद ठहर कर शिष्य के  सपनों को देता है उड़ान  कौन है वह ?  ✍🏻✍🏻 जाने कितने सपनों को  दिखाया उसने सफलता  इत्तिफ़ाक़ से नहीं... आगे पढ़े

पीढ़ी

Updated on 31 August, 2019, 0:32
अंजू निगम/ ट्रेन रफ्तार पकड़ चुकी थी| सुधा और रमेश कानपुर से कलकत्ता जा रहे थे| सुधा समान जमाने लगी| तभी सामने वाली बर्थ में एक नयी उमर का लड़का आ कर बैठ गया| कपड़े और शक्ल तो बता रहे थे कि किसी अच्छे घर की पैदाइश थी पर फैशन... आगे पढ़े

कमाई

Updated on 21 August, 2019, 19:42
अर्चना मंडलोई तालियों की गड़गड़ाहट शांत होते ही अध्यक्ष महोदय मुस्कुराते हुए विजयी मुद्रा में मंच पर पुन:अपने स्थान पर विराजित हो गये। साथी मेहमानों ने भी भ्रष्टाचार को लेकर उनके उत्तेजक भाषण की भूरी-भूरी प्रशंसा की ।चाय काॅफी के दौर के साथ अध्यक्ष महोदय ने बातों ही बातों में ठहाका लगाते... आगे पढ़े