Monday, 25 May 2020, 2:27 PM

साहित्य

पिंजरे का पंछी

Updated on 29 April, 2020, 2:18
.. लिली संजय डावर दीदी बाहर लॉक डाउन है सभी अपने घरों में कैद हैं ,  पिंजरे के पंछी की तरह ,जैसे हम यहाँ जेल में ।हाँ हाँ आगे बोलो, प्राची ने उसके बोलने के संकोच को दूर करने के लिए कहा। तो आप सबने क्या गुनाह किया कि आप कैदी हो,... आगे पढ़े

कोरोना हारेगा और देश जीतेगा

Updated on 25 March, 2020, 0:50
कुलदीप सिंह भाटी,जोधपुर (राजस्थान) कौन कहता है कि यहां कोरोना का कहर है। देख कोरोना तुझे डराने को छत पर देश का हर शहर है। खुले आसमां तले चहुं ओर खनक रही थालियां हैं। अरे बच्चे, बड़े, बूढ़े सब बजा रहे तालियां हैं। यह नहीं हैं केवल आभार राष्ट्र के सेवकों के लिए। ये तो चुनौती है देश में फैले वायरस कोरोना... आगे पढ़े

चुहिया की फरमाइश

Updated on 6 March, 2020, 1:06
/गोविंद भारद्वाज चुहिया बोली चूहे राजा ला दे मुझको साड़ी। और घूमने को दिलवा दे बीएमडब्लू गाड़ी।। स्कूटी पर बैठ सुबह जब घर से बाहर जाती। चौराहे पर बिल्ली हमको रोज रोज धमकाती।। कौवे और बिलौटा हमको सीटी देख बजाते। और छंछूदर हमें देख कर मन्द मन्द मुस्काते।। चूहा बोला चुहिया रानी तू है बड़ी अनाड़ी। बिल छोटा है, खड़ी करेगी कहां बताओ गाड़ी।।     ... आगे पढ़े

अंजाम

Updated on 6 March, 2020, 1:05
//इंद्रजीत कौशिक ‘आओ गुनगुन, चलो चलकर कहीं खाना तलाश करें।’ दूसरे मच्छरों ने अपने साथी गुनगुन मच्छर से कहा तो उसने सर हिला दिया। ‘मुझे कहीं नहीं जाना, तुम्हें जाना है तो जाओ मुझे मत डिस्टर्ब करो।’ गुनगुन ने रूखे स्वर में उत्तर दिया। ‘लगता है तुम्हारा पेट भरा हुआ है। हमें तो... आगे पढ़े

हुआ नीड़ सूना

Updated on 17 February, 2020, 1:57
  मनोरमा जोशी लुट गया मधुवन  हुआं वो नीड़ सूना । अब ना माली के , ह्रदय का घाव छूना । मधुप कलियों को , चले जाकर रुलाकर , उड़ गई कोकिला  अधूरा गीत गाकर , जब ना होगा नीर , सरिता क्या बहेगीं मीन जल से बिछुड़कर , कैसे रहेगीं । लहरियां तट को , जाती झुलाकर , उड़ गयी कोकिला , अधूरा गीत गाकर । कौन तुम... आगे पढ़े

सतरंगी मन

Updated on 13 February, 2020, 0:58
आरती चित्तौड़ा  हैलो मां - आज थोड़ा  जल्दी  घर  आऊंगा। आप नेहा को  कहे वो  तैयार  रहे। हां  बेटा  बोल देती हूँ।  मां- नेहा  लकी का फोन आया था। तैयार  हो जा वो तुझे लेकर कहीं  जाने  वाला है। इतना सुनते ही नेहा का मन खिल उठा। कई महीनों के बाद लकी... आगे पढ़े

इंसानियत

Updated on 13 February, 2020, 0:51
 शोभा रानी तिवारी  हम अपनी कार से ग्वालियर जा रहे थे रास्ते में कार खराब हो गई उस समय रात के 9:00 बजे थे। ड्राइवर ने कहा कि अभी कुछ नहीं हो सकता, कल ही गाड़ी सुधरेगी ।अब हम क्या करें? हमारे साथ दो बच्चे थे। रात का समय तो काटना... आगे पढ़े

माता- पिता की अपेक्षा

Updated on 13 February, 2020, 0:48
आशा जाकड़ 97549694 आज माता- पिता जी जान से मेहनत करके अपने बच्चों का लालनपालन करते हैं। आज विज्ञान ने जितनी सुविधाएं दी हैं, उतना ही माँ -बाप का जीवन  जटिल  हो गया है  क्योंकि हर माता पिता अपने बच्चों को सुविधाएं देने  के लिए बेइन्तहां मेहनत करते हैं कि बच्चों का... आगे पढ़े

अफसोस

Updated on 24 January, 2020, 1:47
कुमुद दुबे    भोपाल से विदिशा के बीच ट्रेन से पहुंचने की एक घंटे की दूरी श्वेता के लिये आज घंटों में बदल गई थी। ट्रेन आधे रास्ते में रुकी हुई थी। शायद आगे कोई एक्सीडेन्ट हुआ है, कूपे में बैठे लोग ऐसी चर्चा कर रहे थे। दिसम्बर की सर्द रात, अंधेरा... आगे पढ़े

मातृभूमि

Updated on 24 January, 2020, 1:27
शोभा रानी तिवारी यहां की माटी है चंदन,  ये हिंदुस्तान है मेरा । हमारे दिल की है धडकन,  मां के चरणों में वंदन,  ये हिंदुस्तान है मेरा । वंदे मातरम धड़कन दिल की , राष्ट्र की आराधना है , ऊर्जा देने वाला गीत है,  भारत मां की वंदना है , कफन बांधकर निकले घर से  श्वास नहीं गिना करते,  देश की... आगे पढ़े

शुभ-शगुन

Updated on 13 January, 2020, 0:34
अर्चना  मंडलोई…… बरसों की तपस्या आज फलीभूत होने जा रही थी । दस वर्ष का पीयूष और पलक तो उससे भी छोटी पाँच वर्ष की ही थी ।तब एक कार एक्सीडेंट में पति चल बसे थे। पैंतालिस साल की उम्र में वैधव्य । कठिन संघर्षों के वे दिन उसकी आँखों में चलचित्र... आगे पढ़े

रंगों की मकर संक्रांति

Updated on 11 January, 2020, 1:58
शोभारानी तिवारी  मकर संक्रांति का पर्व आया मिलजुलकर पर्व मनाएंगे।  तिल गुड़ की मीठास संग,  हम खुशी जताएंगे।  मौज-मस्ती करेंगे हम,  मन में विश्वास जगायेंगे,  रंग बिरंगी पतंग डोर संग,  आसमान में उड़ाएंगे।  स्वर्णिम किरणों को छूने,  लहराकर ऊपर चढ़ जाए,  इंद्रधनुष रंगों में रंगकर,  तूफानों में नाच दिखाएं , मंजिल का तो पता नहीं,  नील गगन की रानी कहलाए,  आसमान में बेखबर,  आजादी संग... आगे पढ़े

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:33

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:27

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:25

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:23

आओ रखें नए कदम....

Updated on 30 December, 2019, 23:33
◆ रश्मि सक्सेना ◆ आओ रखें नए वर्ष में कदम । हर तरफ हो रोशनी और दूर हो ये तम ।। गिले-शिकवों को छोड़कर । ग़मों से बंधन तोड़कर।। पकड़ कर ख़ुशी का हाथ। मुस्कानों को लेकर साथ।। आओ रखें नए वर्ष में कदम....   माता-पिता का रखना ख़याल। थोड़ा सा वक़्त थोड़ी सी देखभाल।। मीठे बोलों से अपने बहलाना । वादा... आगे पढ़े

नववर्ष का स्वागत

Updated on 30 December, 2019, 23:32
डॉ. अंजुल कंसल"कनुप्रिया" नववर्ष का स्वागत बारम्बार वंदन अभिनंदन हर्ष अपार   आनंदमय उत्कर्ष नवल हो हर पल नव उल्लास भरा हो नव आशा अभिलाषा का संचार नववर्ष का स्वागत बारम्बार ।।   नव रचना,नव उमंग सहर्ष हो नव उडान,भाव संदेश नया हो हर हृदय हो आशीष और प्यार नववर्ष का स्वागत बारम्बार।।   गीत संगीत की मधुर तरंग हो राग अनुराग का स्वर संगम... आगे पढ़े

अभिनंदन

Updated on 29 December, 2019, 21:44
शोभा रानी तिवारी नए वर्ष का करें अभिनंदन , आओ मिलकर खुशी मनाएं,  शुरू करें फिर से नवजीवन , बीते कल को भूल जाएं । हर रंग के फूल यहां पर , यह धरती एक बगीचा है,  एक विधा की परछाई  हम , ना कोई ऊंचा नीचा है, स्वर्णिम किरणें आसमान से,  रोली लेकर आई हैं , प्रकृति ने अपने... आगे पढ़े

बदचलन

Updated on 27 December, 2019, 22:41
हरिशंकर परसाई: एक बाड़ा था. बाड़े में तेरह किराएदार रहते थे. मकान मालिक चौधरी साहब पास ही एक बंगले में रहते थे. एक नए किराएदार आए. वे डिप्टी कलेक्टर थे. उनके आते ही उनका इतिहास भी मोहल्ले में आ गया था. वे इसके पहले ग्वालियर में थे. वहां दफ़्तर की लेडी... आगे पढ़े

नानाजी का इनाम

Updated on 27 December, 2019, 22:39
वन्दना यादव मम्मी से ओट बनाकर नानाजी हम भाई-बहनों से गुफ्तगू कर रहे थे। मम्मी कनखियों से हमारी ओर देख भर लेती। कुछ समय बाद एकांत पाकर मम्मी ने उत्सुकता की पोटली खोली, ‘सबसे अलग बैठकर नाना से क्या बातें हो रही थी?’ भाई-बहनों में बड़ी होने के कारण उत्तर मुझे... आगे पढ़े