Wednesday, 20 March 2019, 11:06 AM

साहित्य

होली तुम बिन

Updated on 20 March, 2019, 0:30
/शोभारानी तिवारी तुम बिन मांग सूनी हुई, सूना दिन सूनी रात , आंखें गंगा जमुना बहती , बुझ गई सारी मन की आस , रंगीन दुनिया बेरंग हुई , अपने मन को बहलाऊँ कैसे ? किसे रंग लगाऊँ सजनवा ?बताओ होली खेलूं कैसे ? कहा था होली पर आऊंगा , सब के लिए कुछ ना कुछ ना ,लाऊंगा , मुन्नी... आगे पढ़े

अहसास

Updated on 20 March, 2019, 0:27
/ देवेन्द्र बंसल     माटी की भीनी भीनी सुगंध में      अपनेपन का अहसास है      धूल भरी राहों में खोजता जीवन है      बचपन से यौवन का हर श्रांगार हैं      माँ के आँचल का महकता प्यार है      रोते मुस्कुराते मंज़िलो की तलाश है      सुबह की ठंडक में दिन का एहसास है     ... आगे पढ़े

प्रेम पुजारी

Updated on 14 March, 2019, 1:19
   कहानीकार/ जितेंद्र शिवहरे राहुल के व्यवहार में आये सकारात्मक परिवर्तन को देख घर के सदस्य बहुत खुश थे। अब वो पहले की तरह देर रात तक घर से बाहर रहने वाला और बात बात पर मुंहजोरी करने वाला लापरवाह राहुल नहीं रहा। अब वह समझदारी का परिचायक था। उसकी अस्त-व्यस्त... आगे पढ़े

गर्व है नारी होने पर

Updated on 9 March, 2019, 8:24
◆ रश्मि  सक्सेना    आधी दुनिया मैं कहलाऊँ ,मुझे गर्व है नारी होने पर प्यार,त्याग और श्रद्धा, समर्पण की मूरत हूँ धरती पर   अपनों के हर ख़्वाब को पूरा करने में जुट जाती हूँ उनकी ख़ुशियों में ही अपनी ख़ुशियाँ सारी पाती हूँ   संस्कृति,शिक्षा,कला,खेल, मीडिया,कारपोरेट कौन सा ऐसा क्षेत्र जहाँ पर कदम नहीं मेरा हो   धरती से आकाश... आगे पढ़े

मुखर होना होगा

Updated on 4 March, 2019, 14:22
मनीषा व्यास / भीग गयी रक्त में सैनिकों की वर्दी दे गये मुल्क को अपनी जवानी   दुनिया तो गुलाब देकर अपनी  मोहब्बत रिझाने में लगी थी  पुलवामा में सैनिकों ने दे दी क़ुर्बानी  अब तो ईंट का जवाब पत्थर से देना होगा. चुप  नहीं रहना है अब मुखर होना होगा . माँ के आँचल को छलनी करने वालों से  संघर्ष... आगे पढ़े

महाशिवरात्रि पर्व पर दोहे  

Updated on 4 March, 2019, 13:40
…रश्मि सक्सेना निराकार शिवरूप है , शिव हैं आदि अनंत । शिव का मतलब शून्यता , शिव अनादि भगवंत ।। शोभित चंद्र ललाट पर , कर में लिए त्रिशूल । शंकर भोलेनाथ हैं , सकल सृष्टि के मूल ।। चतुर्दशी तिथि फागुनी , महाशिवरात्रि पर्व । पूजन शिवजी का करें , नर-नारी गंधर्व ।। गौरा जी को... आगे पढ़े

विरासत

Updated on 2 March, 2019, 1:30
पिंकी पोरवाल/ कौन कहता है आप चले गए? आज भी बसे हो गायत्री चालीसा के शब्दों में, क्योंकि सुबह की पहली प्रार्थना आपने ही तो सिखाई थी ! कौन कहता है आप चले गए? आज भी बसे हो शीशम के पेड़ की छाँव में, क्योंकि वो आज भी वहीँ है जहाँ कहानिया सुनी थी आपसे ! कौन... आगे पढ़े

हे कलम

Updated on 26 February, 2019, 0:35
/ मीनू मांणक   हे कलम , आज फिर जय बोल ,  देश के उन वीर जवानों की ।   सरहद पर जो शहीद हुए, भारत माँ के उन सपूतों की ।।   उदास देश , आँखें हैं नम , तूफान उठा है सीने में ।   किया है वार छुप कर नापाक कायरों ने , उड़ा दो चिथड़े दुश्मनों के... आगे पढ़े

ब्लड ग्रुप

Updated on 26 February, 2019, 0:30
             /वंदना पुणतांबेकर रोहित दौड़ता हुआ हॉस्पिटल पहुंचा।नेहा का दिल दहला देने वाला एक्सीडेंट हो गया था।इमरजेंसी में ब्लड डोनर की आवश्यकता थी।रोहित ने सभी ग्रुप पर डाल दिया था।लेकिन अभी तक उसे कोई नही मिला था।वह बैचेनी से किसी न किसी के फ़ोन का इंतजार... आगे पढ़े

मैं बेटी हिंदुस्तान की,

Updated on 20 February, 2019, 12:18
शोभा रानी तिवारी / मैं बेटी हिंदुस्तान की, सदाचार सत्कर्म लक्ष्य हो , ऐसा पुण्य महान करें , फूलों की मुस्कान बिखेरे, जन जन काकल्याण करें , नई किरण फूटी भारत में , मानव के उत्थान की, मैं बेटी हिंदुस्तान की । युद्ध क्षेत्र में वीर बालाओंने, वीरों का है,साथ दिया, छक्के छुड़ाये दुश्मनों का, त्याग और बलिदान दिया , रक्षा की है, मातृभूमि... आगे पढ़े

अकेला चना..

Updated on 20 February, 2019, 12:10
        अंजू निगम "माँ चार दिन से मेरी एक जुराब और चप्पले नहीं मिल रहीं|" सुबह बेटे ने जब कहा तो मैंने भी बेटे को आड़े हाथो लिया," बेटे जी, आप भी तो घर को कबूतर खाना समझते हैं| आये सामान फेंका और पसर गये बिस्तर पर| मन हुआ तो खाया... आगे पढ़े

""जिन्दगी का साज वसन्त ""

Updated on 18 February, 2019, 11:12
आशा जाकड़  रे मन  तू क्यों है उदास? जिन्दगी  का  साज वसंत  आ गया । गिले शिकवे  दूर होते, कहे अनकहे  वादे होगे। निकलेगी जीवन की  भड़ास  , जिन्दगी का साज वसंत  आ गया । शंका - कुशंका के  बांध  टूटेगे, घिरे  बदरवा  खूब बरसेंगे। दूर होगी सब मन की फांस, जिन्दगी  का  साज वसंत आ गया।    सुलगते  मन की  बातें ... आगे पढ़े

अकेला चना...........

Updated on 27 January, 2019, 21:12
 अंजू निगम "माँ चार दिन से मेरी एक जुराब और चप्पले नहीं मिल रही|" सुबह बेटे ने जब कहा तो मैंने भी बेटे को आढ़े हाथो लिया," बेटे जी, आप भी तो घर को कबूतर खाना समझते हैं| आये सामान फेंका और पसर गये बिस्तर पर| मन हुआ तो खाया घर... आगे पढ़े

हिसाब बराबर?

Updated on 27 January, 2019, 10:34
प्रतिभा हवाई जहाज से उतरते ही एक अजीब चिपचिपाहट में घिर गया था. बस मुंबई की सबसे ख़राब चीज़ मुझे यही लगती है. एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही सामने कंपनी की गाड़ी थी. मैं फटाफट उसमें बैठ गया और वह दुम दबाकर भाग खड़ी हुई. मुंबई में कुछ नहीं बदला था... आगे पढ़े

हिंदुस्तान की बेटी

Updated on 27 January, 2019, 10:16
मैं बेटी हिंदुस्तान की, सदाचार सत्कर्म लक्ष्य हो , ऐसा पुण्य महान करें , फूलों की मुस्कान बिखेरे, जन जन काकल्याण करें , नई किरण फूटी भारत में , मानव के उत्थान की, मैं बेटी हिंदुस्तान की । युद्ध क्षेत्र में वीर बालाओंने, वीरों का है,साथ दिया, छक्के छुड़ाये दुश्मनों का, त्याग और बलिदान दिया , रक्षा की है, मातृभूमि के  आन बान... आगे पढ़े

अनुराधा की कविता

Updated on 26 December, 2018, 16:20

कविता

Updated on 19 December, 2018, 15:46

चुल्लू भर पानी चुल्लू भर खून

Updated on 5 November, 2018, 9:23
/ नम गोरे आसमान में कहीं छोटा-सा बादल भी नज़र नहीं आ रहा था। ऊपर से जैसे आग बरस रही थी। बाहर पीली, नम धूप थी। हमारी गाड़ी धीमी गति से इलाहाबाद की ओर बढ़ रही थी जैसे मक्खी गुड़ की भेली पर रेंगती है। गाड़ी में खचाखच भीड़ थी और... आगे पढ़े

चिड़िया-सी गुड़िया

Updated on 5 November, 2018, 9:18
-प्रेम लता चसवाल ‘प्रेमपुष्प’ चिड़िया-सी गुड़िया चीं-चीं करती आंगन में यूं फुदक रही, सावन की रिमझिम में जैसे, फूलों की डाली झलक रही!! गुन-गुन गीतों के भंवरों से, घर-उपवन गुंजार हुआ। चंचलता से महके घर का, कोना-कोना ख़ुशहाल हुआ। मां की ममता कभी दुलार में, कभी खीज में बरसे अमृत-सी। पापा जैसे ही घर आते हैं, चहके गुड़िया कोयल-सी। सोचे, ‘कब बड़ी होऊं... आगे पढ़े

रीते प्रेम की व्यथा ढो रहा गुसाईं

Updated on 2 November, 2018, 9:33
किरन सिंह/ शेखर जोशी की बहुत प्रसिद्ध कहानी है : कोसी का घटवार। इसका नायक गुसाईं रीते प्रेम की व्यथा अकेला ढो रहा है। पूर्व में फौजी रहा गुसाईं अपने ही पडोस के गांव की लछमा से प्रेम करता है । फौज से छुट्टी आता है तो युवाओं में तिरछी टोपी... आगे पढ़े

आखिर कौन हो तुम

Updated on 8 October, 2018, 23:34
" मीनू मांणक " विशाल अंबर सी बाहें , चढते सूर्य का तेज हो । पर्वत की तरह अटल , समुद्र का बहता पानी हो ।। माँ की उम्मीदें , बहन के रक्षक हो । पत्नी का स्वाभिमान , बेटी का अभिमान हो ।। फौलादी हौसले , बरगत की छांया हो । आत्मविश्वास से भरे , खुश्हाली की तुम पूंजी हो ।। माँ... आगे पढ़े

नमक का मोल

Updated on 27 September, 2018, 9:25
शैल चंद्रा टीवी पर एक नामचीन ब्रांड के नमक का विज्ञापन आ रहा था। कोई एक्टर कह रहा था, ‘आयोडीन, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर यही है असली नमक की पहचान। यही नमक खाइये। एक किलो नमक का मूल्य मात्र सौ रुपए।’ यह विज्ञापन देख रहे दादा जी उस ब्रांडेड नमक का... आगे पढ़े

आज मेरे हबी को शादी है

Updated on 25 September, 2018, 8:29
/ जितेंद्र शिवहरे "आपकी बेटी क्या करती है ?" एक नवयुवती ने विवाह के रिश्ते हेतु एक परिवार में पहुंचते ही वधु के संबंध में जांच पड़ताल शुरू कर दी।  सुषमा स्वराज ने कहा- " जी हमारी बेटी तृप्ति एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। सुन्दर है , 5 फीट "5" की... आगे पढ़े

मैं बनती झांसी की रानी

Updated on 25 September, 2018, 8:27
सीमा शिवहरे" सुमन" मैं बनकर झांसी की रानी होती स्वतंत्रता का आधार। बैठ घोड़े पर वीरता दिखलाती करती दुर्लभ नाला पार। शोला धधक रहा सीने में रोश उमड़े है अपार। अंग्रेज़ों को धूल चटाती बनकरके अंगार। अंग्रेज़ों से मिल बैठा था सुना है सिंधिया परिवार। रानी लक्ष्मी बच जाती जो कर देते इंकार। कोई भी नहीं हुआ सहायक प्रार्थना गई बेकार। जीते जी ही आग... आगे पढ़े

जीवन की शून्यता

Updated on 24 September, 2018, 11:21
कभी हम भी गोदी के खिलोने थे माता पिता के राज दुलारे थे अब ना दादी हैं , ना माँ हैं ना पिता हैं बस जीवन की शून्यता हैं, उनके बगेर कई बार बस , मैं यू हीं मचल जाता हूँ उनकी यादों मैं खो जाता हूँ रात्रि का यह प्रहर, उनको समर्पित हैं मन के हृदय भाव से , उनको वंदन हैं वंदन हैंवंदन हैं. ...देवेंद्र बंसल ... आगे पढ़े

कविताआें की दुनिया

Updated on 19 September, 2018, 12:50

भेदभाव

Updated on 19 September, 2018, 9:25
/आशा जाकड़ रिजल्ट निकलने का दिन था ।मिसेज गुप्ता खुश होकर छात्रों को रिजल्ट दे रही थी और उनके अच्छे अंक आने पर बधाई दे रही थी। तभी छात्र यूसुफ ने अपना रिपोर्ट कार्ड मांगा ।मिसेज गुप्ता ने कहा तुम्हारे पेरेंट्स नहीं आए ,यूसुफ यह कार्ड तो  पेरेंट्स को ही मैग्जीन... आगे पढ़े

मैं शर्मिंदा हूं

Updated on 16 September, 2018, 2:07
/ हरिन्दर सिंह गोगना संजू पढ़ाई में होशियार था मगर इस बार हुए यूनिट टेस्ट में उसके कम नंबर देख कर पापा को हैरानी हुई। यही नहीं अब वह पहले की तरह दिल लगा कर पढ़ता भी नहीं था। बात बात पर फिल्मी कलाकारों की बातें करता। अब तो वह पापा... आगे पढ़े

फकीर बाबा की सीख

Updated on 16 September, 2018, 2:04
/गोविंद भारद्वाज.... सतिया नाम का एक किसान मेहनत से ज्यादा अपने भाग्य पर भरोसा करता था। उसके पास खेती करने के लिए जमीन तो बहुत थी,लेकिन वह सब कुछ भाग्य पर छोड़ कर आराम करता। उसके पिता वृद्ध होने के कारण खुद खेती नहीं कर सकते थे इसलिए उन्होंने अपनी सारी... आगे पढ़े