Friday, 16 November 2018, 7:22 AM

साहित्य

चुल्लू भर पानी चुल्लू भर खून

Updated on 5 November, 2018, 9:23
/ नम गोरे आसमान में कहीं छोटा-सा बादल भी नज़र नहीं आ रहा था। ऊपर से जैसे आग बरस रही थी। बाहर पीली, नम धूप थी। हमारी गाड़ी धीमी गति से इलाहाबाद की ओर बढ़ रही थी जैसे मक्खी गुड़ की भेली पर रेंगती है। गाड़ी में खचाखच भीड़ थी और... आगे पढ़े

चिड़िया-सी गुड़िया

Updated on 5 November, 2018, 9:18
-प्रेम लता चसवाल ‘प्रेमपुष्प’ चिड़िया-सी गुड़िया चीं-चीं करती आंगन में यूं फुदक रही, सावन की रिमझिम में जैसे, फूलों की डाली झलक रही!! गुन-गुन गीतों के भंवरों से, घर-उपवन गुंजार हुआ। चंचलता से महके घर का, कोना-कोना ख़ुशहाल हुआ। मां की ममता कभी दुलार में, कभी खीज में बरसे अमृत-सी। पापा जैसे ही घर आते हैं, चहके गुड़िया कोयल-सी। सोचे, ‘कब बड़ी होऊं... आगे पढ़े

रीते प्रेम की व्यथा ढो रहा गुसाईं

Updated on 2 November, 2018, 9:33
किरन सिंह/ शेखर जोशी की बहुत प्रसिद्ध कहानी है : कोसी का घटवार। इसका नायक गुसाईं रीते प्रेम की व्यथा अकेला ढो रहा है। पूर्व में फौजी रहा गुसाईं अपने ही पडोस के गांव की लछमा से प्रेम करता है । फौज से छुट्टी आता है तो युवाओं में तिरछी टोपी... आगे पढ़े

आखिर कौन हो तुम

Updated on 8 October, 2018, 23:34
" मीनू मांणक " विशाल अंबर सी बाहें , चढते सूर्य का तेज हो । पर्वत की तरह अटल , समुद्र का बहता पानी हो ।। माँ की उम्मीदें , बहन के रक्षक हो । पत्नी का स्वाभिमान , बेटी का अभिमान हो ।। फौलादी हौसले , बरगत की छांया हो । आत्मविश्वास से भरे , खुश्हाली की तुम पूंजी हो ।। माँ... आगे पढ़े

नमक का मोल

Updated on 27 September, 2018, 9:25
शैल चंद्रा टीवी पर एक नामचीन ब्रांड के नमक का विज्ञापन आ रहा था। कोई एक्टर कह रहा था, ‘आयोडीन, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर यही है असली नमक की पहचान। यही नमक खाइये। एक किलो नमक का मूल्य मात्र सौ रुपए।’ यह विज्ञापन देख रहे दादा जी उस ब्रांडेड नमक का... आगे पढ़े

आज मेरे हबी को शादी है

Updated on 25 September, 2018, 8:29
/ जितेंद्र शिवहरे "आपकी बेटी क्या करती है ?" एक नवयुवती ने विवाह के रिश्ते हेतु एक परिवार में पहुंचते ही वधु के संबंध में जांच पड़ताल शुरू कर दी।  सुषमा स्वराज ने कहा- " जी हमारी बेटी तृप्ति एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। सुन्दर है , 5 फीट "5" की... आगे पढ़े

मैं बनती झांसी की रानी

Updated on 25 September, 2018, 8:27
सीमा शिवहरे" सुमन" मैं बनकर झांसी की रानी होती स्वतंत्रता का आधार। बैठ घोड़े पर वीरता दिखलाती करती दुर्लभ नाला पार। शोला धधक रहा सीने में रोश उमड़े है अपार। अंग्रेज़ों को धूल चटाती बनकरके अंगार। अंग्रेज़ों से मिल बैठा था सुना है सिंधिया परिवार। रानी लक्ष्मी बच जाती जो कर देते इंकार। कोई भी नहीं हुआ सहायक प्रार्थना गई बेकार। जीते जी ही आग... आगे पढ़े

जीवन की शून्यता

Updated on 24 September, 2018, 11:21
कभी हम भी गोदी के खिलोने थे माता पिता के राज दुलारे थे अब ना दादी हैं , ना माँ हैं ना पिता हैं बस जीवन की शून्यता हैं, उनके बगेर कई बार बस , मैं यू हीं मचल जाता हूँ उनकी यादों मैं खो जाता हूँ रात्रि का यह प्रहर, उनको समर्पित हैं मन के हृदय भाव से , उनको वंदन हैं वंदन हैंवंदन हैं. ...देवेंद्र बंसल ... आगे पढ़े

कविताआें की दुनिया

Updated on 19 September, 2018, 12:50

भेदभाव

Updated on 19 September, 2018, 9:25
/आशा जाकड़ रिजल्ट निकलने का दिन था ।मिसेज गुप्ता खुश होकर छात्रों को रिजल्ट दे रही थी और उनके अच्छे अंक आने पर बधाई दे रही थी। तभी छात्र यूसुफ ने अपना रिपोर्ट कार्ड मांगा ।मिसेज गुप्ता ने कहा तुम्हारे पेरेंट्स नहीं आए ,यूसुफ यह कार्ड तो  पेरेंट्स को ही मैग्जीन... आगे पढ़े

मैं शर्मिंदा हूं

Updated on 16 September, 2018, 2:07
/ हरिन्दर सिंह गोगना संजू पढ़ाई में होशियार था मगर इस बार हुए यूनिट टेस्ट में उसके कम नंबर देख कर पापा को हैरानी हुई। यही नहीं अब वह पहले की तरह दिल लगा कर पढ़ता भी नहीं था। बात बात पर फिल्मी कलाकारों की बातें करता। अब तो वह पापा... आगे पढ़े

फकीर बाबा की सीख

Updated on 16 September, 2018, 2:04
/गोविंद भारद्वाज.... सतिया नाम का एक किसान मेहनत से ज्यादा अपने भाग्य पर भरोसा करता था। उसके पास खेती करने के लिए जमीन तो बहुत थी,लेकिन वह सब कुछ भाग्य पर छोड़ कर आराम करता। उसके पिता वृद्ध होने के कारण खुद खेती नहीं कर सकते थे इसलिए उन्होंने अपनी सारी... आगे पढ़े

खोज खबर

Updated on 16 September, 2018, 2:01
रघु अनजाने व्यक्ति ने जान पर खेल कर लोगों के सामने चेहरा दिखला दिया जिसने आवाज दी हत्यारा वह है – जाने न पाए वह उसे अब छिपा दिया गया है वह अपनी एकाकी गरिमा में प्रकट हुआ एक मिनट के लिए प्रकट हुआ और फिर हम सब से अलग कर दिया गया अपराध संगठित, राजनीति संगठित,... आगे पढ़े

तुम्हारा इन्तज़ार

Updated on 11 September, 2018, 0:56
/ किरण  यादव बिन बुलाए आना तुम इस बार मैं तुम्हें पहचान ना पाऊँ लगे , तुम नहीं हो जैसे स्याह रात ख़ामोशी की चादर ओढ़े साँझ के ढलते ही दस्तक देती है अनजान रास्ता बाँहें फैलाए तुम्हारा इन्तज़ार करता हो तुम उससे मिलने को बेचैन हो महसूस हुआ जैसे द्वार पर कोई आया हो पर कोई ना हो मैं बाहर झाँक... आगे पढ़े

काश माँ ...........

Updated on 11 September, 2018, 0:52
/सुषमा दुबे  काश माँ तूने कठिनाइयों से लड़ना सिखाया होता....... सहारा ना देती खुद ही चलना सिखाया होता ! छोड़ देती मेरा हाथ गिर कर सम्हालना तो सीख जाता .... गिरने के डर से गोद में ना उठाया होता ! काश माँ तूने ……… तू ना जाती प्रिंसिपल के पास मेरी शिकायतें लेकर...... मुझे ही परिस्थितियों से निपटना... आगे पढ़े

मेरी बीवी

Updated on 29 August, 2018, 7:56
 / कल्पना वह मेरी बीवी जा रही है। मगर उसके होंठों पर उस मुस्कुराहट का नाम तक नहीं जैसा कि लोगों ने मेरे दिल की तस्कीन के लिए मुझसे कहा था। बस हड्डियों का एक ढांचा है। उसकी भयानक सूरत से जाहिर होता है कि वह किसी जानलेवा बीमारी का शिकार... आगे पढ़े

खुशी

Updated on 29 August, 2018, 7:50
 /-श्याम यादव अन्तिम संस्कार का सामान बेचने वाला कलवा आज बड़ा खुश था। वह आज खुद के लिए अंग्रेजी शराब की बोतल और गोश्त, बिटिया के लिए खिलौना और पत्नी के लिए साड़ी खरीद कर घर पहुंचा और पत्नी को आवाज़ लगाई । पत्नी ने इतना सामान देख कर पूछ लिया आज... आगे पढ़े

रेशम के धागों में बंधा प्यार

Updated on 25 August, 2018, 10:06
/शोभा रानी तिवारी पूजा की थाली सजाती बहना टीका माथे लगाती है मिठाई खिला राखी बांधती आरती भी उतारती है हर वर्ष राखी पर बहना को रहता इंतजार रेशम के धागों में बंधा है भाई बहन का प्यार । एक राखी उन वीरों के नाम जो रक्षा हित सीमा पर खड़े रहे गोली सीने पर खाई लेकिन मौत से नहीं डरे उनकी लंबी आयु... आगे पढ़े

राखी का त्योहार

Updated on 25 August, 2018, 10:05
/आशा जाकड़ आया राखी का त्योहार । लाया खुशियों का त्योहार । बच्चे - बच्चे पुलक रहे हैं राखी बंधवाएगे , अपनी  बहनों से हम मंगल टीका करवाएंगे । लाया खुशियो की बौछार आया राखी का त्योहार ।। डाल - डाल पर फूल खिले , गाए खुशी के गीत, राखी का संदेश सुनाए भाई - बहन की प्रीत... आगे पढ़े

अंकुर की छतरी

Updated on 21 August, 2018, 8:21
अंकुर छठी कक्षा में पढ़ता था । उसके पिता कुम्हार का काम करते थे और मां घरों में झाड़ू-पौंछा करती थी । इस प्रकार उनके घर का गुजारा चलता। कभी-कभी जब पिता की बिक्री नहीं होती थी तो उन्हें बिना खाए भी रहना पड़ता था। अंकुर को पढ़ने का बहुत... आगे पढ़े

वाह कचोरी !

Updated on 13 August, 2018, 9:39
/ मंजुला भूतड़ा (अध्यक्ष, इन्दौर लेखिका संघ, इन्दौर ) मेरे शहर की शान कचोरी,  हर जीभ का स्वाद कचोरी । मूंग कचोरी  मटर कचोरी  आलू कचोरी  प्याज कचोरी  हींग कचोरी  भुट्टा कचोरी  और होती है 'छोड़' कचोरी । चटपटा जायकेदार मसाला  भरकर बनती कचोरी,  तली जाती तभी बनती  क्रिस्पी क्रिस्पी खस्ता कचोरी । एक होती  राज कचोरी  सेव दही चटनी के साथ कचोरी  बहुत बड़ी तो राज कचोरा  कोई... आगे पढ़े

देशभक्त

Updated on 13 August, 2018, 9:37
/ शोभा रानी तिवारी जन्म से मृत्यु तक मैं फर्ज निभा ऊंगा अपना जीवन मां को अर्पण कर जाऊंगा मां तुम ना रोना, उदास ना होना विश्वास तुम रखना ,मैं फिर से आऊंगा   जो वीर वतन पर ,शहीद हो गए आंचल छोड़ मां की गोद में सो गए खून के कतरे कतरे से इतिहास जो... आगे पढ़े

मेरी स्वयंवरा...

Updated on 13 August, 2018, 9:35
/ सुरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव सुहानी ट्वेल्थ की परीक्षा देने जा रही है.. भावुक हो रही है, मुझे यह स्कूल छोडऩा पड़ेगा, एनुअल फंक्शन्स में धमाल-मस्ती, दोस्त और मेरी बेस्ट फ्रेंड सुखदा सब छूट जाएंगे। विचारों में डूबी सुहानी को देख सुखदा बोली- ‘सुही, तू सीरियस दिख रही है, बिल्कुल नहीं... आगे पढ़े

नारी जीवन

Updated on 13 August, 2018, 8:59
 /मनोरमा जोशी सहे जुल्म जिसने सदियों से अब तक, उनको उबारो यह जी चाहता है । करते रहे आदिशक्ति की पूजा मगर मातृशक्ति कुंठित हो रही है। हुआ मान जिनका नहीं भूलकर भी, वही आज व्याकुल विवश हो रही है । तड़पती तिरस्कृत है आज ममता, उसे अपनाने को जी चाहता है । दुर्गा लक्ष्मी अहिल्या सीता सावित्री मीरा अनसुइया गार्गी मैयत्री सारंगा... आगे पढ़े

‘मैं’

Updated on 8 August, 2018, 9:23
/ किरण यादव सड़क के किनारे बंजर बियाबान में गहन अधंकार में सपनों की चादर ओढ़े सोया ना जाने कितनी रातें घेरते उदासी के बादल जहाँ मैं मापता धरती आकाश की गहराई को धुँधला गई है मन की रोशनी ओर चमकते तारों के मध्य मैं लुप्त हो गया हूँ जहाँ ढूँढने लगता हूँ , मैं अपना घर जो कही... आगे पढ़े

बगिया

Updated on 8 August, 2018, 8:54
/मीनू मांणक हाँ ये बगिया है । यहाँ बहार है , पतझड़ भी आते हैं ।। धूप - छाँव साथ चलते हैं । सुख-दुख  साथ रहते हैं ।।   बाबूल का अंगना छोड़ गोरी सपने संजोए आती है । बन कर बहू दुखों को सहती भीगी पलके लिये होंठों को सी लेती है ।।   वृद्ध आश्रम में ये बुजुर्ग सास खून... आगे पढ़े

मित्रों को समर्पित दोहे

Updated on 6 August, 2018, 1:21
 /रश्मि सक्सेना कृष्ण-सुदामा की यहाँ , देते सभी मिसाल । लेकिन वैसी मित्रता , अब है एक कमाल ।।    बिना झिझक हम बोल दें , जिनसे मन की बात । मित्र ज़िंदगी के लिए , होते वो सौग़ात ।।   दुख को हर कर आपके , सुख जो करते सेंड । होते हैं सच्चे वही , इस... आगे पढ़े

कप्पो की नई राह

Updated on 3 August, 2018, 9:45
वंदना पुणतांबेकर    "उठ जा कप्पो...,"बापू के साथ हाट में जाकर अपने पंसद का खिलौना ले आ,।अम्माँ की आवाज ने कप्पो की नींद खोल दी। कप्पो अभी महज छह साल की थी।आज उसका जन्मदिन था।होली के एक दिन पहले आता तो अम्माँ को हमेशा याद रहता।कप्पो बापू के साथ हाट से... आगे पढ़े

करधनी के टुकडे

Updated on 31 July, 2018, 8:15
/मीना गोदरे "अवनि"   मैं तीनों बहनों से सबसे छोटी और सबसे लाडली थी रूप और बुद्धि का योग मुझमें ही अधिक था दोनों बहनों की शादी के लिए लड़का ढूंढने में अधिक समय लग गया किंतु छोटी और आखरी बेटी के मोह में मां बाबू जी का विचार मेरी शादी... आगे पढ़े