Sunday, 25 August 2019, 5:02 PM

साहित्य

कमाई

Updated on 21 August, 2019, 19:42
अर्चना मंडलोई तालियों की गड़गड़ाहट शांत होते ही अध्यक्ष महोदय मुस्कुराते हुए विजयी मुद्रा में मंच पर पुन:अपने स्थान पर विराजित हो गये। साथी मेहमानों ने भी भ्रष्टाचार को लेकर उनके उत्तेजक भाषण की भूरी-भूरी प्रशंसा की ।चाय काॅफी के दौर के साथ अध्यक्ष महोदय ने बातों ही बातों में ठहाका लगाते... आगे पढ़े

पेड के फल

Updated on 10 August, 2019, 12:23
डा अंजुल कंसल"कनुप्रिया " "भाई दीनानाथ जी आप चार फीट जगह का मकान आगे बढाने में इस्तेमाल कर रहे,हैं क्या? यह तो सरकारी जमीन है।सड़क बनाने के लिए छोडी जाती है।"    "वह तो ठीक है,ये जगह बेकार पडी है सोचा घर थोडा बडा कर लूं।बहू भी आ गई है आगे परिवार... आगे पढ़े

राम का चरित्र

Updated on 10 August, 2019, 12:15
शोभा रानी तिवारी इस धरती पर जन्म लिया राम ने, किया सबका कल्याण है,  इसीलिए तो मेरी धरती,  पावन और महान हैं।  माता-पिता की आज्ञा से  राजवैभव त्याग दिया,  वचन निभाने की खातिर, वन जाना स्वीकार किया,  शबरी के जूठे, फल खाए  अहिल्या का उद्धार किया,  तुलसीदास ने मानव जग में  अद्भुत ग्रंथ उपहार दिया,  तुलसीदास के राम यहां पर , और गीता... आगे पढ़े

''मलीनता की परत''

Updated on 10 August, 2019, 12:13
कुमुद दुबे..     उर्वशी को आज घर पहुंचने की जल्दी थी इसलिये  ऑफिस  का काम जल्दी खत्म किया और  बस पकडी। वह फुर्सत में विचार की माला गूंथ रही थी अच्छा हुआ समय पर बस मिल गई वर्ना फिर आधा घंटा इंतजार करना पड़ता। घर पहुंचने में और देर होती। एक... आगे पढ़े

कोपलों का रंग

Updated on 1 August, 2019, 20:44
/मनीषा व्यास   रिम झिम बरखा ने  दस्तक दे दी ,नई कोपलों  ने  दिखाया सौरभ का रंग तो  फूलों में आयी नई ताज़गी , पेड़ों में जैसे लगे घुँघरू , लहराती सी हवा जो चली  , तो फूलों से ,पत्तियाँ भी कहने लगीं कहाँ हैं ? विधाता उन्हें कर दे नमन ........... कर दें नमन कर दें नमन    ... आगे पढ़े

नवासे का मोह

Updated on 17 July, 2019, 11:15
डा` अंजुल कंसल"कनुप्रिया " रघु और रानी अपनी बेटी से मिलने उसके  शहर जा रहे थे क्योंकि उनकी बेटीआरती के बेटा हुआ था।उनके पास सामान्य डिब्बे का टिकट था लेकिन  अत्यधिक भीड के कारण वे जनरल डिब्बे में चढ नहीं पाए ,अतः आरक्षित डिब्बे में ही बैठ गए।इतने में टी टी... आगे पढ़े

बरसात  में मंगल 

Updated on 17 July, 2019, 11:13
आशा जाकड़ बरसात  में  हरे  भरे  जंगल  करें  मंगल  भीषण वर्षा खेत जल मग्न  रोयें  किसान  बरसात में  दुर्घटना होती है धीरे चलाएँ  खूब बारिश विद्यालय  बन्द हैं  विद्यार्थी  खुश बारिश हुई  सूरज छिप गया  अंधेराहुआ  पानी बरसा  नव जीवन आया जग हरषा मेघा गरजे  भयंकर बरसे  सर्वत्र पानी  भारी बारिश  हुई खूब  तबाही जन हताश   (9754969496)   ... आगे पढ़े

पावस

Updated on 17 July, 2019, 11:12
// वन्दना पुणतांबेकर रिमझिम बरसता सावन  टिपटिप सी माधुर्य संगीत मय ध्वनि लुभाती हर मन पुलकित कर जाती तन मन फुहार गुनगुनाते झूमते भवरें फूलों मंडराती तितलियां सुखद आलम छाया निराली छटा चहुओर निखरा निखरा चमन खिली बेले डार भीनी खुशबू बिखरी सोंधी सोंधी घरा खिलती कली बहार   ... आगे पढ़े

ज़िंदगी के सफ़रनामे में

Updated on 17 July, 2019, 11:11
..देवेन्द्र बंसल इंदौर वक़्त की परीक्षा  हवा के झोंकों  सी बदलती रहती हैं सुख दुःख के झूलों में झूलती रहती है मौसम की तरह  धूप छांव  करती रहती है कैसा ये मेला है ख़ुशियों के द्वार पर भी  ग़मों की बारिश है बहते जीवन के पानी में देवेन्द्र पारिवारिक सहभागिता  के हर्षित  फूलो के बगीचों में भी  हर इंसान मेले मेंअकेला है मेले में अकेला है.....   ... आगे पढ़े

.प्यासे नैना

Updated on 6 July, 2019, 1:04
   " मीनू मांणक " पहने लज्जा का गहना , बिन बोले , सब कुछ कहना । जलते दिए की रोशनी में , बिरहन का यूं चिट्ठी लिखना ।।   काहे बसे परदेस पिया ,  सुना है घर , अगंना । प्यासे हैं ये नैना , नहीं मन को चैना ।।   लिखते-लिखते यूं तकिए में ,  गोरी का मुँह छुपा लेना... आगे पढ़े

चेतना का दीपक

Updated on 6 July, 2019, 1:01
मीना गोदरे ,अवनि        " कहां हो तुम चेतना, कहां हो?,,, मैं कब से तुम्हें पुकार रहा हूं तुम्हें क्या हो गया है चेतना ,तुम्हें सुनाई क्यों नहीं देता ,तुम तो जानती हो तुम्हारा मेरा जन्मों का नाता है तुम्हारे बिना अस्तित्व हीन है मेरा जीवन , तुम हो... आगे पढ़े

कुँआ

Updated on 25 June, 2019, 8:08
 वंदना पुणतांबेकर  जन्मदिन का जश्न मनाया जा रहा था।कम्मो आज सुबह से ही मालकिन के यहाँ काम कर रही थी। सात साल बाद उनके घर एक बेटी के रूप में लक्ष्मी आई थी।कम्मो अपनी दुधमुँही बेटी को घर  छोड़कर आई थी। रामदीन तो उसी दिन से चिढ़ा बैठा था जिस दिन... आगे पढ़े

मेरे बाबूजी

Updated on 14 June, 2019, 8:05
कुमुद दुबे  मुझे अपने बाबूजी पर  घमंड करना आता है उन जैसा पिता जहाँ में  नजर नहीं आता है जब मैं छोटी थी  पर, छः बहनों में बड़ी थी फिर भी थी मैं उनकी लाड़ली सब याद है मुझे, उनका साईकिल पर बिठा बाजार ले जाना अपने साथ बिठा दूध रोटी खिलाना लड़ियाते हुए खाने से थाली में पानी ढुल जाना  फिर मीठी-सी डाँट पडना सब... आगे पढ़े

खुशी की खुशी

Updated on 12 June, 2019, 8:29
  मीनू मांणक आज की तेज रफ्तार ज़िंदगी ने सब कुछ बदल दिया है । पुराना समय तो सपनों सा हो गया। शाम को मैं अकेली बरामदे में बैठी गुज़रा समय याद कर रही थी, खुशी ( पोती ) टी. वी. पर कार्टून देख रही है , वो भी तेज... आगे पढ़े

बेटी

Updated on 12 June, 2019, 8:26
अपूर्वा पवन बर्वे भगवान की सबसे अदभुत कल्पना है बेटी तो फिर क्यूँ इस दुनिया पर बोझ है बेटी... अगर घर का चिराग है बेटा तो उस चिराग की लौ है बेटी घर की शान है बेटा तो घर की रौनक है बेटी स्वाभिमान है बेटा तो अभिमान है बेटी अगर सपना है बेटा... आगे पढ़े

"सकोरा"

Updated on 12 June, 2019, 8:24
पिंकी तिवारी  ये सकोरा क्या होता है माँ ?" मुन्ना ने आरती से पूछा । "कुछ नहीं" - आरती ने टालते हुए कहा।  "बताओ ना माँ " मुन्ना ने फिर पूछा । "कुछ नहीं । मिट्टी का एक कटोरीनुमा बड़ा बर्तन होता है जिसमे हम पक्षियों के लिए पानी भर कर रखते है, खासकर... आगे पढ़े

पानी

Updated on 5 June, 2019, 10:22
 //अविनाश अग्निहोत्री परिवार के साथ गर्मियों में राजस्थान  घूमने गए राजेश को वहां बड़े ही कटु अनुभव हुए।उस प्रदेश की सीमा लगते ही कब उनकी बोतलों के शुद्ध मीठे पानी की जगह नलकूप के मटमैले खारे पानी ने लेली,उन्हें पता भी नही चला।गर्मी की इस तपती धूप में नंगे पैर कई... आगे पढ़े

जहाँ चाह वहाँ राह

Updated on 5 June, 2019, 10:10
  कुमुद दुबे….     समीर व सुनयना को अमेरिका में रहते दस वर्ष हो गये थे। यहां की स्वस्थ-जलवायु और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण की वजह से समीर ने अमेरिका में ही बसने का मन बना लिया था। कुछ दिन पूर्व ही समीर ने एक सर्वसुविधायुक्त रहवासी स्थल में बंगला खरीद लिया... आगे पढ़े

पेड़ हैं सेनापति

Updated on 5 June, 2019, 9:43
मंजुला भूतड़ा// पेड़ हैं सजग प्रहरी, अविराम अपनी लड़ाई में संलग्न, एक कर्तव्यनिष्ठ सैनिक की भांति। पेड़ घबराते नहीं हैं, पतझड़ उनके पत्तों को झड़ा दे, या फूल तोड़ दे, पुनः असंख्य फूलों पत्तों के साथ, हरियाली क़ायम रखते हैं। पेड़ शान्त भाव से निरन्तर बढ़ते रहते हैं, एक मोर्चे पर हार भी जाएं, तो थोड़ा रुक कर  कई मोर्चे खोल देते हैं। पेड़ कोई एक डाल... आगे पढ़े

धरती का सम्मान

Updated on 5 June, 2019, 9:37
शोभारानी तिवारी/ आओ हरियाली से धरती का सम्मान करें पौधों को लगाएं और फूलों से प्यार करें। यह धरती भारत माँ बनकर सबको आश्रय देती है अन्नपूर्णा बनकर हम सबका लालन पालन करती है फल फूलों से लदी डालियाँ झुकना हमें सिखाती हैं, पथ प्रदर्शक बनकर प्रगति की राह दिखाती हैं संकल्पों के वृक्ष लगाकर कर्तव्यों का निर्वाह करें आओ हरियाली से धरती का सम्मान करें। सावन... आगे पढ़े

.पर्यावरण .

Updated on 3 June, 2019, 7:59
✍" मीनू मांणक " छू लो अंबर को , करो खूब विकास । मिटा रहे हो धरा को , कुछ तो करो एहसास ।।   नदियों के निर्मल जल में बहा कर गदंगी । गंगा-यमुना के पवित्र जल को कर दिया दूषित ।।   काट रहे हो पेड़ , खत्म कर दिए जंगल सारे । बहती नदियों के... आगे पढ़े

हुआ सो हुआ

Updated on 3 June, 2019, 7:54
पवन शर्मा "हमदर्द"/ चौकीदार को चोर बनाया, राफेल का गीत सुनाया, जनता को खूब बरगलाया, फिर भी हाथ कुछ नहीं आया, मोदी जी ने 300 का आंकड़ा छुआ खैर जाने दो "हुआ सो हुआ"।।   सुप्रीम कोर्ट में बोला झूठ, एयर स्ट्राइक पर मांगा सबूत,  सब जगह से पार्टी हारी, और अमेठी से हारा खुद, इज्जत का तो बुरा हाल हुआ। खैर जाने... आगे पढ़े

रूमानी किस्सों का अहसास है ये इश्क

Updated on 31 May, 2019, 9:08
पुस्तक समीक्षा / केशव पटेल इश्क के कई मायने होते हैं, कुछ आंखों से उतर कर दिल में हमेशा के लिए कैद हो जाते हैं तो कुछ आंखों ही आंखों में रह जाते हैं. इश़्क हर दौर में मौजूद रहा है तो हर दौर में इश्क के मायने भी अलग-अलग होते... आगे पढ़े

सीख

Updated on 31 May, 2019, 8:02
अविनाश अग्निहोत्री आज बिट्टू को कुछ नया सिखाने की गरज से,पढ़ाने बैठी ही थी कि मोबाईल पर छोटी बहन का नम्बर फ्लैश हुआ।उठाते ही वो मुझसे मुस्कुराकर बोली ,ओर क्या मज़े ले रही है।मैंने कहा क्या मजे बस सारा दिन  वही रूटीन है।ऐसा लगता है जैसे पिछले कुछ सालों से खुशी... आगे पढ़े

दुःखद सेल्फी

Updated on 30 May, 2019, 9:13
  वंदना पुणतांबेकर इस साल काव्या ने नाइंथ क्लास की परीक्षा पास की थी। पापा से पास होने की खुशी में मोबाइल की मांग कर उठी। अपनी प्यारी बच्ची को अच्छे नंबरों से पास होने पर।मां प्यार से बोली....,"ले दो इसको भी एक मोबाइल आजकल तो सभी के पास होते हैं,अब... आगे पढ़े

जल मटका वार्तालाप

Updated on 30 May, 2019, 9:07
डां अंजुल कंसल "कनुप्रिया"/ जल कहे मटके से,कभी न कर अभिमान परोपकार कर सदा,बना रहे मान सम्मान।   मटका बोला जल से ,तू है मूल्यवान  बुझाता प्यास सबकी,देता जीवनदान।   जल दुखी हो बोला,सूख रहे सरोवर ताल मनुष्य व्यर्थ बहा रहा,समस्या है विकराल ।   मटका रुआंसा हो बोला,मैं मिट्टी से बना हूं इक दिन फूटूंगा,मिट्टी में ही मिल जाऊंगा ।   मटका... आगे पढ़े

बेबहर

Updated on 30 May, 2019, 9:00
गजल/अंजू निगम गुजरती हूँ तेरी गली से कहानी बनकर, उतरता जाता आँखो में वीरानी बनकर| आज रेत पर देखे तेरे कदमो के निशां, उभरती रही पीली यादें रुहानी बनकर| सदा आती है उन खंडहरों से आज भी, हमारे वस्ल-ए-इश्क की निशानी बनकर| बोसे-वफा का आलम रहा इस कदर जो, मंजर में बसा है आज भी जुबानी बनकर| पतझड़ भी "अंजू" गिरा... आगे पढ़े

आँचल और आस का कपड़ा

Updated on 27 May, 2019, 10:19
पिंकी तिवारी / "माँ, ये साड़ी बहुत सुन्दर लग रही है, हल्का गुलाबी रंग बहुत पसंद है मुझे । कहाँ से ली अपने? वैसे ज़्यादा महँगी नहीं लग रही है ।" एक ही साँस में आरती ने मायके आते ही सवालों की झड़ी लगा दी । "ये तेरी नानी जी की... आगे पढ़े

कहां हैं वो...

Updated on 27 May, 2019, 10:07
स्वाति जोशी/ वो जो बारिशों में भीग जाया करते थे, रुह का क़तरा बनके, जाने उन एहसासों का, अब कहाँ है ठिकाना.. थिरक जाती थीं जो धड़कनें, सांसों की झंकार पर, वो आवाज़ कहाँ, वो अंदाज़ कहाँ.. हुई मुद्दतें जब साथ रहते थे सभी, ज़िक्र भी अब किसी का, न किसी को है गवारा.. उम्र की बस्ती से... आगे पढ़े

नारी ही क्यूं?

Updated on 27 May, 2019, 10:01
अपूर्वा पवन बर्वे/ हमेशा नारी ही क्यूं छोड़े अपना घर, अपना संसार अपना प्यार , अपना परिवार....... हमेशा नारी ही क्यूं सहे ताने ,गुस्सा, अपमान ...... हमेशा नारी ही क्यूं सुने सभी कि बात जज्बात सभी के हास- परिहास ..... हमेशा नारी ही क्यूं त्यागे अपने सपने, अपनी खुशी अपना वजूद, अपनी उम्मीद ..... नारी के लिये ही क्यूं है  मान... आगे पढ़े

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