Sunday, 15 December 2019, 5:13 PM

साहित्य

"सकोरा"

Updated on 12 June, 2019, 8:24
पिंकी तिवारी  ये सकोरा क्या होता है माँ ?" मुन्ना ने आरती से पूछा । "कुछ नहीं" - आरती ने टालते हुए कहा।  "बताओ ना माँ " मुन्ना ने फिर पूछा । "कुछ नहीं । मिट्टी का एक कटोरीनुमा बड़ा बर्तन होता है जिसमे हम पक्षियों के लिए पानी भर कर रखते है, खासकर... आगे पढ़े

पानी

Updated on 5 June, 2019, 10:22
 //अविनाश अग्निहोत्री परिवार के साथ गर्मियों में राजस्थान  घूमने गए राजेश को वहां बड़े ही कटु अनुभव हुए।उस प्रदेश की सीमा लगते ही कब उनकी बोतलों के शुद्ध मीठे पानी की जगह नलकूप के मटमैले खारे पानी ने लेली,उन्हें पता भी नही चला।गर्मी की इस तपती धूप में नंगे पैर कई... आगे पढ़े

जहाँ चाह वहाँ राह

Updated on 5 June, 2019, 10:10
  कुमुद दुबे….     समीर व सुनयना को अमेरिका में रहते दस वर्ष हो गये थे। यहां की स्वस्थ-जलवायु और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण की वजह से समीर ने अमेरिका में ही बसने का मन बना लिया था। कुछ दिन पूर्व ही समीर ने एक सर्वसुविधायुक्त रहवासी स्थल में बंगला खरीद लिया... आगे पढ़े

पेड़ हैं सेनापति

Updated on 5 June, 2019, 9:43
मंजुला भूतड़ा// पेड़ हैं सजग प्रहरी, अविराम अपनी लड़ाई में संलग्न, एक कर्तव्यनिष्ठ सैनिक की भांति। पेड़ घबराते नहीं हैं, पतझड़ उनके पत्तों को झड़ा दे, या फूल तोड़ दे, पुनः असंख्य फूलों पत्तों के साथ, हरियाली क़ायम रखते हैं। पेड़ शान्त भाव से निरन्तर बढ़ते रहते हैं, एक मोर्चे पर हार भी जाएं, तो थोड़ा रुक कर  कई मोर्चे खोल देते हैं। पेड़ कोई एक डाल... आगे पढ़े

धरती का सम्मान

Updated on 5 June, 2019, 9:37
शोभारानी तिवारी/ आओ हरियाली से धरती का सम्मान करें पौधों को लगाएं और फूलों से प्यार करें। यह धरती भारत माँ बनकर सबको आश्रय देती है अन्नपूर्णा बनकर हम सबका लालन पालन करती है फल फूलों से लदी डालियाँ झुकना हमें सिखाती हैं, पथ प्रदर्शक बनकर प्रगति की राह दिखाती हैं संकल्पों के वृक्ष लगाकर कर्तव्यों का निर्वाह करें आओ हरियाली से धरती का सम्मान करें। सावन... आगे पढ़े

.पर्यावरण .

Updated on 3 June, 2019, 7:59
✍" मीनू मांणक " छू लो अंबर को , करो खूब विकास । मिटा रहे हो धरा को , कुछ तो करो एहसास ।।   नदियों के निर्मल जल में बहा कर गदंगी । गंगा-यमुना के पवित्र जल को कर दिया दूषित ।।   काट रहे हो पेड़ , खत्म कर दिए जंगल सारे । बहती नदियों के... आगे पढ़े

हुआ सो हुआ

Updated on 3 June, 2019, 7:54
पवन शर्मा "हमदर्द"/ चौकीदार को चोर बनाया, राफेल का गीत सुनाया, जनता को खूब बरगलाया, फिर भी हाथ कुछ नहीं आया, मोदी जी ने 300 का आंकड़ा छुआ खैर जाने दो "हुआ सो हुआ"।।   सुप्रीम कोर्ट में बोला झूठ, एयर स्ट्राइक पर मांगा सबूत,  सब जगह से पार्टी हारी, और अमेठी से हारा खुद, इज्जत का तो बुरा हाल हुआ। खैर जाने... आगे पढ़े

रूमानी किस्सों का अहसास है ये इश्क

Updated on 31 May, 2019, 9:08
पुस्तक समीक्षा / केशव पटेल इश्क के कई मायने होते हैं, कुछ आंखों से उतर कर दिल में हमेशा के लिए कैद हो जाते हैं तो कुछ आंखों ही आंखों में रह जाते हैं. इश़्क हर दौर में मौजूद रहा है तो हर दौर में इश्क के मायने भी अलग-अलग होते... आगे पढ़े

सीख

Updated on 31 May, 2019, 8:02
अविनाश अग्निहोत्री आज बिट्टू को कुछ नया सिखाने की गरज से,पढ़ाने बैठी ही थी कि मोबाईल पर छोटी बहन का नम्बर फ्लैश हुआ।उठाते ही वो मुझसे मुस्कुराकर बोली ,ओर क्या मज़े ले रही है।मैंने कहा क्या मजे बस सारा दिन  वही रूटीन है।ऐसा लगता है जैसे पिछले कुछ सालों से खुशी... आगे पढ़े

दुःखद सेल्फी

Updated on 30 May, 2019, 9:13
  वंदना पुणतांबेकर इस साल काव्या ने नाइंथ क्लास की परीक्षा पास की थी। पापा से पास होने की खुशी में मोबाइल की मांग कर उठी। अपनी प्यारी बच्ची को अच्छे नंबरों से पास होने पर।मां प्यार से बोली....,"ले दो इसको भी एक मोबाइल आजकल तो सभी के पास होते हैं,अब... आगे पढ़े

जल मटका वार्तालाप

Updated on 30 May, 2019, 9:07
डां अंजुल कंसल "कनुप्रिया"/ जल कहे मटके से,कभी न कर अभिमान परोपकार कर सदा,बना रहे मान सम्मान।   मटका बोला जल से ,तू है मूल्यवान  बुझाता प्यास सबकी,देता जीवनदान।   जल दुखी हो बोला,सूख रहे सरोवर ताल मनुष्य व्यर्थ बहा रहा,समस्या है विकराल ।   मटका रुआंसा हो बोला,मैं मिट्टी से बना हूं इक दिन फूटूंगा,मिट्टी में ही मिल जाऊंगा ।   मटका... आगे पढ़े

बेबहर

Updated on 30 May, 2019, 9:00
गजल/अंजू निगम गुजरती हूँ तेरी गली से कहानी बनकर, उतरता जाता आँखो में वीरानी बनकर| आज रेत पर देखे तेरे कदमो के निशां, उभरती रही पीली यादें रुहानी बनकर| सदा आती है उन खंडहरों से आज भी, हमारे वस्ल-ए-इश्क की निशानी बनकर| बोसे-वफा का आलम रहा इस कदर जो, मंजर में बसा है आज भी जुबानी बनकर| पतझड़ भी "अंजू" गिरा... आगे पढ़े

आँचल और आस का कपड़ा

Updated on 27 May, 2019, 10:19
पिंकी तिवारी / "माँ, ये साड़ी बहुत सुन्दर लग रही है, हल्का गुलाबी रंग बहुत पसंद है मुझे । कहाँ से ली अपने? वैसे ज़्यादा महँगी नहीं लग रही है ।" एक ही साँस में आरती ने मायके आते ही सवालों की झड़ी लगा दी । "ये तेरी नानी जी की... आगे पढ़े

कहां हैं वो...

Updated on 27 May, 2019, 10:07
स्वाति जोशी/ वो जो बारिशों में भीग जाया करते थे, रुह का क़तरा बनके, जाने उन एहसासों का, अब कहाँ है ठिकाना.. थिरक जाती थीं जो धड़कनें, सांसों की झंकार पर, वो आवाज़ कहाँ, वो अंदाज़ कहाँ.. हुई मुद्दतें जब साथ रहते थे सभी, ज़िक्र भी अब किसी का, न किसी को है गवारा.. उम्र की बस्ती से... आगे पढ़े

नारी ही क्यूं?

Updated on 27 May, 2019, 10:01
अपूर्वा पवन बर्वे/ हमेशा नारी ही क्यूं छोड़े अपना घर, अपना संसार अपना प्यार , अपना परिवार....... हमेशा नारी ही क्यूं सहे ताने ,गुस्सा, अपमान ...... हमेशा नारी ही क्यूं सुने सभी कि बात जज्बात सभी के हास- परिहास ..... हमेशा नारी ही क्यूं त्यागे अपने सपने, अपनी खुशी अपना वजूद, अपनी उम्मीद ..... नारी के लिये ही क्यूं है  मान... आगे पढ़े

नदिया की जु़बानी

Updated on 21 May, 2019, 11:43
डॉ. चंद्रा सायता मनुपुत्र.के मानस को यूं देख विव्हल, मौन खडी़ मैं मन ही मन अकुला रही। खाली खाली अपना आंचल निहार, ' प्यास लगी है?' कहते भी सकुचा रही।   क्षीण जलधार से जैसे तैसे लिखी मैंने, खुरदुरे ज़मीनी कागज पर एक इबारत। कभी न सोचा था, होगा यह अंजाम मानव यूं प्रकृति से करेगा ऐसी शरारत।   मेरा गुनाह... आगे पढ़े

सदमा

Updated on 21 May, 2019, 11:33
अविनाश अग्निहोत्री / जल्दी अमीर बनने के चक्कर मे अशोकबाबू के बेटे को शेयर बाजार में बड़ा घाटा हो चुका था।जिसे पाटने में वो अपना पुश्तेनी घर भी गिरवी रख चुका था।घर पहुँचे कर्जदारों से ,यह बात जब अशोकबाबू को पता चली तो वह स्वाभिमानी व्यक्ति बेचैन हो उठे। अपने बेटे... आगे पढ़े

रिश्ता

Updated on 16 May, 2019, 11:58
/ कमल शर्मा रोहन अपनी मां मीनाक्षी के एकाकी जीवन से चिंतित था तो अलका को अपने पापा अशोकजी का अकेलापन बर्दाश्त नहीं हो रहा था. अत: अशोकजी शाम को अपने घर की छत पर टहल रहे थे. एक मोटरसाइकिल सवार गेट के सामने आ कर रुका, जिस का चेहरा हैलमेट में... आगे पढ़े

मां के लिये

Updated on 16 May, 2019, 11:56
/ सरोज गुप्ता संध्या के दोनों बच्चे बेहद उत्साहित हो रहे थे क्योंकि अगले इतवार को ही मदर्स-डे आ रहा था। चिंटू और प्रिया मिलकर आपस में योजना बना रहे थे कि इस दिन को कैसे मनाया जाए। अभी चार-पांच दिन का समय था। दोनों ने अपने हाथों से एक सुंदर-सा... आगे पढ़े

मतदान अवश्य करें

Updated on 16 May, 2019, 11:41
/  डॅा.  अंजुल कंसल "कनुप्रिया" अपने अधिकारों का सम्मान करें आप सब मिल कर विचार करें।   विवेकपूर्ण इस बार मतदान करें अमूल्य वोट को देश के नाम करें।   मतदान केंद्र स्वयं अवश्य जाएं साथ में परिवार को भी ले जाएं।   आस- पड़ोस का ध्यान रखें बडे -बुजुर्गों को संग ले जाएं।   दिव्यांगों से अवश्य वोट डलवाएं व्यवस्था कर बूथ तक... आगे पढ़े

सबक़

Updated on 8 May, 2019, 9:02
/जितेंद्र शिवहरे नीमा आज बहुत खुश थी। उसे पिता ने आज पहली बार जवाबदारी वाला काम सौंपा था। लड़की होने के कारण आये दिन घर में पक्षपात का शिकार हो चूकी नीमा ने कई बार इसका विरोध किया था। साथ ही नीमा अपने भाई की तरह पिता की किराना दुकान बेहतर... आगे पढ़े

बंकू की जीत का राज़

Updated on 7 May, 2019, 10:07
बाल कहानी/देवेन्द्रराज सुथार विश्व स्वास्थ्य दिवस पर होली पब्लिक स्कूल में दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन होने वाला था। सभी बच्चों में दौड़ को लेकर चर्चाएँ हो रही थीं। प्रथम स्थान हासिल करने वाले विजेता को साइकिल देकर पुरस्कृत किया जाना था। सभी की नजरें दौड़ जीतकर साइकिल हासिल करने पर थी।... आगे पढ़े

आस्था के अंकुर

Updated on 13 April, 2019, 9:33
 मंजुला भूतड़ा/ नई सदी में नई आस्था के अंकुर लहराएंगे, सुख वैभव का अमर उजाला घर आंगन में लाएंगे।   भेद भाव के जाल काट कर मैत्री भाव बढ़ाएंगे, छू लेंगे अंतर्मन को हम ऐसी दया दिखाएंगे।   द्वेष भाव हिंसा से परे हो ऐसी युक्ति लगाएंगे, अब तक जो भूलें की हमने उनको न दोहराएंगे।   कैसी राह चलें हम आगे चिन्तन करते जाएंगे, दुःखी न... आगे पढ़े

जय जय मां : हाइकु

Updated on 13 April, 2019, 9:27
आशा जाकड़ / दुर्गा मां आई ढेरों  खुशियां  लाई बजे  बधाई  हे दयालु मां भक्तों  पे दया कर आशीष दे मां  मां में  है आस्था  दूर करेगी व्यथा सुन पुकार  मां कृपा कर दुखों  का नाश कर पाय लागू  मां मां कालजयी  तू है वात्सल्यमयी करुणामयी चीख पुकार  दुष्टों का नाश कर उठा कटार मां कहाँ  है तू आजा दर्शन  देदे  आशीर्वाद दे पहाड़ों वाली भक्तों की दुलारी मां  तू है प्यारी मां जगदम्बे मां तुझमें दुर्गा ... आगे पढ़े

दोस्ती

Updated on 13 April, 2019, 9:25
 मीनू मांणक / दोस्ती की ये सौग़ात हमेशा याद रखना । दिल में दोस्तों की भी जगह बनाये रखना ।। कितनी भी रूकावटें आएँ राहों में । सच्ची है ग़र दोस्ती तो निभाये रखना ।। पाई तेरी दोस्ती तो , मशहूर हो गये । मुस्कुराए तेरी हँसी में तो ग़म दूर हो गए।। दोस्ती ग़म नहीं खुशियों... आगे पढ़े

हरी घास पर क्षण भर अज्ञेय

Updated on 11 April, 2019, 10:58
  देखती है दीठ क्षमा की वेला एक आटोग्रॉफ़ तुम्हीं हो क्या बन्धु वह प्रणति राह बदलती नहीं विश्वास का वारिद किरण मर जाएगी शक्ति का उत्पाद पराजय है याद दीप थे अगणित खुलती आँख का सपना पावस-प्रात सागर के किनारे दूर्वांचल कितनी शान्ति ! कितनी शान्ति ! कतकी पूनो वसंत की बदली मुझे सब कुछ याद है अकेली न जैयो राधे जमुना के तीर जब पपीहे ने पुकारा माहीवाल से शरद क्वाँर की... आगे पढ़े

अहसास

Updated on 11 April, 2019, 10:49
कहानी/  रुपेंद्र शर्मा/                   हैलो..........हैलो........... ,            थोड़ी देर के सन्नाटे के बाद दबे से स्वर में आवाज आती है........., हैलो.................... मैं राज बोल रहा हूँ, क्या तुम मुझे सुन रही हो । हाँ सुन रही हूँ, पहचाना मुझे, पिया बोल रही हूँ। अपना परिचय देने की जरूरत नहीं है,... आगे पढ़े

डॉ चंद्रा सायता की लघु कथाएं

Updated on 11 April, 2019, 10:38
तलाक  तलाक  तलाक। जबसे झूठ की मुलाकात दौलत से हुई थी, एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। पसंद दोस्ती में और दोस्ती निकाह में तब्दील हो गई। दोनो इंसान के जेहन में घर बनाकर रहने लगे। एक दिन झूठ कानून की गिरफ्त में आ फंसा। बुरी तरह जकड़ा जा चुका था। उसके पास अब... आगे पढ़े

धनुषाकार पिरामिड

Updated on 7 April, 2019, 11:43
डा` अंजुल कंसल"कनुप्रिया"   हां  रंग गुलाल अबीर भी झरी फुहार लाल गाल भाल रंगों का है त्योहार गिले शिकवे भूल पिचकारी भर खूब मनाई सखि होली हंसते  हुए रे   है आई रंगीली होली खेली रंग पंचमी झूमते नाचते फगुआ गीत गाएं नाचें धूम मचाएं है आखिरी दिन होली की करें मुस्कराते विदाई रंग रे   ... आगे पढ़े

मेरा प्यारा शहर ...

Updated on 7 April, 2019, 11:39
देवेंद्र बंसल / मालवा का यह शहर आबो हवा में निराला है सामाजिक और संस्कृति प्रेम यहाँ की विशेषता है हर रंग में रंगा यह शहर भारत का ह्र्दय स्थल है स्वच्छता की शिखरता पाकर मस्तक हमारा उँचा है राष्ट्रीयता पर भी हमारे शहर के अनेक तारे हैं ओंकार महाकाल की कृपा से बसे यहाँ सारे... आगे पढ़े