Sunday, 15 September 2019, 11:53 PM

साहित्य

कथाओं से भरे इस देश में मैं भी एक कथा हूँ

Updated on 6 April, 2018, 13:54
http://कविता वो मिट्टी के दिन, वो घरौंदों की शाम, वो तन-मन में बिजली की कौंधों की शाम, मदरसों की छुट्टी, वो छंदों की शाम, वो घर भर में गोरस की गंधों की शाम वो दिन भर का पढ़ना, वो भूलों की शाम, वो वन-वन के बाँसों-बबूलों की शाम, झिड़कियाँ पिता की, वो डाँटों की शाम, वो बंसी, वो... आगे पढ़े

कथाओं से भरे इस देश में मैं भी एक कथा हूँ

Updated on 6 April, 2018, 13:50
वो मिट्टी के दिन, वो घरौंदों की शाम, वो तन-मन में बिजली की कौंधों की शाम, मदरसों की छुट्टी, वो छंदों की शाम, वो घर भर में गोरस की गंधों की शाम वो दिन भर का पढ़ना, वो भूलों की शाम, वो वन-वन के बाँसों-बबूलों की शाम, झिड़कियाँ पिता की, वो डाँटों की शाम, वो बंसी, वो... आगे पढ़े

ठण्डी रोटी

Updated on 5 April, 2018, 23:53
एक लड़का था. उसकी माँ ने उसका विवाह कर दिया. लेकिन लड़का कुछ नहीं कमाता था. माँ जब भी उसको रोटी परोसती थी, तब वह कहती कि बेटा, ठंडी रोटी खा  लो. लड़के की समझ में यह नहीं आया कि माँ ऐसा क्यों कहती है. फिर भी वह चुप रहा.... आगे पढ़े

मेरे जीवन का अनुभव

Updated on 5 April, 2018, 23:44
मरने की अभिलाषा लेकर जीवन की भीख में मागूं क्यों जव तोड़ दिये बंधन सारे तो निद्रा से क्यों न जागूं मैं बस एक व्यथा जीवन को निज पथ से भटकाती रहती है स्व: त्व: के बंधन में बंधकर तम को दर्शाती रहती हैं। (२) हास्य और करूणा का जन्म मंथन करके देख लिया प्रेम और रति के झरनों का अस्वादन करके... आगे पढ़े

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