Wednesday, 13 November 2019, 6:05 PM

साहित्य

दो लघु कथाएं

Updated on 15 April, 2018, 14:10
 मां ‘मां, हम दोनों ने फैसला कर लिया है कि हमारा बच्चा किसी और की कोख से पैदा होगा ।’ ‘क्या कह रही हो, पागल तो नहीं हो गई? तुम्हारा बच्चा किसी और की कोख से ?’ ‘मां, हम किराये की कोख का इंतज़ाम कर रहे हैं।’ ‘…पर लोग क्या कहेंगे?’ ‘लोगों को कह दूंगी,... आगे पढ़े

भिखारिन / रवीन्द्रनाथ टैगोर की कहानी

Updated on 11 April, 2018, 14:06
अन्धी प्रतिदिन मन्दिर के दरवाजे पर जाकर खड़ी होती, दर्शन करने वाले बाहर निकलते तो वह अपना हाथ फैला देती और नम्रता से कहती- "बाबूजी, अन्धी पर दया हो जाए।" वह जानती थी कि मन्दिर में आने वाले सहृदय और श्रद्धालु हुआ करते हैं। उसका यह अनुमान असत्य न था। आने-जाने... आगे पढ़े

बीमार बच्चा

Updated on 10 April, 2018, 0:08
/ बेला जैन                                    छः महीने से मेरा बच्चा बहुत बीमार था। मैं और मेरी पत्नी सभी सरकारी अस्पतालों में बच्चे को लेकर इलाज के लिये घूम चुके थे। पर सभी सरकारी अस्पतालों के डाक्टरों ने मुझे कहा कि आप अपने बच्चे को किसी अच्छे प्रायवेट अस्पताल में दिखाईयें जहां इलाज... आगे पढ़े

// अमित पांडे

Updated on 9 April, 2018, 1:44
अपना देश...  अपने देश में सभी सम्पदायें अपरंपार हैं उर्जा तकनीक इंजीनियर डॉक्टर बहुत मददगार हैं लेकिन मत भुलाना उन गऱीब भाईयों को क्यों कि हर विकास में मजदूर बराबर के भागीदार हैं अपने देश में सभी सम्पदायें अपरंपार हैं एक खासियत और यहाँ के लोकतंत्र में हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई हकदार बने जनतंत्र में मूल सिद्धांत देकर... आगे पढ़े

ऊँचाई

Updated on 9 April, 2018, 1:26
           ..रामेश्वर काम्बोज "हिमांशु" पिताजी के अचानक आ धमकने से पत्नी तमतमा उठी, "लगता है बूढ़े को पैसों की ज़रूरत आ पड़ी है, वर्ना यहाँ कौन आने वाला था। अपने पेट का गड्‌ढा भरता नहीं, घर वालों का कुआँ कहाँ से भरोगे?" मैं नज़रें बचाकर दूसरी ओर देखने लगा। पिताजी नल पर... आगे पढ़े

सबसे सुन्दर लड़की / रचनाकार: विष्णु प्रभाकर

Updated on 7 April, 2018, 1:23
समुद्र के किनारे एक गाँव था । उसमें एक कलाकार रहता था । वह दिन भर समुद्र की लहरों से खेलता रहता, जाल डालता और सीपियाँ बटोरता ।  रंग-बिरंगी कौड़ियां, नाना रूप के सुन्दर-सुन्दर शंख चित्र-विचित्र पत्थर, न जाने क्या-क्या समुद्र जाल में भर देता ।  उनसे वह तरह-तरह के... आगे पढ़े

कथाओं से भरे इस देश में मैं भी एक कथा हूँ

Updated on 6 April, 2018, 13:57
  वो मिट्टी के दिन, वो घरौंदों की शाम, वो तन-मन में बिजली की कौंधों की शाम, मदरसों की छुट्टी, वो छंदों की शाम, वो घर भर में गोरस की गंधों की शाम वो दिन भर का पढ़ना, वो भूलों की शाम, वो वन-वन के बाँसों-बबूलों की शाम, झिड़कियाँ पिता की, वो डाँटों की शाम, वो बंसी, वो... आगे पढ़े

कथाओं से भरे इस देश में मैं भी एक कथा हूँ

Updated on 6 April, 2018, 13:54
http://कविता वो मिट्टी के दिन, वो घरौंदों की शाम, वो तन-मन में बिजली की कौंधों की शाम, मदरसों की छुट्टी, वो छंदों की शाम, वो घर भर में गोरस की गंधों की शाम वो दिन भर का पढ़ना, वो भूलों की शाम, वो वन-वन के बाँसों-बबूलों की शाम, झिड़कियाँ पिता की, वो डाँटों की शाम, वो बंसी, वो... आगे पढ़े

कथाओं से भरे इस देश में मैं भी एक कथा हूँ

Updated on 6 April, 2018, 13:50
वो मिट्टी के दिन, वो घरौंदों की शाम, वो तन-मन में बिजली की कौंधों की शाम, मदरसों की छुट्टी, वो छंदों की शाम, वो घर भर में गोरस की गंधों की शाम वो दिन भर का पढ़ना, वो भूलों की शाम, वो वन-वन के बाँसों-बबूलों की शाम, झिड़कियाँ पिता की, वो डाँटों की शाम, वो बंसी, वो... आगे पढ़े

ठण्डी रोटी

Updated on 5 April, 2018, 23:53
एक लड़का था. उसकी माँ ने उसका विवाह कर दिया. लेकिन लड़का कुछ नहीं कमाता था. माँ जब भी उसको रोटी परोसती थी, तब वह कहती कि बेटा, ठंडी रोटी खा  लो. लड़के की समझ में यह नहीं आया कि माँ ऐसा क्यों कहती है. फिर भी वह चुप रहा.... आगे पढ़े

मेरे जीवन का अनुभव

Updated on 5 April, 2018, 23:44
मरने की अभिलाषा लेकर जीवन की भीख में मागूं क्यों जव तोड़ दिये बंधन सारे तो निद्रा से क्यों न जागूं मैं बस एक व्यथा जीवन को निज पथ से भटकाती रहती है स्व: त्व: के बंधन में बंधकर तम को दर्शाती रहती हैं। (२) हास्य और करूणा का जन्म मंथन करके देख लिया प्रेम और रति के झरनों का अस्वादन करके... आगे पढ़े