Wednesday, 20 June 2018, 5:06 AM

कहानी

मेरे पापा

Updated on 17 June, 2018, 0:20
फादर्स डे पर विशेष / सुधा चौहान मैं उस समय कालेज में पढ़ रहा था। अक्सर दोस्तों के साथ बैठ कर गपशप करने में घर पर आने में देर हो जाती थी। कभी कभी सिनेमा भी चले जाया करते थे पर यह सब चुपचाप तरीके से होता था। मेरे पापा बहुत... आगे पढ़े

नानी का दुलारा

Updated on 8 June, 2018, 8:40
/ प्रमोद त्रिवेदी ‘पुष्प’ बहुत समय पहले की बात है। कीर्तिपुर नामक गांव में लामचे नाम का एक लड़का अपने गरीब माता-पिता के साथ रहा करता था। वे जंगल से लकड़ियां काटकर, उन्हें बाजार में बेचकर बड़ी मुश्किल से अपना गुजारा कर रहे थे। एक दिन लामचे अपने मां-बाप के साथ... आगे पढ़े

एक थी गौरा

Updated on 2 June, 2018, 9:07
अमरकांत लंबे कद और डबलंग चेहरे वाले चाचा रामशरण के लाख विरोध के बावजूद आशू का विवाह वहीं हुआ। उन्होंने तो बहुत पहले ही ऐलान कर दिया था कि ‘लड़की बड़ी बेहया है।’ आशू एक व्यवहार-कुशल आदर्शवादी नौजवान है, जिस पर मार्क्स और गांधी दोनों का गहरा प्रभाव है। वह स्वभाव से... आगे पढ़े

रिश्ते

Updated on 27 May, 2018, 13:49
केवल तिवारी ‘आपकी मम्मा मुझे बहुत डांटती थीं।’ ‘अच्छा फिर आप किससे शिकायत करती थीं।’ ‘किसी से नहीं, मैं इतना चिल्लाती थी कि उन्हें खुद ही बड़ों की डांट पड़ जाती।’ हा, हा, हा (सब खिलखिलाकर हंस पड़े)। ‘एक बार तो मैंने दीदी यानी आपकी मम्मा की एक किताब छिपा दी। वह रोने लगीं।... आगे पढ़े

बासी रोटी पर साैंधी चटनी जैसी मां

Updated on 17 May, 2018, 10:35
 क्षमा शर्मा मदर्स डे पर हम सब अपनी-अपनी मांओं को याद कर रहे होंगे। वे माएं जिन्होंने हमें जन्म तो दिया मगर हमने कभी उनके दुख और तकलीफों को समझने की ज्यादा कोशिश नहीं की। मां के बारे में सोचती हूं तो एक फिरकनी जैसा चित्र नजर आता है, जो सवेरे... आगे पढ़े

मन की पीड़ा : उस दिन भी इतवार था

Updated on 13 May, 2018, 11:39
अरुण सब्बरवाल उस दिन भी इतवार था. अब न वह था न उस की मां, न उस के पिता न पंचम की मां और न ही पंचम के पिता. केवल थी तो पंचम. इतवार को कुछ भी बुरा नहीं कहूंगी, जो होना था सो हो गया. न जाने कितने इतवारों को... आगे पढ़े

धूप का एक टुकड़ा

Updated on 8 May, 2018, 12:49
कालजयी रचना / निर्मल वर्मा क्या मैं इस बेंच पर बैठ सकती हूं? नहीं, आप उठिए नहीं – मेरे लिए यह कोना ही काफी है। आप शायद हैरान होंगे कि मैं दूसरी बेंच पर क्यों नहीं जाती? इतना बड़ा पार्क – चारों तरफ खाली बेंचें – मैं आपके पास ही क्यों... आगे पढ़े

सुनो एक कहानी (इक प्यारी सखी के लिये) पंचायती शॉपिंग

Updated on 4 May, 2018, 9:40
सुषमा व्यास बात उन दिनों की है, जब मैं कॉलेज में पढती थी। शुरू से ही अपने में खोये रहने की आदत रही है। हर बात से बेपरवाह, किसी से कोई खास मतलब नहीं, अपनी ही धुन में मस्त मैं बेपरवाह सी जीती रही हूं यानी मैं झल्ली हूं मेरी सहेली भी मेरी ही... आगे पढ़े

क्या यही प्यार है? : जेबा और राहिल के प्यार की कहानी

Updated on 2 May, 2018, 13:08
जेबा की बरात आने वाली थी. सभी पूरी तैयारी के साथ बरात के आने का इंतजार कर रहे थे कि तभी जेबा का आशिक राहिल कहीं से अचानक आंगन में आ गया. मंजर मुजफ्फरपुरी जेबा की बरात आने वाली थी. सभी पूरी तैयारी के साथ बरात के आने का इंतजार कर रहे... आगे पढ़े

रमादेवी ने अपनी जिद को दी तिलांजलि

Updated on 25 April, 2018, 15:30
नरेंद्र कौर रमादेवी ने बहू सुलभा को बेफिक्र हो कर नौकरी करने का आदेश दे तो दिया लेकिन कुछ समय बाद उन्हें ही क्यों लगने लगा कि अब उन्हें अपनी जिद को तिलांजलि देनी होगी?  पूरा घर ही रमादेवी को अस्तव्यस्त महसूस हो रहा है. सोफे के कुशन बिखरे हुए, दीवान की... आगे पढ़े

वादियों का प्यार

Updated on 20 April, 2018, 11:51
- शारदा छाबड़ा नैशनल कैडेट कोर यानी एनसीसी की लड़कियों के साथ जब मैं  कालका से शिमला जाने के लिए टौय ट्रेन में सवार हुई तो मेरे मन में सहसा पिछली यादों की घटनाएं उमड़ने लगीं. 3 वर्षों पहले ही तो मैं साकेत के साथ शिमला आई थी. तब इस गाड़ी में बैठ... आगे पढ़े

टूटे हुए पंखों की उड़ान : क्या अर्चना अपने सपने पूरे कर पाई

Updated on 15 April, 2018, 23:59
ममता रैना  गली में घुसते ही शोरगुल के बीच लड़ाईझगड़े और गालीगलौज की आवाजें अर्चना के कानों में पड़ीं. सड़ांध भरी नालियों के बीच एक संकरी गली से गुजर कर उस का घर आता था, जहां बरसात में मारे बदबू के चलना मुश्किल हो जाता था. दुपट्टे से नाक ढकते हुए अर्चना... आगे पढ़े

भिखारिन / रवीन्द्रनाथ टैगोर की कहानी

Updated on 11 April, 2018, 14:06
अन्धी प्रतिदिन मन्दिर के दरवाजे पर जाकर खड़ी होती, दर्शन करने वाले बाहर निकलते तो वह अपना हाथ फैला देती और नम्रता से कहती- "बाबूजी, अन्धी पर दया हो जाए।" वह जानती थी कि मन्दिर में आने वाले सहृदय और श्रद्धालु हुआ करते हैं। उसका यह अनुमान असत्य न था। आने-जाने... आगे पढ़े

सबसे सुन्दर लड़की / रचनाकार: विष्णु प्रभाकर

Updated on 7 April, 2018, 1:23
समुद्र के किनारे एक गाँव था । उसमें एक कलाकार रहता था । वह दिन भर समुद्र की लहरों से खेलता रहता, जाल डालता और सीपियाँ बटोरता ।  रंग-बिरंगी कौड़ियां, नाना रूप के सुन्दर-सुन्दर शंख चित्र-विचित्र पत्थर, न जाने क्या-क्या समुद्र जाल में भर देता ।  उनसे वह तरह-तरह के... आगे पढ़े

ठण्डी रोटी

Updated on 5 April, 2018, 23:53
एक लड़का था. उसकी माँ ने उसका विवाह कर दिया. लेकिन लड़का कुछ नहीं कमाता था. माँ जब भी उसको रोटी परोसती थी, तब वह कहती कि बेटा, ठंडी रोटी खा  लो. लड़के की समझ में यह नहीं आया कि माँ ऐसा क्यों कहती है. फिर भी वह चुप रहा.... आगे पढ़े