Friday, 10 April 2020, 11:42 AM

कविताएं

कोरोना हारेगा और देश जीतेगा

Updated on 25 March, 2020, 0:50
कुलदीप सिंह भाटी,जोधपुर (राजस्थान) कौन कहता है कि यहां कोरोना का कहर है। देख कोरोना तुझे डराने को छत पर देश का हर शहर है। खुले आसमां तले चहुं ओर खनक रही थालियां हैं। अरे बच्चे, बड़े, बूढ़े सब बजा रहे तालियां हैं। यह नहीं हैं केवल आभार राष्ट्र के सेवकों के लिए। ये तो चुनौती है देश में फैले वायरस कोरोना... आगे पढ़े

चुहिया की फरमाइश

Updated on 6 March, 2020, 1:06
/गोविंद भारद्वाज चुहिया बोली चूहे राजा ला दे मुझको साड़ी। और घूमने को दिलवा दे बीएमडब्लू गाड़ी।। स्कूटी पर बैठ सुबह जब घर से बाहर जाती। चौराहे पर बिल्ली हमको रोज रोज धमकाती।। कौवे और बिलौटा हमको सीटी देख बजाते। और छंछूदर हमें देख कर मन्द मन्द मुस्काते।। चूहा बोला चुहिया रानी तू है बड़ी अनाड़ी। बिल छोटा है, खड़ी करेगी कहां बताओ गाड़ी।।     ... आगे पढ़े

हुआ नीड़ सूना

Updated on 17 February, 2020, 1:57
  मनोरमा जोशी लुट गया मधुवन  हुआं वो नीड़ सूना । अब ना माली के , ह्रदय का घाव छूना । मधुप कलियों को , चले जाकर रुलाकर , उड़ गई कोकिला  अधूरा गीत गाकर , जब ना होगा नीर , सरिता क्या बहेगीं मीन जल से बिछुड़कर , कैसे रहेगीं । लहरियां तट को , जाती झुलाकर , उड़ गयी कोकिला , अधूरा गीत गाकर । कौन तुम... आगे पढ़े

मातृभूमि

Updated on 24 January, 2020, 1:27
शोभा रानी तिवारी यहां की माटी है चंदन,  ये हिंदुस्तान है मेरा । हमारे दिल की है धडकन,  मां के चरणों में वंदन,  ये हिंदुस्तान है मेरा । वंदे मातरम धड़कन दिल की , राष्ट्र की आराधना है , ऊर्जा देने वाला गीत है,  भारत मां की वंदना है , कफन बांधकर निकले घर से  श्वास नहीं गिना करते,  देश की... आगे पढ़े

रंगों की मकर संक्रांति

Updated on 11 January, 2020, 1:58
शोभारानी तिवारी  मकर संक्रांति का पर्व आया मिलजुलकर पर्व मनाएंगे।  तिल गुड़ की मीठास संग,  हम खुशी जताएंगे।  मौज-मस्ती करेंगे हम,  मन में विश्वास जगायेंगे,  रंग बिरंगी पतंग डोर संग,  आसमान में उड़ाएंगे।  स्वर्णिम किरणों को छूने,  लहराकर ऊपर चढ़ जाए,  इंद्रधनुष रंगों में रंगकर,  तूफानों में नाच दिखाएं , मंजिल का तो पता नहीं,  नील गगन की रानी कहलाए,  आसमान में बेखबर,  आजादी संग... आगे पढ़े

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:33

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:27

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:25

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:23

आओ रखें नए कदम....

Updated on 30 December, 2019, 23:33
◆ रश्मि सक्सेना ◆ आओ रखें नए वर्ष में कदम । हर तरफ हो रोशनी और दूर हो ये तम ।। गिले-शिकवों को छोड़कर । ग़मों से बंधन तोड़कर।। पकड़ कर ख़ुशी का हाथ। मुस्कानों को लेकर साथ।। आओ रखें नए वर्ष में कदम....   माता-पिता का रखना ख़याल। थोड़ा सा वक़्त थोड़ी सी देखभाल।। मीठे बोलों से अपने बहलाना । वादा... आगे पढ़े

नववर्ष का स्वागत

Updated on 30 December, 2019, 23:32
डॉ. अंजुल कंसल"कनुप्रिया" नववर्ष का स्वागत बारम्बार वंदन अभिनंदन हर्ष अपार   आनंदमय उत्कर्ष नवल हो हर पल नव उल्लास भरा हो नव आशा अभिलाषा का संचार नववर्ष का स्वागत बारम्बार ।।   नव रचना,नव उमंग सहर्ष हो नव उडान,भाव संदेश नया हो हर हृदय हो आशीष और प्यार नववर्ष का स्वागत बारम्बार।।   गीत संगीत की मधुर तरंग हो राग अनुराग का स्वर संगम... आगे पढ़े

अभिनंदन

Updated on 29 December, 2019, 21:44
शोभा रानी तिवारी नए वर्ष का करें अभिनंदन , आओ मिलकर खुशी मनाएं,  शुरू करें फिर से नवजीवन , बीते कल को भूल जाएं । हर रंग के फूल यहां पर , यह धरती एक बगीचा है,  एक विधा की परछाई  हम , ना कोई ऊंचा नीचा है, स्वर्णिम किरणें आसमान से,  रोली लेकर आई हैं , प्रकृति ने अपने... आगे पढ़े

सुनो

Updated on 10 November, 2019, 23:04
..../ देवेन्द्र बंसल ख़ुशहाली आ रही है  उसे अपने पास बैठना नाराज़ मत करना दूसरे का घर छोड़कर बड़ी उम्मीद से आई है  कितने दिन रुकेगी पता नही  लेकिन जहाँ जाती हैं वहाँ क़िस्मत बदल देती है  जहाँ से आती हैं  उनकी भी बदल जाती हैं आप अच्छें लगे तो रुकेगी नहीं तो फिर नया घर ढूँढेगी यहीं तो लीला है देवेन्द्र जो प्रभु ने बनाई हैं मुसाफ़िरों की दुनिया में  यही ज़िंदगी बसाई हैं   ... आगे पढ़े

..... बरखा रानी ...

Updated on 1 October, 2019, 23:55
 " मीनू मांणक " उमड़-घुमड़ घनघोर घटा । चमक-दमक गरजी बिजुरिया ।। मंद-मस्त बादल झूमते । संग हवा के उड़ते जायें ।। राह तकती , प्यासी धरती । ताक रही , आस लगाए ।। सूखी नदियाँ , सूखे झरने । प्यासे हैं , सब प्राणी ।। अब तो बरसो , बरखा रानी । क्यों सूखी गरज पर तरसाती हो ।। गरज-गरज... आगे पढ़े

'' घर''

Updated on 1 October, 2019, 23:53
   कुमुद दुबे,   इन्दौर कंकरीट का मकान जिसे लोग घर कहते है बिखरे-बिखरे है लोग  उसे परिवार कहते हैं.. ना बच्चों की किलकारी ना सासु-माँ का दुलार  ना दुलार भरी फटकार रिश्तों से दूर सब कटे-कटे रहते हैं कंकरीट का मकान जिसे लोग घर कहते हैं... ना ननंद की तकरार ना नन्दोई की मनुहार ना ससुर के पदचाप ना आगमन की खंकार ना बहू की... आगे पढ़े

शिक्षक

Updated on 5 September, 2019, 10:49
शोभा रानी तिवारी/ अंधकार था मेरा जीवन , मैं मूर्ख अज्ञान था , चैतन्य प्राणी होने पर भी, मैं सबसे अंजान था , जिसने दिशा का ज्ञान कराया,  मानो उसका एहसान , इसीलिए तो सब करते हैं , शिक्षक का सम्मान।  हम गीली मिट्टी के पुतले , हर पल उन्होंने हमें संभाला , हाथों से आकृति बनाई , फिर सांचों में  हमको... आगे पढ़े

गुरुवर वाणी

Updated on 5 September, 2019, 10:47
शिक्षक दिवस / मनीषा व्यास  कौन है वह ? ✍🏻✍🏻 बाल मन की जिज्ञासा को  जो करता है शांत  पल पल आशाओं की  जो भरता है उड़ान , कौन है वह ?  ✍🏻✍🏻 ज़िंदग़ी के सफ़र को  जो कर देता है आसान ख़ुद ठहर कर शिष्य के  सपनों को देता है उड़ान  कौन है वह ?  ✍🏻✍🏻 जाने कितने सपनों को  दिखाया उसने सफलता  इत्तिफ़ाक़ से नहीं... आगे पढ़े

राम का चरित्र

Updated on 10 August, 2019, 12:15
शोभा रानी तिवारी इस धरती पर जन्म लिया राम ने, किया सबका कल्याण है,  इसीलिए तो मेरी धरती,  पावन और महान हैं।  माता-पिता की आज्ञा से  राजवैभव त्याग दिया,  वचन निभाने की खातिर, वन जाना स्वीकार किया,  शबरी के जूठे, फल खाए  अहिल्या का उद्धार किया,  तुलसीदास ने मानव जग में  अद्भुत ग्रंथ उपहार दिया,  तुलसीदास के राम यहां पर , और गीता... आगे पढ़े

कोपलों का रंग

Updated on 1 August, 2019, 20:44
/मनीषा व्यास   रिम झिम बरखा ने  दस्तक दे दी ,नई कोपलों  ने  दिखाया सौरभ का रंग तो  फूलों में आयी नई ताज़गी , पेड़ों में जैसे लगे घुँघरू , लहराती सी हवा जो चली  , तो फूलों से ,पत्तियाँ भी कहने लगीं कहाँ हैं ? विधाता उन्हें कर दे नमन ........... कर दें नमन कर दें नमन    ... आगे पढ़े

बरसात  में मंगल 

Updated on 17 July, 2019, 11:13
आशा जाकड़ बरसात  में  हरे  भरे  जंगल  करें  मंगल  भीषण वर्षा खेत जल मग्न  रोयें  किसान  बरसात में  दुर्घटना होती है धीरे चलाएँ  खूब बारिश विद्यालय  बन्द हैं  विद्यार्थी  खुश बारिश हुई  सूरज छिप गया  अंधेराहुआ  पानी बरसा  नव जीवन आया जग हरषा मेघा गरजे  भयंकर बरसे  सर्वत्र पानी  भारी बारिश  हुई खूब  तबाही जन हताश   (9754969496)   ... आगे पढ़े