Saturday, 18 January 2020, 12:38 PM

कविताएं

रंगों की मकर संक्रांति

Updated on 11 January, 2020, 1:58
शोभारानी तिवारी  मकर संक्रांति का पर्व आया मिलजुलकर पर्व मनाएंगे।  तिल गुड़ की मीठास संग,  हम खुशी जताएंगे।  मौज-मस्ती करेंगे हम,  मन में विश्वास जगायेंगे,  रंग बिरंगी पतंग डोर संग,  आसमान में उड़ाएंगे।  स्वर्णिम किरणों को छूने,  लहराकर ऊपर चढ़ जाए,  इंद्रधनुष रंगों में रंगकर,  तूफानों में नाच दिखाएं , मंजिल का तो पता नहीं,  नील गगन की रानी कहलाए,  आसमान में बेखबर,  आजादी संग... आगे पढ़े

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:33

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:27

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:25

देश को बचाना है...

Updated on 10 January, 2020, 12:23

आओ रखें नए कदम....

Updated on 30 December, 2019, 23:33
◆ रश्मि सक्सेना ◆ आओ रखें नए वर्ष में कदम । हर तरफ हो रोशनी और दूर हो ये तम ।। गिले-शिकवों को छोड़कर । ग़मों से बंधन तोड़कर।। पकड़ कर ख़ुशी का हाथ। मुस्कानों को लेकर साथ।। आओ रखें नए वर्ष में कदम....   माता-पिता का रखना ख़याल। थोड़ा सा वक़्त थोड़ी सी देखभाल।। मीठे बोलों से अपने बहलाना । वादा... आगे पढ़े

नववर्ष का स्वागत

Updated on 30 December, 2019, 23:32
डॉ. अंजुल कंसल"कनुप्रिया" नववर्ष का स्वागत बारम्बार वंदन अभिनंदन हर्ष अपार   आनंदमय उत्कर्ष नवल हो हर पल नव उल्लास भरा हो नव आशा अभिलाषा का संचार नववर्ष का स्वागत बारम्बार ।।   नव रचना,नव उमंग सहर्ष हो नव उडान,भाव संदेश नया हो हर हृदय हो आशीष और प्यार नववर्ष का स्वागत बारम्बार।।   गीत संगीत की मधुर तरंग हो राग अनुराग का स्वर संगम... आगे पढ़े

अभिनंदन

Updated on 29 December, 2019, 21:44
शोभा रानी तिवारी नए वर्ष का करें अभिनंदन , आओ मिलकर खुशी मनाएं,  शुरू करें फिर से नवजीवन , बीते कल को भूल जाएं । हर रंग के फूल यहां पर , यह धरती एक बगीचा है,  एक विधा की परछाई  हम , ना कोई ऊंचा नीचा है, स्वर्णिम किरणें आसमान से,  रोली लेकर आई हैं , प्रकृति ने अपने... आगे पढ़े

सुनो

Updated on 10 November, 2019, 23:04
..../ देवेन्द्र बंसल ख़ुशहाली आ रही है  उसे अपने पास बैठना नाराज़ मत करना दूसरे का घर छोड़कर बड़ी उम्मीद से आई है  कितने दिन रुकेगी पता नही  लेकिन जहाँ जाती हैं वहाँ क़िस्मत बदल देती है  जहाँ से आती हैं  उनकी भी बदल जाती हैं आप अच्छें लगे तो रुकेगी नहीं तो फिर नया घर ढूँढेगी यहीं तो लीला है देवेन्द्र जो प्रभु ने बनाई हैं मुसाफ़िरों की दुनिया में  यही ज़िंदगी बसाई हैं   ... आगे पढ़े

..... बरखा रानी ...

Updated on 1 October, 2019, 23:55
 " मीनू मांणक " उमड़-घुमड़ घनघोर घटा । चमक-दमक गरजी बिजुरिया ।। मंद-मस्त बादल झूमते । संग हवा के उड़ते जायें ।। राह तकती , प्यासी धरती । ताक रही , आस लगाए ।। सूखी नदियाँ , सूखे झरने । प्यासे हैं , सब प्राणी ।। अब तो बरसो , बरखा रानी । क्यों सूखी गरज पर तरसाती हो ।। गरज-गरज... आगे पढ़े

'' घर''

Updated on 1 October, 2019, 23:53
   कुमुद दुबे,   इन्दौर कंकरीट का मकान जिसे लोग घर कहते है बिखरे-बिखरे है लोग  उसे परिवार कहते हैं.. ना बच्चों की किलकारी ना सासु-माँ का दुलार  ना दुलार भरी फटकार रिश्तों से दूर सब कटे-कटे रहते हैं कंकरीट का मकान जिसे लोग घर कहते हैं... ना ननंद की तकरार ना नन्दोई की मनुहार ना ससुर के पदचाप ना आगमन की खंकार ना बहू की... आगे पढ़े

शिक्षक

Updated on 5 September, 2019, 10:49
शोभा रानी तिवारी/ अंधकार था मेरा जीवन , मैं मूर्ख अज्ञान था , चैतन्य प्राणी होने पर भी, मैं सबसे अंजान था , जिसने दिशा का ज्ञान कराया,  मानो उसका एहसान , इसीलिए तो सब करते हैं , शिक्षक का सम्मान।  हम गीली मिट्टी के पुतले , हर पल उन्होंने हमें संभाला , हाथों से आकृति बनाई , फिर सांचों में  हमको... आगे पढ़े

गुरुवर वाणी

Updated on 5 September, 2019, 10:47
शिक्षक दिवस / मनीषा व्यास  कौन है वह ? ✍🏻✍🏻 बाल मन की जिज्ञासा को  जो करता है शांत  पल पल आशाओं की  जो भरता है उड़ान , कौन है वह ?  ✍🏻✍🏻 ज़िंदग़ी के सफ़र को  जो कर देता है आसान ख़ुद ठहर कर शिष्य के  सपनों को देता है उड़ान  कौन है वह ?  ✍🏻✍🏻 जाने कितने सपनों को  दिखाया उसने सफलता  इत्तिफ़ाक़ से नहीं... आगे पढ़े

राम का चरित्र

Updated on 10 August, 2019, 12:15
शोभा रानी तिवारी इस धरती पर जन्म लिया राम ने, किया सबका कल्याण है,  इसीलिए तो मेरी धरती,  पावन और महान हैं।  माता-पिता की आज्ञा से  राजवैभव त्याग दिया,  वचन निभाने की खातिर, वन जाना स्वीकार किया,  शबरी के जूठे, फल खाए  अहिल्या का उद्धार किया,  तुलसीदास ने मानव जग में  अद्भुत ग्रंथ उपहार दिया,  तुलसीदास के राम यहां पर , और गीता... आगे पढ़े

कोपलों का रंग

Updated on 1 August, 2019, 20:44
/मनीषा व्यास   रिम झिम बरखा ने  दस्तक दे दी ,नई कोपलों  ने  दिखाया सौरभ का रंग तो  फूलों में आयी नई ताज़गी , पेड़ों में जैसे लगे घुँघरू , लहराती सी हवा जो चली  , तो फूलों से ,पत्तियाँ भी कहने लगीं कहाँ हैं ? विधाता उन्हें कर दे नमन ........... कर दें नमन कर दें नमन    ... आगे पढ़े

बरसात  में मंगल 

Updated on 17 July, 2019, 11:13
आशा जाकड़ बरसात  में  हरे  भरे  जंगल  करें  मंगल  भीषण वर्षा खेत जल मग्न  रोयें  किसान  बरसात में  दुर्घटना होती है धीरे चलाएँ  खूब बारिश विद्यालय  बन्द हैं  विद्यार्थी  खुश बारिश हुई  सूरज छिप गया  अंधेराहुआ  पानी बरसा  नव जीवन आया जग हरषा मेघा गरजे  भयंकर बरसे  सर्वत्र पानी  भारी बारिश  हुई खूब  तबाही जन हताश   (9754969496)   ... आगे पढ़े

पावस

Updated on 17 July, 2019, 11:12
// वन्दना पुणतांबेकर रिमझिम बरसता सावन  टिपटिप सी माधुर्य संगीत मय ध्वनि लुभाती हर मन पुलकित कर जाती तन मन फुहार गुनगुनाते झूमते भवरें फूलों मंडराती तितलियां सुखद आलम छाया निराली छटा चहुओर निखरा निखरा चमन खिली बेले डार भीनी खुशबू बिखरी सोंधी सोंधी घरा खिलती कली बहार   ... आगे पढ़े

ज़िंदगी के सफ़रनामे में

Updated on 17 July, 2019, 11:11
..देवेन्द्र बंसल इंदौर वक़्त की परीक्षा  हवा के झोंकों  सी बदलती रहती हैं सुख दुःख के झूलों में झूलती रहती है मौसम की तरह  धूप छांव  करती रहती है कैसा ये मेला है ख़ुशियों के द्वार पर भी  ग़मों की बारिश है बहते जीवन के पानी में देवेन्द्र पारिवारिक सहभागिता  के हर्षित  फूलो के बगीचों में भी  हर इंसान मेले मेंअकेला है मेले में अकेला है.....   ... आगे पढ़े

.प्यासे नैना

Updated on 6 July, 2019, 1:04
   " मीनू मांणक " पहने लज्जा का गहना , बिन बोले , सब कुछ कहना । जलते दिए की रोशनी में , बिरहन का यूं चिट्ठी लिखना ।।   काहे बसे परदेस पिया ,  सुना है घर , अगंना । प्यासे हैं ये नैना , नहीं मन को चैना ।।   लिखते-लिखते यूं तकिए में ,  गोरी का मुँह छुपा लेना... आगे पढ़े

मेरे बाबूजी

Updated on 14 June, 2019, 8:05
कुमुद दुबे  मुझे अपने बाबूजी पर  घमंड करना आता है उन जैसा पिता जहाँ में  नजर नहीं आता है जब मैं छोटी थी  पर, छः बहनों में बड़ी थी फिर भी थी मैं उनकी लाड़ली सब याद है मुझे, उनका साईकिल पर बिठा बाजार ले जाना अपने साथ बिठा दूध रोटी खिलाना लड़ियाते हुए खाने से थाली में पानी ढुल जाना  फिर मीठी-सी डाँट पडना सब... आगे पढ़े

बेटी

Updated on 12 June, 2019, 8:26
अपूर्वा पवन बर्वे भगवान की सबसे अदभुत कल्पना है बेटी तो फिर क्यूँ इस दुनिया पर बोझ है बेटी... अगर घर का चिराग है बेटा तो उस चिराग की लौ है बेटी घर की शान है बेटा तो घर की रौनक है बेटी स्वाभिमान है बेटा तो अभिमान है बेटी अगर सपना है बेटा... आगे पढ़े

पेड़ हैं सेनापति

Updated on 5 June, 2019, 9:43
मंजुला भूतड़ा// पेड़ हैं सजग प्रहरी, अविराम अपनी लड़ाई में संलग्न, एक कर्तव्यनिष्ठ सैनिक की भांति। पेड़ घबराते नहीं हैं, पतझड़ उनके पत्तों को झड़ा दे, या फूल तोड़ दे, पुनः असंख्य फूलों पत्तों के साथ, हरियाली क़ायम रखते हैं। पेड़ शान्त भाव से निरन्तर बढ़ते रहते हैं, एक मोर्चे पर हार भी जाएं, तो थोड़ा रुक कर  कई मोर्चे खोल देते हैं। पेड़ कोई एक डाल... आगे पढ़े

धरती का सम्मान

Updated on 5 June, 2019, 9:37
शोभारानी तिवारी/ आओ हरियाली से धरती का सम्मान करें पौधों को लगाएं और फूलों से प्यार करें। यह धरती भारत माँ बनकर सबको आश्रय देती है अन्नपूर्णा बनकर हम सबका लालन पालन करती है फल फूलों से लदी डालियाँ झुकना हमें सिखाती हैं, पथ प्रदर्शक बनकर प्रगति की राह दिखाती हैं संकल्पों के वृक्ष लगाकर कर्तव्यों का निर्वाह करें आओ हरियाली से धरती का सम्मान करें। सावन... आगे पढ़े

.पर्यावरण .

Updated on 3 June, 2019, 7:59
✍" मीनू मांणक " छू लो अंबर को , करो खूब विकास । मिटा रहे हो धरा को , कुछ तो करो एहसास ।।   नदियों के निर्मल जल में बहा कर गदंगी । गंगा-यमुना के पवित्र जल को कर दिया दूषित ।।   काट रहे हो पेड़ , खत्म कर दिए जंगल सारे । बहती नदियों के... आगे पढ़े

हुआ सो हुआ

Updated on 3 June, 2019, 7:54
पवन शर्मा "हमदर्द"/ चौकीदार को चोर बनाया, राफेल का गीत सुनाया, जनता को खूब बरगलाया, फिर भी हाथ कुछ नहीं आया, मोदी जी ने 300 का आंकड़ा छुआ खैर जाने दो "हुआ सो हुआ"।।   सुप्रीम कोर्ट में बोला झूठ, एयर स्ट्राइक पर मांगा सबूत,  सब जगह से पार्टी हारी, और अमेठी से हारा खुद, इज्जत का तो बुरा हाल हुआ। खैर जाने... आगे पढ़े

जल मटका वार्तालाप

Updated on 30 May, 2019, 9:07
डां अंजुल कंसल "कनुप्रिया"/ जल कहे मटके से,कभी न कर अभिमान परोपकार कर सदा,बना रहे मान सम्मान।   मटका बोला जल से ,तू है मूल्यवान  बुझाता प्यास सबकी,देता जीवनदान।   जल दुखी हो बोला,सूख रहे सरोवर ताल मनुष्य व्यर्थ बहा रहा,समस्या है विकराल ।   मटका रुआंसा हो बोला,मैं मिट्टी से बना हूं इक दिन फूटूंगा,मिट्टी में ही मिल जाऊंगा ।   मटका... आगे पढ़े