Wednesday, 14 November 2018, 6:29 AM

कविताएं

चिड़िया-सी गुड़िया

Updated on 5 November, 2018, 9:18
-प्रेम लता चसवाल ‘प्रेमपुष्प’ चिड़िया-सी गुड़िया चीं-चीं करती आंगन में यूं फुदक रही, सावन की रिमझिम में जैसे, फूलों की डाली झलक रही!! गुन-गुन गीतों के भंवरों से, घर-उपवन गुंजार हुआ। चंचलता से महके घर का, कोना-कोना ख़ुशहाल हुआ। मां की ममता कभी दुलार में, कभी खीज में बरसे अमृत-सी। पापा जैसे ही घर आते हैं, चहके गुड़िया कोयल-सी। सोचे, ‘कब बड़ी होऊं... आगे पढ़े

आखिर कौन हो तुम

Updated on 8 October, 2018, 23:34
" मीनू मांणक " विशाल अंबर सी बाहें , चढते सूर्य का तेज हो । पर्वत की तरह अटल , समुद्र का बहता पानी हो ।। माँ की उम्मीदें , बहन के रक्षक हो । पत्नी का स्वाभिमान , बेटी का अभिमान हो ।। फौलादी हौसले , बरगत की छांया हो । आत्मविश्वास से भरे , खुश्हाली की तुम पूंजी हो ।। माँ... आगे पढ़े

मैं बनती झांसी की रानी

Updated on 25 September, 2018, 8:27
सीमा शिवहरे" सुमन" मैं बनकर झांसी की रानी होती स्वतंत्रता का आधार। बैठ घोड़े पर वीरता दिखलाती करती दुर्लभ नाला पार। शोला धधक रहा सीने में रोश उमड़े है अपार। अंग्रेज़ों को धूल चटाती बनकरके अंगार। अंग्रेज़ों से मिल बैठा था सुना है सिंधिया परिवार। रानी लक्ष्मी बच जाती जो कर देते इंकार। कोई भी नहीं हुआ सहायक प्रार्थना गई बेकार। जीते जी ही आग... आगे पढ़े

जीवन की शून्यता

Updated on 24 September, 2018, 11:21
कभी हम भी गोदी के खिलोने थे माता पिता के राज दुलारे थे अब ना दादी हैं , ना माँ हैं ना पिता हैं बस जीवन की शून्यता हैं, उनके बगेर कई बार बस , मैं यू हीं मचल जाता हूँ उनकी यादों मैं खो जाता हूँ रात्रि का यह प्रहर, उनको समर्पित हैं मन के हृदय भाव से , उनको वंदन हैं वंदन हैंवंदन हैं. ...देवेंद्र बंसल ... आगे पढ़े

कविताआें की दुनिया

Updated on 19 September, 2018, 12:50

खोज खबर

Updated on 16 September, 2018, 2:01
रघु अनजाने व्यक्ति ने जान पर खेल कर लोगों के सामने चेहरा दिखला दिया जिसने आवाज दी हत्यारा वह है – जाने न पाए वह उसे अब छिपा दिया गया है वह अपनी एकाकी गरिमा में प्रकट हुआ एक मिनट के लिए प्रकट हुआ और फिर हम सब से अलग कर दिया गया अपराध संगठित, राजनीति संगठित,... आगे पढ़े

तुम्हारा इन्तज़ार

Updated on 11 September, 2018, 0:56
/ किरण  यादव बिन बुलाए आना तुम इस बार मैं तुम्हें पहचान ना पाऊँ लगे , तुम नहीं हो जैसे स्याह रात ख़ामोशी की चादर ओढ़े साँझ के ढलते ही दस्तक देती है अनजान रास्ता बाँहें फैलाए तुम्हारा इन्तज़ार करता हो तुम उससे मिलने को बेचैन हो महसूस हुआ जैसे द्वार पर कोई आया हो पर कोई ना हो मैं बाहर झाँक... आगे पढ़े

काश माँ ...........

Updated on 11 September, 2018, 0:52
/सुषमा दुबे  काश माँ तूने कठिनाइयों से लड़ना सिखाया होता....... सहारा ना देती खुद ही चलना सिखाया होता ! छोड़ देती मेरा हाथ गिर कर सम्हालना तो सीख जाता .... गिरने के डर से गोद में ना उठाया होता ! काश माँ तूने ……… तू ना जाती प्रिंसिपल के पास मेरी शिकायतें लेकर...... मुझे ही परिस्थितियों से निपटना... आगे पढ़े

रेशम के धागों में बंधा प्यार

Updated on 25 August, 2018, 10:06
/शोभा रानी तिवारी पूजा की थाली सजाती बहना टीका माथे लगाती है मिठाई खिला राखी बांधती आरती भी उतारती है हर वर्ष राखी पर बहना को रहता इंतजार रेशम के धागों में बंधा है भाई बहन का प्यार । एक राखी उन वीरों के नाम जो रक्षा हित सीमा पर खड़े रहे गोली सीने पर खाई लेकिन मौत से नहीं डरे उनकी लंबी आयु... आगे पढ़े

राखी का त्योहार

Updated on 25 August, 2018, 10:05
/आशा जाकड़ आया राखी का त्योहार । लाया खुशियों का त्योहार । बच्चे - बच्चे पुलक रहे हैं राखी बंधवाएगे , अपनी  बहनों से हम मंगल टीका करवाएंगे । लाया खुशियो की बौछार आया राखी का त्योहार ।। डाल - डाल पर फूल खिले , गाए खुशी के गीत, राखी का संदेश सुनाए भाई - बहन की प्रीत... आगे पढ़े

वाह कचोरी !

Updated on 13 August, 2018, 9:39
/ मंजुला भूतड़ा (अध्यक्ष, इन्दौर लेखिका संघ, इन्दौर ) मेरे शहर की शान कचोरी,  हर जीभ का स्वाद कचोरी । मूंग कचोरी  मटर कचोरी  आलू कचोरी  प्याज कचोरी  हींग कचोरी  भुट्टा कचोरी  और होती है 'छोड़' कचोरी । चटपटा जायकेदार मसाला  भरकर बनती कचोरी,  तली जाती तभी बनती  क्रिस्पी क्रिस्पी खस्ता कचोरी । एक होती  राज कचोरी  सेव दही चटनी के साथ कचोरी  बहुत बड़ी तो राज कचोरा  कोई... आगे पढ़े

देशभक्त

Updated on 13 August, 2018, 9:37
/ शोभा रानी तिवारी जन्म से मृत्यु तक मैं फर्ज निभा ऊंगा अपना जीवन मां को अर्पण कर जाऊंगा मां तुम ना रोना, उदास ना होना विश्वास तुम रखना ,मैं फिर से आऊंगा   जो वीर वतन पर ,शहीद हो गए आंचल छोड़ मां की गोद में सो गए खून के कतरे कतरे से इतिहास जो... आगे पढ़े

नारी जीवन

Updated on 13 August, 2018, 8:59
 /मनोरमा जोशी सहे जुल्म जिसने सदियों से अब तक, उनको उबारो यह जी चाहता है । करते रहे आदिशक्ति की पूजा मगर मातृशक्ति कुंठित हो रही है। हुआ मान जिनका नहीं भूलकर भी, वही आज व्याकुल विवश हो रही है । तड़पती तिरस्कृत है आज ममता, उसे अपनाने को जी चाहता है । दुर्गा लक्ष्मी अहिल्या सीता सावित्री मीरा अनसुइया गार्गी मैयत्री सारंगा... आगे पढ़े

‘मैं’

Updated on 8 August, 2018, 9:23
/ किरण यादव सड़क के किनारे बंजर बियाबान में गहन अधंकार में सपनों की चादर ओढ़े सोया ना जाने कितनी रातें घेरते उदासी के बादल जहाँ मैं मापता धरती आकाश की गहराई को धुँधला गई है मन की रोशनी ओर चमकते तारों के मध्य मैं लुप्त हो गया हूँ जहाँ ढूँढने लगता हूँ , मैं अपना घर जो कही... आगे पढ़े

बगिया

Updated on 8 August, 2018, 8:54
/मीनू मांणक हाँ ये बगिया है । यहाँ बहार है , पतझड़ भी आते हैं ।। धूप - छाँव साथ चलते हैं । सुख-दुख  साथ रहते हैं ।।   बाबूल का अंगना छोड़ गोरी सपने संजोए आती है । बन कर बहू दुखों को सहती भीगी पलके लिये होंठों को सी लेती है ।।   वृद्ध आश्रम में ये बुजुर्ग सास खून... आगे पढ़े

मित्रों को समर्पित दोहे

Updated on 6 August, 2018, 1:21
 /रश्मि सक्सेना कृष्ण-सुदामा की यहाँ , देते सभी मिसाल । लेकिन वैसी मित्रता , अब है एक कमाल ।।    बिना झिझक हम बोल दें , जिनसे मन की बात । मित्र ज़िंदगी के लिए , होते वो सौग़ात ।।   दुख को हर कर आपके , सुख जो करते सेंड । होते हैं सच्चे वही , इस... आगे पढ़े

मन विचलित

Updated on 30 July, 2018, 13:34
कभी कभी मन बड़ा विचलित होता हैं हरपल अच्छा सा नहीं लगता हैं  शरीर के संचालित मन मस्तिक मैं विचारों की गंगा का प्रवाह तेज़ हो जाता हैं इधर उधर हम भटकते से लगते हैं स्थिरता की नाव डगमगाती है कोशिशों की सीमा बिखर जाती है  कुछ ही पल मैं बहुत कुछ हो जाएगा  अरे इंसान ,ठहर जा... आगे पढ़े

सलाम

Updated on 27 July, 2018, 10:35
/ आशा जाकड़ उन सपूतों  को  सलाम जिन्होंने  झेली हैं अपने  सीने पर गोलियां मिट गई जिनकी  कहानियाँ रह गई  केवल अमर स्मृतियाँ । उन माताओं  को सलाम जिनकी  कोख धन्य  हो गई , पुत्र  बलिदान  कर ममता  धन्य  हो गई रह गए  आंसू   और  मुस्कान । उन बहिनों  को  सलाम, जिनकी राखी सिसकती रहेगी अपनों  की याद ताजा  करती रहेगी सूख... आगे पढ़े

गुरु का महत्व

Updated on 27 July, 2018, 10:34
/ शोभारानी तिवारी गीली मिट्टी के थे पुतले हरपल गुरु ने हमें संभाला हाथों से आकृति बनाई फिर सांचों में हमको ढाला सबसे ऊपर है उनका  पद वही मेरे भगवान इसीलिए तो सब करते हैं गुरुओं का सम्मान खुशबू के बिना फूल अधूरा हरियाली के बिना चमन जल के बिना अधूरी मछली गुरु के बिना अधूरा जीवन कल्पतरु के जैसे हैं वह हमें बनाया... आगे पढ़े

शोखियों में घोलकर...मेघा छाए आधी रात

Updated on 20 July, 2018, 14:52
 नमन / सीमा शिवहरे" सुमन " मेघा छाये आधी रात और कारवाँ गुजर गया ..... दिल की कलम से लिखने वाला  वो महाकवि अब किधर गया। शोखियों में घोलकर फूलों का शबाब  आखिर वो लौट ही गये  देखो ना सावन की तरह। ए भाई जरा देख के चलो..... एक दिन सबको चले जाना  गोपाल दास" नीरज" की तरह। आंसुओं को सम्मानित... आगे पढ़े

बरसाती हाइकु

Updated on 17 July, 2018, 9:32
/आशा  जाकड़ बरसात  में रिमझिम फुहार लाए बहार मेघा गरजे भयंकर  बरसे सर्वत्र  पानी बारिश  हुई सूरज छिप गया अंधेराहुआ पानी  बरसा नव जीवन आया जग हरषा भरेगी नाली चले कागज-नाव बजेगी  ताली वर्षा होने से धरती  खिल उठी मन हरषे बरखा  आई खुशियाँ  संग लाई जीवन दायी बदरा घिरे झमाझम  पानी में छाते निकले बारिश हुई पेड़-पौधे जी उठे नदियाँ  बहे घटाएँ  घिरी बदरा बरसते मन खिलते इन्द्रधनुष मन को  दे सुकून मिटे कलुष आसमान  में बिजली   चमकती और कड़कती वर्षा को देख बच्चे  हो रहे खुश होगा ... आगे पढ़े

वक़्त के पहले क्यों चले जाते हैं लोग

Updated on 15 July, 2018, 17:54
यह कैसा सिलसिला है ज़िंदगी का  वक़्त के पहले क्यों चले जाते हैं लोग  दिल मैं बसे रिश्ते तोड़ जाते हैं लोग  मिलते महकते तो है, हम अपना बनकर  फिर चल रहे रास्ते से क्यों अलग हो जाते है  महफ़िलो मैं अब वो नज़र नहीं आएँगे  जो लिख गए अपनी किताब ज़िंदगी की  जो सजाया करते थे... आगे पढ़े

"उड़ जायेगा हंस"

Updated on 14 July, 2018, 14:34
/प्रियंका “अद्वैता” नैनों के पीछे छिपे हुए हैं राज़ कई हम उलझे हैं दुनियादारी के मसलों में आज कहीं मैं अकसर ही खुद को पाता हूँ बँटा हुआ लगता जैसे एक हिस्सा मेरे जिस्म का है और दूजा  मेरी भूति का इक हिस्सा दुनियावी है और दूजा है  दूर गगन बसता स्वछंद है जो जो बंधा नहीं है सवालों में......... जो विचर रहा आकाश की गूढ़ बयारों में..... जो मुक्त रूप जो पहने ना बेड़ी कोई जो... आगे पढ़े

एकता के संग

Updated on 11 July, 2018, 20:11
 /  मनु जोशी      एक साँस एक आस विश्वास सबके एक हो ।  कठिन कर्म नींव बने आवाज सबकी एक हो । ताकत पुरुषार्थ बूढ़े जीत मगर एक हो । हम सब एक हों । एकता के रंग मेंरंगे विश्वमति एक हो । गीता कुरान एक, फागुन की फाग एक गुरुग्रंथ गान एक , बाइबिल और जीसस के, त्यागों के गान... आगे पढ़े

*अंत तुम बने सदा आरम्भ*

Updated on 10 July, 2018, 9:39
/प्रतिमा अखिलेश टूटी आस लुटा विश्वास किन्तु रुका नहीं ये विकास                अंत तुम बने सदा आरंभ।   निशा के अन्तिम तम के कण, बने ऊषा की प्रथम किरण                हुआ जीवन का प्रत्यारंभ।                अंत तुम बने सदा आरंभ।   अतल... आगे पढ़े

कह दो हवाओं से

Updated on 8 July, 2018, 10:08
देवेंद्र बंसल हवाओं से कह दो की वो धक्का देकर बात ना किया करे जो सच्चे  दिल के हैं उन्हें गहरी ठेस पहुँचती हैं ये झूठ फ़रेब की दुनिया मुझे रास नहीं आती ये मन  के आँचल को मटमैला किए देती हैं ख़ूब दिया है इंसानों को धरती के सागर ने कब तक तू इसे पाकर मुस्करता रहेगा है इंसान तू अकेला ही... आगे पढ़े

पुलिस अधिकारियों ! वेतन लेने से पहले स्वयं से करो प्रश्न

Updated on 6 July, 2018, 15:06
महू के पुलिस अधिकारियों ! वेतन लेने से पहले स्वयं से करो प्रश्न क्यों नहीं पकड़ आ रहे चोर, लुटरे? कैसे हाथ से छूट गया ईश्वर भील? डॉक्टर दंपत्ति के घर किसने की चोरी? आर्मी दंपत्ति को मारने वाले हमलावर  अब तक क्यों नहीं धराये? बच्चे नशे के शिकार क्यों हो रहे कोचिंग की लड़कियों के साथ  बगीचों... आगे पढ़े

मासूमों की क्या खता…

Updated on 4 July, 2018, 8:50
//कुसुम सोगानी दिल रो रहा है जार जार क्यों होता ऐसा बार बार हर शब्द लिखने पे वमन हो रही हे विष के घूँट पी रहे हैं सांसे उगल रहीं हैं छोटी सी मासूम को ना पता कुछ भी शरीर का स्वयं कपड़े  पहनना ठीक से आता नहीं बिना माता छाती से लग ठीक से... आगे पढ़े

हे माँ .. तू बड़ी निराली

Updated on 4 July, 2018, 8:42
/ सरिता  काला क्यों  मैं  इस  धरती  पर  जन्मी क्यों  इतना  दर्द  सहा इस  पापी  दुनिया  में  क्यों  लायी सरकार  से  क्यों  डरी मेरी  हत्या  क्यों  नही  की हे मां, मुझे  क्यों  जन्म  दिया अब हर बेटी  की  रक्षा करना इन दरिंदों से  बचाना मां  वादा  कर हर  बेटी  को  न्याय  दिलाना ... आगे पढ़े