Saturday, 25 May 2019, 5:20 PM

कविताएं

नदिया की जु़बानी

Updated on 21 May, 2019, 11:43
डॉ. चंद्रा सायता मनुपुत्र.के मानस को यूं देख विव्हल, मौन खडी़ मैं मन ही मन अकुला रही। खाली खाली अपना आंचल निहार, ' प्यास लगी है?' कहते भी सकुचा रही।   क्षीण जलधार से जैसे तैसे लिखी मैंने, खुरदुरे ज़मीनी कागज पर एक इबारत। कभी न सोचा था, होगा यह अंजाम मानव यूं प्रकृति से करेगा ऐसी शरारत।   मेरा गुनाह... आगे पढ़े

मतदान अवश्य करें

Updated on 16 May, 2019, 11:41
/  डॅा.  अंजुल कंसल "कनुप्रिया" अपने अधिकारों का सम्मान करें आप सब मिल कर विचार करें।   विवेकपूर्ण इस बार मतदान करें अमूल्य वोट को देश के नाम करें।   मतदान केंद्र स्वयं अवश्य जाएं साथ में परिवार को भी ले जाएं।   आस- पड़ोस का ध्यान रखें बडे -बुजुर्गों को संग ले जाएं।   दिव्यांगों से अवश्य वोट डलवाएं व्यवस्था कर बूथ तक... आगे पढ़े

आस्था के अंकुर

Updated on 13 April, 2019, 9:33
 मंजुला भूतड़ा/ नई सदी में नई आस्था के अंकुर लहराएंगे, सुख वैभव का अमर उजाला घर आंगन में लाएंगे।   भेद भाव के जाल काट कर मैत्री भाव बढ़ाएंगे, छू लेंगे अंतर्मन को हम ऐसी दया दिखाएंगे।   द्वेष भाव हिंसा से परे हो ऐसी युक्ति लगाएंगे, अब तक जो भूलें की हमने उनको न दोहराएंगे।   कैसी राह चलें हम आगे चिन्तन करते जाएंगे, दुःखी न... आगे पढ़े

जय जय मां : हाइकु

Updated on 13 April, 2019, 9:27
आशा जाकड़ / दुर्गा मां आई ढेरों  खुशियां  लाई बजे  बधाई  हे दयालु मां भक्तों  पे दया कर आशीष दे मां  मां में  है आस्था  दूर करेगी व्यथा सुन पुकार  मां कृपा कर दुखों  का नाश कर पाय लागू  मां मां कालजयी  तू है वात्सल्यमयी करुणामयी चीख पुकार  दुष्टों का नाश कर उठा कटार मां कहाँ  है तू आजा दर्शन  देदे  आशीर्वाद दे पहाड़ों वाली भक्तों की दुलारी मां  तू है प्यारी मां जगदम्बे मां तुझमें दुर्गा ... आगे पढ़े

दोस्ती

Updated on 13 April, 2019, 9:25
 मीनू मांणक / दोस्ती की ये सौग़ात हमेशा याद रखना । दिल में दोस्तों की भी जगह बनाये रखना ।। कितनी भी रूकावटें आएँ राहों में । सच्ची है ग़र दोस्ती तो निभाये रखना ।। पाई तेरी दोस्ती तो , मशहूर हो गये । मुस्कुराए तेरी हँसी में तो ग़म दूर हो गए।। दोस्ती ग़म नहीं खुशियों... आगे पढ़े

हरी घास पर क्षण भर अज्ञेय

Updated on 11 April, 2019, 10:58
  देखती है दीठ क्षमा की वेला एक आटोग्रॉफ़ तुम्हीं हो क्या बन्धु वह प्रणति राह बदलती नहीं विश्वास का वारिद किरण मर जाएगी शक्ति का उत्पाद पराजय है याद दीप थे अगणित खुलती आँख का सपना पावस-प्रात सागर के किनारे दूर्वांचल कितनी शान्ति ! कितनी शान्ति ! कतकी पूनो वसंत की बदली मुझे सब कुछ याद है अकेली न जैयो राधे जमुना के तीर जब पपीहे ने पुकारा माहीवाल से शरद क्वाँर की... आगे पढ़े

धनुषाकार पिरामिड

Updated on 7 April, 2019, 11:43
डा` अंजुल कंसल"कनुप्रिया"   हां  रंग गुलाल अबीर भी झरी फुहार लाल गाल भाल रंगों का है त्योहार गिले शिकवे भूल पिचकारी भर खूब मनाई सखि होली हंसते  हुए रे   है आई रंगीली होली खेली रंग पंचमी झूमते नाचते फगुआ गीत गाएं नाचें धूम मचाएं है आखिरी दिन होली की करें मुस्कराते विदाई रंग रे   ... आगे पढ़े

मेरा प्यारा शहर ...

Updated on 7 April, 2019, 11:39
देवेंद्र बंसल / मालवा का यह शहर आबो हवा में निराला है सामाजिक और संस्कृति प्रेम यहाँ की विशेषता है हर रंग में रंगा यह शहर भारत का ह्र्दय स्थल है स्वच्छता की शिखरता पाकर मस्तक हमारा उँचा है राष्ट्रीयता पर भी हमारे शहर के अनेक तारे हैं ओंकार महाकाल की कृपा से बसे यहाँ सारे... आगे पढ़े

होली तुम बिन

Updated on 20 March, 2019, 0:30
/शोभारानी तिवारी तुम बिन मांग सूनी हुई, सूना दिन सूनी रात , आंखें गंगा जमुना बहती , बुझ गई सारी मन की आस , रंगीन दुनिया बेरंग हुई , अपने मन को बहलाऊँ कैसे ? किसे रंग लगाऊँ सजनवा ?बताओ होली खेलूं कैसे ? कहा था होली पर आऊंगा , सब के लिए कुछ ना कुछ ना ,लाऊंगा , मुन्नी... आगे पढ़े

अहसास

Updated on 20 March, 2019, 0:27
/ देवेन्द्र बंसल     माटी की भीनी भीनी सुगंध में      अपनेपन का अहसास है      धूल भरी राहों में खोजता जीवन है      बचपन से यौवन का हर श्रांगार हैं      माँ के आँचल का महकता प्यार है      रोते मुस्कुराते मंज़िलो की तलाश है      सुबह की ठंडक में दिन का एहसास है     ... आगे पढ़े

गर्व है नारी होने पर

Updated on 9 March, 2019, 8:24
◆ रश्मि  सक्सेना    आधी दुनिया मैं कहलाऊँ ,मुझे गर्व है नारी होने पर प्यार,त्याग और श्रद्धा, समर्पण की मूरत हूँ धरती पर   अपनों के हर ख़्वाब को पूरा करने में जुट जाती हूँ उनकी ख़ुशियों में ही अपनी ख़ुशियाँ सारी पाती हूँ   संस्कृति,शिक्षा,कला,खेल, मीडिया,कारपोरेट कौन सा ऐसा क्षेत्र जहाँ पर कदम नहीं मेरा हो   धरती से आकाश... आगे पढ़े

मुखर होना होगा

Updated on 4 March, 2019, 14:22
मनीषा व्यास / भीग गयी रक्त में सैनिकों की वर्दी दे गये मुल्क को अपनी जवानी   दुनिया तो गुलाब देकर अपनी  मोहब्बत रिझाने में लगी थी  पुलवामा में सैनिकों ने दे दी क़ुर्बानी  अब तो ईंट का जवाब पत्थर से देना होगा. चुप  नहीं रहना है अब मुखर होना होगा . माँ के आँचल को छलनी करने वालों से  संघर्ष... आगे पढ़े

महाशिवरात्रि पर्व पर दोहे  

Updated on 4 March, 2019, 13:40
…रश्मि सक्सेना निराकार शिवरूप है , शिव हैं आदि अनंत । शिव का मतलब शून्यता , शिव अनादि भगवंत ।। शोभित चंद्र ललाट पर , कर में लिए त्रिशूल । शंकर भोलेनाथ हैं , सकल सृष्टि के मूल ।। चतुर्दशी तिथि फागुनी , महाशिवरात्रि पर्व । पूजन शिवजी का करें , नर-नारी गंधर्व ।। गौरा जी को... आगे पढ़े

विरासत

Updated on 2 March, 2019, 1:30
पिंकी पोरवाल/ कौन कहता है आप चले गए? आज भी बसे हो गायत्री चालीसा के शब्दों में, क्योंकि सुबह की पहली प्रार्थना आपने ही तो सिखाई थी ! कौन कहता है आप चले गए? आज भी बसे हो शीशम के पेड़ की छाँव में, क्योंकि वो आज भी वहीँ है जहाँ कहानिया सुनी थी आपसे ! कौन... आगे पढ़े

हे कलम

Updated on 26 February, 2019, 0:35
/ मीनू मांणक   हे कलम , आज फिर जय बोल ,  देश के उन वीर जवानों की ।   सरहद पर जो शहीद हुए, भारत माँ के उन सपूतों की ।।   उदास देश , आँखें हैं नम , तूफान उठा है सीने में ।   किया है वार छुप कर नापाक कायरों ने , उड़ा दो चिथड़े दुश्मनों के... आगे पढ़े

मैं बेटी हिंदुस्तान की,

Updated on 20 February, 2019, 12:18
शोभा रानी तिवारी / मैं बेटी हिंदुस्तान की, सदाचार सत्कर्म लक्ष्य हो , ऐसा पुण्य महान करें , फूलों की मुस्कान बिखेरे, जन जन काकल्याण करें , नई किरण फूटी भारत में , मानव के उत्थान की, मैं बेटी हिंदुस्तान की । युद्ध क्षेत्र में वीर बालाओंने, वीरों का है,साथ दिया, छक्के छुड़ाये दुश्मनों का, त्याग और बलिदान दिया , रक्षा की है, मातृभूमि... आगे पढ़े

""जिन्दगी का साज वसन्त ""

Updated on 18 February, 2019, 11:12
आशा जाकड़  रे मन  तू क्यों है उदास? जिन्दगी  का  साज वसंत  आ गया । गिले शिकवे  दूर होते, कहे अनकहे  वादे होगे। निकलेगी जीवन की  भड़ास  , जिन्दगी का साज वसंत  आ गया । शंका - कुशंका के  बांध  टूटेगे, घिरे  बदरवा  खूब बरसेंगे। दूर होगी सब मन की फांस, जिन्दगी  का  साज वसंत आ गया।    सुलगते  मन की  बातें ... आगे पढ़े

हिंदुस्तान की बेटी

Updated on 27 January, 2019, 10:16
मैं बेटी हिंदुस्तान की, सदाचार सत्कर्म लक्ष्य हो , ऐसा पुण्य महान करें , फूलों की मुस्कान बिखेरे, जन जन काकल्याण करें , नई किरण फूटी भारत में , मानव के उत्थान की, मैं बेटी हिंदुस्तान की । युद्ध क्षेत्र में वीर बालाओंने, वीरों का है,साथ दिया, छक्के छुड़ाये दुश्मनों का, त्याग और बलिदान दिया , रक्षा की है, मातृभूमि के  आन बान... आगे पढ़े

अनुराधा की कविता

Updated on 26 December, 2018, 16:20

कविता

Updated on 19 December, 2018, 15:46

चिड़िया-सी गुड़िया

Updated on 5 November, 2018, 9:18
-प्रेम लता चसवाल ‘प्रेमपुष्प’ चिड़िया-सी गुड़िया चीं-चीं करती आंगन में यूं फुदक रही, सावन की रिमझिम में जैसे, फूलों की डाली झलक रही!! गुन-गुन गीतों के भंवरों से, घर-उपवन गुंजार हुआ। चंचलता से महके घर का, कोना-कोना ख़ुशहाल हुआ। मां की ममता कभी दुलार में, कभी खीज में बरसे अमृत-सी। पापा जैसे ही घर आते हैं, चहके गुड़िया कोयल-सी। सोचे, ‘कब बड़ी होऊं... आगे पढ़े

आखिर कौन हो तुम

Updated on 8 October, 2018, 23:34
" मीनू मांणक " विशाल अंबर सी बाहें , चढते सूर्य का तेज हो । पर्वत की तरह अटल , समुद्र का बहता पानी हो ।। माँ की उम्मीदें , बहन के रक्षक हो । पत्नी का स्वाभिमान , बेटी का अभिमान हो ।। फौलादी हौसले , बरगत की छांया हो । आत्मविश्वास से भरे , खुश्हाली की तुम पूंजी हो ।। माँ... आगे पढ़े

मैं बनती झांसी की रानी

Updated on 25 September, 2018, 8:27
सीमा शिवहरे" सुमन" मैं बनकर झांसी की रानी होती स्वतंत्रता का आधार। बैठ घोड़े पर वीरता दिखलाती करती दुर्लभ नाला पार। शोला धधक रहा सीने में रोश उमड़े है अपार। अंग्रेज़ों को धूल चटाती बनकरके अंगार। अंग्रेज़ों से मिल बैठा था सुना है सिंधिया परिवार। रानी लक्ष्मी बच जाती जो कर देते इंकार। कोई भी नहीं हुआ सहायक प्रार्थना गई बेकार। जीते जी ही आग... आगे पढ़े

जीवन की शून्यता

Updated on 24 September, 2018, 11:21
कभी हम भी गोदी के खिलोने थे माता पिता के राज दुलारे थे अब ना दादी हैं , ना माँ हैं ना पिता हैं बस जीवन की शून्यता हैं, उनके बगेर कई बार बस , मैं यू हीं मचल जाता हूँ उनकी यादों मैं खो जाता हूँ रात्रि का यह प्रहर, उनको समर्पित हैं मन के हृदय भाव से , उनको वंदन हैं वंदन हैंवंदन हैं. ...देवेंद्र बंसल ... आगे पढ़े

कविताआें की दुनिया

Updated on 19 September, 2018, 12:50

खोज खबर

Updated on 16 September, 2018, 2:01
रघु अनजाने व्यक्ति ने जान पर खेल कर लोगों के सामने चेहरा दिखला दिया जिसने आवाज दी हत्यारा वह है – जाने न पाए वह उसे अब छिपा दिया गया है वह अपनी एकाकी गरिमा में प्रकट हुआ एक मिनट के लिए प्रकट हुआ और फिर हम सब से अलग कर दिया गया अपराध संगठित, राजनीति संगठित,... आगे पढ़े

तुम्हारा इन्तज़ार

Updated on 11 September, 2018, 0:56
/ किरण  यादव बिन बुलाए आना तुम इस बार मैं तुम्हें पहचान ना पाऊँ लगे , तुम नहीं हो जैसे स्याह रात ख़ामोशी की चादर ओढ़े साँझ के ढलते ही दस्तक देती है अनजान रास्ता बाँहें फैलाए तुम्हारा इन्तज़ार करता हो तुम उससे मिलने को बेचैन हो महसूस हुआ जैसे द्वार पर कोई आया हो पर कोई ना हो मैं बाहर झाँक... आगे पढ़े

काश माँ ...........

Updated on 11 September, 2018, 0:52
/सुषमा दुबे  काश माँ तूने कठिनाइयों से लड़ना सिखाया होता....... सहारा ना देती खुद ही चलना सिखाया होता ! छोड़ देती मेरा हाथ गिर कर सम्हालना तो सीख जाता .... गिरने के डर से गोद में ना उठाया होता ! काश माँ तूने ……… तू ना जाती प्रिंसिपल के पास मेरी शिकायतें लेकर...... मुझे ही परिस्थितियों से निपटना... आगे पढ़े

रेशम के धागों में बंधा प्यार

Updated on 25 August, 2018, 10:06
/शोभा रानी तिवारी पूजा की थाली सजाती बहना टीका माथे लगाती है मिठाई खिला राखी बांधती आरती भी उतारती है हर वर्ष राखी पर बहना को रहता इंतजार रेशम के धागों में बंधा है भाई बहन का प्यार । एक राखी उन वीरों के नाम जो रक्षा हित सीमा पर खड़े रहे गोली सीने पर खाई लेकिन मौत से नहीं डरे उनकी लंबी आयु... आगे पढ़े