Wednesday, 20 November 2019, 5:36 PM

कविताएं

अहसास

Updated on 20 March, 2019, 0:27
/ देवेन्द्र बंसल     माटी की भीनी भीनी सुगंध में      अपनेपन का अहसास है      धूल भरी राहों में खोजता जीवन है      बचपन से यौवन का हर श्रांगार हैं      माँ के आँचल का महकता प्यार है      रोते मुस्कुराते मंज़िलो की तलाश है      सुबह की ठंडक में दिन का एहसास है     ... आगे पढ़े

गर्व है नारी होने पर

Updated on 9 March, 2019, 8:24
◆ रश्मि  सक्सेना    आधी दुनिया मैं कहलाऊँ ,मुझे गर्व है नारी होने पर प्यार,त्याग और श्रद्धा, समर्पण की मूरत हूँ धरती पर   अपनों के हर ख़्वाब को पूरा करने में जुट जाती हूँ उनकी ख़ुशियों में ही अपनी ख़ुशियाँ सारी पाती हूँ   संस्कृति,शिक्षा,कला,खेल, मीडिया,कारपोरेट कौन सा ऐसा क्षेत्र जहाँ पर कदम नहीं मेरा हो   धरती से आकाश... आगे पढ़े

मुखर होना होगा

Updated on 4 March, 2019, 14:22
मनीषा व्यास / भीग गयी रक्त में सैनिकों की वर्दी दे गये मुल्क को अपनी जवानी   दुनिया तो गुलाब देकर अपनी  मोहब्बत रिझाने में लगी थी  पुलवामा में सैनिकों ने दे दी क़ुर्बानी  अब तो ईंट का जवाब पत्थर से देना होगा. चुप  नहीं रहना है अब मुखर होना होगा . माँ के आँचल को छलनी करने वालों से  संघर्ष... आगे पढ़े

महाशिवरात्रि पर्व पर दोहे  

Updated on 4 March, 2019, 13:40
…रश्मि सक्सेना निराकार शिवरूप है , शिव हैं आदि अनंत । शिव का मतलब शून्यता , शिव अनादि भगवंत ।। शोभित चंद्र ललाट पर , कर में लिए त्रिशूल । शंकर भोलेनाथ हैं , सकल सृष्टि के मूल ।। चतुर्दशी तिथि फागुनी , महाशिवरात्रि पर्व । पूजन शिवजी का करें , नर-नारी गंधर्व ।। गौरा जी को... आगे पढ़े

विरासत

Updated on 2 March, 2019, 1:30
पिंकी पोरवाल/ कौन कहता है आप चले गए? आज भी बसे हो गायत्री चालीसा के शब्दों में, क्योंकि सुबह की पहली प्रार्थना आपने ही तो सिखाई थी ! कौन कहता है आप चले गए? आज भी बसे हो शीशम के पेड़ की छाँव में, क्योंकि वो आज भी वहीँ है जहाँ कहानिया सुनी थी आपसे ! कौन... आगे पढ़े

हे कलम

Updated on 26 February, 2019, 0:35
/ मीनू मांणक   हे कलम , आज फिर जय बोल ,  देश के उन वीर जवानों की ।   सरहद पर जो शहीद हुए, भारत माँ के उन सपूतों की ।।   उदास देश , आँखें हैं नम , तूफान उठा है सीने में ।   किया है वार छुप कर नापाक कायरों ने , उड़ा दो चिथड़े दुश्मनों के... आगे पढ़े

मैं बेटी हिंदुस्तान की,

Updated on 20 February, 2019, 12:18
शोभा रानी तिवारी / मैं बेटी हिंदुस्तान की, सदाचार सत्कर्म लक्ष्य हो , ऐसा पुण्य महान करें , फूलों की मुस्कान बिखेरे, जन जन काकल्याण करें , नई किरण फूटी भारत में , मानव के उत्थान की, मैं बेटी हिंदुस्तान की । युद्ध क्षेत्र में वीर बालाओंने, वीरों का है,साथ दिया, छक्के छुड़ाये दुश्मनों का, त्याग और बलिदान दिया , रक्षा की है, मातृभूमि... आगे पढ़े

""जिन्दगी का साज वसन्त ""

Updated on 18 February, 2019, 11:12
आशा जाकड़  रे मन  तू क्यों है उदास? जिन्दगी  का  साज वसंत  आ गया । गिले शिकवे  दूर होते, कहे अनकहे  वादे होगे। निकलेगी जीवन की  भड़ास  , जिन्दगी का साज वसंत  आ गया । शंका - कुशंका के  बांध  टूटेगे, घिरे  बदरवा  खूब बरसेंगे। दूर होगी सब मन की फांस, जिन्दगी  का  साज वसंत आ गया।    सुलगते  मन की  बातें ... आगे पढ़े

हिंदुस्तान की बेटी

Updated on 27 January, 2019, 10:16
मैं बेटी हिंदुस्तान की, सदाचार सत्कर्म लक्ष्य हो , ऐसा पुण्य महान करें , फूलों की मुस्कान बिखेरे, जन जन काकल्याण करें , नई किरण फूटी भारत में , मानव के उत्थान की, मैं बेटी हिंदुस्तान की । युद्ध क्षेत्र में वीर बालाओंने, वीरों का है,साथ दिया, छक्के छुड़ाये दुश्मनों का, त्याग और बलिदान दिया , रक्षा की है, मातृभूमि के  आन बान... आगे पढ़े

अनुराधा की कविता

Updated on 26 December, 2018, 16:20

कविता

Updated on 19 December, 2018, 15:46

चिड़िया-सी गुड़िया

Updated on 5 November, 2018, 9:18
-प्रेम लता चसवाल ‘प्रेमपुष्प’ चिड़िया-सी गुड़िया चीं-चीं करती आंगन में यूं फुदक रही, सावन की रिमझिम में जैसे, फूलों की डाली झलक रही!! गुन-गुन गीतों के भंवरों से, घर-उपवन गुंजार हुआ। चंचलता से महके घर का, कोना-कोना ख़ुशहाल हुआ। मां की ममता कभी दुलार में, कभी खीज में बरसे अमृत-सी। पापा जैसे ही घर आते हैं, चहके गुड़िया कोयल-सी। सोचे, ‘कब बड़ी होऊं... आगे पढ़े

आखिर कौन हो तुम

Updated on 8 October, 2018, 23:34
" मीनू मांणक " विशाल अंबर सी बाहें , चढते सूर्य का तेज हो । पर्वत की तरह अटल , समुद्र का बहता पानी हो ।। माँ की उम्मीदें , बहन के रक्षक हो । पत्नी का स्वाभिमान , बेटी का अभिमान हो ।। फौलादी हौसले , बरगत की छांया हो । आत्मविश्वास से भरे , खुश्हाली की तुम पूंजी हो ।। माँ... आगे पढ़े

मैं बनती झांसी की रानी

Updated on 25 September, 2018, 8:27
सीमा शिवहरे" सुमन" मैं बनकर झांसी की रानी होती स्वतंत्रता का आधार। बैठ घोड़े पर वीरता दिखलाती करती दुर्लभ नाला पार। शोला धधक रहा सीने में रोश उमड़े है अपार। अंग्रेज़ों को धूल चटाती बनकरके अंगार। अंग्रेज़ों से मिल बैठा था सुना है सिंधिया परिवार। रानी लक्ष्मी बच जाती जो कर देते इंकार। कोई भी नहीं हुआ सहायक प्रार्थना गई बेकार। जीते जी ही आग... आगे पढ़े

जीवन की शून्यता

Updated on 24 September, 2018, 11:21
कभी हम भी गोदी के खिलोने थे माता पिता के राज दुलारे थे अब ना दादी हैं , ना माँ हैं ना पिता हैं बस जीवन की शून्यता हैं, उनके बगेर कई बार बस , मैं यू हीं मचल जाता हूँ उनकी यादों मैं खो जाता हूँ रात्रि का यह प्रहर, उनको समर्पित हैं मन के हृदय भाव से , उनको वंदन हैं वंदन हैंवंदन हैं. ...देवेंद्र बंसल ... आगे पढ़े

कविताआें की दुनिया

Updated on 19 September, 2018, 12:50

खोज खबर

Updated on 16 September, 2018, 2:01
रघु अनजाने व्यक्ति ने जान पर खेल कर लोगों के सामने चेहरा दिखला दिया जिसने आवाज दी हत्यारा वह है – जाने न पाए वह उसे अब छिपा दिया गया है वह अपनी एकाकी गरिमा में प्रकट हुआ एक मिनट के लिए प्रकट हुआ और फिर हम सब से अलग कर दिया गया अपराध संगठित, राजनीति संगठित,... आगे पढ़े

तुम्हारा इन्तज़ार

Updated on 11 September, 2018, 0:56
/ किरण  यादव बिन बुलाए आना तुम इस बार मैं तुम्हें पहचान ना पाऊँ लगे , तुम नहीं हो जैसे स्याह रात ख़ामोशी की चादर ओढ़े साँझ के ढलते ही दस्तक देती है अनजान रास्ता बाँहें फैलाए तुम्हारा इन्तज़ार करता हो तुम उससे मिलने को बेचैन हो महसूस हुआ जैसे द्वार पर कोई आया हो पर कोई ना हो मैं बाहर झाँक... आगे पढ़े

काश माँ ...........

Updated on 11 September, 2018, 0:52
/सुषमा दुबे  काश माँ तूने कठिनाइयों से लड़ना सिखाया होता....... सहारा ना देती खुद ही चलना सिखाया होता ! छोड़ देती मेरा हाथ गिर कर सम्हालना तो सीख जाता .... गिरने के डर से गोद में ना उठाया होता ! काश माँ तूने ……… तू ना जाती प्रिंसिपल के पास मेरी शिकायतें लेकर...... मुझे ही परिस्थितियों से निपटना... आगे पढ़े

रेशम के धागों में बंधा प्यार

Updated on 25 August, 2018, 10:06
/शोभा रानी तिवारी पूजा की थाली सजाती बहना टीका माथे लगाती है मिठाई खिला राखी बांधती आरती भी उतारती है हर वर्ष राखी पर बहना को रहता इंतजार रेशम के धागों में बंधा है भाई बहन का प्यार । एक राखी उन वीरों के नाम जो रक्षा हित सीमा पर खड़े रहे गोली सीने पर खाई लेकिन मौत से नहीं डरे उनकी लंबी आयु... आगे पढ़े

राखी का त्योहार

Updated on 25 August, 2018, 10:05
/आशा जाकड़ आया राखी का त्योहार । लाया खुशियों का त्योहार । बच्चे - बच्चे पुलक रहे हैं राखी बंधवाएगे , अपनी  बहनों से हम मंगल टीका करवाएंगे । लाया खुशियो की बौछार आया राखी का त्योहार ।। डाल - डाल पर फूल खिले , गाए खुशी के गीत, राखी का संदेश सुनाए भाई - बहन की प्रीत... आगे पढ़े

वाह कचोरी !

Updated on 13 August, 2018, 9:39
/ मंजुला भूतड़ा (अध्यक्ष, इन्दौर लेखिका संघ, इन्दौर ) मेरे शहर की शान कचोरी,  हर जीभ का स्वाद कचोरी । मूंग कचोरी  मटर कचोरी  आलू कचोरी  प्याज कचोरी  हींग कचोरी  भुट्टा कचोरी  और होती है 'छोड़' कचोरी । चटपटा जायकेदार मसाला  भरकर बनती कचोरी,  तली जाती तभी बनती  क्रिस्पी क्रिस्पी खस्ता कचोरी । एक होती  राज कचोरी  सेव दही चटनी के साथ कचोरी  बहुत बड़ी तो राज कचोरा  कोई... आगे पढ़े

देशभक्त

Updated on 13 August, 2018, 9:37
/ शोभा रानी तिवारी जन्म से मृत्यु तक मैं फर्ज निभा ऊंगा अपना जीवन मां को अर्पण कर जाऊंगा मां तुम ना रोना, उदास ना होना विश्वास तुम रखना ,मैं फिर से आऊंगा   जो वीर वतन पर ,शहीद हो गए आंचल छोड़ मां की गोद में सो गए खून के कतरे कतरे से इतिहास जो... आगे पढ़े

नारी जीवन

Updated on 13 August, 2018, 8:59
 /मनोरमा जोशी सहे जुल्म जिसने सदियों से अब तक, उनको उबारो यह जी चाहता है । करते रहे आदिशक्ति की पूजा मगर मातृशक्ति कुंठित हो रही है। हुआ मान जिनका नहीं भूलकर भी, वही आज व्याकुल विवश हो रही है । तड़पती तिरस्कृत है आज ममता, उसे अपनाने को जी चाहता है । दुर्गा लक्ष्मी अहिल्या सीता सावित्री मीरा अनसुइया गार्गी मैयत्री सारंगा... आगे पढ़े

‘मैं’

Updated on 8 August, 2018, 9:23
/ किरण यादव सड़क के किनारे बंजर बियाबान में गहन अधंकार में सपनों की चादर ओढ़े सोया ना जाने कितनी रातें घेरते उदासी के बादल जहाँ मैं मापता धरती आकाश की गहराई को धुँधला गई है मन की रोशनी ओर चमकते तारों के मध्य मैं लुप्त हो गया हूँ जहाँ ढूँढने लगता हूँ , मैं अपना घर जो कही... आगे पढ़े

बगिया

Updated on 8 August, 2018, 8:54
/मीनू मांणक हाँ ये बगिया है । यहाँ बहार है , पतझड़ भी आते हैं ।। धूप - छाँव साथ चलते हैं । सुख-दुख  साथ रहते हैं ।।   बाबूल का अंगना छोड़ गोरी सपने संजोए आती है । बन कर बहू दुखों को सहती भीगी पलके लिये होंठों को सी लेती है ।।   वृद्ध आश्रम में ये बुजुर्ग सास खून... आगे पढ़े

मित्रों को समर्पित दोहे

Updated on 6 August, 2018, 1:21
 /रश्मि सक्सेना कृष्ण-सुदामा की यहाँ , देते सभी मिसाल । लेकिन वैसी मित्रता , अब है एक कमाल ।।    बिना झिझक हम बोल दें , जिनसे मन की बात । मित्र ज़िंदगी के लिए , होते वो सौग़ात ।।   दुख को हर कर आपके , सुख जो करते सेंड । होते हैं सच्चे वही , इस... आगे पढ़े

मन विचलित

Updated on 30 July, 2018, 13:34
कभी कभी मन बड़ा विचलित होता हैं हरपल अच्छा सा नहीं लगता हैं  शरीर के संचालित मन मस्तिक मैं विचारों की गंगा का प्रवाह तेज़ हो जाता हैं इधर उधर हम भटकते से लगते हैं स्थिरता की नाव डगमगाती है कोशिशों की सीमा बिखर जाती है  कुछ ही पल मैं बहुत कुछ हो जाएगा  अरे इंसान ,ठहर जा... आगे पढ़े