Wednesday, 14 November 2018, 6:11 AM

लघु कथा

रीते प्रेम की व्यथा ढो रहा गुसाईं

Updated on 2 November, 2018, 9:33
किरन सिंह/ शेखर जोशी की बहुत प्रसिद्ध कहानी है : कोसी का घटवार। इसका नायक गुसाईं रीते प्रेम की व्यथा अकेला ढो रहा है। पूर्व में फौजी रहा गुसाईं अपने ही पडोस के गांव की लछमा से प्रेम करता है । फौज से छुट्टी आता है तो युवाओं में तिरछी टोपी... आगे पढ़े

नमक का मोल

Updated on 27 September, 2018, 9:25
शैल चंद्रा टीवी पर एक नामचीन ब्रांड के नमक का विज्ञापन आ रहा था। कोई एक्टर कह रहा था, ‘आयोडीन, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर यही है असली नमक की पहचान। यही नमक खाइये। एक किलो नमक का मूल्य मात्र सौ रुपए।’ यह विज्ञापन देख रहे दादा जी उस ब्रांडेड नमक का... आगे पढ़े

भेदभाव

Updated on 19 September, 2018, 9:25
/आशा जाकड़ रिजल्ट निकलने का दिन था ।मिसेज गुप्ता खुश होकर छात्रों को रिजल्ट दे रही थी और उनके अच्छे अंक आने पर बधाई दे रही थी। तभी छात्र यूसुफ ने अपना रिपोर्ट कार्ड मांगा ।मिसेज गुप्ता ने कहा तुम्हारे पेरेंट्स नहीं आए ,यूसुफ यह कार्ड तो  पेरेंट्स को ही मैग्जीन... आगे पढ़े

मैं शर्मिंदा हूं

Updated on 16 September, 2018, 2:07
/ हरिन्दर सिंह गोगना संजू पढ़ाई में होशियार था मगर इस बार हुए यूनिट टेस्ट में उसके कम नंबर देख कर पापा को हैरानी हुई। यही नहीं अब वह पहले की तरह दिल लगा कर पढ़ता भी नहीं था। बात बात पर फिल्मी कलाकारों की बातें करता। अब तो वह पापा... आगे पढ़े

खुशी

Updated on 29 August, 2018, 7:50
 /-श्याम यादव अन्तिम संस्कार का सामान बेचने वाला कलवा आज बड़ा खुश था। वह आज खुद के लिए अंग्रेजी शराब की बोतल और गोश्त, बिटिया के लिए खिलौना और पत्नी के लिए साड़ी खरीद कर घर पहुंचा और पत्नी को आवाज़ लगाई । पत्नी ने इतना सामान देख कर पूछ लिया आज... आगे पढ़े

अंकुर की छतरी

Updated on 21 August, 2018, 8:21
अंकुर छठी कक्षा में पढ़ता था । उसके पिता कुम्हार का काम करते थे और मां घरों में झाड़ू-पौंछा करती थी । इस प्रकार उनके घर का गुजारा चलता। कभी-कभी जब पिता की बिक्री नहीं होती थी तो उन्हें बिना खाए भी रहना पड़ता था। अंकुर को पढ़ने का बहुत... आगे पढ़े

कप्पो की नई राह

Updated on 3 August, 2018, 9:45
वंदना पुणतांबेकर    "उठ जा कप्पो...,"बापू के साथ हाट में जाकर अपने पंसद का खिलौना ले आ,।अम्माँ की आवाज ने कप्पो की नींद खोल दी। कप्पो अभी महज छह साल की थी।आज उसका जन्मदिन था।होली के एक दिन पहले आता तो अम्माँ को हमेशा याद रहता।कप्पो बापू के साथ हाट से... आगे पढ़े

शादी से पहले तलाक

Updated on 22 July, 2018, 11:52
/ के. एल दीवान मैं ऑटो रिक्शा स्टैंड पर खड़ा था। आगरा बस स्टैंड जाना था मुझे। इन्तज़ार था कुछ और सवारियों का। तभी वहां एक युवक और युवती आते हैं। युवती ऑटो वाले से कहती है, आगरा बस स्टैंड फुल ऑटो। तभी युवक कहता है,’ देखो शिमला चलेंगे, मंदिर में... आगे पढ़े

सलाम

Updated on 17 July, 2018, 9:28
/ वन्दना पुणतांबेकर बारह साल का छोटू अपनी माँ का इकलौता बेटा था।हमेशा से गरीबी ,भुखमरी औऱ ज़िल्लत की जिंदगी जी रहा था। झुग्गी- झोपड़ी में उनका जीवन बीत रहा था।जब से आँख खोली कभी पिता को नहीं देखा ।जब भी माँ से पूछता ,तो उनके नाम पर माँ दो,चार गालियां सुना... आगे पढ़े

संस्कार

Updated on 14 July, 2018, 15:01
मीना गोदरे “अवनि”  उस दिन स्कूल में रिजल्ट की घोषणा हुई बेटी हर बार की तरह फिर स्कूल में प्रथम आई , हम सब बहुत खुश थे कल मार्कशीट लेने जाने लगी तो मैंने कहा-- 'मार्कशीट लेकर तुम अपनी टीचर के चरण स्पर्श कर लेना '               'माम्मा वहां कोई पैर नहीं... आगे पढ़े

पवित्र प्रेम

Updated on 14 July, 2018, 14:52
/ मीनू मांणक अंजु और शेखर एक ही मौहल्ले में रहते थे ।एक दिन अंजु की माँ ने शेखर से कहा--बेटा हमारी अंजु को गणित समझा दोगे ?परीक्षा आने वाली है गणित थोड़ा कमजोर है अंजु का।        शेखर ने हाँ कर दी। अगले दिन से शेखर अंजु को पढ़ाने लगा।अंजु... आगे पढ़े

दो पहलू

Updated on 14 July, 2018, 14:30
दो पहलू    /अंजू निगम  1) बेटा बीमार है उसकी हालत नाजुक  है|बाप डाक्टर के पैरों पर गिर जाता है|अपने इकलौते बेटे को बचा लेने की भीख माँगता है।डॉक्टर इलाज का खर्च ३ लाख बताते हैं।"डॉक्टर साब,आप इलाज शुरु करें,मैं दो दिन में कहीं से भी पैसों का इंतजाम करता हूँ|"    सब तरफ... आगे पढ़े

माँ की सीख

Updated on 10 July, 2018, 9:19
मंजू गुप्ता, नवी मुंबई   डोली में विदा होते हुए आधुनिकता में रंगी  बेटी माँ से गले मिलकर यूँ बोली -  " माँ  ! इन कीमती आंसुओं को छलका कर  दुखी न हो .मैं तो 21 वीं सदी में पली - बढ़ी हुई हूँ . तेरे ही संस्कारों का प्रतिरूप  हूँ . " माँ ... आगे पढ़े

नदी और माँ ..

Updated on 28 June, 2018, 11:56
प्रियंका बाजपेयी  ‘अद्वैता’  मुनिया आज पूरे अठ्ठारह वर्ष की हो गई... पिछले सत्रह बरस पंख लगाऐ न जाने कहाँ उड़ गये । गत वर्षों में, यही तो एक जगह थी जहाँ  मुनिया बिना चूके , प्रतिदिन आया करती थी, घंटा दो घंटा इसी किनारे पर बैठ मन का सुख दुख अपनी... आगे पढ़े

कीमती पल

Updated on 19 June, 2018, 0:07
अंजू निगम  दस दिन की लंबी  अवधि बिता मैं वापस चलने को हुई|लंबी इसलिए की मेरी भरी-पूरी गृहस्थी है और उससे ज्यादा दिन विलग मेरा कही मन नहीं लगता|   जब चलने को हुई तो मौसी ने कस कर मेरा हाथ पकड़ लिया,"बिन्नी,जल्दी आना!!जाने अगली बार मिलूं,न मिलुं|"चलते समय कही ऐसी बातें... आगे पढ़े

पसीने की बूंद

Updated on 15 June, 2018, 12:18
वन्दना पुणतांबेकर जेठ का महीना तपती धूप मे मधु स्कूल से लौटकर पैदल घर जा रही थी।आज उसकी बस नहीं आई थी।उसे अपने घर के रास्ता एक किलोमीटर पैदल चलकर तय करना था। वह एक टीचर थी। रास्ते से गुजरते वक्त उसने देखा कि एक मकान बन रहा था।इतनी गर्मी में... आगे पढ़े

डर

Updated on 11 June, 2018, 16:15
    आशा जाकड़   हैलो रानू ," बच्चों की छुट्टियां कब हो रही हैं। तुम्हारे पापा तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं" ।    मम्मा बस 15 अप्रैल से छुट्टियां हो रही हैं । हम यहां से 15 को ही चलेंगे,आर्या  भी  आप सब को बहुत याद करती है । अभी तो वह खेलने गई... आगे पढ़े

नास्तिक

Updated on 7 June, 2018, 9:42
        " सुखी । चल जल्दी से नहा धोकर तैयार हो जा।आज ग्यारस है, आज तो चला चल मंदिर।"    मां की रोज रोज की ऐसी बात सुनकर सुखी हंसा, पर बोला कुछ नहीं।      मां बड़बड़ाते हुए मंदिर जाने की तैयारी करने लगी।" कितना ही बोलूं इसे,... आगे पढ़े

रोहिणी बहन का पीहर आगमन

Updated on 1 June, 2018, 9:29
सुषमा व्यास ‘राजनिधि’ गरमी भाभी ने अपनी पड़ोसन पसीना को कहा--- बहन तुमने देखा? हर साल की तरह ये रोहिणी बहन फिर से अपने नवतपा भाई के यहां नौ दिन रहने आयी है। पसीना पड़ोसन बोली--- हां गरमी बहन, ये रोहिणी जब भी आती है, हम तो परेशान हो जाते हैं।इतनी तेज है कि अपनी... आगे पढ़े

गोरैया जब मुझसे मिली

Updated on 22 May, 2018, 12:03
          वन्दना पुणतांबेकर             भीषण गर्मी की दोपहर घर  में कूलर की आवाज में कुछ सुनाई नही दे रहा था।तभी डोर बेल बजी।देखा तो कोरियर वाला था।  जैसे ही में दौड़कर अंदर आने के लिए पलटी तो सामने घर की मुंडेर पर एक गोरैया बैठी थी।उसके पैर जल रहे थे।जलन से वह उचक... आगे पढ़े

तीनों बंदर खो गए

Updated on 17 May, 2018, 11:05
  बृजेश नीरज आज़ादी के समय देश में हर तरफ दंगे फैले हुए थे। गांधी जी बहुत दुखी थे। उनके दुख के दो कारण थे - एक दंगे, दूसरा उनके तीनों बंदर खो गए थे। बहुत तलाश किया लेकिन वे तीन न जाने कहां गायब हो गए थे। एक दिन सुबह अपनी... आगे पढ़े

अर्थ खोजते हुए

Updated on 13 May, 2018, 12:24
सुधाकर आशावादी महानगर के प्रमुख चौराहे पर भारी भीड़ एकत्र थी। चौराहे के बीचोंबीच बने फौव्वारे के चबूतरे पर कुछ खद्दरधारी काले बैनर और झंडे लहरा रहे थे। अधिकांश के हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां थी। भीड़ में आक्रोश था। धर्म विशेष की बालिका के साथ किसी अत्याचार को लेकर कानून... आगे पढ़े

दाल नहीं गली

Updated on 6 May, 2018, 9:45
नेहा को तेज बुखार था|विभोर देर रात तक उसके माथे की पट्टियाँ बदलता रहा|तड़के नेहा की आँख लगी तो विभोर भी सो गया|      सुबह माँ ने विभोर से दूसरे कमरे में आराम करने को कहा और खुद नेहा के पास बैठ उसके माथे की पट्टियाँ बदलने लगी|तभी पड़ोसन हाथ में... आगे पढ़े

मां का सुरक्षा घेरा

Updated on 29 April, 2018, 10:13
 कुल्लू के पास जनसुख गाँवआसपास प्रकृति का सौंदर्य बिखरा हुआ|जंगल असीम विस्तार लिये|       गाँव से जरा हट कर कच्ची ईटों का छोटा सा घर|छत पर टिन की चादर टिकी हूई|दीमा अपनी बेटी और बापू के साथ यही रहती है|कहाँ से आई,इसका कोई ठिकाना नहीं|माँग भर-भर तो सिदूंर  डाले है, पर... आगे पढ़े

मुफ्त की कीमत ...

Updated on 22 April, 2018, 12:52
मां! बिग सेल लगी है… एक के साथ एक फ्री… चलो न! लेखा ने जिद की।’ ‘दुनिया में कोई भी चीज मुफ्त नहीं मिलती… और जो मुफ्त मिलती है, उसकी एक दिन बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।’ मां ने उसे टाल दिया था। आज बरसों बाद अपने आप को इस मुकाम पर... आगे पढ़े

|पैसों की नहीं अपनों की कमी है

Updated on 18 April, 2018, 10:30
सो गयी क्या"?सरदारजी बोले|   "नहीं!!इस उम्र में नींद बैरन होगी|जल्द आती भी नहीं |"बीबी बोली|"आपको भी नींद नहीं आयी"     "कोशिश कर रहा हूँ|"     "आज ठंड लगता ज्यादा है|आपको भी लग रही"|   "नहीं तो!!!रोज जैसी है|कहो तो पंखा कम कर दूँ|"   आप लेटो|मैं कर देती हूँ कम|आपके भी तो घुटने चटकते हैं|"  ... आगे पढ़े

दो लघु कथाएं

Updated on 15 April, 2018, 14:10
 मां ‘मां, हम दोनों ने फैसला कर लिया है कि हमारा बच्चा किसी और की कोख से पैदा होगा ।’ ‘क्या कह रही हो, पागल तो नहीं हो गई? तुम्हारा बच्चा किसी और की कोख से ?’ ‘मां, हम किराये की कोख का इंतज़ाम कर रहे हैं।’ ‘…पर लोग क्या कहेंगे?’ ‘लोगों को कह दूंगी,... आगे पढ़े

बीमार बच्चा

Updated on 10 April, 2018, 0:08
/ बेला जैन                                    छः महीने से मेरा बच्चा बहुत बीमार था। मैं और मेरी पत्नी सभी सरकारी अस्पतालों में बच्चे को लेकर इलाज के लिये घूम चुके थे। पर सभी सरकारी अस्पतालों के डाक्टरों ने मुझे कहा कि आप अपने बच्चे को किसी अच्छे प्रायवेट अस्पताल में दिखाईयें जहां इलाज... आगे पढ़े

ऊँचाई

Updated on 9 April, 2018, 1:26
           ..रामेश्वर काम्बोज "हिमांशु" पिताजी के अचानक आ धमकने से पत्नी तमतमा उठी, "लगता है बूढ़े को पैसों की ज़रूरत आ पड़ी है, वर्ना यहाँ कौन आने वाला था। अपने पेट का गड्‌ढा भरता नहीं, घर वालों का कुआँ कहाँ से भरोगे?" मैं नज़रें बचाकर दूसरी ओर देखने लगा। पिताजी नल पर... आगे पढ़े