Thursday, 20 February 2020, 6:23 PM

लघु कथा

सतरंगी मन

Updated on 13 February, 2020, 0:58
आरती चित्तौड़ा  हैलो मां - आज थोड़ा  जल्दी  घर  आऊंगा। आप नेहा को  कहे वो  तैयार  रहे। हां  बेटा  बोल देती हूँ।  मां- नेहा  लकी का फोन आया था। तैयार  हो जा वो तुझे लेकर कहीं  जाने  वाला है। इतना सुनते ही नेहा का मन खिल उठा। कई महीनों के बाद लकी... आगे पढ़े

इंसानियत

Updated on 13 February, 2020, 0:51
 शोभा रानी तिवारी  हम अपनी कार से ग्वालियर जा रहे थे रास्ते में कार खराब हो गई उस समय रात के 9:00 बजे थे। ड्राइवर ने कहा कि अभी कुछ नहीं हो सकता, कल ही गाड़ी सुधरेगी ।अब हम क्या करें? हमारे साथ दो बच्चे थे। रात का समय तो काटना... आगे पढ़े

माता- पिता की अपेक्षा

Updated on 13 February, 2020, 0:48
आशा जाकड़ 97549694 आज माता- पिता जी जान से मेहनत करके अपने बच्चों का लालनपालन करते हैं। आज विज्ञान ने जितनी सुविधाएं दी हैं, उतना ही माँ -बाप का जीवन  जटिल  हो गया है  क्योंकि हर माता पिता अपने बच्चों को सुविधाएं देने  के लिए बेइन्तहां मेहनत करते हैं कि बच्चों का... आगे पढ़े

अफसोस

Updated on 24 January, 2020, 1:47
कुमुद दुबे    भोपाल से विदिशा के बीच ट्रेन से पहुंचने की एक घंटे की दूरी श्वेता के लिये आज घंटों में बदल गई थी। ट्रेन आधे रास्ते में रुकी हुई थी। शायद आगे कोई एक्सीडेन्ट हुआ है, कूपे में बैठे लोग ऐसी चर्चा कर रहे थे। दिसम्बर की सर्द रात, अंधेरा... आगे पढ़े

शुभ-शगुन

Updated on 13 January, 2020, 0:34
अर्चना  मंडलोई…… बरसों की तपस्या आज फलीभूत होने जा रही थी । दस वर्ष का पीयूष और पलक तो उससे भी छोटी पाँच वर्ष की ही थी ।तब एक कार एक्सीडेंट में पति चल बसे थे। पैंतालिस साल की उम्र में वैधव्य । कठिन संघर्षों के वे दिन उसकी आँखों में चलचित्र... आगे पढ़े

नानाजी का इनाम

Updated on 27 December, 2019, 22:39
वन्दना यादव मम्मी से ओट बनाकर नानाजी हम भाई-बहनों से गुफ्तगू कर रहे थे। मम्मी कनखियों से हमारी ओर देख भर लेती। कुछ समय बाद एकांत पाकर मम्मी ने उत्सुकता की पोटली खोली, ‘सबसे अलग बैठकर नाना से क्या बातें हो रही थी?’ भाई-बहनों में बड़ी होने के कारण उत्तर मुझे... आगे पढ़े

समीक्षा- * सिलवटें * लघुकथा संकलन

Updated on 14 December, 2019, 0:13
                 समीक्षक - वन्दना पुणतांबेकर      विचारों का महकता गुलदस्ता                         सिलवटें जब मेरे हाथ में आई तो इतनी आकर्षक लगी कि शब्दों में कहना असम्भव है।इतनी सारी लेखिकाओं का लेखन सृजन देखकर मन की भवनाएं भावविभोर हो गई।कई रंगों के विचारों का एक महकता गुलदस्ता हाथों में थामे में महक... आगे पढ़े

सपना

Updated on 16 November, 2019, 0:13
आरती चित्तौड़ा (जयपुर) सर्द रात में हवा अपनी रफ्तार से चल रही थी। सभी ने अपनी हैसियत के मुताबिक गर्म कपड़े पहन रखे थे। बाजार में रौनक आम दिनों की तरह थी। गरम  गरम  दूध जलेबी, गाजर का हलवा, गराडू, मूंगफली और  कढाई में ऊबलता दूध ये सब चीजें देखकर खाने को... आगे पढ़े

मानव-मूल्य

Updated on 16 November, 2019, 0:03
डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी (उदयपुर) वह चित्रकार अपनी सर्वश्रेष्ठ कृति को निहार रहा था। चित्र में गांधीजी के तीनों बंदरों  को विकासवाद के सिद्दांत के अनुसार बढ़ते क्रम में मानव बनाकर दिखाया गया था।उसके एक मित्र ने कक्ष में प्रवेश किया और चित्रकार को उस चित्र को निहारते देख उत्सुकता से... आगे पढ़े

बेटी बचाओ

Updated on 10 November, 2019, 23:11
अदिति सिंह भदौरिया  जैसे ही मालिनी जी ने मंच पर कदम रखा तभी तालियों की गूँज ने उनका स्वागत किया ओर होता भी क्यों न आखिर वो शहर कि सम्मानित समाज सेविका थी ओर आज का विषय भी संवेदनशील था( बेटी बताओ) उनके भाषण एवं उनके कार्य लोगों को जीवन की... आगे पढ़े

बरकत

Updated on 10 November, 2019, 23:05
 पिंकी तिवारी रियांश अब पूरे पाँच साल का हो गया था । घर में सबका लाडला और बहुत नटखट ।कभी दीवारों पर अपनी कलाकारी दिखाता तो कभी सोफे के हैंडल पर चढ़कर टीवी देखता ।इस बार तो रियांश की मम्मी को उसके जन्मदिन पर तोहफे के रूप में एक सलाह भी... आगे पढ़े

"आडम्बर "

Updated on 1 October, 2019, 23:51
आशा जाकड़ (9754969496) "अजी सुनिए ,मम्मी की फोटो  बड़ी करवा दीजिए  ,मुझे  ड्राइंग  रूम में  लगाना है और चंदन की बड़ी माला भी ले आना।" "हां - हां  करवा दूंगा ।"कहकर दिलीप सीढियां  उतरने लगा और सोचने लगा कि  जबतक मां जीवित रही तब तक कभी मां से ढंग से बातचीत नहीं ... आगे पढ़े

पीढ़ी

Updated on 31 August, 2019, 0:32
अंजू निगम/ ट्रेन रफ्तार पकड़ चुकी थी| सुधा और रमेश कानपुर से कलकत्ता जा रहे थे| सुधा समान जमाने लगी| तभी सामने वाली बर्थ में एक नयी उमर का लड़का आ कर बैठ गया| कपड़े और शक्ल तो बता रहे थे कि किसी अच्छे घर की पैदाइश थी पर फैशन... आगे पढ़े

कमाई

Updated on 21 August, 2019, 19:42
अर्चना मंडलोई तालियों की गड़गड़ाहट शांत होते ही अध्यक्ष महोदय मुस्कुराते हुए विजयी मुद्रा में मंच पर पुन:अपने स्थान पर विराजित हो गये। साथी मेहमानों ने भी भ्रष्टाचार को लेकर उनके उत्तेजक भाषण की भूरी-भूरी प्रशंसा की ।चाय काॅफी के दौर के साथ अध्यक्ष महोदय ने बातों ही बातों में ठहाका लगाते... आगे पढ़े

पेड के फल

Updated on 10 August, 2019, 12:23
डा अंजुल कंसल"कनुप्रिया " "भाई दीनानाथ जी आप चार फीट जगह का मकान आगे बढाने में इस्तेमाल कर रहे,हैं क्या? यह तो सरकारी जमीन है।सड़क बनाने के लिए छोडी जाती है।"    "वह तो ठीक है,ये जगह बेकार पडी है सोचा घर थोडा बडा कर लूं।बहू भी आ गई है आगे परिवार... आगे पढ़े

''मलीनता की परत''

Updated on 10 August, 2019, 12:13
कुमुद दुबे..     उर्वशी को आज घर पहुंचने की जल्दी थी इसलिये  ऑफिस  का काम जल्दी खत्म किया और  बस पकडी। वह फुर्सत में विचार की माला गूंथ रही थी अच्छा हुआ समय पर बस मिल गई वर्ना फिर आधा घंटा इंतजार करना पड़ता। घर पहुंचने में और देर होती। एक... आगे पढ़े

नवासे का मोह

Updated on 17 July, 2019, 11:15
डा` अंजुल कंसल"कनुप्रिया " रघु और रानी अपनी बेटी से मिलने उसके  शहर जा रहे थे क्योंकि उनकी बेटीआरती के बेटा हुआ था।उनके पास सामान्य डिब्बे का टिकट था लेकिन  अत्यधिक भीड के कारण वे जनरल डिब्बे में चढ नहीं पाए ,अतः आरक्षित डिब्बे में ही बैठ गए।इतने में टी टी... आगे पढ़े

कुँआ

Updated on 25 June, 2019, 8:08
 वंदना पुणतांबेकर  जन्मदिन का जश्न मनाया जा रहा था।कम्मो आज सुबह से ही मालकिन के यहाँ काम कर रही थी। सात साल बाद उनके घर एक बेटी के रूप में लक्ष्मी आई थी।कम्मो अपनी दुधमुँही बेटी को घर  छोड़कर आई थी। रामदीन तो उसी दिन से चिढ़ा बैठा था जिस दिन... आगे पढ़े

"सकोरा"

Updated on 12 June, 2019, 8:24
पिंकी तिवारी  ये सकोरा क्या होता है माँ ?" मुन्ना ने आरती से पूछा । "कुछ नहीं" - आरती ने टालते हुए कहा।  "बताओ ना माँ " मुन्ना ने फिर पूछा । "कुछ नहीं । मिट्टी का एक कटोरीनुमा बड़ा बर्तन होता है जिसमे हम पक्षियों के लिए पानी भर कर रखते है, खासकर... आगे पढ़े

पानी

Updated on 5 June, 2019, 10:22
 //अविनाश अग्निहोत्री परिवार के साथ गर्मियों में राजस्थान  घूमने गए राजेश को वहां बड़े ही कटु अनुभव हुए।उस प्रदेश की सीमा लगते ही कब उनकी बोतलों के शुद्ध मीठे पानी की जगह नलकूप के मटमैले खारे पानी ने लेली,उन्हें पता भी नही चला।गर्मी की इस तपती धूप में नंगे पैर कई... आगे पढ़े

सीख

Updated on 31 May, 2019, 8:02
अविनाश अग्निहोत्री आज बिट्टू को कुछ नया सिखाने की गरज से,पढ़ाने बैठी ही थी कि मोबाईल पर छोटी बहन का नम्बर फ्लैश हुआ।उठाते ही वो मुझसे मुस्कुराकर बोली ,ओर क्या मज़े ले रही है।मैंने कहा क्या मजे बस सारा दिन  वही रूटीन है।ऐसा लगता है जैसे पिछले कुछ सालों से खुशी... आगे पढ़े

दुःखद सेल्फी

Updated on 30 May, 2019, 9:13
  वंदना पुणतांबेकर इस साल काव्या ने नाइंथ क्लास की परीक्षा पास की थी। पापा से पास होने की खुशी में मोबाइल की मांग कर उठी। अपनी प्यारी बच्ची को अच्छे नंबरों से पास होने पर।मां प्यार से बोली....,"ले दो इसको भी एक मोबाइल आजकल तो सभी के पास होते हैं,अब... आगे पढ़े

आँचल और आस का कपड़ा

Updated on 27 May, 2019, 10:19
पिंकी तिवारी / "माँ, ये साड़ी बहुत सुन्दर लग रही है, हल्का गुलाबी रंग बहुत पसंद है मुझे । कहाँ से ली अपने? वैसे ज़्यादा महँगी नहीं लग रही है ।" एक ही साँस में आरती ने मायके आते ही सवालों की झड़ी लगा दी । "ये तेरी नानी जी की... आगे पढ़े

सदमा

Updated on 21 May, 2019, 11:33
अविनाश अग्निहोत्री / जल्दी अमीर बनने के चक्कर मे अशोकबाबू के बेटे को शेयर बाजार में बड़ा घाटा हो चुका था।जिसे पाटने में वो अपना पुश्तेनी घर भी गिरवी रख चुका था।घर पहुँचे कर्जदारों से ,यह बात जब अशोकबाबू को पता चली तो वह स्वाभिमानी व्यक्ति बेचैन हो उठे। अपने बेटे... आगे पढ़े

मां के लिये

Updated on 16 May, 2019, 11:56
/ सरोज गुप्ता संध्या के दोनों बच्चे बेहद उत्साहित हो रहे थे क्योंकि अगले इतवार को ही मदर्स-डे आ रहा था। चिंटू और प्रिया मिलकर आपस में योजना बना रहे थे कि इस दिन को कैसे मनाया जाए। अभी चार-पांच दिन का समय था। दोनों ने अपने हाथों से एक सुंदर-सा... आगे पढ़े

डॉ चंद्रा सायता की लघु कथाएं

Updated on 11 April, 2019, 10:38
तलाक  तलाक  तलाक। जबसे झूठ की मुलाकात दौलत से हुई थी, एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। पसंद दोस्ती में और दोस्ती निकाह में तब्दील हो गई। दोनो इंसान के जेहन में घर बनाकर रहने लगे। एक दिन झूठ कानून की गिरफ्त में आ फंसा। बुरी तरह जकड़ा जा चुका था। उसके पास अब... आगे पढ़े

ब्लड ग्रुप

Updated on 26 February, 2019, 0:30
             /वंदना पुणतांबेकर रोहित दौड़ता हुआ हॉस्पिटल पहुंचा।नेहा का दिल दहला देने वाला एक्सीडेंट हो गया था।इमरजेंसी में ब्लड डोनर की आवश्यकता थी।रोहित ने सभी ग्रुप पर डाल दिया था।लेकिन अभी तक उसे कोई नही मिला था।वह बैचेनी से किसी न किसी के फ़ोन का इंतजार... आगे पढ़े

अकेला चना..

Updated on 20 February, 2019, 12:10
        अंजू निगम "माँ चार दिन से मेरी एक जुराब और चप्पले नहीं मिल रहीं|" सुबह बेटे ने जब कहा तो मैंने भी बेटे को आड़े हाथो लिया," बेटे जी, आप भी तो घर को कबूतर खाना समझते हैं| आये सामान फेंका और पसर गये बिस्तर पर| मन हुआ तो खाया... आगे पढ़े

अकेला चना...........

Updated on 27 January, 2019, 21:12
 अंजू निगम "माँ चार दिन से मेरी एक जुराब और चप्पले नहीं मिल रही|" सुबह बेटे ने जब कहा तो मैंने भी बेटे को आढ़े हाथो लिया," बेटे जी, आप भी तो घर को कबूतर खाना समझते हैं| आये सामान फेंका और पसर गये बिस्तर पर| मन हुआ तो खाया घर... आगे पढ़े

रीते प्रेम की व्यथा ढो रहा गुसाईं

Updated on 2 November, 2018, 9:33
किरन सिंह/ शेखर जोशी की बहुत प्रसिद्ध कहानी है : कोसी का घटवार। इसका नायक गुसाईं रीते प्रेम की व्यथा अकेला ढो रहा है। पूर्व में फौजी रहा गुसाईं अपने ही पडोस के गांव की लछमा से प्रेम करता है । फौज से छुट्टी आता है तो युवाओं में तिरछी टोपी... आगे पढ़े