Sunday, 21 July 2019, 1:48 AM

लघु कथा

नवासे का मोह

Updated on 17 July, 2019, 11:15
डा` अंजुल कंसल"कनुप्रिया " रघु और रानी अपनी बेटी से मिलने उसके  शहर जा रहे थे क्योंकि उनकी बेटीआरती के बेटा हुआ था।उनके पास सामान्य डिब्बे का टिकट था लेकिन  अत्यधिक भीड के कारण वे जनरल डिब्बे में चढ नहीं पाए ,अतः आरक्षित डिब्बे में ही बैठ गए।इतने में टी टी... आगे पढ़े

कुँआ

Updated on 25 June, 2019, 8:08
 वंदना पुणतांबेकर  जन्मदिन का जश्न मनाया जा रहा था।कम्मो आज सुबह से ही मालकिन के यहाँ काम कर रही थी। सात साल बाद उनके घर एक बेटी के रूप में लक्ष्मी आई थी।कम्मो अपनी दुधमुँही बेटी को घर  छोड़कर आई थी। रामदीन तो उसी दिन से चिढ़ा बैठा था जिस दिन... आगे पढ़े

"सकोरा"

Updated on 12 June, 2019, 8:24
पिंकी तिवारी  ये सकोरा क्या होता है माँ ?" मुन्ना ने आरती से पूछा । "कुछ नहीं" - आरती ने टालते हुए कहा।  "बताओ ना माँ " मुन्ना ने फिर पूछा । "कुछ नहीं । मिट्टी का एक कटोरीनुमा बड़ा बर्तन होता है जिसमे हम पक्षियों के लिए पानी भर कर रखते है, खासकर... आगे पढ़े

पानी

Updated on 5 June, 2019, 10:22
 //अविनाश अग्निहोत्री परिवार के साथ गर्मियों में राजस्थान  घूमने गए राजेश को वहां बड़े ही कटु अनुभव हुए।उस प्रदेश की सीमा लगते ही कब उनकी बोतलों के शुद्ध मीठे पानी की जगह नलकूप के मटमैले खारे पानी ने लेली,उन्हें पता भी नही चला।गर्मी की इस तपती धूप में नंगे पैर कई... आगे पढ़े

सीख

Updated on 31 May, 2019, 8:02
अविनाश अग्निहोत्री आज बिट्टू को कुछ नया सिखाने की गरज से,पढ़ाने बैठी ही थी कि मोबाईल पर छोटी बहन का नम्बर फ्लैश हुआ।उठाते ही वो मुझसे मुस्कुराकर बोली ,ओर क्या मज़े ले रही है।मैंने कहा क्या मजे बस सारा दिन  वही रूटीन है।ऐसा लगता है जैसे पिछले कुछ सालों से खुशी... आगे पढ़े

दुःखद सेल्फी

Updated on 30 May, 2019, 9:13
  वंदना पुणतांबेकर इस साल काव्या ने नाइंथ क्लास की परीक्षा पास की थी। पापा से पास होने की खुशी में मोबाइल की मांग कर उठी। अपनी प्यारी बच्ची को अच्छे नंबरों से पास होने पर।मां प्यार से बोली....,"ले दो इसको भी एक मोबाइल आजकल तो सभी के पास होते हैं,अब... आगे पढ़े

आँचल और आस का कपड़ा

Updated on 27 May, 2019, 10:19
पिंकी तिवारी / "माँ, ये साड़ी बहुत सुन्दर लग रही है, हल्का गुलाबी रंग बहुत पसंद है मुझे । कहाँ से ली अपने? वैसे ज़्यादा महँगी नहीं लग रही है ।" एक ही साँस में आरती ने मायके आते ही सवालों की झड़ी लगा दी । "ये तेरी नानी जी की... आगे पढ़े

सदमा

Updated on 21 May, 2019, 11:33
अविनाश अग्निहोत्री / जल्दी अमीर बनने के चक्कर मे अशोकबाबू के बेटे को शेयर बाजार में बड़ा घाटा हो चुका था।जिसे पाटने में वो अपना पुश्तेनी घर भी गिरवी रख चुका था।घर पहुँचे कर्जदारों से ,यह बात जब अशोकबाबू को पता चली तो वह स्वाभिमानी व्यक्ति बेचैन हो उठे। अपने बेटे... आगे पढ़े

मां के लिये

Updated on 16 May, 2019, 11:56
/ सरोज गुप्ता संध्या के दोनों बच्चे बेहद उत्साहित हो रहे थे क्योंकि अगले इतवार को ही मदर्स-डे आ रहा था। चिंटू और प्रिया मिलकर आपस में योजना बना रहे थे कि इस दिन को कैसे मनाया जाए। अभी चार-पांच दिन का समय था। दोनों ने अपने हाथों से एक सुंदर-सा... आगे पढ़े

डॉ चंद्रा सायता की लघु कथाएं

Updated on 11 April, 2019, 10:38
तलाक  तलाक  तलाक। जबसे झूठ की मुलाकात दौलत से हुई थी, एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। पसंद दोस्ती में और दोस्ती निकाह में तब्दील हो गई। दोनो इंसान के जेहन में घर बनाकर रहने लगे। एक दिन झूठ कानून की गिरफ्त में आ फंसा। बुरी तरह जकड़ा जा चुका था। उसके पास अब... आगे पढ़े

ब्लड ग्रुप

Updated on 26 February, 2019, 0:30
             /वंदना पुणतांबेकर रोहित दौड़ता हुआ हॉस्पिटल पहुंचा।नेहा का दिल दहला देने वाला एक्सीडेंट हो गया था।इमरजेंसी में ब्लड डोनर की आवश्यकता थी।रोहित ने सभी ग्रुप पर डाल दिया था।लेकिन अभी तक उसे कोई नही मिला था।वह बैचेनी से किसी न किसी के फ़ोन का इंतजार... आगे पढ़े

अकेला चना..

Updated on 20 February, 2019, 12:10
        अंजू निगम "माँ चार दिन से मेरी एक जुराब और चप्पले नहीं मिल रहीं|" सुबह बेटे ने जब कहा तो मैंने भी बेटे को आड़े हाथो लिया," बेटे जी, आप भी तो घर को कबूतर खाना समझते हैं| आये सामान फेंका और पसर गये बिस्तर पर| मन हुआ तो खाया... आगे पढ़े

अकेला चना...........

Updated on 27 January, 2019, 21:12
 अंजू निगम "माँ चार दिन से मेरी एक जुराब और चप्पले नहीं मिल रही|" सुबह बेटे ने जब कहा तो मैंने भी बेटे को आढ़े हाथो लिया," बेटे जी, आप भी तो घर को कबूतर खाना समझते हैं| आये सामान फेंका और पसर गये बिस्तर पर| मन हुआ तो खाया घर... आगे पढ़े

रीते प्रेम की व्यथा ढो रहा गुसाईं

Updated on 2 November, 2018, 9:33
किरन सिंह/ शेखर जोशी की बहुत प्रसिद्ध कहानी है : कोसी का घटवार। इसका नायक गुसाईं रीते प्रेम की व्यथा अकेला ढो रहा है। पूर्व में फौजी रहा गुसाईं अपने ही पडोस के गांव की लछमा से प्रेम करता है । फौज से छुट्टी आता है तो युवाओं में तिरछी टोपी... आगे पढ़े

नमक का मोल

Updated on 27 September, 2018, 9:25
शैल चंद्रा टीवी पर एक नामचीन ब्रांड के नमक का विज्ञापन आ रहा था। कोई एक्टर कह रहा था, ‘आयोडीन, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर यही है असली नमक की पहचान। यही नमक खाइये। एक किलो नमक का मूल्य मात्र सौ रुपए।’ यह विज्ञापन देख रहे दादा जी उस ब्रांडेड नमक का... आगे पढ़े

भेदभाव

Updated on 19 September, 2018, 9:25
/आशा जाकड़ रिजल्ट निकलने का दिन था ।मिसेज गुप्ता खुश होकर छात्रों को रिजल्ट दे रही थी और उनके अच्छे अंक आने पर बधाई दे रही थी। तभी छात्र यूसुफ ने अपना रिपोर्ट कार्ड मांगा ।मिसेज गुप्ता ने कहा तुम्हारे पेरेंट्स नहीं आए ,यूसुफ यह कार्ड तो  पेरेंट्स को ही मैग्जीन... आगे पढ़े

मैं शर्मिंदा हूं

Updated on 16 September, 2018, 2:07
/ हरिन्दर सिंह गोगना संजू पढ़ाई में होशियार था मगर इस बार हुए यूनिट टेस्ट में उसके कम नंबर देख कर पापा को हैरानी हुई। यही नहीं अब वह पहले की तरह दिल लगा कर पढ़ता भी नहीं था। बात बात पर फिल्मी कलाकारों की बातें करता। अब तो वह पापा... आगे पढ़े

खुशी

Updated on 29 August, 2018, 7:50
 /-श्याम यादव अन्तिम संस्कार का सामान बेचने वाला कलवा आज बड़ा खुश था। वह आज खुद के लिए अंग्रेजी शराब की बोतल और गोश्त, बिटिया के लिए खिलौना और पत्नी के लिए साड़ी खरीद कर घर पहुंचा और पत्नी को आवाज़ लगाई । पत्नी ने इतना सामान देख कर पूछ लिया आज... आगे पढ़े

अंकुर की छतरी

Updated on 21 August, 2018, 8:21
अंकुर छठी कक्षा में पढ़ता था । उसके पिता कुम्हार का काम करते थे और मां घरों में झाड़ू-पौंछा करती थी । इस प्रकार उनके घर का गुजारा चलता। कभी-कभी जब पिता की बिक्री नहीं होती थी तो उन्हें बिना खाए भी रहना पड़ता था। अंकुर को पढ़ने का बहुत... आगे पढ़े

कप्पो की नई राह

Updated on 3 August, 2018, 9:45
वंदना पुणतांबेकर    "उठ जा कप्पो...,"बापू के साथ हाट में जाकर अपने पंसद का खिलौना ले आ,।अम्माँ की आवाज ने कप्पो की नींद खोल दी। कप्पो अभी महज छह साल की थी।आज उसका जन्मदिन था।होली के एक दिन पहले आता तो अम्माँ को हमेशा याद रहता।कप्पो बापू के साथ हाट से... आगे पढ़े

शादी से पहले तलाक

Updated on 22 July, 2018, 11:52
/ के. एल दीवान मैं ऑटो रिक्शा स्टैंड पर खड़ा था। आगरा बस स्टैंड जाना था मुझे। इन्तज़ार था कुछ और सवारियों का। तभी वहां एक युवक और युवती आते हैं। युवती ऑटो वाले से कहती है, आगरा बस स्टैंड फुल ऑटो। तभी युवक कहता है,’ देखो शिमला चलेंगे, मंदिर में... आगे पढ़े

सलाम

Updated on 17 July, 2018, 9:28
/ वन्दना पुणतांबेकर बारह साल का छोटू अपनी माँ का इकलौता बेटा था।हमेशा से गरीबी ,भुखमरी औऱ ज़िल्लत की जिंदगी जी रहा था। झुग्गी- झोपड़ी में उनका जीवन बीत रहा था।जब से आँख खोली कभी पिता को नहीं देखा ।जब भी माँ से पूछता ,तो उनके नाम पर माँ दो,चार गालियां सुना... आगे पढ़े

संस्कार

Updated on 14 July, 2018, 15:01
मीना गोदरे “अवनि”  उस दिन स्कूल में रिजल्ट की घोषणा हुई बेटी हर बार की तरह फिर स्कूल में प्रथम आई , हम सब बहुत खुश थे कल मार्कशीट लेने जाने लगी तो मैंने कहा-- 'मार्कशीट लेकर तुम अपनी टीचर के चरण स्पर्श कर लेना '               'माम्मा वहां कोई पैर नहीं... आगे पढ़े

पवित्र प्रेम

Updated on 14 July, 2018, 14:52
/ मीनू मांणक अंजु और शेखर एक ही मौहल्ले में रहते थे ।एक दिन अंजु की माँ ने शेखर से कहा--बेटा हमारी अंजु को गणित समझा दोगे ?परीक्षा आने वाली है गणित थोड़ा कमजोर है अंजु का।        शेखर ने हाँ कर दी। अगले दिन से शेखर अंजु को पढ़ाने लगा।अंजु... आगे पढ़े

दो पहलू

Updated on 14 July, 2018, 14:30
दो पहलू    /अंजू निगम  1) बेटा बीमार है उसकी हालत नाजुक  है|बाप डाक्टर के पैरों पर गिर जाता है|अपने इकलौते बेटे को बचा लेने की भीख माँगता है।डॉक्टर इलाज का खर्च ३ लाख बताते हैं।"डॉक्टर साब,आप इलाज शुरु करें,मैं दो दिन में कहीं से भी पैसों का इंतजाम करता हूँ|"    सब तरफ... आगे पढ़े

माँ की सीख

Updated on 10 July, 2018, 9:19
मंजू गुप्ता, नवी मुंबई   डोली में विदा होते हुए आधुनिकता में रंगी  बेटी माँ से गले मिलकर यूँ बोली -  " माँ  ! इन कीमती आंसुओं को छलका कर  दुखी न हो .मैं तो 21 वीं सदी में पली - बढ़ी हुई हूँ . तेरे ही संस्कारों का प्रतिरूप  हूँ . " माँ ... आगे पढ़े

नदी और माँ ..

Updated on 28 June, 2018, 11:56
प्रियंका बाजपेयी  ‘अद्वैता’  मुनिया आज पूरे अठ्ठारह वर्ष की हो गई... पिछले सत्रह बरस पंख लगाऐ न जाने कहाँ उड़ गये । गत वर्षों में, यही तो एक जगह थी जहाँ  मुनिया बिना चूके , प्रतिदिन आया करती थी, घंटा दो घंटा इसी किनारे पर बैठ मन का सुख दुख अपनी... आगे पढ़े

कीमती पल

Updated on 19 June, 2018, 0:07
अंजू निगम  दस दिन की लंबी  अवधि बिता मैं वापस चलने को हुई|लंबी इसलिए की मेरी भरी-पूरी गृहस्थी है और उससे ज्यादा दिन विलग मेरा कही मन नहीं लगता|   जब चलने को हुई तो मौसी ने कस कर मेरा हाथ पकड़ लिया,"बिन्नी,जल्दी आना!!जाने अगली बार मिलूं,न मिलुं|"चलते समय कही ऐसी बातें... आगे पढ़े

पसीने की बूंद

Updated on 15 June, 2018, 12:18
वन्दना पुणतांबेकर जेठ का महीना तपती धूप मे मधु स्कूल से लौटकर पैदल घर जा रही थी।आज उसकी बस नहीं आई थी।उसे अपने घर के रास्ता एक किलोमीटर पैदल चलकर तय करना था। वह एक टीचर थी। रास्ते से गुजरते वक्त उसने देखा कि एक मकान बन रहा था।इतनी गर्मी में... आगे पढ़े

डर

Updated on 11 June, 2018, 16:15
    आशा जाकड़   हैलो रानू ," बच्चों की छुट्टियां कब हो रही हैं। तुम्हारे पापा तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं" ।    मम्मा बस 15 अप्रैल से छुट्टियां हो रही हैं । हम यहां से 15 को ही चलेंगे,आर्या  भी  आप सब को बहुत याद करती है । अभी तो वह खेलने गई... आगे पढ़े

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