Wednesday, 20 June 2018, 5:07 AM

लघु कथा

कीमती पल

Updated on 19 June, 2018, 0:07
अंजू निगम  दस दिन की लंबी  अवधि बिता मैं वापस चलने को हुई|लंबी इसलिए की मेरी भरी-पूरी गृहस्थी है और उससे ज्यादा दिन विलग मेरा कही मन नहीं लगता|   जब चलने को हुई तो मौसी ने कस कर मेरा हाथ पकड़ लिया,"बिन्नी,जल्दी आना!!जाने अगली बार मिलूं,न मिलुं|"चलते समय कही ऐसी बातें... आगे पढ़े

पसीने की बूंद

Updated on 15 June, 2018, 12:18
वन्दना पुणतांबेकर जेठ का महीना तपती धूप मे मधु स्कूल से लौटकर पैदल घर जा रही थी।आज उसकी बस नहीं आई थी।उसे अपने घर के रास्ता एक किलोमीटर पैदल चलकर तय करना था। वह एक टीचर थी। रास्ते से गुजरते वक्त उसने देखा कि एक मकान बन रहा था।इतनी गर्मी में... आगे पढ़े

डर

Updated on 11 June, 2018, 16:15
    आशा जाकड़   हैलो रानू ," बच्चों की छुट्टियां कब हो रही हैं। तुम्हारे पापा तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं" ।    मम्मा बस 15 अप्रैल से छुट्टियां हो रही हैं । हम यहां से 15 को ही चलेंगे,आर्या  भी  आप सब को बहुत याद करती है । अभी तो वह खेलने गई... आगे पढ़े

नास्तिक

Updated on 7 June, 2018, 9:42
        " सुखी । चल जल्दी से नहा धोकर तैयार हो जा।आज ग्यारस है, आज तो चला चल मंदिर।"    मां की रोज रोज की ऐसी बात सुनकर सुखी हंसा, पर बोला कुछ नहीं।      मां बड़बड़ाते हुए मंदिर जाने की तैयारी करने लगी।" कितना ही बोलूं इसे,... आगे पढ़े

रोहिणी बहन का पीहर आगमन

Updated on 1 June, 2018, 9:29
सुषमा व्यास ‘राजनिधि’ गरमी भाभी ने अपनी पड़ोसन पसीना को कहा--- बहन तुमने देखा? हर साल की तरह ये रोहिणी बहन फिर से अपने नवतपा भाई के यहां नौ दिन रहने आयी है। पसीना पड़ोसन बोली--- हां गरमी बहन, ये रोहिणी जब भी आती है, हम तो परेशान हो जाते हैं।इतनी तेज है कि अपनी... आगे पढ़े

गोरैया जब मुझसे मिली

Updated on 22 May, 2018, 12:03
          वन्दना पुणतांबेकर             भीषण गर्मी की दोपहर घर  में कूलर की आवाज में कुछ सुनाई नही दे रहा था।तभी डोर बेल बजी।देखा तो कोरियर वाला था।  जैसे ही में दौड़कर अंदर आने के लिए पलटी तो सामने घर की मुंडेर पर एक गोरैया बैठी थी।उसके पैर जल रहे थे।जलन से वह उचक... आगे पढ़े

तीनों बंदर खो गए

Updated on 17 May, 2018, 11:05
  बृजेश नीरज आज़ादी के समय देश में हर तरफ दंगे फैले हुए थे। गांधी जी बहुत दुखी थे। उनके दुख के दो कारण थे - एक दंगे, दूसरा उनके तीनों बंदर खो गए थे। बहुत तलाश किया लेकिन वे तीन न जाने कहां गायब हो गए थे। एक दिन सुबह अपनी... आगे पढ़े

अर्थ खोजते हुए

Updated on 13 May, 2018, 12:24
सुधाकर आशावादी महानगर के प्रमुख चौराहे पर भारी भीड़ एकत्र थी। चौराहे के बीचोंबीच बने फौव्वारे के चबूतरे पर कुछ खद्दरधारी काले बैनर और झंडे लहरा रहे थे। अधिकांश के हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां थी। भीड़ में आक्रोश था। धर्म विशेष की बालिका के साथ किसी अत्याचार को लेकर कानून... आगे पढ़े

दाल नहीं गली

Updated on 6 May, 2018, 9:45
नेहा को तेज बुखार था|विभोर देर रात तक उसके माथे की पट्टियाँ बदलता रहा|तड़के नेहा की आँख लगी तो विभोर भी सो गया|      सुबह माँ ने विभोर से दूसरे कमरे में आराम करने को कहा और खुद नेहा के पास बैठ उसके माथे की पट्टियाँ बदलने लगी|तभी पड़ोसन हाथ में... आगे पढ़े

मां का सुरक्षा घेरा

Updated on 29 April, 2018, 10:13
 कुल्लू के पास जनसुख गाँवआसपास प्रकृति का सौंदर्य बिखरा हुआ|जंगल असीम विस्तार लिये|       गाँव से जरा हट कर कच्ची ईटों का छोटा सा घर|छत पर टिन की चादर टिकी हूई|दीमा अपनी बेटी और बापू के साथ यही रहती है|कहाँ से आई,इसका कोई ठिकाना नहीं|माँग भर-भर तो सिदूंर  डाले है, पर... आगे पढ़े

मुफ्त की कीमत ...

Updated on 22 April, 2018, 12:52
मां! बिग सेल लगी है… एक के साथ एक फ्री… चलो न! लेखा ने जिद की।’ ‘दुनिया में कोई भी चीज मुफ्त नहीं मिलती… और जो मुफ्त मिलती है, उसकी एक दिन बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।’ मां ने उसे टाल दिया था। आज बरसों बाद अपने आप को इस मुकाम पर... आगे पढ़े

|पैसों की नहीं अपनों की कमी है

Updated on 18 April, 2018, 10:30
सो गयी क्या"?सरदारजी बोले|   "नहीं!!इस उम्र में नींद बैरन होगी|जल्द आती भी नहीं |"बीबी बोली|"आपको भी नींद नहीं आयी"     "कोशिश कर रहा हूँ|"     "आज ठंड लगता ज्यादा है|आपको भी लग रही"|   "नहीं तो!!!रोज जैसी है|कहो तो पंखा कम कर दूँ|"   आप लेटो|मैं कर देती हूँ कम|आपके भी तो घुटने चटकते हैं|"  ... आगे पढ़े

दो लघु कथाएं

Updated on 15 April, 2018, 14:10
 मां ‘मां, हम दोनों ने फैसला कर लिया है कि हमारा बच्चा किसी और की कोख से पैदा होगा ।’ ‘क्या कह रही हो, पागल तो नहीं हो गई? तुम्हारा बच्चा किसी और की कोख से ?’ ‘मां, हम किराये की कोख का इंतज़ाम कर रहे हैं।’ ‘…पर लोग क्या कहेंगे?’ ‘लोगों को कह दूंगी,... आगे पढ़े

बीमार बच्चा

Updated on 10 April, 2018, 0:08
/ बेला जैन                                    छः महीने से मेरा बच्चा बहुत बीमार था। मैं और मेरी पत्नी सभी सरकारी अस्पतालों में बच्चे को लेकर इलाज के लिये घूम चुके थे। पर सभी सरकारी अस्पतालों के डाक्टरों ने मुझे कहा कि आप अपने बच्चे को किसी अच्छे प्रायवेट अस्पताल में दिखाईयें जहां इलाज... आगे पढ़े

ऊँचाई

Updated on 9 April, 2018, 1:26
           ..रामेश्वर काम्बोज "हिमांशु" पिताजी के अचानक आ धमकने से पत्नी तमतमा उठी, "लगता है बूढ़े को पैसों की ज़रूरत आ पड़ी है, वर्ना यहाँ कौन आने वाला था। अपने पेट का गड्‌ढा भरता नहीं, घर वालों का कुआँ कहाँ से भरोगे?" मैं नज़रें बचाकर दूसरी ओर देखने लगा। पिताजी नल पर... आगे पढ़े