प्रदेशवार्ता. बिजली के दामों ने आम आदमी को पहले ही परेशान कर रखा हैं. लोगों की आम शिकायत रहती है कि उनके बिजली के बिल ज्यादा आते हैं. अडानी के स्मार्ट मीटर को लेकर भी लोग संशय में रहे. लेकिन अब सरकार का एक बडा कदम बिजली उपभोक्ताओं की जेब हल्की कर सकता हैं. ये भी संभव है कि बिजली का बिल आम उपभोक्ताओं के लिए भरना असंभव हो जाए. सरकार सबसे पहले तो राज्यों से अधिकार छीन रही है कि वो बिजली के दामों में किसी तरह का परिवर्तन कर सके, दूसरा ये होने वाला है कि बिजली बनाने की पूरी लागत वसूली जाएगी, बिजली कंपनी को अधिकार होगा कि वो जब चाहे बिजली के दामों को लेकर निर्णय ले सके. एनईपी ड्राफ्ट 2026 आम उपभोक्ताओं के लिए किसी कडवी गोली से कम नहीं हैं. इस ड्राफ्ट के लागू होने के बाद बिजली का बिल भरना और कठिन हो जाएगा.
नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी (NEP) ड्राफ्ट 2026 के प्रावधान साफ़-साफ़ बता रहे हैं कि अभी तक तो बिजली की दरें राज्यों के नियामक आयोग तय करते हैं लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। बिजली के दाम उसकी लागत के हिसाब से बिजली कंपनियां खुद ही बढ़ा सकेंगी. अभी तक घरेलू बिजली सस्ती और औद्योगिक बिजली महंगी होती है, लेकिन NEP में घरेलू तथा औद्योगिक बिजली की दरें एक समान करने की बात कही गई है। राष्ट्रीय बिजली नीति का ड्राफ्ट बताता है कि बिजली खरीद लागत में होने वाली बढ़ोतरी को वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) ऑटोमेटिक रूप से उपभोक्ताओं के मासिक बिल में जोड़ सकेंगी। बिजली खरीद की लागत, ईंधन की कीमत, महंगाई और अन्य खर्च बढ़ने पर उसका असर सीधे लोगों के मासिक बिल में दिखेगा। यानी बिजली के दाम साल में एक बार नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपने-आप कई बार बढ़ सकते हैं। सरकार ने राष्ट्रीय बिजली नीति के ड्राफ्ट में इंडेक्स-लिंक्ड टैरिफ का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत बिजली की दरें किसी तय इंडेक्स से जुड़ी होंगी। जैसे कोयला महंगा होने, बिजली उत्पादन की लागत बढ़ने या डिस्कॉम का खर्च बढ़ने से बिजली की दरें भी उसी हिसाब से बढ़ जाएंगी। इससे दरों में हर महीने बदलाव हो सकता है।
बिजली कोयले से बनती है और कोयला व बिजली दोनों अडाणी के हैं। अब झरिया व धनबाद का कोयला सीधे-सीधे रेल की बजाय जलमार्ग से श्रीलंका के रास्ते गुजरात और फिर राजस्थान स्थित अपने विद्युत उत्पादन संयंत्रों को पहुंचा कर उत्पादन लागत ज्यादा दिखाने वाले गौतम अडाणी को बिजली के मनमाने दाम बढ़ाने से कौन रोकेगा। स्मार्ट मीटर के जरिए लोगों को हर साल कितना चूना लगाया जा रहा है, इसे भी सब जानते हैं।
सभी को NEP ड्राफ्ट ज़रूर पढना चाहिए ताकि उन्हें पता चल जाए कि बिजली का बिल घर का बजट कितना गडबड करेगा.


