Uncategorizedआपका शहरआपका शहरप्रदेशप्रदेश

देश का पहला राज्य मप्र जिसने अपने नागरिकों की खुशी के लिए की संस्थागत पहल… जानिए राज्य सरकार के आनंद विभाग के काम


प्रदेशवार्ता. आनंद विभाग के ऊपर अपने नागरिकों के सर्वांगीण विकास करने और उन्हें हर हाल में यानी भौतिक, भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक रूप से खुशहाल महसूस कराने की महती ज़िम्मेदारी है। इसके लिए 6 अगस्त 2016 को मध्य प्रदेश सरकार ने मध्य प्रदेश शासन कार्य (आबंटन) नियमों में नियम संख्या 2 में संशोधन करते हुए आनंद विभाग को वजूद में लाया गया था। जिसे 4 जनवरी 2022 को हुई कैबिनेट की बैठक में स्थायी तौर पर मान्य किया गया. हिंदुस्तान में यह पहली बार हुआ था कि किसी एक राज्य में अपने नागरिकों की खुशहाली को मापने और खुशहाली का प्रचार-प्रसार करने या उनके लिए खुशनुमा माहौल बनाने के लिए सांस्थानिक स्तर पर पहल की हो। 6 अगस्त 2016 को राज्य आनंद संस्थान का गठन भी इसी उद्देश्य से किया गया था।
आनंद विभाग कई तरह की गतिविधियों का संचालन करता हैं जैसे आनन्द एवं सकुशलता को मापने के पैमानों की पहचान करना तथा उन्हें परिभाषित करना, राज्य में आनन्द का प्रसार बढ़ाने की दिशा में विभिन्न विभागों के बीच समन्वयन के लिए दिशा-निर्देश तय करना, आनन्द की अवधारणा का नियोजन नीति निर्धारण और क्रियान्वयन की प्रक्रिया को मुख्यधारा में लाना, आनन्द की अनुभूति के लिए एक्शन प्लान एवं गतिविधियों का निर्धारण करना, निरंतर अन्तराल पर निर्धारित मापदंडों पर राज्य के नागरिकों की मन:स्थिति का आंकलन करना, आनन्द की स्थिति पर सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार कर प्रकाशित करना, आनन्द के प्रसार के माध्‍यमों, उनके आंकलन के मापदण्डों में सुधार के लिए लगातार अनुसंधान करना और आनन्द के विषय पर एक ज्ञान संसाधन केन्द्र के रुप में कार्य करना।
इतने महत्वपूर्ण काम करने के लिए एक सुनियोजित यान्त्रिकी की भी ज़रूरत होगी जिसके लिए आनंद विभाग के तहत एक सुनियोजित ढांचा तैयार किया गया। इसकी एक कार्यपालन समिति है जिसकी अध्यक्षता राज्य शासन द्वारा मनोनीत अध्यक्ष करते हैं, सचिव के रूप में राज्य आनंद संस्थान के निदेशक होते हैं, इसके अलावा योजना, खेल एवं युवा कल्याण, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण तथा संस्‍कृति विभाग के प्रमुख सचिव इस समिति में सदस्य शामिल रहते हैं. हर जिले में नियुक्त राज्य आनंद संस्थान के निदेशकगढ़ भी इस समिति में बतौर सदस्य शामिल हैं. इस विभाग द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में आनंद उत्सव, आनंद सभा, आनंदम आनंद क्लब, अल्प विराम शामिल हैं.
विभाग द्वारा हर वर्ष 14 जनवरी से 28 जनवरी के बीच ‘आनंद उत्सव’ का आयोजन किया जाता है। जिसकी स्थापना है कि “जीवंत सामुदायिक जीवन, नागरिकों की जिन्‍दगी में आनंद का संचार करता है”।
आनंद उत्सव का उद्देश्‍य नागरिकों में सहभागिता एवं उत्‍साह को बढ़ाने के लिये समूह स्‍तर पर खेल-कूद और सांस्‍कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना है। आनंद उत्‍सव की मूल भावना प्रतिस्‍पर्धा नहीं वरन सहभागिता है. आनंद उत्‍सव, नगरीय और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आयोजित किए जाते है । आनंद उत्‍सव में प्रमुख रूप से स्‍थानीय तौर पर प्रचलित परम्‍परागत खेल-कूद जैसे कबड्डी, खो-खो, बोरा रेस, रस्‍सा कसी, चेअर रेस, पिठ्ठू, सितोलिया, चम्‍मच दौड़, नीबू दौड़ आदि तथा सांस्‍कृतिक कार्यक्रम जैसे लोक संगीत, नृत्‍य, गायन, भजन, कीर्तन, नाटक आदि एवं स्‍थानीय स्‍तर पर तय अन्‍य कार्यक्रम किए जाते हैं।इसके अन्य आयोजन ‘आनंदम’ की स्थापना भी बहुत मानवीय है। इसके अनुसार ‘दूसरों की निस्‍वार्थ सहायता करना तथा उसके लिए आगे बढ़कर त्‍याग करने का भाव भारतीय संस्‍कृति का आधार है’। सहायता करने के अनेक तरीके हो सकते हैं उदाहरणत: घरों में कई बार ऐसा सामान होता है जिसकी आवश्‍यकता नहीं होती। ऐसे सामान को किसी जरूरतमंद तक पहुंचाने की संस्‍थागत व्‍यवस्‍था होनी चाहिए। यह मदद करने का प्रभावी तरीका हो सकता है। इसी बात को ध्‍यान में रखकर ‘’आनंदम’’ नामक व्‍यवस्‍था को आरंभ किया गया. इसके अंतर्गत ऐसा घरेलू सामान, जिसकी आवश्‍यकता न हो, उसे व्‍यक्ति एक निश्चित स्‍थल पर रख दे तथा जिसे जरूरत हो वह वहां से बिना किसी से पूछे ले जा सके। आनंदम की यह व्‍यवस्‍था पूरे प्रदेश में हर जिले में समाज सेवी तथा जन प्रतिनिधियों के सहयोग से आरंभ की गई।
आनंद सभा.. शासकीय स्कूलों में ‘आनंद सभाओं’ के जरिये बच्चों को आमंत्रित किया जाता है.
‘आनंद क्लब’ की परिकल्पना और उनका संचालन इस स्थापना पर आधारित है कि अकेले धनोपार्जन अथवा भौतिक तरक्की समाज की खुशहाली का सूचकांक नहीं है, किताबें पढ़कर केवल उथला ज्ञान ही प्राप्त होता है इसलिए यह जरूरी है कि स्‍वयं सेवी (आनंदक) पहले यह कौशल खुद सीखें, उसे अपने जीवन में उतारें और फिर अपने अनुभवों को अन्‍य लोगों तक पहुंचाएं तभी उनके द्वारा की गई गतिविधियां तथा प्रयास प्रभावी होंगे। एक विशेष स्थापना यह भी है कि भले ही प्रसन्‍नचित रहना हम सभी की जरूरत है परन्‍तु इसके लिए क्‍या करना चाहिए इसकी स्‍पष्‍ट रूप से जानकारी नहीं होती। विपरीत परिस्थितियों में किस प्रकार संतुलित रहा जा सकता है तथा सामान्‍य अनुभव में बिना उपलब्धि अथवा सफलता के आनंद कैसे प्राप्‍त हो सकता है जानना सभी के लिए जरूरी है। इसके लिए हर छोटे बड़े कस्बे में स्वैच्छिक रूप से आनंद क्लब की स्थापना की जा रही है जो आनंद विभाग के संरक्षण में खुशहाली का प्रचार प्रसार करेंगे।
इस विभाग का अन्यतम कार्यक्रम ‘अल्प-विराम’ सरकारी कर्मचारियों के निमित्त बनाया गया है। सभी विभागों के सरकारी कर्मचारियों को उनके काम से पंद्रह मिनिट से आधे घंटे का एक विराम दिया जाएगा जिसमें उन्हे प्रेणादायक फिल्में, कोई कहानी या संगीत सुनने के अवसर मुहैया कराये जाएंगे ताकि उनका मन प्रसन्न रहे और वो अपने जीवन में आनंद की अनुभूति कर सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button