– कन्नौद द्वितीय एडीजे न्यायालय ने सुनाया फैसला
कन्नौद। बकरा- बाटी खाने के दौरान विवाद हो गया था । विवाद के बाद तीन लोगों ने मिलकर एक व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया था। अब कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दस। दस साल की सजा सुनाई है। द्वितीय पर सत्र न्यायाधीश अमित निगम ने हत्या के एक मामले में तीन आरोपियों को 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई साथ ही दो-दो हजार रुपए के अर्थदण्ड दंडित भी किया। घटना 19 मई 2021 को शाम साढ़े 5 बजे से से पौने छः बजे विनोद पिता देवीलाल कोरकू निवासी डेहरी द्वारा बकरे की मान कड़ाई कुंडिया के जंगल में देने से वह तथा उसका बड़ा भाई राधेश्याम एवं विजय पिता मगन कोरकू तथा अजय पिता रमेश कोरकू भी कार्यक्रम में गए थे, वहां पर गजराज कोरकू दलपत कोरकू भी गये थे तथा ग्राम डेहरी के अनिल पिता कालू, सुनिल पिता कालू एवं सुरेश पिता कालू निवासी डेहरी के भी कार्यकम में गये थे। शाम के समय बकरा-बाटी खाते समय साढ़े 5 बजे अनिल ने विजय को जबरदस्ती स्टील के लोटे में पानी पिलाने लगा विजय ने मना किया और खड़ा हो गया तो अनिल व उसके भाई सुनिल व सुरेश ने मिलकर विजय की हत्या करने के लिये अनिल ने एक मुक्का विजय के सीने पर मारा तो विजय सीना पकड़ने लगा तो अनिल ने एक लात विजय को मारा तो वह सिर के बल पत्थर पर गिरा एवं सुनील व सुरेश ने हाथ मुक्के व लात से विजय के सीने व पेट पर मारपीट करने लगे तब उसने, राधेश्याम, अजय, गजराज एवं दलपत ने बीच-बचाव किया, विजय के सीने, सिर, पेट पर अंदरूनी चोट लगने से विजय पिता मगन कोरकू की मृत्यु हो गई। तीनों विजय की हत्या करने के बाद अनिल पिता कालू, सुनील पिता कालू, सुरेश पिता कालू सभी निवासी ग्राम डेहरी थाना कांटाफोड़ वहां से भाग गए। थाना कांटाफोड़ पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया था । जहां से द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायालय न्यायाधीश श्री अमित निगम ने समस्त साक्षीयो गवाहो के बयानों के आधार पर मानव वध मानते हुए धारा 304 भाग एक में फैसला सुनाया और तीनों आरोपियों को 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 2 -2 रूपए का अर्थथंड, अर्थ दंड नहीं भरने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने का फैसला सुनाया। जहां से न्यायालय ने तीनो आरोपियों को उपजेल कन्नौद भेज दिया है। शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक दीप कुमार पटवा ने की। एवं विशेष सहयोग पुलिस कोर्ट मुंशी राजपाल सिंह ठाकुर का रहा।
