*अरविंद तिवारी*

*बात यहां से शुरू करते हैं*

• दूरदर्शी हो तो मंत्री भूपेंद्र सिंह जैसा। दरअसल दमोह उपचुनाव का जिम्मा पार्टी ने सबसे पहले भूपेंद्र सिंह को दिया था।‌ वह जब वहां गए अलग-अलग क्षेत्र में घूमे और कार्यकर्ताओं से मिले तो उन्हें अंदाज लग गया कि यहां राहुल लोधी का भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतना बहुत मुश्किल है। हार का ठीकरा सिर्फ अपने सिर न फूटे इसलिए उन्होंने बाद में मंत्री गोपाल भार्गव को भी वहां का प्रभारी बनवाया, केंद्रीय मंत्री और दमोह के सांसद प्रहलाद पटेल की भी वहां पर तैनाती हुई और खुद प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा 10 दिन वहां किला लड़ाते रहे। अब जबकि नतीजा भाजपा के पक्ष में नहीं है हार की जिम्मेदारी इन सब नेताओं की रहेगी ना कि केवल भूपेंद्र सिंह की।

• नरेंद्र सिंह तोमर और सुहास भगत की जुगल जोड़ी अंततः असम में सफल हो गई। दोनों नेताओं ने गजब का तालमेल दिखाया और भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर 5 साल के लिए आसाम में झंडा गाड़ दिया। ‌ मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल बने या हेमंत विश्वा शर्मा इन दोनों नेताओं का जलजला न केवल गुवाहाटी में बरकरार रहेगा बल्कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की नजर में भी दोनों का कद बहुत बढ़ गया है। दिल्ली में पहले से ही मजबूत तोमर तो और मजबूत होंगे ही देखना तो यह है कि इस जीत के बाद क्या भगत नार्थ ईस्ट में पार्टी को मजबूत करने के लिए कहीं सेवन सिस्टर्स के प्रभारी बनाकर गुवाहाटी में ही तैनात न कर दिया जाए।

• उपचुनाव में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने यूं तो अलग-अलग नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी थी लेकिन यहां तीन नेता बड़ी अहम भूमिका में थे। उपचुनाव का नतीजा आने के पहले इस दुनिया को अलविदा कह गए पूर्व मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर, प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष डाॅ विक्रांत भूरिया और खरगोन के विधायक रवि जोशी। यहां कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में अजय टंडन का चयन राठौर और जोशी के अनुशंसा पर हुआ था और जैसे ही टंडन की उम्मीदवारी की घोषणा हुई इन दोनों नेताओं के अलावा डॉ विक्रांत ने भी दमोह में मोर्चा संभाला। इन्होंने कांग्रेसियों को तो काम पर लगाया ही बल्कि भाजपा के उन दिग्गजों को भी साध लिया जो राहुल लोधी को उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज थे। यह दिग्गज कांग्रेस के लिए बहुत मददगार रहे। राठौर और जोशी इसके पहले हुए उपचुनाव में मुरैना जिले की दिमनी सीट पर भी पार्टी उम्मीदवार की जीत के मुख्य शिल्पकार थे।

• चमचमाती इनोवा या सफारी गाड़ी के बजाए यदि कोई मंत्री वैनिटी वैन में सफर करें तो चौंकना स्वाभाविक है। ‌ मालवा निमाड़ क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले एक कद्दावर मंत्री इन दिनों अपनी सरकारी गाड़ी छोड़कर वैनिटी वैन में ही दौरे करते हैं।मंत्री जी की लोगों से मेल मुलाकात भी इसी वेन में होती है। उनका मानना है कि यह मुलाकात बेहद सुरक्षित रहती है और सफर भी आसान रहता है। यह वैनिटी वैन मंत्री जी के मित्रों ने उनके लिए 3 करोड रुपए की लागत से तैयार करवाई है। मौका लगे तो कभी आप भी इस वैन में सवारी का आनंद जरूर लीजिए।

• पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में बेहद सक्रिय रही अर्चना चिटनिस स्वभाविक तौर पर खंडवा लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही है। पर इस क्षेत्र में और खासकर बड़वाह और भीकनगांव विधानसभा क्षेत्रों में कृष्ण मुरारी मोघे की बढ़ती आमद रफत ने जरूर उन्हें परेशान कर रखा होगा। खरगोन का सांसद रहने के कारण मोघे का इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में अच्छा संपर्क है। अब यह दोनों विधानसभा क्षेत्र खंडवा संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। कोरोना संक्रमण के दौर में इन दोनों क्षेत्रों में मोघे यहां न केवल आवश्यक सुविधाएं मुहैया करवा रहे हैं बल्कि इंदौर में यहां के लोगों के मददगार भी बने हुए हैं। सही कहा है किसी ने दूर दृष्टि पक्का इरादा।

• सागर कलेक्टर रहते हुए बहुचर्चित हनी ट्रैप कांड की एक आरोपी से अपने संबंधों के कारण चर्चा में आए एक आईएएस अफसर इन दिनों प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश से बाहर हैं। जब वे सागर कलेक्टर थे तब सरकारी बंगले में एक महिला से मुलाकात के दौरान पत्नी द्वारा रंगे हाथों पकड़े गए थे और उसी के बाद से उनके पारिवारिक जीवन में कलह शुरू हो गया था। पता चला है कि तब शुरू हुआ यह कल है अब तलाक में तब्दील हो गया है और पत्नी ने उनसे नाता तोड़ लिया है।

• मध्य प्रदेश काडर के बहुत शानदार और बेहद दमदार अधिकारी मनोज श्रीवास्तव 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो गए। वे जिस पद पर भी पदस्थ रहे अपनी एक अलग पहचान बनाई। धर्म और संस्कृति के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे को मध्यप्रदेश में विस्तार देने में श्रीवास्तव ने अहम भूमिका निभाई। वे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भी बेहद भरोसेमंद अफसरों में थे लेकिन यह भरोसा पता नहीं क्यों उनके सेवाकाल के आखिरी साल में टूट गया। यही कारण है कि तमाम काबिलियत और संघ की पसंद होने के बावजूद सेवानिवृत्ति के बाद श्रीवास्तव को कोई सरकारी मुकाम नहीं मिल पाया। हो सकता है भरोसा फिर कायम हो और आगे कोई मौका मिले।

• मध्यप्रदेश में अपनी उपेक्षा से क्षुब्ध अपर पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर चले गए और इन दिनों बीएसएफ के मणिपुर स्थित रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर के आईजी है। लिखने पढ़ने के साथ ही धर्म और अध्यात्म तथा गौ सेवा से वास्ता रखने वाले सिंह इन दिनों कोरोना संक्रमण के झंझावातों से दूर नॉर्थ ईस्ट के वातावरण में पूरी तरह रम गए हैं। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर वह यहां की खूबियों को प्रमुखता के साथ रेखांकित करने के साथ ही वह प्रशिक्षु सिपाहियों के लिए अलग-अलग कोर्स भी प्लान कर रहे हैं। वह रोज अपने स्टाफ से सीधा संवाद करते हैं और अपने अनुभवों के आधार पर वहां के वर्किंग सिस्टम को नया रूप दे रहे है।

चलते चलते

• जरा पता कीजिए कि क्या दमोह उपचुनाव का नतीजा खंडवा संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर उम्मीदवारी के समीकरण को भी प्रभावित करेगा। निमाड़ के दो क्षत्रपों की निगाहें इस सीट पर है।

पुछल्ला

• पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी भले ही हार गई हो लेकिन इस हार के बावजूद कैलाश विजयवर्गीय का कद बढ़ना तय है। पार्टी में उनकी अगली भूमिका क्या होगी इस पर सबकी निगाहें हैं। वैसे विजयवर्गीय की पहचान चुनौतीपूर्ण काम को हाथ में लेने और अंजाम तक पहुंचाने वाले नेता की है।

अब बात मीडिया की

• वरिष्ठ पत्रकार और प्रदेश के सूचना विजय मनोहर तिवारी ने व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए जो तीखे ट्वीट किए है उनकी मंत्रालय ही पांचवे मंजिल पर बड़ी चर्चा है।

• कोरोना संक्रमण के दौर में संचालक जनसंपर्क आशुतोष प्रताप सिंह ने बेहद संवेदनशील अधिकारी की भूमिका निभाते हुए जिस तत्परता से पत्रकार साथियों को मदद दिलवाई उसकी पूरी पत्रकार बिरादरी में बड़ी चर्चा है।

• बेहद प्रतिभावान और परिश्रमी पत्रकार सौरभ मिश्रा ने मृदुभाषी पत्र समूह को अलविदा कह दिया है वे अब न्यूज 18 के डिजिटल सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं।

• युवा पत्रकार शताब्दी शर्मा अब गुड इवनिंग समूह के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सेक्शन की प्रभारी हो गई है।‌ पहले यह काम योगेश राठौर देख रहे थे।

• भोपाल बुजुर्ग पत्रकार गोविंद तोमर को चिकित्सा सहायता दिलवाने में राजधानी के वरिष्ठ पत्रकार राघवेंद्र सिंह की अहम भूमिका रही।

• सहारा समय भोपाल की बेहतरीन एंकर निकिता तोमर को कोरोना ने हमसे छीन लिया। टीम ने उनका जीवन बचाने की भरसक कोशिश की।

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