डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।प्रदेश की शिवराज सरकार ने छिन्दवाड़ा सिंचाई काम्प्लेक्स परियोजना एवं पेंच माइक्रो सिंचाई काम्प्लेक्स-1 प्रोजेक्ट में करीब 500 करोड़ रुपयों का अनियमित भुगतान करने के मामले में जल संसाधन विभाग के दो अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिये हैं और उनसे पन्द्रह दिन के अंदर जवाब तलब कर लिया है।
छिन्दवाड़ा प्रोजेक्ट के मामले में तत्कालीन प्रभारी कार्यपालन यंत्री अरुणेन्द्रनाथ शर्मा को नोटिस जारी किया गया है। वे 18 फरवरी 2020 से 21 जनवरी 2021 तक उक्त प्रोजेक्ट में पदस्थ थे। जारी नोटिस में इस अधिकारी पर आरोप लगाया गया है कि उसने बिना जनरल अरेंजमेंट ड्राईंग-जीएडी की स्वीकृति के अनुबंधित एजेन्सी मेसर्स एचईएस मैक्स ( ए ज्वाईंट वेंचरर्स मेसर्स एचईएस इन्फ्रा प्रालि एण्ड मेसर्स मैक्स इन्फ्रा आई लिमिटेड) हैदराबाद राज्य तेलंगना को पाइप निर्माण सामग्री के लिये 496 करोड़ 64 लाख रुपयों का अनियमित भुगतान किया था। जबकि बांध स्थल, जल भराव की स्थिति, कमाण्ड क्षेत्र का निर्धारण एवं जल वितरण प्रणाली की स्थिति स्पष्ट नहीं थी। पाइप निर्माण हेतु स्टील की प्लेटों की मात्रा, पाइपों का व्यास व मोटाई आदि का निर्धारण किये बिना ही स्टील का क्रय करने हेतु ठेकेदार को भुगतान किया गया। ऐसा ठेकेदार को अनुचित लाभ प्रदान करने के लिये किया गया। इस प्रकार का व्यय लंबी अवधि तक (बांध बनकर जल का भराव होने तक) निष्फल ही रहेगा। वर्तमान में इस प्रोजेक्ट के कार्य की भौतिक प्रगति शून्य है।
इसी प्रकार, तत्कालीन प्रभारी कार्यपालन यंत्री आशीष महाजन पेंच व्यपवर्तन बांध क्रमांक एक सिंगना बांध चौरई जिला छिन्दवाड़ा में 25 जनवरी 2018 से 21 जनवरी 2021 तक पदस्थ रहे। जारी नोटिस में इस अधिकारी पर आरोप है कि उसने मेंच माइक्रो सिंचाई काम्प्लेक्स-1 के निर्माण में अनुबंधित एजेन्सी मेसर्स एचईएस इन्फ्रा प्रालि हैदराबाद राज्य तेलंगना को 10 करोड़ 77 लाख 86 हजार रुपयों का अनियमित भुगतान किया। इस भुगतान के पूर्व भी जनरल अरेंजमेंट ड्राईंग-जीएडी की स्वीकृति नहीं ली गई थी। प्रोजेक्ट के माइक्रो सिस्टम में उपयोग में आने वाले पाईपों के साईज एवं मोटाई का निर्धारण नहीं किया गया। इससे यह व्यय भी लंबी अवधि तक निष्फल हुआ है। इसमें भी ठेकेदार को अनुचित लाभ प्रदान करने के लिये भुगतान किया गया।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि जल संसाधन विभाग के बोधी से ठेकेदार को स्ट्रक्चरल डिजाईन की स्वीकृति लेनी होती है जिसे जीएडी कहा जाता है, जोकि नहीं ली गई थी और भुगतान कर दिया गया था। अभी आरोप-पत्र एवं गवाहों की सूची जारी कर शो-कॉज नोटिस दिया गया है तथा जवाब सही नहीं आने पर विभागीय जांच बैठा दी जायेगी।पि

पिछलेर्ष मृत्यु पंजीयन के आंकड़े 4 लाख रहे

भोपाल।प्रदेश में पिछले वर्ष ऑनलाईन मृत्यु पंजीयन का आंकड़ा 3 लाख 98 हजार 567 रहा जबकि जन्म पंजीयन का आंकड़ा 12 लाख 14 हजार 489 रहा। योजना, आर्थिक व सांख्यिकी विभाग के अनुसार, गत वर्ष चिकित्सकीय रुप से प्रमाणित मृत्यु पंजीयन के आंकड़ों में मृत्यु के प्रमुख कारण ये रहे : एक, सक्युलेटरी सिस्टम, पल्मनरी सक्युलेशन एण्ड अदर कॉजेस ऑफ हार्ट डिसीज। दो, डिसीज ऑफ द रेस्पटरी सिस्टम। तीन, न्यूप्लाज्मास। चार, ट्रांसपोर्ट एक्सीडेंट। पांच, अदर सरटेन इनफक्सियस एण्ड पेरासेटिक डिसीज एंकलेट इफेक्ट्स ऑफ इन्फक्सियस एण्ड पेरासेटिक डिसीज आदि रहे। जबकि राज्य के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, प्रदेश में कोरोना से मार्च 2020 से अभी तक कुल 4 हजार व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी है।

अब सहायक आपूर्ति अधिकारी पैट्रोल-डीजल
में मिलावट की जांच कर सकेंगे, आदेश जारी

भोपाल।राज्य सरकार ने खाद्य विभाग के सहायक आपूर्ति अधिकारियों को पैट्रोल-डीजल में मिलावट और संबंधित अपराधों पर कार्यवाही करने के अधिकार प्रदान कर दिये हैं। यह आदेश केंद्र सरकार के मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल प्रदाय तथा वितरण का विनियमन और अनाचार निवारण आदेश 2005 के तहत जारी किया गया है।
दरअसल पहले यह अधिकारी जिला आपूर्ति अधिकारी के पास था। सहायक आपूर्ति अधिकारी पहले लायसेंसिंग कण्ट्रोल आर्डर के तहत यह जांच कर सकते थे परन्तु यह आर्डर सरकार ने खत्म कर दिया था। फिर ये राजपत्रित अधिकारी भी नहीं थे। लेकिन अब ये राजपत्रित अधिकारी हो गये हैं और इनकी सभी जिलों में संख्या भी पर्याप्त हो गई है। जिला आपूर्ति अधिकारी पर इस जांच के लिये प्रकरणों का काफी भार भी था। इसीलिये अब सहायक आपूर्ति अधिकारियों को अधिकृत कर दिया गया है।
सहायक आपूर्ति अधिकारी अब, तलाशी के अलावा जब्ती, अवैध विक्रय आदि की भी जांच कर सकेंगे तथा प्रकरण दर्ज कर सकेंगे।

रिटायर्ड पीसीसीएफ की संविदा नियुक्ति में वृध्दि

भोपाल।राज्य शासन ने सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक आरजी सोनी की संविदा अवधि में वृध्दि कर दी है। वे जल संसाधन विभाग की छिन्दवाड़ा सिंचाई काम्प्लेक्स में वन प्रकरण एवं पर्यावरण स्वीकृति के प्रकरणों के निराकरण के लिये परामर्शी विशेषज्ञ के रुप में संविदा पर 75 हजार रुपये प्रति माह के पारिश्रमिक पर नियुक्त थे। उनकी संविदा अवधि में 14 फरवरी 2021 से 14 फरवरी 2022 तक की वृध्दि की गई है।

 

 

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