नई दिल्लीः स्टैंडबाई खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम के साथ ब्रिटेन जाने वाले बायें हाथ के तेज गेंदबाज अर्जन नागवासवाला ने कहा कि तुलना नहीं करना, धैर्य रखना और नियमित चीजों पर ध्यान देने ने उनके लिए वांछित नतीजे हासिल करने में अहम भूमिका निभाई। राष्ट्रीय टीम की ओर से कुछ ही पारसी क्रिकेटर खेलने में सफल रहे हैं और गुजरात के लिए शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम से जुड़ने वाले नागवासवाला इस सूची में जगह बनाने की उम्मीद कर रहे हैं।

गुजरात के सूरत में 17 अक्टूबर 1997 को जन्मे अर्जन नागवासवाला ने ‘बीसीसीआई.टीवी’ से कहा, ‘‘घरेलू क्रिकेट की कड़ी जरूरतों ने मुझे नियमित अभ्यास की अहमियत समझाई। कैसे अभ्यास करना है, अभ्यास के दौरान कैसे गेंदबाजी करनी है और प्रक्रिया पर ध्यान कैसे देना है और इसका पालन कैसे करना है, नतीजे के बारे में अधिक सोचे बिना।’’

इस तेज गेंदबाज ने कहा, ‘‘अगर आप प्रक्रिया का सही तरह से पालन करते हैं तो जो निश्चित तौर पर आपको वांछित नतीजे मिलते हैं। इसके अलावा धैर्य बरकरार रखना भी अहम है। किसी और से अपनी तुलना करने और यह सोचने का कोई मतलब नहीं है कि किसी और को टीम में जगह क्यों मिली और मुझे क्यों नहीं मिली।’’

ये पारसी समुदाय को कुछ वापस देने की तरह है

पारसी क्रिकेटर के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘‘मुझे इसकी जानकारी है। जब मैं रणजी ट्रॉफी खेल रहा था तो लोग मुझे कहते थे कि बहुत सालों से कोई पारसी क्रिकेटर भारत के लिए खेला नहीं। यह समुदाय को कुछ वापस देने की तरह है। मैं बेहद खुश हूं।’’

बायें हाथ का यह तेज गेंदबाज 41 विकेट के साथ 2019-20 सत्र में गुजरात को सबसे सफल गेंदबाज रहा था और उनकी टीम रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में जगह बनाने में सफल रही थी।

जहीर खान हैं आदर्श

नागवासवाला के आदर्श पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जहीर खान हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं उसे (जहीर) भारत के लिए खेलते हुए देखता हुआ बड़ा हुआ।’’ यह तेज गेंदबाज भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच भरत अरूण का भी बड़ा प्रशंसक है। उन्होंने कहा, ‘‘भरत अरूण सर के मार्गदर्शन में हमारी तेज गेंदबाजी में काफी सुधार हुआ है। हमारे पास मजबूत बेंच स्ट्रेंथ है। मुझे यकीन है कि मुझे भरत अरूण सर से काफी कुछ सीखने को मिलेगा।’’

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