Friday, July 17th, 2026 | 10:18 PM

सरकारी स्कूल में चार लीटर पेंट से पुताई के लिए बुलाए 168 मजदूर और 65 राजमिस्त्री

by Amjad Shaikh

प्रदेशवार्ता. मप्र के दो सरकारी स्कूलों में पुताई घोटाला सामने आया हैं. जितने मजदूर पुताई के काम के लिए बुलाना बताया जा रहा है उतने मजदूर तो पूरे गांव में ही नहीं हैं. खास बात यह है कि बिल बनने से एक महीना पहले ही प्राचार्य ने उसे सत्यापित भी कर दिया. रही कसर ट्रेजरी आफिसर ने पूरी कर दी उसने बिना जांचे ही बिल का भुगतान कर दिया.
मप्र के शहडोल में तो गजब हो गया. दो स्कूलों की पुताई में ही सरकार का तीन लाख 40 हजार रुपए के करीब पैसा खर्च हो गया. दो स्कूलों की पुताई ने तो सभी रिकॉर्ड तोड दिए. शहडोल जिले के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के सकंदी और निपानिया गांव के दो स्कूलों में ये मामला सामने आया हैं. साफ दिख रहा है कि अफसरों ने सरकारी पैसा ठिकाने पर लगा दिया. पहले बात करते है शासकीय हाईस्कूल सकंदी की. इस स्कूल का जो बिल दिखाया गया है उसमें चार लीटर आयल पेंट से पुताई हुई हैं. चार लीटर आयल पेंट से स्कूल की दीवारों पर पुताई के लिए 168 मजदूर और 65 राजमिस्त्री लगे थे. चार लीटर पुताई से बिल के अनुसार खर्च 1,06,984 रुपए खर्च आया था, जिसका भुगतान कर दिया गया. इसी तरह निपानिया के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भी बडे बजट में पुताई का काम पूरा किया गया. यहां पर 20 लीटर आयल पेंट से पुताई हुई. साथ ही 10 खिडकिया लगवाने और चार दरवाजों की फिटिंग के लिए 275 मजदूर और 150 राजमिस्त्री बुलाए गए थे. इस पर खर्च 2 लाख 31 हजार 685 रुपए आया.
खास बात यह है कि जितने मजदूर दोनों स्कूलों में लगाए गए उतने मजदूर तो इन गांवों में भी मौजूद नहीं हैं. प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी फूलसिंह मरपाची ने भुगतान के लिए राशि सरकारी खजाने से निकालकर भुगतान भी कर दिया.
राशि भुगतान के लिए स्कूल के प्राचार्य भी खासे जल्दी में दिखे. प्राचार्य निपानिया ने चार अप्रैल 25 को बिल पर साइन कर दिए. प्राचार्य ने बिल पहले साइन किए और सुधाकर कंस्ट्रक्शन ओदारी ने बिल ठीक एक माह बाद 5 मई को तैयार किया. याने बिल बनने से पहले ही प्राचार्य ने उसे सत्यापित कर दिया. ट्रेजरी आफिसर ने भी जरूरी नहीं समझा कि वो इसे चेक कर ले. बिना देखे ही बिल का भुगतान कर दिया गया.
अनुरक्षण मद का मतलब है, रख-रखाव के लिए दिया गया पैसा। नियम है कि अनुरक्षण मद से कराए गए कार्यों की तस्वीरें (पहले और बाद की) बिल के साथ जमा करनी होती हैं। लेकिन, इन बिलों के साथ कोई तस्वीर नहीं थी। फिर भी ट्रेजरी ऑफिसर ने बिल पास कर दिया और भुगतान कर दिया।

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