डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।प्रदेश की शिवराज सरकार ने नगरीय निकायों की अचल सम्पत्तियों के अंतरण संबंधी नियमों में बदलाव कर दिया है। अब नगर निगमों में मेयर इन कौंसिल तथा नगर पालिकाओं एवं नगर परिषदों में प्रेसीडेन्ट इन कौंसिल भी अचल सम्पत्तियों को विक्रय, पट्टेख् दान, बंधक या विनिमय द्वारा अंतरित कर सकेंगी। पहले इन्हें कोई अधिकार नहीं थे।
नगरीय निकायों में अचल सम्पत्तियों के अंतरण हेतु वर्ष 2016 में नियम बनाये गये थे। पांच साल बाद इनमें संशोधन कर दिया गया है। नये संशोधन के अनुसार, 5 लाख या अधिक जनसंख्या वाले नगर निगमों में अब दस करोड़ रुपये तक मूल्य की अचल सम्पत्ति का अंतरण मेयर इन कौंसिल कर सकेगी। दस करोड़ से 20 करोड़ रुपये तक की सम्पत्ति का निगम परिषद, 20 करोड़ से 50 करोड़ रुपये तक की सम्पत्ति का आयुक्त नगरीय प्रशासन तथा 50 करोड़ रुपये से अधिक की सम्पत्ति का राज्य सरकार अंतरण कर सकेगी।
इसी प्रकार, 5 लाख से कम जनसंख्या वाले नगर निगम तथा नगर पालिका में 2 करोड़ रुपये तक की अचल सम्पत्ति का मेयर/प्रेसीडेन्ट इन कौंसिल, 2 करोड़ से 5 करोड़ रुपये तक की सम्पत्ति का परिषद, 5 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक की सम्पत्ति का आयुक्त नगरीय प्रशासन तथा 10 करोड़ रुपये से अधिक की सम्पत्ति का राज्य सरकार अंतरण कर सकेगी। नगर परिषदों में 50 लाख रुपये तक की सम्पत्ति का अंतरण प्रेसीडेन्ट इन कौंसिल, 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक की सम्पत्ति का परिषद, 1 करोड़ से 5 करोड़ रुपये तक की सम्पत्ति का अंतरण आयुक्त नगरीय प्रशासन तथा 5 करोड़ रुपये से अधिक की सम्पत्ति का अंतरण राज्य सरकार कर सकेगी।
ये भी हुये नये संशोधन :
भूमि स्वामी में अब पट्टाधारी भी शामिल किये गये हैं। ई-निविदा द्वारा अचल सम्पत्तियों का अंतरण होगा लेकिन लोक प्रयोजनों के लिये तथा पंजीकृत लोक संस्थाओं को धार्मिक प्रयोजनों के लिये बंद लिफाफे की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकेगी। फ्लेटों में नामांतरण शुल्क 2 हजार रुपये के स्थान पर 5 हजार रुपये होगा। अचल सम्पत्ति का वार्षिक भू-भाटक/किराया निविदा में प्राप्त प्रीमीयम राशि के मूल्य का 0.5 प्रतिशत के बजाये 2 प्रतिशत होगा तथा प्रत्येक 5 वर्ष पश्चात भू-भाटक की दरों में दस प्रतिशत की वृध्दि की जायेगी। पट्टे का अंतरण 30 वर्ष के लिये होगा। अचल सम्पत्ति जैसे भवन, दुकान इत्यादि के विक्रय व अंतरण में अजाजजा के लोगों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण तो मिलेगा परन्तु अब इन वर्गों की महिलाओं को दो-दो प्रतिशत आरक्षण में यह बदलाव कर दिया गया है कि ये महिलायें विधवा होना चाहिये। राज्य सरकार को अधिकार होगा कि वह शहरी गरीबों के लिये केंद्र या राज्य की प्रायोजित आवासीय योजनाओं के अधीन निर्मित होने वाले आवासों के अंतरण के लिये आरक्षण से छूट प्रदान कर सके। पट्टों का 0.5 प्रतिशत शुल्क से नवीनीकरण भी हो सकेगा।

शासकीय पालीटेक्नीक कालेजों की जनभागीदारी समितियों की अध्यक्षता अब कलेक्टर कर सकेंगे

भोपाल।प्रदेश के ऐसे शासकीय पालीटेक्नीक कालेज जहां की जनभागीदारी समितियों में राज्य सरकार द्वारा अध्यक्ष का मनोनयन नहीं किया गया है, संबंधित जिले के कलेक्टर अध्यक्ष के दायित्वों का निर्वहन करेंगे। इस संबंध में राज्य के तकनीकी शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिये हैं।
तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर सचिव एमआर धाकड़ के अनुसार, प्रदेश के ज्यादातर पालीटेक्नीक कालेजों की जनभागीदारी समितियों में राज्य सरकार द्वारा अध्यक्ष पद पर अभी तक मनोनयन नहीं किया गया है। इस समिति के उपाध्यक्ष संबंधित जिले के कलेक्टर होते हैं। नये अध्यक्ष के मनोनयन तक अब ये जिला कलेक्टर समिति के अध्यक्ष पद का दायित्व देख सकेंगे और बैठकें कर निर्णय ले सकेंगे। उल्लेखनीय है कि जन भागीदारी समितियों में जिले के प्रभारी मंत्री या विधायक अध्यक्ष नियुक्त किये जाते हैं।

 

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