राकेश अचल

देश में कुछ भी नहीं बदल रहा है । कुछ भी इसलिए नहीं बदल रहा क्योंकि हमारी सियासत,हमारा सिस्टम और हमारी मानसिकता जड़ हो चुकी है । जिस राजस्थान में पांच साल पहले पहलू खान की निर्मम हत्या तब के कथित गौभक्तों ने की थी उसी राजस्थान में बीते दिन दो और निर्दोष लोग मौत के घाट उतार दिया। प्रदेश में पांच साल पहले भाजपा की सरकार थी लेकिन आज कांग्रेस की सरकार है। जाहिर है कि हत्यारे सत्ता से प्रेरित हों या न हों लेकिन वे बर्बर मानसिकता से प्रेरित जरूर हैं।
चित्तौड़गढ़ के बेंगू गांव के पास गौप्रेमियों ने दो युवकों को गौवंश का सौदागर समझकर पीट-पीटकर मार डाला। हमलावरों की भीड़ में गांव के ही दो दर्जन से ज्यादा लोग शामिल थे। पुलिस का कहना है कि मरने वालों में से एक बाबूलाल मीणा ने तीन गाय-बैल खरीदे थे। बिलखेड़ा तिराहे पर कथित हमलावरों ने बाबूलाल समेत तीन लोगों पर जानलेवा कर दिया,इस हमले में दो लोग मारे गए ,एक गंभीर रूप से घायल है।
पांच साल बाद राजस्थान में भीड़ द्वारा हत्या का ये सनसनीखेज मामला ये साबित करता है कि भीड़ अब भी जैसी की तैसी है। भीड़ की मानसिकता में कोई अंतर नहीं आया है।
भीड़ द्वारा हत्या यानि मोब लिंचिंग ने पांच साल पहले एक के बाद एक अनेक निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार दिया था ये मुद्दा राजनीति का मुद्दा बना था और सड़क से लेकर संसद तक हंगामा किया था लेकिन बदला कुछ नहीं है ,लोग आज भी गाय-गाय चीखते हुए आगे बढ़ रहे है। भीड़ द्वारा हत्या के मामलों का सत्ता से कोई लेना-देना नहीं है। हरियाणा और राजस्थान में सत्ता उस समय भाजपा की थी आज कांग्रेस की है। न भाजपा इस बीमारी से मुक्ति दिला पाई और न राजस्थान सरकार।
‘ मोब लिंचिंग का कॉरोना काल में होना चौंकाता जरूर है । देश के अनेक हिस्सों में इस तरह की अमानवीय घटनाएं अतीत में हो चुकी हैं,लेकिन एक लम्बे अरसे से शान्ति थी लेकिन न जाने कब और कैसे ये बीमारी दोबारा से उबर कर सामने आ गयी है। बेंगू की वारदात के बाद पुलिस ने फौरी कार्रवाई करते हुए 19 में से 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। यदि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार न होती तो शायद इस कार्रवाई के बजाय आरोपियों की रिहाई के लिए आंदोलन हो रहे होते। इस घटना के लिए नैतिक रूप से राज्य सरकार जिम्मेदार है ,पर अब नैतिकता की बात किसी भी सरकार के सामने की ही नहीं जा सकती। दुर्भाग्य से अब नैतिकता न समाज में है और न सरकारों के पास। नैतिकता शायद घास चरने गयी है।
गौवंश की सुरक्षा के नाम पर इसी देश में राज्य पोषित हिंसा भी हो चुकी है ,चूंकि इस समय राजनीतिक दलों के पास दूसरे काम हैं इसलिए बेंगू की वारदात मुद्दा नहीं बन पायी। भाजपा सत्ता में नहीं है और कांग्रेस सत्ता में है ,शायद इसी वजह से ये हुआ अन्यथा कोई दल राजनीति किये बिना पानी न पीता। वैसे भी खून पीने वाली सियासत पानी पीती ही कहाँ है। देश में गायों को लेकर राजनीति होती है तो शर्म आती है क्योंकि हमारे ही देश में गएँ कचरा खाने पर मजबूर है। गौवंश देश की सड़कों पर आवारगी के लिए अभिशप्त है। इस वजह से सड़क दुर्घनाएं होती हैं सो अलग लेकिन कोई गौवंश प्रेमी इन अनाथ गायों और सांडों को अपनाने के लिए आगे नहीं आता। भैंसों के वंश के लिए देश में कोई लड़ने नहीं आता।
बेंगू की घटना पर सन्नाटे की एक वजह ये भी है कि ये वारदात किसी भाजपा शासित राज्य में नहीं हुई,अन्यथा इस मसले पर हमेशा राजनीति करने वाले स्वयंसेवी संगठन अपनी प्रगतिशीलता का मुजाहिरा अब तक जरूर करा चुके होते। देश में इस समय ऐसा वातावरण बना दिया गया है कि अब गौवंश का एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना खतरे से खाली नहीं है। पता नहीं कब,कौन गौवंश रक्षक आपकी हत्या कर दे ?पुलिस बाद में हत्यारों की धरपकड़ करती रहे,इससे क्या फायदा ?जरूरत इस हत्यारी और खूनी मान्यता से मुक्ति की है । ये मानसिकता सत्ता परिवर्तन होने भर से मर नहीं जाती।
इस समय मै अमेरिका में हू। यहां गौमांस खाया जाता है लेकिन आपको हैरानी होगी कि इस देश में सड़कों पर कोई आवारा गाय या सांड नजर नहीं आता। यहां गायों का धर्म से कोई रिश्ता नहीं है । वे यदि पालतू पशु हैं तो उनका पूरा ख्याल रखा जाता है और यदि वे भोजन के रूप में इस्तेमाल की जाती हैं तो भी उन्हें आवारा भटकने के लिए नहीं छोड़ा जाता। उनके परिवहन का काम खतरनाक नहीं है । मेरे कहने का आशय ये बिलकुल नहीं है कि अमेरिका में गाय खाना उचित है ,लेकिन जाहिर है कि हम गौवंश की रक्षा का कोरा नाटक करते हैं और मनुष्यों के वंश की हत्या करने में लज्जा अनुभव नहीं करते। (यह लेखक के निजी विचार हैं)

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