भोपाल । लंबे इंतजार के बाद जिलों को प्रभारी मंत्री मिले हैं। यह प्रभारी मंत्री इन दिनों अपने- अपने प्रभार वाले जिलों का दौरा कर रहे हैं। यह दौरे मंत्रियों के साथ ही पार्टी के ही स्थानीय वरिष्ठ नेताओं व विधायकों के बीच सामंजस्य की जगह मन व मतभेद की वजह बनते जा रहे हैं। हालत यह हो गई है कि कई जिलों में तो मंत्रियों को उनका आक्रोश शांत कराने के लिए जहां हाथ तक जोड़ने पड़ रहे हैं, तो वहीं प्रभारी मंत्रियों की कार्यशैली की शिकायतें भोपाल में संगठन व सत्ता के शीर्ष तक आना शुरू हो गई हैं। इस तरह के हालात वाले जिलों के वे मंत्री हैं जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए हैं। इन प्रभारी मंत्रियों और मूल रुप से भाजपाई नेताओं के बीच अब भी अनजान नेता जैसी स्थिति बनी हुई है। यही वजह है कि प्रभारी मंत्रियों का पहला ही दौरा कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की बजाय उपेक्षा वाला तो प्रभारी मंत्रियों के लिए मुश्किल वाला साबित हो रहा है। इन दौरों में तो कई जगह सत्तापक्ष के विधायकों और प्रभारी मंत्रियों के बीच मन व मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। इसकी बानगी हाल ही में मंडला, नीमच, मंदसौर, रतलाम, के अलावा उज्जैन और सतना में सामने आ चुकी है। इन हालातों पर काबू पाने के लिए अगर सत्ता और संगठन सक्रिय नहीं हुए तो पार्टी को बड़ा नुकसान नगरीय निकाय चुनावों में हो सकता है। दरअसल प्रदेश में भाजपा की सत्ता बने हुए दो साल का समय होने को है, लेकिन अब तक भाजपा कार्यकर्ताओं को सत्ता में भागीदारी मिलना तो दूर अपनी सत्ता होने का भी अहसास नहीं हो पाया है। अफसर उनकी सुनते नहीं हैं और मंत्रियों द्वारा उन्हें महत्व नहीं दिया जाता है। यही वजह है कि इस तरह की स्थिति तमाम जिलों में बन रही है।
देवड़ा की संगठन से शिकायत
उज्जैन जैसे महत्वपूर्ण जिले का प्रभार मिलने के बाद प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा के लिए मुश्किलें खड़ी होने लगी हैं। उनके सामने इस जिले में वर्तमान व पूर्व मंत्रियों के अलावा संघ के साथ बेहतर समन्वय की बड़ी चुनौती बनी हुई है। एक भवन की अनुमति के मामले में देरी पर पूर्व मंत्री पारस जैन ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस मामले में उनके द्वारा प्रदेश संगठन से भी शिकायत की गई है।
जारी है यशोधरा के आने का इंतजार
नेमावर हत्याकांड और फिर नर्मदा माइक्रो सिंचाई परियोजना के मामले को लेकर देवास जिले की राजनीति इन दिनों बेहद गर्माई हुई है। इस बीच जहां अन्य जिलों में प्रभारी मंत्री पहुंच रहे हैं, लेकिन अब तक राजधानी के करीब होने के बाद भी प्रभारी मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया का इंतजार समाप्त नहीं हो रहा है। अभी उनका दौरा तक तय नहीं हो पाया है। पूर्व मंत्री दीपक जोशी उपचुनावी समझौते के अमल की राह देख रहे हैं, तो वहीं श्रीमंत समर्थक विधायक और भाजपा के मूल विधायकों के बीच की खाई भी पटती अब तक नहीं दिख पा रही है।
मंत्री को जोड़ने पड़े हाथ  
हाल ही में बतौर प्रभारी मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव मंदसौर गए तो वहां उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं का भारी विरोध झेलना पड़ा। दरअसल  यह कार्यकर्ता एक मामले में मंत्री द्वारा तवज्जो नहीं दिए जाने से नाराज थे। विरोध में जब वे कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए तो मामले को शांत कराने के लिए दत्तीगांव को हाथ तक जोड़ने पड़ गए।
गायब रहे विधायक: कुछ दिनों पहले ओपीएस भदौरिया अपने प्रभार वाले जिले रतलाम गए तो वहां पत्रकारों से चर्चा के दौरान उनके साथ सिर्फ एक ही विधायक दिलीप मकवाना रहे। जबकि शहर से चैतन्य कश्यप और जावरा से विधायक डॉक्टर राजेंद्र पांडे उनसे दूरी बनाए रहे। यह दोनों विधायक भाजपा के ही हैं। इसी तरह से उनके इस दौरे में कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों की बैठक से भी बड़े चेहरे नदारत ही रहे। जावरा विधायक तो कई बार खुलकर प्रशासन के खिलाफ खड़े हो चुके हैं। यही नहीं वे एक बार तो स्थानीय मेडिकल कॉलेज के खिलाफ तो उनकी नेगेटिव रिपोर्ट को पॉजिटिव बताने पर विधानसभा सत्र से रोकने की साजिश तक के आरोप लगा चुके हैं।
मंत्री के खिलाफ संगठन व सीएम से शिकायत
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने के बाद मंत्री बनाए गए बिसाहूलाल का मंडला दौरा भी कड़वी यादों से भरा रहा। उनके खिलाफ तो स्थानीय संगठन ने प्रदेश स्तर पर शिकायत तक पहुंचाई है। दरअसल दौरे में सर्किट हाउस में उनसे मिलने स्थानीय जिलाध्यक्ष और कई महत्वपूर्ण नेता पहुंचे, लेकिन बिसाहूलाल ने उन्हें कोई महत्व ही नहीं दिया। यही नहीं अफसरों को आजूबाजू बिठाकर कार्यकर्ताओं व नेताओं को पार्टी कार्यालय जाने का फरमान सुना दिया। इससे नाराज कार्यकर्ताओं ने पहले से तय उनका सम्मान समारोह तो निरस्त कर ही दिया साथ ही उनके खिलाफ शिकायत कर मोर्चा भी खोल दिया है।
जब विधायक का फूट पड़ा गुस्सा  
नीमच पहुंचने पर प्रभारी मंत्री उषा ठाकुर को पार्टी के स्थानीय जन प्रतिनिधियों के बीच जारी अदावत का सामना करना पड़ा। दरअसल इस जिले में श्रीमंत समर्थकों के भाजपा में आने के बाद से एक अलग टीम बन गई है। फिलहाल विधायक भाजपा के मूल नेताओं के समर्थक हैं लेकिन उनमें भी अंतर्विरोध भी कम नहीं है। इस दौरे में मंत्री ठाकुर की मौजूदगी में एक बैठक में मनासा विधायक अनिरुद्ध माधव मारू अपने क्षेत्र की उपेक्षा पर जमकर नाराज हो गए यही नहीं वे इस दौरान नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार पर भी निशाना साधने से पीछे नहीं रहे। इसके पूर्व भी मारू स्वास्थ्य समिति की बैठक में मनासा अस्पताल की सुविधाओं को लेकर फफक पड़े थे।

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