भोपाल । प्रदेश में पीडितों को तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए अब प्रशासन मौजूदा एक हजार ‘डायल 100’ वाहनों की संख्या एक हजार से बढ़ाकर बारह सौ करने जा रहा है। दरअसल यह निर्णय प्रशासन ने हाल ही में लगातार अपराधों व जनसंख्या में हो रही वृद्धि की वजह से लिया है। प्रशासन की मंशा हर थाने को अलग से एक डायल 100 वाहन देने की है। इसके लिए 200 करोड़ रुपए का बजट वृद्धि करने का भी निर्णय लिया गया है। दरअसल अफसरों के मुताबिक एक वाहन पर एक साल में करीब एक करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है।
यह फैसला गत दिवस मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस की अध्यक्षता में हुई परियोजना परीक्षण समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में  मौजूदा वाहनों की संख्या को कम बताते हुए कहा गया कि उनकी संख्या एक हजार की जगह डेढ़ हजार होना चाहिए। प्रदेश के आर्थिक हालातों की वजह से वित्त विभाग पांच सौ वाहन वृद्धि के लिए तैयार नहीं हुआ, जिसकी वजह से दो सौ वाहन की वृद्धि का ही तय किया गया। इसके साथ ही इन वाहनों के लिए इस साल के लिए प्रस्तावति किए गए एक हजार करोड़ के बजट में भी कटौती कर उसे 850 करोड़ रुपए करने का फैसला किया गया। अब इस बजट प्रस्ताव को कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। कैबिनेट की मुहर लगने के बाद नया टेंडर जारी किया जाएगा। गौरतलब है कि प्रदेश में करीब छह साल पहले इस सेवा के लिए 625 करोड़ का प्रावधान किया गया था। उस समय पांच सालों के लिए यह काम जीवीके कंपनी को मिला था। अब इस टेंडर की अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन फिर भी प्रदेश में नए टेंडर की जगह उसी कंपनी से ही काम कराया जा रहा है। इसकी वजह कंपनी का रसूख माना जा रहा है। कंपनी का रसूख इससे ही समझा जा  सकता है कि उसने अवधि समाप्त होने के बाद भी डायल 100 की सेवा को जारी तो रखा ही है साथ ही अगले छह माह के होने वाले भुगतान में भी तय दर में 15 फीसद तक की वृद्धि भी करा ली है। यह हाल तब हैं जबकि आधे से अधिक वाहन कंडम हालात में पहुंच चुके हैं और उसके करीब 15 फीसद तक वाहन सड़क पर ही नहीं होते हैं। समय पर टेंडर जारी नहीं किए जाने की वजह से डायल हंड्रेड में नई कंपनी व नई गाड़िया नहींं आ पायी है, जिसका फायदा मौजूदा कंपनी को मिल रहा है। कंडम वाहनों की वजह से वे कहीं भी कभी भी न केवल खड़े हो जाते हैं, बल्कि मौके पर भी पहुंचने में समय अधिक लगता है।
एक बार निरस्त हो चुका है टेंडर
फिलहाल प्रदेश में अगले छह माह तक जीवीके कंपनी की कंडम हो चुकी सफारी गाड़ियां दौड़ती रहेंगी। इसके पूर्व डायल हंड्रेड के 625 करोड़ से अधिक के टेंडर में जीवीके एमआरआई और अशोका बिल्डकॉन ने हिस्सा लिया था।
टेंडर में अशोका बिल्डकॉन का रेट एल-1 आया था। इस बीच एक शिकायत के बाद अशोका बिल्डकॉन कंपनी द्वारा छग में फर्जी दस्तावेज लगाकर टेंडर लेने को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा छग से जानकारी मांगी गई थी, लेकिन वह जानकारी आने के पहले ही उक्त टेंडर को निरस्त कर दिया गया था और वर्तमान कंपनी को अगले 6 माह तक 15 फीसदी अतिरिक्त राशि के साथ गाड़ियां चलाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी थी।

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