इंदौर विमानतल ऐसे बना देश के अन्य एयरपोर्ट में नंबर वन *
कीर्ति राणा/ इंदौरदेश में जिस तरह स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार चार बार नंबर आने से इंदौर सिरमौर बना है, उसी तरह इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतरराष्ट्रीय विमानतल भी देश के अन्य हवाईअड्डों में न सिर्फ नंबर वन बना है बल्कि यहां किए गए सुधार कार्य अन्य हवाईअड्डों के लिए प्रेरक भी बने हैं।करीब साढ़े चार साल एयरपोर्ट डायरेक्टर के रूप में काम करने वाली आर्यमा सान्याल अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी एयरपोर्ट डायरेक्टर पदस्थ की गई हैं।वहां हुए ट्रांसफर के पीछे भी उनके द्वारा यहां किए गए वो सुधार कार्य हैं जिनसे देश के अन्य एयरपोर्ट डायरेक्टरों में उनकी खास पहचान बनी है।
विमानतल कैसे नंबर वन बना इसकी पूरी कहानी सुनाई एयरपोर्ट डायरेक्टर आर्यमा सान्याल ने। करीब साढ़े चार साल पहले इंदौर पदस्थ की गईं सान्याल ने यह सब कर दिखाया करीब ढाई साल में क्योंकि दो साल तो विमानतल भी कोरोना संक्रमण से बचाव वाली सख्ती का शिकार रहा था। किए गए सुधारों की शुरुआत को याद करते हुए सान्याल ने कहा विमानतल में प्रथम प्रयोग वॉशरूम से शुरु किया, मुझे लगता था जब मैं यहां की साफसफाई से संतुष्ट नहीं हूं तो यात्री कैसे सेटिस्फाई हो सकते हैं।कर्मचारियों को विश्वास में लेकर काम शुरु किया और कुछ समय में ही वॉशरूम को फाइव स्टार जैसी सुविधा वाला बना दिया।लेडिज वॉशरूम को लेकर समस्या अलग थी, महिला यात्रियों को सेनटरी नेपकीन को लेकर परेशानी रहती थी।यहां हमने नाममात्र के शुल्क पर सेनटरी वेंडिंग मशीन लगाई।इस काम को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया और इसके बाद पूरे भारत के विमानतलों पर यह मशीन लगाई गई।तभी यह भी लगा कि लड़कियों के स्कूल सहित तंग बस्तियों में भी यह समस्या होगी, हमने फिर लड़कियों के स्कूलों में तंग बस्तियों में सेनेटरी नेपकीन बांटने का सिलसिला शुरु किया।
देश में प्लास्टिक बेन का अभियान चला किंतु सभी विमानतल पर कचरा संग्रहण के लिए प्लास्टिक के बेग उपयोग होता था, इंदौर ऐसा सबसे पहला विमानतल रहा, जहां यह बेग बंद हुआ। यात्री पानी के लिए प्लास्टिक बोतल का उपयोग करते थे, हमने बोतल क्रश करने की मशीन लगवाई, इसका उपयोग करने वालों को खानपान सामग्री में दस प्रतिशत छूट की पहली शुरुआत इसी एयरपोर्ट से हुई।
फ्लाइट से आने जाने वाले यात्रियों में दिव्यांग यात्रियों की अपनी परेशानी थी। जो बोल या सुन नहीं पाते वो अपनी परेशानी बताते भी तो हमारा ड्यूटी स्टॉफ समझ नहीं पाता था।हमने स्टॉफ की साइन लैंग्वेज ट्रेनिंग करनाई, यह ऐसा
पहला विमानतल बना जहां टीम को साइन लैंग्वेज सिखाई गई, इसका फायदा यह हुआ कि बिछड़े यात्रियों को परिवार से मिलवाने में मदद मिली।इंदौर विमानतल पर इस दौरान जितना भी अच्छा कर सके उसकी वजह इस शहर से मिली प्रेरणा और देवी अहिल्या की कृपा ही रही है।यह इंदौर मॉडल प्रचारित होना चाहिए।
रन वे की लंबाई बढ़ने पर विदेशी विमान उतर सकेंगे
एयरपोर्ट डायरेक्टर आर्यमा सान्याल का कहना था इंटरनेशनल ट्रैफिक का दबाव निरंतर बना रहे इसके लिए रनवे की लंबाई इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के मुताबिक कम से कम 4 किमी लंबा रन वे होना चाहिए, तब 777 बोइंग सहित इंटरनेशनल फ्लाइट वाले अन्य विमानों की आवाजाही आसान हो जाएगी। अभी कस्टम नोटिफाइड एयरपोर्ट होने से रन वे की लंबाई 2750 किमी है, इसलिए विदेशी विमान नहीं उतर पाते।जमीन अधिग्रहण पश्चात यह परेशानी हल हो जाएगी।
सिंधिया के विमानन मंत्री होने का लाभ मिलेगा
केंद्रीय मंत्रिमंडल में ज्योतिरादित्य सिंधिया को नागरिक उड्डयन मंत्रालय मिलने से इंदौर विमानतल की अंतरराष्ट्रीय मानक मुताबिक सुविधाएं मिलने की अधिक संभावना बढ़ गई है। सिंधिया समर्थक-जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट भी आर्यमा सान्याल से विमानतल विस्तार की जरूरतों को लेकर चर्चा कर चुके हैं। इंदौर संभागायुक्त डॉ पवन शर्मा ने भी जरूरी कार्यों की विस्तार से जानकारी देने को कहा है।
चेतन भगत को विश्वास नहीं हुआ
विमानतल पर फाइव स्टार या निजी विमानतल जैसी सुविधाओं के फीड बेक को लेकर सान्याल का कहना था लेखक चेतन भगत को तो विश्वास ही नहीं हुआ कि यह सरकारी विमानतल है।इसी तरह इंडिगो के पूर्व सीईओ आदित्य घोष हैरत में थे कि सरकारी विमानतल पर भी इतनी बढ़िया व्यवस्थाएं हो सकती हैं।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here