••• उच्च न्यायालय में जनहित याचिका ग्राह्य, सभी पक्षों को नोटिस जारी हुए
••• जवाब पेश करना है 4 अगस्त को, अब तक न राजभवन ने जवाब दिया न कुलपति ने
कीर्ति राणा /इंदौर  डॉ बीआर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर नियुक्त डॉ आशा शुक्ला इस पद पर नियुक्ति के लिए फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र तैयार करने के मामले में उलझ गई हैं।इस आशय की एक जनहित याचिका को ग्राह्य करने के साथ ही उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने संबंधितों को नोटिस जारी कर 4 अगस्त को जवाब पेश करने के लिए कहा है।
आंबेडकर विवि कुलपति के इस फर्जीवाड़े जैसा ही मामला अपर आयुक्त रहे संतोष वर्मा का भी है। वर्मा ने भी कूटरचित दस्तावेज के आधार पर खुद को आईएएस दर्शाया था। उनकी इस पोलपट्टी को उनकी ही महिला मित्र, जिसे धोखे में रख कर वर्मा ने मंदिर में शादी की थी, ने उजागर किया था। इस प्रकरण में उलझे वर्मा अब जेल की सलाखों के पीछे हैं।मात्र संविदा कर्मचारी हो और स्वयं फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र बनाकर सर्वोच्च पद हथिया ले देश के शैक्षणिक जगत में ऐसा उदाहरण महू आंबेडकर विवि मध्यप्रदेश में देखने को मिला है।
उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में धार निवासी एडवोकेट अशोक मिश्रा ने जनहित याचिका लगाई है। यह याचिका लगाने के लिए भी वे तब बाध्य हुए जब सूचना के अधिकार के तहत बार बार जानकारी मांगने पर भी आंबेडकर विवि की कुलपति डॉ आशा शुक्ला की इस पद पर नियुक्ति संबंधी जानकारी राजभवन, आंबेडकर विवि आदि से प्राप्त नहीं हुई।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजाय पॉल की अदालत में दाखिल इस याचिका को ग्राह्य किया जाकर 6 सप्ताह में राजभवन, बरकतउल्ला विवि भोपाल और कुलपति डॉ आशा शुक्ला को (4अगस्त तक) जवाब पेश करना है।
इस याचिका के संबंध में एडवोकेट अशोक मिश्रा ने बताया कि न्यायालय में कुलपति पद पर डॉ आशा शुक्ला की नियुक्ति को चुनौती दी गई है क्यों कि कूटरचित दस्तावेज और राजभवन को धोखे में रख कर इस पद के लिए खुद को योग्य बताते हुए उन्होंने इस पद पर नियुक्ति प्राप्त की है।
ये कारण गिनाए हैं याचिका में
🔹कुलपति के पद पर दस साल के अध्यापन या प्रोफेसर को ही नियुक्ति की प्राथमिकता रहती है। डॉ आशा शुक्ला न प्रोफेसर हैं न अध्यापन का अनुभव है।
🔹बरकतउल्ला विवि भोपाल में महिला अध्ययन केंद्र की संचालक के पद पर संविदाकर्मी के रूप में संचालक पदस्थ थी।वहीं से प्रतिनियुक्ति पर यहां आईं।
🔹संविदाकर्मियों को शासन 62 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त करता है जबकि (अध्यापन आदि से जुड़े) प्रोफेसर आदि को 65 वर्ष में सेवानिवृत किया जाता है।
🔹यदि डॉ आशा शुक्ला प्रोफेसर रहीं होती तो उन्हें बरकतुल्ला विवि 62 वर्ष की आयु होने पर (मार्च ‘21) रिटायर नहीं करता।वे संविदाकर्मी थीं।महिला अध्ययन केंद्र की संचालक पद से संविदा कर्मी रहते जब सेवानिवृत्त कर दी गईं तो कुलपति के पद पर कैसे बनी रह सकती हैं।
बरकतउल्ला विवि भोपाल के पूर्व कुलसचिव के जवाब से बढ़ी परेशानी
नयायालय को राजभवन और कुलपति की तरफ से अभी नोटिस का जवाब नहीं दिया गया है। बस बरकतउल्ला विवि के तत्कालीन कुल सचिव यूएन शुक्ला का जवाब मिला है। इसमें कहा गया है कि आंबेडकर विवि कुलपति पद के लिए डॉक्टर शुक्ला ने जो अनापत्ति प्रमाणपत्र लगाया है उनके (यूएन शुक्ला) द्वारा ऐसा कोई पत्र प्रदान नहीं किया गया।और न ही दिए गए पत्र पर उनके हस्ताक्षर हैं, कुलपति द्वारा पेश किए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र में उनके हस्ताक्षर भी फर्जी हैं।
नोटिस मिला है, विवि के एडवोकेट जवाब देंगे-कुलपति
आंबेडकर विवि की कुलपति डॉ आशा शुक्ला से जब चर्चा की गई तो उनका कहना था हाइकोर्ट द्वारा जारी नोटिस मिला है। विश्वविद्यालय के एडवोकेट इस संबंध में कोर्ट में जवाब पेश करेंगे।

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