नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन.  बीस साल पहले अफगानिस्तान के बामियान में इतिहास प्रसिद्ध बुद्ध प्रतिमाओं को तोड़ने वाले तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के जश्न में डूबे पाकिस्तानियों ने अपने देश में महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति तोड़ दी। यह इस बात का उदाहरण भी है कि पाकिस्तान अपने ही अतीत को किस तरह अपमानित करता है और कैसे इतिहास को भी सांप्रदायिक घृणा का शिकार बना लेता है। तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) संगठन से जुड़े एक व्यक्ति पर प्रतिमा तोड़ने का आरोप लगा है।

महाराजा रणजीत सिंह सिख साम्राज्य स्थापित करने वाले पहले राजा थे। यह साम्राज्य भारत से वर्तमान पाकिस्तान तक फैला था। उन्होंने चार दशक तक राज्य किया और उन्हें शेर-ए-पंजाब नाम से जाना गया। लाहौर किले के बाहर बनी इस नौ फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण जून 2019 में किया गया था। तब से लेकर अब तक ये तीसरी घटना है जब इस प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ की गई है। इससे पहले दो बार और प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया गया है। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है।  इस वीडियो में सफेद कुर्ता-पायजामा और टोपी पहने एक शख्स नजर आ रहा है जो इस प्रतिमा को तोड़ रहा है। प्रतिमा पर हमला करते समय शख्स नारे भी लगा रहा है।

सिख इतिहासकार, लेखक और फिल्म निर्माता बॉबी सिंह बंसल द्वारा सम्राट की 180 वीं पुण्यतिथि पर माई जिंदन हवेली में लाहौर किले में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया था। बंसल का लंदन स्थित संगठन, एस.के. फाउंडेशन, ने प्रतिमा को वित्त पोषित किया था। इसे स्थानीय कलाकारों द्वारा फकीर खाना संग्रहालय के तत्वावधान में तराशा गया था।

पाकिस्तानी अखबाऱ डॉन के मुताबिक बंसल ने खुद पहले कहा था कि प्रतिमा पंजाब के लोगों के बीच एक स्थायी दोस्ती बनाने के लिए एक परियोजना थी और यह कि मूर्ति पाकिस्तान के लोगों को उनकी नींव द्वारा सिख विरासत और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दान की गई थी। हालांकि, मूर्ति के उद्घाटन के कुछ समय बाद, बर्बरता का पहला हमला हुआ, जहां दो लोगों ने लकड़ी की छड़ से मारा, जिसके परिणामस्वरूप इसकी एक भुजा टूट गई और अन्य भागों को नुकसान पहुंचा। हमलावर पंजाब के पूर्व शासक के खिलाफ नारे लगा रहे थे और भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने का विरोध कर रहे थे। दिसंबर 2020 में दूसरे हमले में एक युवक, जिसे बाद में गिरफ्तार किया गया था, ने कांसे से बनी मूर्ति का एक हाथ तोड़ दिया। अपने पहले के लोगों की तरह, संदिग्ध ने भी पुलिस को बताया कि रणजीत सिंह की मूर्ति नहीं बननी चाहिए थी क्योंकि उसने अपने शासन के दौरान मुसलमानों पर अत्याचार किया था।

वहां मौजूद लोगों ने शख्स को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। मूर्ति तोड़ने वाला ये शख्स तहरीक-ए लब्बैक पाकिस्तान (TLP) से जुड़ा है। टीएलपी पाकिस्तान की एक राजनीतिक दल है और ये घोर इस्लामिक पार्टी के तौर पर अपनी पहचान रखता है। 2015 में इस पार्टी का गठन हुआ था, जिसे इसी साल अप्रैल में प्रतिबंधित कर दिया गया।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी व दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के प्रधान मनजिंदर सिंह सिरसा ने घटना की निंदी की है।

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