भारत के महालेखाकर के आदेश पर एन आर ए सेल बनाई गई

डॉ नवीन जोशी

भोपाल।अब प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों का उसके मूल्य सहित हिसाब-किताब रखा जायेगा। भारत के महालेखाकर ने यह कदम उठाने के लिये राज्य सरकार से कहा है जिस पर राज्य के वित्त विभाग ने नेचुरल रिसोर्सेज अकाउण्टिंग-एनआरए सेल का गठन कर दिया है। यही सेल अब यह कार्य करेगी।
प्राकृतिक संसाधनों में राज्य की भूमि, जल, ऊर्जा आदि सभी संसाधन आयेंगे। यह सेल इन संसाधनों को निर्धारित प्रपत्र में दर्ज करेगी तथा इनका मूल्य भी दर्ज करेगी। इसमें भूमि से खेती और खनन के जरिये होने वाली आय तथा पर्यावरणीय संसाधनों से आय को भी दर्ज किया जायेगा। यह एनआरए सेल आयुक्त कोष एवं लेखा लोकेश कुमार जाटव की अध्यक्षता में गठित किया गया है। इसके सदस्य सचिव योजना विभाग के अवर सचिव अशोक कुमार मालवीय नियुक्त किये गये हैं जबकि सदस्यों में शामिल हैं : सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख आशुतोष तिवारी, जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता जीपी सोनी, वन विभाग के एपीसीसीएफ संजय शुक्ला, एप्को के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डा. राजेन्द्र कुमार जैन तथा खनिज विभाग के सुपरीन्टेन्डिंग जियोलाजिस्ट विनोद बागरे।
उक्त सेल का मुख्यालय भोपाल रहेगा तथा यह सेल प्राकृतिक संसाधनों का लेखा रखने की पध्दति का निर्धारण करेगा। साथ ही इन प्राकृतिक संसाधानों से होने वाली आय का भी निर्धारण करेगा। हर दो माह में इसकी बैठक आयोजित की जायेगी। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार बाजार से ऋण लेने के दौरान यह घोषित करती रही है कि उसके पास इतने ज्यादा प्राकृतिक संसाधन एवं अन्य सम्पत्तियों हैं जिससे वह अपना उधार आसानी से चुका सकती है। यह प्राकृतिक संसाधन कितना है और इसका मूल्य कितना है, यही अब इस सेल के जरिये ज्ञात किया जायेगा तथा यह सेल इसे सार्वजनिक भी करेगा।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि कैग ने प्राकृतिक संसाधनों का लेखा रखने के लिये एक सेल गठित करने के निर्देश दिये थे। यह सेल गठित कर दिया गया है तथा अब यह कैग के मार्गदर्शन में आगे की कार्यवाही करेगा।

केंद्र एवं राज्य के निगम-मण्डल भी स्टाम्प बेच सकेंगे

प्रदेश में अब ऐसे निगम-मण्डल या कंपनियां जिनमें केंद्र और राज्य सरकार के कम से कम 51 प्रतिशत शेयर हैं, स्टाम्प बेच सकेंगे। इसके लिये राज्य सरकार ने 79 साल पहले बने मप्र स्टाम्प नियम 1942 में बदलाव कर दिया है।
इस नये प्रावधान से उक्त निगम-मण्डल एवं कंपनियां स्टाम्प क्रय करके अपने पास रख सकेंगी तथा भूमि आवंटन, एग्रीमेंट या अन्य योजनाओं में लगने वाले स्टाम्प को स्वयं से हितग्राही को प्रदान कर सकेंगी तथा हितग्राही को इसके लिये बाहर से स्टाम्प क्रय करके लाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। कई बार बाहर से स्आम्प क्रय करने के लिये वेण्डरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं तथा उसे निर्धारित मूल्य से ज्यादा कीमत पर क्रय करना पड़ता था। इसी कारण से यह नया प्रावधान किया गया है। ये निगम-मण्डल एवं कंपनियां स्टाम्प को उसके निर्धारित मूल्य पर ही क्रय करेगी तथा इसी निर्धारित मूल्य पर हितग्राही को बेच सकेगी और इसमें कोई कमीशन नहीं होगा। बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं तथा डाकघरों को पहले से ही राज्य सरकार ने यह सुविधा दे रखी है तथा अब इसमें सरकारी निगम-मण्डल एवं कंपनियां भी शामिल कर दी गई हैं।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि केंद्र एवं राज्य सरकार के निगम-मण्डलों एवं कंपनियों को भी स्टाम्प क्रय कर उसे बेचने के अधिकार दिये गये हैं। इससे इनके हितग्राहियों को बाहर से स्टाम्प क्रय करने के लिये यहां-वहां नहीं जाना पड़ेगा।

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