मास्को। अफगानिस्तान(Afghanistan) में तालिबान (Talibanj)  राज कायम होते ही उससे सारे देशों की सुरक्षा पर गंभीरता का खतरा पैदा हो गया है। तालिबान (Taliban)  के आते ही अफगानिस्तान में अब आईएसआईएस (ISIS)  आतंकी (terrorist) खुलकर सक्रिय हो गए। अफगान-रूस और तजाकिस्तान बार्डर (Tajikistan border)  पर 10 हजार से भी ज्यादा आईएस आतंकियों का जमावड़ा लगने से खतरा बढ़ गया है। इसको लेकर रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने बार्डर पर सेना और टैंक भी भेज दिए। पुतिन ने आईएस आतंकियों को चेताया है कि अगर हमला किया तो बख्शेंगे नहीं।

हाजरा समुदाय के 300 परिवारों को 9 दिनों में पंजशीर छोडऩे का फरमान
अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकियों द्वारा हाजरा समुदाय पर लगातार अत्याचार जारी है। 100 से ज्यादा हाजरा समुदाय के लोगों की हत्या करने के बाद तालिबान ने पंजशीर घाटी में 300 परिवारों को 9 दिन के अंदर घाटी छोडऩे का फरमान जारी कर दिया है। साथ ही चेतावनी दी कि घर नहीं छोड़ा तो गंभीर परिणाम भुगतना होंगे।

अफगानिस्तान को 470 करोड़ रुपए की मदद देगा अमेरिका
तालिबानी (taliban) कब्जे के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान के लोगों को आर्थिक मदद देने के लिए 64 मिलियन डॉलर (करीब 470 करोड़ रुपए) की मानवीय सहायता देने का ऐलान किया और कहा कि आगे इस देश की जमीनी स्थिति का आकलन कर भविष्य में और मदद देने पर विचार होगा। अमेरिका के अलावा संयुक्त राष्ट्र ने भी अफगानिस्तान में मानवीय अभियान का समर्थन करने के लिए दो करोड़ अमेरिकी डॉलर देने की घोषणा करते हुए कहा कि अफगानिस्तान के लोगों को भोजन, दवा, स्वास्थ्य सेवा, सुरक्षित पानी, स्वच्छता और सुरक्षा की तत्काल आवश्यकता है।

देश में काम ठप, कैश की कमी
अफगानिस्तान के लोगों का कहना है कि उनके पास खाने तक के पैसे नहीं हैं, इसलिए वो घर में रखे सामान को बाजार में लाकर बेच रहे हैं। देश की बैंकों से प्रति हफ्ते 200 डॉलर निकालने की अनुमति है, लेकिन उसके लिए लोगों को लंबी लाइन में लगकर मशक्कत करना पड़ती है।

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