अशोक सोनी 

मुंबई में हुए बलात्‍कार और हत्‍या के मामले में क्‍या राजनीति की जानी चाहिए और क्‍या इस प्रकार की घटनाओं को आरोपी के शहर और प्रदेश से जोडकर संबोधित किया जाना चाहिए, अगर इसका जवाब नहीं में है तो राजनेताओं को यह बात कौन समझाएगा कि वे जो कह या कर रहे है वह पूर्ण्‍ रूप से गलत है। सोचने वाली बात है कि क्‍या अन्‍य प्रदेशों में इस प्रकार की वारदातें नहीं हो रही है और जिस प्रदेश में बलात्‍कार जैसे जघन्‍य अपराधों में मंत्रियों को त्‍यागपत्र देने पडें हो उस प्रदेश की सत्‍तारूढ पार्टीके प्रवक्‍ता को इस प्रकार की बात कहने का तो कोई अधिकार ही नहीं बनता है।

बात मुंबई में हुए बलात्‍कार और हत्‍या की जघन्‍य वारदात को लेकर हो रही है और यहां शिवसेना के प्रवक्‍ता संजय राउत की हो रही है जो कि शिवसेना के मुख पत्र सामना के संपादक भी है और उन्‍होंने इस वारदात को इसलिए जौनपुर पैटर्न लिख दिया क्‍यों कि आरोपी जौनपुर उत्‍तर प्रदेश का निवासी  है, क्‍या किसी एक व्‍यक्ति द्वारा किये गए अपराध को लेकर उसके शहर और प्रदेश से जोडकर देखा जाना चाहिए आश्‍चर्य की बात तो यह है कि शिवसेना के ये सांसद व प्रवक्‍ता अपने बडबोले पन के लिए कुख्‍यात है। दूसरी बात मुंबई में रहने और आने वाले परप्रांतीयों के प्रति उनकी और शिवसेना की नफरत जग जाहिर है ओर ये ऐसे मौके की तलाश में रहते हे कि कब उन्‍हें परप्रातियों के प्रति जहर उगलने का मौका मिले, दुखद स्थिति यह है कि ये है ये हर मामलेमें राजनीति करने के आदि हो चुके हैं।

अगर बात यह करे कि महाराष्‍ट जैसे राज्‍य के महानगर मुंबई मे आने और मुंबई के विकास में अपना सौ प्रतिशत देने को तत्‍पर रहते हैं उनके प्रति इतनी नफरत क्‍यों है। अगर आप अपराध को लेकर इतने चिंतित है तो अपराधी की जाति और मजहब, उसके मुल प्रदेश को निशाना क्‍यों बनाया जाता है। हर अपराधी के खिलाफ एक सी आवाज बुलंद करें, मुंबई में हुई इस वारदात के बाद मुंबई के ही एक उपनगर में एक और घटना घटी जिसमें एक सात साल की मासूम बच्‍ची के साथ उसके पडोस में  रहने वाले मुस्लिम प्रौड 51 वर्षीय द्वारा तीन साल से बलात्‍कार किये जाने का मामला सामने आया लेकिन शिवसेना के प्रवक्‍ता संजय राउत के मुंह में शायद दही जम गया था इसलिये वे इस घटना पर चुप्‍पी साध कर बैठ गए आखिर क्‍यो कया डर गए संजय राउत। बलात्‍कार जैसे मामलों में अपराधियों को जितना जल्‍दी हो उतना जल्‍दी सजा दिलवाई जाना चाहिए, सरकारे राज्‍य की हों या केंद्र की इन मामलों में विशेष न्‍यायालयों का गठन कर आरोपियों को एक माह में सजा देने की व्‍यवस्‍था होनी चाहिए और ऐसे मामलों नेताओं को राजनीति से उपर उठकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की जानी चाहिए अपराधी चाहे नेता हो या अफसर या फिर आम आदमी किसी भी अपराधी को बचाने या ऐेसे मामलों में राजनीति करने का किसी को मौका नहीं दिया जाना चाहिए।

चुने हुए राजनेताओं की भी यह जवाबदारी है कि वे अपराधों पर नियंत्रण के लिए मंथन करें और अपराधियों को सजा दिलवाए न कि स्‍वयं के स्‍वार्थ के लिए ऐसे अपराधियों को बचाने का प्रयास करें, जनता ने इन नेताओं को चुना है तो इन्‍हें भी जनता के प्रति जवाबदेह बनना होगा। वर्तमान में तो हालात ऐसे है कि राजनीतिक दलों के नेता खुले आम अपराधियों का समर्थन करते या चुनाव मैदानमें उन्‍हें उतारने की घोषणा करते नजर आ रहे है और जब ये अपराधी लोकसभा और विधानसभा में जीत कर जाएंगे तो ये क्‍या करेंगे इस बात को जनता को भी समझ लेना चा‍हिए और सोच समझ कर इन्‍हें वोट करना चाहिए, अगर जनता इन मामलों में लापरवाह बनी रही तो देश में अपराध कम नहीं होंगे बल्कि ये बढेंगे। चुनाव आयोग को भी ऐसे लोगो के लोकतंत्र में प्रवेश पर रोक लगाने के लिए कदम उठाना चाहिये चाहे वे आर्थिक मामलो में अपराधी हो या अन्‍य अपराधों में लिप्‍त रहे है, अपराधियों के चुनाव लडने पर ही रोक लग जाना चाहिए ताकि राजनीति में घुसी  इस प्रकार की गंदगी का सफाया किया जा सके।

एक  अन्‍य महत्‍वपूर्ण बात यह है कि अभिव्‍यक्ति की आजादी के नाम पर देश और समाज में जहर  घोलने वालों को इस बात का अहसास होना चाहिए कि वे क्‍या बोल रहे है समाज में वैमनस्‍य उत्‍पन्‍न करने वाले बयानों पर भी रोक लगाने की आवश्‍यकता है, आज हर कोई अधिकार की तो बात करता है लेकिन क्‍या उसे अपने कर्तव्‍यों का ख्‍याल है, जो व्‍यक्ति अपनी जवाबदारी को नहीं पहचाने उसे अपने अधिकार की बात करने का कोई हक या अधिकार नहीं होना चाहिए फिर चाहे वह व्‍यक्ति कोई भी क्‍यों न हो। यह इसलिए भी जरूरी है क्‍यों कि ये देश कश्‍मीर से कन्‍या कुमारी तक एक है किसी भी व्‍यक्ति का या किसी भी राजनीतिक दल का किसी प्रदेश पर एकाधिकार नहीं है यह बात स्‍पष्‍टहो जाना चाहिए1 देश का और उसमें रहने वाले सभी लोगों का हर प्रदेश के विकास में महत्‍वपूर्ण योगदान है।

जहां तक बात अपराध और अपराधियों की है तो यह जग जाहिर है कि अपराधी हर जगह, हर प्रदेश में मौजूद है इस बात को समझना आवश्‍यक है कि अगर हम अगर हम किसी अपराधी या अपराध को किसी स्‍थान से  जोडने का प्रयास करेंगे तो दूसरे भी आपको उसी प्रकार संबोधित करेंगे, संजय राउत ने जो अपराध को जौनपुर पैटर्न बताया तो दूसरे भी कह सकते है कि महाराष्‍ट में जो जनता को लूटने का पैटर्न है उसकी जनक शिवसेना है क्‍यों कि जिस प्रकार महाराष्‍ट में नेताओं के कारनामें उजागर हो रहे हैं उसे महाराष्‍ट पैटर्न ही कहा जाएगा, क्‍यों कि वहां पर लूट चाहे सहकारी बैंको की हो या व्‍यवसायियों से करोडों रुपए की वसूली की एक के बाद एक अपराधियों के नाम सामने आते जा रहे है। मामला चाहे आर्थिक, हो या हत्‍या या बलात्‍कार का महाराष्‍ट किसी से कम नहीं है। महाराष्‍ट सरकार मुंबई आने वाले परप्रातियों के पंजीयन की बात कह रही है क्‍योंकि उसका शायद यह मानना है कि यहां आने वाले ही अपराध करते है, लेकिन क्‍या सरकार को पता है कि महाराष्‍ट और विशेष्‍ कर मुंबई में रहने वाले क्‍या किसी प्रकार का अपराध नहीं करते हैं इस पर भी विचार किया जाना चाहिए।

 

 

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