भोपाल. इंडिया डेटलाइन. मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और साध्वी उमा भारती मध्यप्रदेश में अपने टेड़े बोलों और बयानों के कारण चर्चा में बनी हैं। भाजपा शासित प्रदेशों में बदलाव के इस दौर में उमा भारती के पीछे किसी राजनीति या केन्द्रीय इशारे को प्रदेश भाजपा के नेता ‘डी-कोड’ करने (समझने)  की कोशिश कर रहे हैं। उमा भारती ने केवल चेतावनियां-धमकी दे रही हैं  बल्कि अगले महीने सड़क पर उतरकर शराबबंदी के लिए अभियान चलाने जा रही हैं।

पिछले दो-तीन दिन से उमा भारती एक वीडियो में नौकरशाही को लेकर विवादास्पद बातें कहने के लिए चर्चा में रहीं जिसके बारे में सोमवार को उन्होंने खेद जताया। पर उन्होंने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को एक चिट्ठी लिखकर केवल यही नहीं कहा कि वह अपनी भाषा सुधारेंगी, बल्कि दिग्विजय सिंह को भी भाषा सुधारने की सलाह दे डाली। उन्होंने दिग्विजय सिंह को लिखकर कहा-‘आपने मेरे बयान पर उचित प्रतिक्रिया दी है। मुझे अपनी ही बोली भाषा का गहरा आघात लगा है। मैं आपके पीछे पड़ जाती थी कि दादा संयत भाषा नहीं बोलते, यह तो वैसे ही हो गया जैसा रामायण में लिखा है-कर उपदेश कुशल बहुतेरे, सो आचरही ते नर न घनेरे। मैं आगे से अपनी भाषा सुधार लूंगी, आप भी ऐसा कर सकें तो कर लें।’ उमा भारती का वीडियो सामने आने के बाद दिग्विजय सिंह ने उनसे माफी की मांग की थी।

उमा भारती ने कहा था-नौकरशाही उनकी चप्पल उठाती है

उमा भारती ने कहा था कि ब्यूरोक्रेसी हमारी चप्पल उठाती है। ब्यूरोक्रेसी सरकार चलाती है, यह फालतू बात है। नेता से पहले बात होती है, फिर फाइल चलती है। हम उन्हें पोस्टिंग देते हैं, प्रमोशन देते हैं। उनकी औकात क्या है। उमा भारती ने यह बात उनसे मिलने के लिए आए पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधिमंडल के सामने यह बात कही थी।

शराबबंदी के लिए सड़क पर उतरने की घोषणा

पिछले यानी सितंबर के दूसरे सप्ताह में ही उमा भारती शराबबंदी के लिए सड़क पर उतरने की घोषणा कर चुकी हैं। उन्होंने सरकार को15 सितंबर तक का समय दिया है। उनके इस ऐलान से वैसे ही भाजपा की सत्ता में हलचल पैदा हो गई, लेकिन इस मामले में भी वह कठोर भाषा में बोलीं-कहा कि प्रदेश में कई अपराधों का कारण शराब पीना है। उनके बयानों की भाषा को बारीकी से पढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा-मध्यप्रदेश में शराबबंदी आसान है (क्योंकि शिवराज सिंह व अध्यक्ष वीडी शर्मा दोनों इसमें समर्थ हैं।) इसका आशय तो यह है कि भाजपा के दोनों शीर्ष नेताओं के समर्थ होने के बावजूद उन्हें सड़क पर उतरना पड़ रहा है।

लट्ठ से शराबबंदी, कप्तान सिंह सोलंकी की समझाइश

उमा भारती ने कहा कि जनजागरूकता से नहीं, लट्ठ से होगी शराबबंदी। जिसके बाद कांग्रेस नेता और दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह ने कहा कि उमा भारती लट्ठ उठाएं, वे साथ चलेंगे। लेकिन भाजपा के भीतर ही भारती की भाषा को सही नहीं माना गया। पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने तो ट्वीट कर समझाइश दे डाली-लोकतंत्र जनमत से चलता है, लट्ठ से नहीं। कानून से भय पैदा किया जा सकता है, विचार नहीं बदले जा सकते। संस्कारों से विचार बदलने की जरूरत है। हालांकि उमा भारती ने ट्वीट कर लट्ठमारी का बचाव किया था-मुझे लट्ठ शब्द का प्रयोग कने का जरा भी रंज नहीं है क्योंकि सरकार के द्वारा सख्त कानून या महिलाओं का शक्तिशाली अभियान ही शराबबंदी करवाएगा। लट्ठ से शराबबंदी को लेकर बाद में उन्होंने सफाई दी कि लट्ठ से उनका मतलब सख्ती से था। सख्त कानून सरकार कैसे लाएगी। वह जनदबाव को देखकर कानून लाएगी

पहले भी शराबबंदी की तिथि मुकर्रर कर चुकी हैं

उमा भारती पिछले कुछ समय से प्रदेश में शराबबंदी के खिलाफ आवाज उठा रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को पत्र लिखकर 8 मार्च महिला दिवस के मौके से शराबबंदी के लिए अभियान चलाने की बात कही थी। इस पर विपक्ष भी उनके समर्थन में खड़ा हो गया था। लेकिन बाद में उन्होंने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। राज्यसभा की सीट के लिए चुनाव के समय उन्होंने फिर यह मुद्दा गरमा दिया है। हालांकि एकमात्र सीट पर केन्द्रीय मंत्री एल मुरुगन को उम्मीदवार बना दिया गया। कुछ लोग यह सवाल उठाते हैं कि उमा भारती खुद मुख्यमंत्री थीं तब शराबबंदी की घोषणा कर सकती थीं। चुनाव के समय ही यह याद क्यों आती है।

क्या उप्र के चुनाव के लिए

हालांकि राजनीति और उस पर नजर रखने वालों का एक वर्ग जहां इसे हाल के राज्यसभा चुनाव से जोड़कर देख रहा था,वहीं कुछ लोग मानते हैं कि जल्दी ही आने वाले उत्तरप्रदेश चुनाव के मद्देनजर उन्हें सक्रिय किया गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इससे ध्यान हटाकर बड़ी लकीर खींचने का काम शुरू कर दिया है। उन्होंने प्रदेश में सुराज अभियान की शुरूआत की है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here