राजसात एक्सकेवेटर वाहन नीलाम होगा

डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।प्रदेश के अनूपपुर जिले में रेत का अवैध खनन करने वाले ठेकेदार से न केवल 28 करोड़ 31 लाख 70 हजार रुपये अर्थदण्ड वसूला जायेगा बल्कि अवैध खनन के दौरान राजसात हुण्डई कंपनी के एक्सकेवपेटर वाहन को नीलाम भी किया जायेगा।
दरअसल ठेकेदार कमलेश सिंह चंदेल को अनुपपुर जिले के ग्राम चचाई में सोन नदी पर 5 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2020 तक ठेका स्वीकृत था। खनिज निरीक्षक ने 8 जुलाई 2017 को निरीक्षण में पाया कि स्वीकृत क्षेत्र से बाहर बाबाकुटी शिथिलीकरण टैंक के समीप 97 हजार 390 घनमीटर रेत का अवैध उत्खनन एक्सकेवेटर वाहन द्वारा कराया गया जिस पर वाहन जब्त कर 28 करोड़ 31 लाख 70 हजार रुपये अर्थदण्ड लगाया गया। 5 मार्च 2019 को जिला कलेक्टर ने इस अर्थदण्ड को मंजूरी प्रदान कर दी। इसके खिलाफ संचालक खनिज को 9 अप्रैल 2019 को अपील की गई जिसे पुन: कलेक्टर अनूपपुर के पास निराकरण हेतु भेजा गया। लेकिन इस बार भी कलेक्टर ने अर्थदण्ड वसूलने एवं राजसात वाहन नीलाम करने के आदेश दिये। इस बार ठेकेदार ने राज्य शासन के समक्ष अपील की परन्तु राज्य शासन ने भी इस अपील को निरस्त कर दिया है। इससे ठेकेदार से अब अर्थदण्ड की वसूली भी होगी और राजसात वाहन की नीलामी भी की जायेगी।

सतना के सहायक प्राध्यापक का प्रकरण चेतावनी देकर खत्म किया
राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने सतना जिले के जैतवारा में स्थित शासकीय महाविद्यालय के राजनीति शास्त्र के सहायक प्राध्यापक डा. अमिताभ पाण्डेय का प्रकरण उन्हे चेतावनी देकर खत्म कर दिया है।
दरअसल डॉ. पाण्डेय के विरूद्ध यौन शोषण के संबंध में दर्ज आपराधिक प्रकरण एवं उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में अनियमितता किए जाने के कारण विभाग के आदेश 20 फरवरी 2018 द्वारा डॉ. पाण्डेय को निलंबित कर उनके विरूद्ध 1 मई 2018 को आरोप पत्रादि जारी किए गए। डॉ. पाण्डेय को विभागीय आदेश 2 अगस्त 2018 द्वारा निलंबन से बहाल किया गया। जांचकर्ता अधिकारी द्वारा 14 अक्टूबर 2020 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जिसमें डॉ. पाण्डेय पर अधिरोपित आरोप प्रमाणित पाए गए। इस पर डॉ. पाण्डेय से जवाब मांगा गया जो उन्होंने 23 नवम्बर 2020 को दिया।
डॉ. पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत जवाब में पाया गया कि न्यायालय द्वारा निर्णय दिनांक 17 जुलाई 2013 के माध्यम से डॉ. पाण्डेय को यौन शोषण के आरोपों से दोषमुक्त किया गया है। वर्ष 2007-08 के दौरान मूल्यांकन कार्य में की गई अनियमितता के लिए डॉ. पाण्डेय को कुलसचिव, रीवा दवारा 9 अगस्त 2008 के आदेश से 5 वर्षों के लिए परीक्षा कार्य से प्रतिबंधित किया गया था।
परीक्षणोपरांत विभाग द्वारा डॉ. पाण्डेय को परिनिंदा की शास्ति अधिरोपित करने का निर्णय लेकर लोक सेवा आयोग की सहमति चाही गयी। लोक सेवा आयोग के पत्र दिनांक 28 जुलाई, 2021 द्वारा प्रकरण में परिनिंदा शास्ति के स्थान पर चेतावनी देकर प्रकरण समाप्त करने का मत दिया गया। इस पर अब उच्च शिक्षा विभाग द्वारा डॉ. पाण्डेय को चेतावनी देते हए प्रकरण इसी स्तर पर समाप्त कर दिया है।

राजनैतिक संदेश प्रसारित करने की शिकायत चेतावनी देकर समाप्त किया

राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने दो प्राध्यापकों के खिलाफ अपने मोबाईल से राजनैतिक संदेश प्रसारित करने की शिकायत चेतावनी देकर समाप्त कर दिया है।
शासकीय पीजी कालेज खरगौन की प्रोफेसर श्रीमती शैल जोशी एवं प्रोफेसर अशोक गुप्ता के खिलाफ यह शिकायत मिली थी जिस पर इंदौर के उच्च शिक्षा अतिरिक्त संचालक ने जांच के लिये तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। जांच समिति को दोनों प्रोफेसरों ने कहा कि उनके परिवारजनों ने ये राजनैतिक संदेश उनके मोबाईल से प्रसारित कर दिये थे। जांच समिति ने अपने अभिमत के साथ प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस पर विभाग ने अब दोनों प्रोफेसर को चेतावनी देकर प्रकरण समाप्त कर दिया है।

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