हम सुधरें, हिन्दी सुधारें

   मंजुला भूतड़ा

हम प्रतिवर्ष हिन्दी दिवस मनाते हैं, बहुत सारी बातें हिन्दी की, बहुत सारे आयोजन हिन्दी दिवस उपलक्ष्य में आयोजित करते और शामिल होते हैं।  यह भी सच है कि हिन्दी के लिए मात्र एक दिवस नहीं, हिन्दी को जीवन की हर अभिव्यक्ति में सम्मिलित करना होगा।साथ ही प्रचार प्रसार भी करना होगा।हम जुट जाएं तो सब कुछ सम्भव है। जहां हिन्दी के उपयोग में त्रुटि हो उस के लिए आगाह करना चाहिए। जगह जगह शहर में लगे, दुकानों पर लगे बोर्ड हिन्दी में लिखे हैं परन्तु त्रुटि पूर्ण।

जैसे ही परिस्थितियां सामान्य हों, हम इसमें सुधार की पहल करें।

यह भी अक्षरशः सत्य है कि अंग्रेजी के बिना काम मुश्किल है,देश विदेश में अपनी प्रगति के लिए यह आवश्यक भी है। हम हर भाषा का सम्मान करते हैं।निश्चित ही जहां हिन्दी ही उपयुक्त हो वहां हिन्दी ही होनी चाहिए। हिन्दी भारत की भाषा है, उसे राष्ट्र भाषा बनाना है।

जैसे हिंदी डे नहीं हिन्दी दिवस

इसी तरह बहुत जगह हम अनावश्यक अंग्रेजी उपयोग कर लेते हैं।

कहते हैं मीटिंग है तो क्यों न कहें सभा है।

ऐसे अनेक उदाहरण हैं।

यही कहूंगी–

हम सुधरें, हिन्दी सुधारें


क्यों न बोलूँ मैं हिन्दी

डॉक्टर रजनी भंडारी

क्यों न बोलूँ मैं हिन्दी मैं हिंदुस्तानी हूँ

क्यों न लिखूँ मैं हिन्दी मैं हिंदुस्तानी हूँ

क्यों न गाऊँ मैं इसके गुणगान मैं हिंदुस्तानी हूँ

मुझे गर्व है मैं हिंदुस्तानी हूँ

हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा घोषित होनी चाहिये,

प्रेरणा सेन्द्रे

जैसे नाम से व्यक्ति की पहचान होती उसी तरह भाषा  से देश और राष्ट्र की पहचान होती है। संविधान के अनुसार सितंबर सन उन्नीस सौ उनन्चास को , हिन्दी को राजभाषा घोषित किया गया। तभी से चौदह  सितंबर को , हिन्दी दिवस के रुप में मनाया जाता है।         , हिन्दी राजभाषा के रूप में सरकारी कामकाज में स्वीकार तो है,  पर राष्ट्रभाषा के रूप में पूरे देश में नहीं बोली जा रही है। अड़सठ  साल के बाद भी , हिन्दी राजभाषा से राष्ट्रीय भाषा नहीं बन पा रही है।  विश्व , हिन्दी दिवस दस  जनवरी उन्नीस सौ पिचहत्तर  को नागपुर में हुआ था।  भारत में , हिन्दी बोलने समझने वाले सत्तर  करोड़ लोग हैं।  हिंदी चीन की मैंडरिन के के बाद दुनिया की दूसरी भाषा है।

       कुछ कदम यदि भारत शक्ति से उठाएगा तो , हिन्दी को राजभाषा से राष्ट्रीय भाषा बदल सकता है।जैसे…….

एक – दस  राज्य जैसे दिल्ली, यूपी,  एमपी, राजस्थान,  जैसे त्रिभाषा सूत्र यानि  मातृ भाषा, अंग्रेजी और दूसरे राज्य भाषा पढ़ाने का होना चाहिए। दो -, हिन्दी की सरकारी शब्दकोश और दस्तावेजों से कठिन शब्द को हटाए बिना, , हिन्दी का विकास नहीं ।

तीन – बारहवीं में , हिन्दी भाषा का साहित्य और अनिवार्य भाषा बनानी चाहिए

चार -स्कूलों में लैपटॉप कंप्यूटर पर हिन्दी  कीबोर्ड  का उपयोग करवाना चाहिए। ।

पाँच – यदि हम हिन्दी को बढ़ावा नहीं देंगे तो अंग्रेजी, सर पर सवार होकर अंग्रेजो का गुलाम बन जाएंगे।

छः  इंटरनेट पर हिन्दी की सामग्री  ना मिलने वाली अंग्रेजी वढ रही तो इंटरनेट को हिन्दी में बोलना चाहिए।

सात -अंग्रेजी की तरह हिन्दी में शब्दों के कई तरह लिखने का शब्दकोश हिन्दी से करीब लाएगा।

आठ -सरकार को हिन्दी के अनुकूल तकनीकी विकास में दिलचस्पी बढ़ाना चाहिए इन प्रयासों से हम राजभाषा हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाकर भारत की पहचान बना सकते हैं।

बदलो चाहे जितना पर

अपनी पहचान ना खोने दो,

मिलकर हिन्दी को अपनाओ,

 राष्ट्रभाषा घोषित होने दो।।

हिंदुस्तान की शान है  “हिन्दी”

हेमलता शर्मा ‘भोली बैन’

हिन्दी  मां भारती के भाल की बिंदी,

रक्षा इसकी अब करना है ।

सब भाषाओं से उपर इसका,

हमको तो अब रखना है ।।

गौरव‌ और अभिमान ये देश का,

हिन्दी  दिवस तक नहीं सीमित इसे रखना है ।

क्षेत्रवाद की होली जलाकर, हिंदुस्तान को जिंदा रखना है ।।

देवभाषा से उद्गम इसका,

मैकाले का दमन अब करना है ।

देश-संस्कृति की वाहक  हिन्दी, अक्षुण्ण इसे अब रखना है ।।

एक सूत्र में राष्ट्र को बांधती,

विश्व गुरु पुनः अब बनना है ।

हिंदुस्तान की शान है हिन्दी,

सम्मान बनाये रखना है ।।

देश की सीमा से बाहर अब,

संवर्धन इसका करना है ।

विदेशियों के मुख पर हो हिन्दी, परिदृश्य ऐसा अब करना है।।

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