नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन.

‘फेक न्यूज’ के दौर में इस बार का नोबेल शांति पुरस्कार झूठी खबरों के खिलाफ लड़ने वाले किसी पत्रकार को दिया जा सकता है। नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामों का चयन करने वाली ओस्लो स्थित शांति पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार वर्ष 2020 के पुरस्कारों की घोषणा में पत्रकारों को संरक्षण देने की दृष्टि से इस पर विचार किया गया है। इसमें वैश्विक स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों की संस्था ‘रिपोर्टर्स विदाउट बार्डर्स’ का नाम सबसे ऊपर है। पुरस्कार आने वाले 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएँगे। 

नोबेल शांति पुरस्कार क्या है और यह किसे दिया जाता है ? (What is Nobel Peace Prize and Who is it Given ?)

नोबेल शांति पुरस्कार, शांति का प्रतीक है. अतः यह उन लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने विश्व शांति के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर अपना योगदान दिया हो, एवं राष्ट्रों के बीच बिरादरी के लिए सबसे अधिक या सबसे अच्छा काम किया हो. ऐसे व्यक्ति दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान बना लेते हैं. इन्हें सम्मान देने के लिए ही नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाता है.

नोबेल शांति पुरस्कार का इतिहास (History of Nobel Peace Prize)

नोबेल शांति पुरस्कार की शुरुआत नोबेल की मृत्यु के 5 साल बाद यानि सन 1901 में हुई. पहली बार सन 1901 में यह पुरस्कार उन लोगों के प्रयासों का सम्मान करने के लिए दिया गया था, जो दुनिया में शांति और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत थे. नोबेल शांति पुरस्कार का इतिहास पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है. किन्तु यह पुरस्कार सबसे पहले सन 1901 से सन 1904 तक एट्रियम में, सन 1905 से सन 1946 तक नोर्वेजियन नोबेल इंस्टिट्यूट में और फिर सन 1947 से सन 1989 तक ओस्लो फैकल्टी ऑफ़ लॉ में दिया गया था. इसके बाद सन 1990 से अब तक हर साल ओस्लो सिटी हॉल में नोबेल शांति पुरस्कार समारोह आयोजित किया जा रहा है, और यहीं नोबेल शांति पुरस्कार के विजेताओं को सम्मानित किया जाता है. अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के अनुसार यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले व्यक्ति का चयन नॉर्वे की संसद द्वारा चुनी गई 5 लोगों की समिति द्वारा किया जाता है. नोर्वेजियन नोबेल समिति के अनुसार नोबेल की मित्रता बर्था वोन सूटनर से थी, जोकि एक शांति कार्यकर्त्ता और बाद में पुरस्कार प्राप्त करने वाले व्यक्तियों में से एक थे. उन्होंने शांति को एक श्रेणी के रूप में शामिल करने के नोबेल के फैसले को प्रभावित किया था.

दूसरी तरफ कुछ नोबेल विद्वानों का कहना है, कि विनाशकारी शक्तियों के विकसित होने से होने वाली क्षति की पूर्ती के लिए विश्व शांति के रूप में नोबेल ने इस पुरस्कार की शुरुआत की थी. उन विद्वानों का यह भी कहना था, कि उनके अविष्कारों में डायनामाइट और बैलेसाईट शामिल थे, दोनों का उपयोग उनके जीवनकाल के दौरान हिंसक रूप से किया गया था. दरअसल सन 1880 के दशक में कुछ युद्ध हुए थे, उस दौरान इनकी काफी अहम भूमिका थी. इसके इतिहास में यह भी स्पष्ट नहीं है, कि नोबेल ने नॉर्वे में इस पुरस्कार को शुरु करने का फैसला क्यों किया, जबकि नोबेल की मृत्यु के समय नॉर्वे स्वीडन के साथ मिलकर शासन कर रहा था. हालाँकि नोर्वेजियन नोबेल समिति का यह अनुमान था, कि नोबेल ने नॉर्वे को पुरस्कार देने के लिए बेहतर जगह इसलिए माना होगा, क्योंकि वहां स्वीडन जैसी सैन्य परम्परा नहीं थी.

अतः इस शांति पुरस्कार के इतिहास के बारे में पूरी तरह से सही जानकारी उल्लेखित नहीं की गई है.

नोर्वेजियन नोबेल कमिटी की स्थापना (Norwegian Nobel Committee)

अल्फ्रेड नोबेल ने घोषणा की, कि नोबेल शांति पुरस्कार को नोर्वेजियन स्टोर्टिंग द्वारा चयनित 5 व्यक्तियों की समिति द्वारा प्रदान किया जायेगा. इसलिए इस समिति की स्थापना करने की जिम्मेदारी अप्रैल सन 1897 में स्टोर्टिंग ने ली और उसी वर्ष के अगस्त में नोर्वेजियन स्टोर्टिंग की नोबेल समिति की स्थापना की गई. तब से इस शांति पुरस्कार को ओस्लो में नोर्वेजियन नोबेल समिति द्वारा सम्मानित किया जाता है, जो नोर्वेजियन संसद के अधिकार के तहत एक संगठन है.

नोबेल फाउंडेशन (Nobel Foundation)

स्वीडन में वित्तीय मामलों को 1900 में नोबेल फाउंडेशन की स्थापना के माध्यम से संतोषजनक रूप से व्यवस्थित किया गया था, ताकि नॉर्वे की नोबेल समिति और अन्य पुरस्कार या पुरस्कृत निकाय अपना काम शुरू कर सकें, और अच्छे तरीके से कर सकें.

पहला नोबेल शांति पुरस्कार (First Nobel Peace Prize)

पहला नोबेल शांति पुरस्कार 1901 में दिया गया था. इस शांति पुरस्कार को उस साल 2 लोगों को प्रदान किया गया था. पहला फ्रेंचमेन फ्रेडेरिक पैसी थे, और दूसरा स्विस जीन हेनरी डूनांट थे. फ्रेंचमेन फ्रेडेरिक पैसी एक फ्रेंच वकील थे, जिन्होंने सन 1889 में पहली फ्रेंच पीस सोसाइटी की स्थापना की थी और वे उसके अध्यक्ष भी रहे थे. एवं स्विस जीन हेनरी डूनांट वे व्यक्ति थे, जिन्होंने सन 1863 में इंटरनेशनल कमिटी ऑफ़ द रेड क्रॉस की स्थापना की थी, और साथ ही युद्ध के दौरान सभी देशों के बीच जेनेवा संधि शुरू करने का प्रस्ताव भी दिया था.

चयन के लिए पात्रता (Criteria For Selection)

नोबेल फाउंडेशन के कानूनों के अनुसार नामांकन को वैध माना जाना आवश्यक है. इस पुरस्कार के लिए नामांकन करने के लिए नामांकन करने वाले व्यक्ति को निम्न कैटगरी के अनुसार योग्य होना होगा.

  • स्वतंत्र राज्यों की राष्ट्रीय सरकारों और राष्ट्रीय सभाओं के सदस्य यानि केन्द्रीय सदस्य या मंत्री और साथ ही साथ राज्यों के वर्तमान में जो प्रमुख हैं, वे इस पुरस्कार के लिए नामांकन करने के लिए योग्य है.
  • इसके अलावा हैग में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के सदस्य और हैग में स्थायी न्यायालय के सदस्य भी इसके लिए योग्य होते हैं.
  • नामांकन करने वाले वे व्यक्ति जो आई”इंस्टिट्यूट डी ड्रोइट इंटरनेशनल के सदस्य हैं, इस पुरस्कार के लिए नामांकन करने के लिए योग्य हैं.
  • इतिहास, सामाजिक विज्ञान, दर्शन, कानून और धर्मशास्त्र के विश्वविध्यालय के प्रोफेसर, विश्वविध्यालय के अध्यक्ष और शांति रिसर्च एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के निदेशक भी इसके लिए नामांकन कर सकते हैं.
  • इसके साथ ही यदि कोई व्यक्ति शांति और स्वतंत्रता के लिए महिला अंतर्राष्ट्रीय लीग के अंतर्राष्ट्रीय बोर्ड की कार्यकारी समिति के सदस्य है तो भी वे इसके लिए पात्र हैं.
  • संगठनों के सदस्यों सहित पूर्व प्राप्तकर्ता जो पहले पुरस्कार प्राप्त कर चुके है, उन्हें भी इसके लिए नामांकन करने की अनुमति है.
  • यहाँ तक कि नोर्वेजियन नोबेल समिति के वर्तमान और अतीत के सदस्य और साथ ही नोर्वेजियन नोबेल संसथान के पूर्व स्थायी सलाहकार भी इसके लिए योग्य है.

नामांकन एवं विजेताओं के चयन की प्रक्रिया (Process of Nomination and Selection)

नोबेल पुरस्कार के सभी श्रेणियों के नामांकन एवं विजेताओं के लिए चयन प्रक्रिया लगभग समान ही है. यहाँ हम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन एवं विजेताओं के चयन की प्रक्रिया के बारे में बता रहे हैं. नोर्वेजियन संसद, नोर्वेजियन नोबेल समिति का गठन करती है. इसके बाद इस समिति के द्वारा नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का चयन किया जाता है. नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन किसी भी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किया जा सकता है, जोकि नामांकन के लिए योग्य है. यह कैसे होता है इसकी प्रक्रिया का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है –

  • सितंबर :- सितंबर में नोर्वेजियन नोबेल समिति नामांकन प्राप्त करने के लिए तैयार होती है. ये नामांकन राष्ट्रीय विधानसभाओं, सरकारों और कानून के अंतर्राष्ट्रीय न्यायालयों के सदस्यों द्वारा प्रस्तुत किये जाते हैं. इसके लिए योग्य व्यक्ति या संगठन को ही नामांकन करने की अनुमति मिलती है.
  • फरवरी :- फिर फरवरी में नामांकन जमा करने की आखिरी अवधि होती है. नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करने के लिए अंतिम तारीख फरवरी की पहली तारीख है. इस तारीख से पहले नामांकन भेजने पर आपका नामांकन ओस्लो में नोर्वेजियन नोबेल समिति को भेजा जाता है. यदि इस तिथि के बाद नामांकन प्राप्त किये जाते हैं तो वह अगले वर्ष की चर्चाओं में शामिल होते हैं. हाल के वर्षों में समिति को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए लगभग 300 के करीब नामांकन प्राप्त हुए हैं.
  • फरवरी – मार्च :- फरवरी से मार्च के महीने में प्राप्त सभी योग्य नामांकनों पर चर्चा होने के बाद सबसे दिलचस्प और योग्य उम्मीदवारों की एक शोर्ट लिस्ट तैयार’ की जाती है. समिति के सभी स्थायी सलाहकारों द्वारा अन्य नोर्वेजियन या अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर उम्मीदवारों के काम का आकलन किया जाता है, और एक और सूची तैयार की जाती है.
  • मार्च से अगस्त में :- इस समय में सलाहकार द्वारा शोर्टलिस्ट किये गये नामांकन की समीक्षा की जाती है.
  • अक्टूबर :- फिर अक्टूबर में नोबेल पुरस्कार विजेता चुने जाते हैं. एक नियम के अनुसार अक्टूबर की शुरूआत में, नोबेल समिति अपनी अंतिम बैठक में सर्वसम्मति से नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का चयन करती है. किन्तु यदि समिति के बीच सहमति नहीं बनती है तब बहुमत के माध्यम से विजेता का चयन किया जाता है. फिर यह निर्णय अंतिम निर्णय होता है जोकि बिना किसी अपील के होता है. तब जाकर नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करने वाले विजेता का नाम घोषित किया जाता है.
  • दिसम्बर :- साल के अंत में यानि दिसम्बर में नोबेल पुरस्कार विजेताओं को उनका पुरस्कार मिलता है. नोबेल शांति पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को ओस्लो जोकि नॉर्वे में स्थित है आयोजित किया जाता है. 10 दिसम्बर को अल्फ्रेड नोबेल की मृत्युतिथि होती है. वहां नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं को उनका नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया जाता है. यह पुरस्कार स्टॉकहोम में प्रस्तुत किया जाने वाला एक मात्र नोबेल पुरस्कार है. इस नोबेल शांति पुरस्कार में उन्हें एक नोबेल पदक और डिप्लोमा दिया जाता है. और एक दस्तावेज दिया जाता है जोकि पुरस्कार की राशि को दर्शाता है. सन 2013 में पुरस्कार की राशि 10 मिलियन यूएस डॉलर थी.

इस्टीट्यूट के निदेशक हेनरिक उर्दाल ने कहा कि हाल के वर्षों में प्रेस की स्वतंत्रता व पत्रकार इस पुरस्कार के बड़े दावेदार बनकर उभरे हैं। 2020 में कोरोना के दौरान झूठी व भ्रामक खबरें लोकतांत्रिक समाज के सामने बड़ी चुनौती बनकर सामने आईं हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया है कि संघर्ष के दौर में पत्रकारिता इसलिए महत्वपूर्ण है कि क्योंकि यही बताती है कि वास्तव में क्या घट रहा है। 

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