प्रदेशवार्ता. मप्र में चार हजार से अधिक कालोनियां हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में सरपंच से अनुमति लेकर घर बना लिए जाते हैं जो बाद में शहरी क्षेत्र के दायरे में आने के बाद अवैध हो जाते हैं. मप्र सरकार अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लिए एकीकृत व्यवस्था लेकर आ रही हैं. वहीं अब कलेक्टर अवैध कालोनी विकसित होने पर सीधे जिम्मेदार होंगे. अवैध कालोनी विकसित करने वाले के लिए दस साल की सजा और एक करोड के जुर्माने का प्रावधान किया गया हैं. ये बिल अगले माह विधानसभा सत्र में लाया जाएगा. मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में कॉलोनी निर्माण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और अवैध कॉलोनियों के जाल को खत्म करने के लिए एक नया ‘एकीकृत अधिनियम’ लाने जा रही है। इस नए कानून के तहत अब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी, और एक बार लाइसेंस लेने के बाद कॉलोनाइजर पूरे प्रदेश में कहीं भी प्रोजेक्ट शुरू कर सकेंगे।
इस प्रस्तावित अधिनियम का प्रारूप नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने तैयार कर लिया है, जिसे 16 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया जाएगा। नए कानून में जवाबदेही तय करने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं, जिसके तहत किसी भी जिले में अवैध कॉलोनी विकसित होने पर सीधे तौर पर कलेक्टर जिम्मेदार माने जाएंगे. अवैध कॉलोनी बनाने वालों पर शिकंजा कसते हुए अर्थदंड की राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये और सजा को बढ़ाकर 10 वर्ष करने का प्रावधान किया जा रहा है। सक्षम प्राधिकारी के रूप में कलेक्टर ही अंतिम निर्णय लेंगे, हालांकि वे अनुभाग स्तर पर एसडीएम को जिम्मेदारी सौंप सकेंगे।


