– राजनीति प्रसाद

कैसे सिद्ध हो सिद्धू का मक़सद 

पंजाब के सिद्धू का मक़सद सिद्ध नहीं हो रहा है। भाजपा में अकालियों ने दाल नहीं गलने दी तो कांग्रेस में कैप्टन अमरिंदर सिंह से पटरी नहीं बैठ रही। राहुल गांधी के रविवार को आयोजित पंजाब दौरे पर खुटका था कि सिद्धू उनका ज़ायक़ा न बिगाड़ दें। सो प्रदेश के प्रभारी हरीश रावत उन्हें और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद से हटाए गए बाजवा को मनाने गए। लेकिन लगता है कि इसमें सिद्धू से सौदा नहीं पटा। राहुल की रैली में सिद्धू ने कांग्रेस के कान में कड़वा तेल उँड़ेल ही दिया। भाषण में कैप्टन सरकार पर ही सवाल उठा दिए। सुरसुरी यह है कि सिद्धू के तार फिर से भाजपा से जुड़ रहे हैं। अकालियों के भाजपा गठबंधन से हटने पर उन्हें अपना रास्ता साफ़ होता दिख रहा है। मोदी से सीधे संपर्क में हैं। 

दीपक जोशी लौट के आए

दीपक जोशी नाम है मध्यप्रदेश में जनसंघ के दीपक को जलाने वाले कैलाश जोशी के होनहार बेटे का। हाट पिपल्या से विधायक थे। राज्य की पिछली शिवराज सिंह सरकार में मंत्री भी रहे। इस बार उनकी सीट से उपचुनाव में वे सज्जन भाजपा के टिकट पर उतर गए हैं जो हाल में कांग्रेस से आए हैं। सो जो फूटी आँख नहीं सुहाते थे, उनके लिए पलक पाँवड़े कैसे बिछाएँ। कांग्रेस ने उनकी पीड़ा को भाँपकर जाल फेंका जिसमें एक बारगी जोशी महाराज फँस गए। भाजपा के दफ़्तर पर जाकर तेवर भी दिखा आए लेकिन कमलनाथ की हालत देखकर वास्ता नहीं हुआ। सो शिवराज के दर पर जाकर कह दिया-अब कहीं नहीं जाएँगे। लेकिन यह कहने के लिए भी दो सौ लोगों का जमघट लेकर गए। 

भाजपा के दिग्गजों के नए ठिकानों की खोज

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जयप्रकाश नड्डा की टीम से हटाए गए दिग्गजों के पुनर्वास को लेकर सत्ता साकेत में कई चर्चाएँ हैं। उत्तर पूर्व और जम्मू काश्मीर में पार्टी के एजेंडे को सफलता के साथ लागू करने वाले राम माधव पर ज्यादा निगाहें हैं। अंदरखाते की जानकारी रखने वाले कुछ लोग कहते हैं कि वे केन्द्र में मंत्री बनाए जाएँगे तो एक सूत्र ने कहा कि उनके गृहप्रदेश आंध्र में पार्टी मुख्यमंत्री का एक चेहरे रखकर सरकार बनाने की लड़ाई शुरू करना चाहती है। उनकी जगह मप्र के प्रभात झा को लगाने पर विचार किया गया है।विनय सहस्त्रबुद्धे को लेकर भी क़यास हैं। सूत्र उन्हें शिक्षा मंत्री बनाने की कौड़ी लेकर आया। वे भारतीय सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष हैं।

कांग्रेस की नर्सरी का पौधा भाजपा के आँगन में

मध्यप्रदेश में कांग्रेस से भाजपा में आए बाईस विधायक जागते हुए यह भूल जाते हैं कि अब उनकी पार्टी बदल गई है। उपचुनाव में आए दिन इसके नमूने मिलते हैं। रविवार को फिर निमाड़ अंचल में एक वाक़या वायरल हुआ। निमाड़खेड़ी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी नारायण पटेल एक सभा में हाथ के पंजे पर वोट डालने की अपील करते रहे।बाज़ू में बैठे लोग उनका कुर्ता खींचकर सही रास्ते पर लाने की कोशिश करते रहे। कुर्ता फटता, इसके पहले उन्होने खुद को दुरुस्त कर लिया। जिन विधायकों की आँखें ही कांग्रेस के पालने में खुलीं और उसी के खाद-पानी से फले-फूले, अब उखड़कर भाजपा के आँगन में गिर गए तो नई जगह सैट होने में समय तो लगेगा ही।

कांग्रेस का अजब सर्वे

मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी रोज सुबह नियम से एक ट्वीट कर बताती है- ‘ताजा सर्वे के अनुसार उपचुनाव में भाजपा को 28 में से एक भी सीट नहीं मिल रही है और पूरी की पूरी सीटें कांग्रेस की झोली में जा रही हैं।’ राजनीति का अनाड़ी भी भरोसा न करे। देश की सियासत को हिला देने वाले बड़े से बड़े तूफ़ान में ऐसा नहीं हुआ। सो, पार्टी ये ट्वीट किसके लिए करती है? प्रबुद्ध लोग इसकी झलक देखकर ही आगे खिसका देते हैं और ‘बेवक़ूफ़ बनने वाली’ जनता को ट्वीट से मतलब नहीं। 

ममता पर अभद्र टिप्पणी की, कोविड हो गया 

मुझे कोविड हो गया तो मैं ममता बैनर्जी से लिपट जाऊँगा -कौन कह सकता है। ऐरा-गैरा ! नहीं भाई, बंगाल से हाल में भाजपा की नड्डा टीम में राष्ट्रीय सचिव बनाए गए अनुपम हज़ारा ने कहा। तो अनुपम की एक साध पूरी हो गई। उन्हें कोरोना हो गया। अब पुलिस को डर है कि अनुपम दूसरी घोषणा को अमल में न लाने लगें। 

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