दिल्ली। मध्यप्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त विजय मनोहर तिवारी की नई किताब के प्रकाशन की औपचारिक घोषणा शनिवार को दिल्ली में की गई है। कोरोना काल की डायरी के रूप में यह किताब गरुड़ प्रकाशन से छपकर आ रही है, जिसका शीर्षक है-‘उफ ये मौलाना!’ साढ़े चार सौ पेज की इस किताब की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है। ऑनलाइन स्टोर्स पर यह दस नवंबर तक आ जाएगी। लेखक की यह सातवीं किताब है।

 इस किताब के लांचिंग वक्तव्य में कहा गया है कि दुनिया भर में कोरोना एक महामारी की शक्ल में ही आया, लेकिन कोरोना के आगमन के साथ ही भारत में तबलीग की धुन अलग से सुनी गई। कोरोना एक वायरस था, जिससे निपटने के लिए अस्पतालों और डॉक्टरों को ही जुटना था। वे दुनिया भर में जूझ भी रहे थे, लेकिन भारत में डॉक्टरों से ज्यादा पुलिस, अदालत और जेलों में हलचल मची। ऐसे दृश्य दुनिया के किसी भी देश में दिखाई नहीं दिए, जब गली-मोहल्लों में गए मेडिकल जाँच दलों को बेइज्जत किया गया और उन पर जानलेवा हमले हुए। कुछ लोग कोरोना को मजाक समझ रहे थे। उन्हें लग रहा था कि यह उनके खिलाफ सरकार की कोई साजिश है, जो एक साथ इकट्‌ठे होकर इबादत से रोका जा रहा है या पूजास्थल बंद किए जा रहे हैं। कोरोना के विकट समय भारत का सामुदायिक चरित्र भी उजागर होता हुआ सबने देखा। शाहीनबाग का मजमा सिमटते ही जैसे उन्हीं आवाजों का शोर कोरोना पर सवार हो गया था। जब एक महामारी के कारण देश और दुनिया इतिहास की सबसे संकटपूर्ण स्थिति में फँसी हो और समाज का कोई तबका अलग और उलट ढंग से पेश आए तो यह किसी भी सभ्य समाज और मजबूत सरकार के लिए नजरअंदाज करने वाली घटना नहीं है। भारतीय संदर्भ में यह किताब कोरोना काल का एक विचारोत्तेजक दस्तावेज है। विजय मनोहर तिवारी की यह सातवीं किताब है। गरुड़ प्रकाशन की चर्चा हाल ही में प्रकाशित पुस्तक – दिल्ली दंगे 2020 एक अनकही कहानी-के कारण हुई है।

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