भोपाल / इंडिया डेटलाइन

कोरोनाकाल में शनिवार को एक बार फिर बड़ा धार्मिक आयोजन ‘अयोध्या की रामलीला’ लेकर आया। छोटे पर्दे पर 25 अक्टूबर तक हर दिन तीन घंटे चलने वाली रामलीला का नया व तकनीकी रूप से परिष्कृत संस्करण तैयार करने की कोशिश कामयाब नहीं दिखी। शुरुआती नृत्यों को देखकर लगा जैसे हम बॉलीवुड के अवार्ड वाली शाम देख रहे हों तो दृश्यांकन व संवाद साधारण थे। कंटेट के स्तर पर कोई प्रय़ोग नहीं किया गया। इस रामलीला में दो सांसद मनोज तिवारी (अंगद) व रविकिशन (भरत), बिंदु दारासिंह (हनुमान), रजा मुराद (अहिरावण), ऋतु शिवपुरी (कैकेयी), राकेश बेदी (विभीषण) और शहबाज़ खान (रावण) की भूमिका निभा रहे हैं। 

अब तक हमने अपने क़स्बों व शहरों में छोटे-छोटे मंचों पर रामलीलाएं देखी हैं। देश की चुनिंदा रामलीला मंडलियों ने इसका व्यापक व कलात्मक स्वरूप तैयार किया जो देश के विभिन्न शहरों में मंचन करती थीं। भोपाल में नब्बे के दशक में रामलीला महोत्सव में देश भर की ऐसी विभिन्न भाषा व शैलियों वाली क्षेत्रीय रामलीलाएं अपना प्रदर्शन करने के लिए आती रहीं। बनारस के रामनगर की रामलीला देश भर में अपनी ऐतिहासिकता, व्यापकता व कलात्मकता के लिए प्रसिद्ध रही है। रामानंद सागर ने ‘रामायण’ धारावाहिक बनाकर रामकथा के मंचन का इलेक्ट्रॉनिक रूप निखारा। कोरोना काल में दूरदर्शन पर पुन: प्रसारित ‘रामायण’ आठ करोड़ दर्शकों के साथ विश्व का सबसे अधिक देखा जाने वाला धारावाहिक बन गया था। 

अयोध्या की रामलीला का यह राष्ट्रीय स्वरूप देश के सबसे बड़े प्रसारक के माध्यम से देश नौ दिन तक देखेगा। श्रीराम जन्मभूमि के शिलान्यास के बाद यह मंचन पहली बार हो रहा है। इसमें पारंपरिक रामलीला को इलेक्ट्रॉनिक व डिजीटल तकनीक के मिश्रण से सँवारा गया। मंचन का ही सीधा प्रसारण किया जा रहा है। बीआर चोपड़ा की महाभारत से लेकर एकता कपूर की महाभारत तक तकनीक ने काफी स्वरूप बदला। रामायण व महाभारत में तकनीकों के प्रभाव को दर्शाने के बेशुमार अवसर भी हैं। 

दूरदर्शन की ‘अयोध्या की रामलीला’ तकनीकी श्रेष्ठता का नमूना तो पेश नहीं कर सकी लेकिन क़स्बों का दर्शक पारंपरिक रामलीलाओं से आगे जाकर कुछ देख रहा था। सरयू तट पर लक्ष्मण क़िला मंदिर में सेट सजा था। मुंबई से 85 कलाकारों का दल आया है। सीता के वस्त्र जनकपुर नेपाल से, रावण का एक वस्त्र श्रीलंका व धनुष कुरुक्षेत्र से आया है। 

रामलीला में बॉलीवुड के कई कलाकार भूमिका निभा रहे हैं। शनिवार की कड़ी में असरानी नारदजी की भूमिका में थे। उत्तराखंड की कविता जोशी सीता होंगीं तो हापुड़ उप्र के सोनू डागर राम की भूमिका में होंगे। इसकी आयोजना से बुंदेलखंड के कलाकार राजा बुंदेला और मुंबई के ड्रेस डिज़ाइनर विष्णु पाटिल भी जुड़े हैं। पहली कड़ी में कलाकारों के मेक अप का अतिरेक अस्वाभाविकता पैदा कर रहा था। नारद विश्व मोहिनी प्रसंग में शिव के गण का प्रसंग अनावश्यक लंबा होने से उबाऊ था। 

रामलीला के आयोजन के सरकार द्वारा प्रायोजन को लेकर अंगुली उठाई जा रही है। दूरदर्शन ने सफाई दी है कि वह जैसे विभिन्न क्षेत्रों व समुदायों की संस्कृति को दिखाता है, वैसे ही रामलीला को दिखा रहा है लेकिन अयोध्या के सूत्र बताते हैं कि पूरी प्रशासनिक मशीनरी पिछले कई दिनों से इसकी तैयारी में लगी रही। समय तीन घंटे ज्यादा लंबा प्रतीत हुआ।शुरुआत की कसावट बाद तक बरकरार रखना कठिन रहा।

प्रसारण समय शाम 7 से 10 बजे

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