• डीयू की होनहार छात्रा ऐश्वर्या ने सिर्फ इसलिए आत्महत्या की, क्योंकि उसके पिता के पास पैसे नहीं थे और उसे सरकार स्कॉलरशिप नहीं दे रही थी. परिवार इकोनॉमिक क्राइसिस से गुजर रहा था.
  • दरअसल, ऐश्वर्या ने आत्महत्या नहीं की है. उन्हें सरकार और उसकी सिस्टम ने मारा है. उन्हें उस लॉकडाउन ने मारा, जिससे उनके पिता की दुकान बंद हो गई थी. उसे उस 20 लाख करोड़ के पैकेज ने मारा जो सिर्फ बयानों में था.
  • साल 2018 की NCRB की रिपोर्ट बताती है कि 12,936 युवाओं ने बेरोजगारी से तंग आकर आत्महत्या की. वहीं 2019 में ये आंकड़ा 10,355 था. यानी हर घंटे एक छात्र की मौत.
  • पीएम मोदी के शासनकाल में पिछले 5 सालों में देश के 23 IIT में 50 छात्रों ने आत्महत्या की. वहीं 20 IIM में 10 छात्रों ने आत्महत्या की. इनमें ज्यादातर आर्थिक, जातीय उत्पीड़न से तंग थे.
  • ऐश्वर्या इस मामले सिर्फ इकलौती नहीं हैं. इससे पहले गरीबी, मानसिक और जातीय उत्पीड़न से तंग आकर रोहित वेमुला, पायल तड़वी और फातिमा लतीफ जैसे कई होनहार छात्रों ने मौत को गले लगाया है.
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