आईपीएल में क्रिकेटर नहीं, एक्टर खेल रहे हैं

डॉ. महेश परिमल

हम सब मनोरंजन के आदी हैं। फिल्में देखकर भी हम अपना मनोरंजन करते हैं। इसमें हम अपना काफी धन भी खर्च करते हैं। देश में राजनीति के बाद मनोरंजन उद्योग का बोलबाला है। मनोरंजन की दुनिया के लोग राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से भी अधिक आय अर्जित करते हैं। इस बार कोरोना काल में 19 सितम्बर से आईपीएल के नाम से जो मनोरंजन शुरू हुआ है। उस में इस बार क्रिकेटरों ने सराहनीय अभिनय किया है। कोरोना काल में घर पर रहकर बोर होने वाले लोग अब आईपीएल के मजे ले रहे हैं। बिना दर्शक के स्टेडियम को देखना अच्छा तो नहीं लगता, पर क्या करें, मजबूरी है। फिर भी लोग देख ही रहे हैं। इस बार भी आईपीएल पर ऊंगली उठाई गई है। आरोप वही सट्‌टेबाजी। कई मैच देखने के बाद लगा कि सचमुच ये क्रिकेटर तो अपने लिए खेलने में इतने तल्लीन हो गए हैं कि मैदान में अच्छा खेलने की जोरदार एक्टिंग करने लगे हैं। इससे यह कहा जा सकता है कि इस बार आईपीएल में क्रिकेटर नहीं, बल्कि एक्टर खेल रहे हैं। उनकी एक्टिंग इतनी सधी हुई है कि बॉलीवुड के एक्टर भी उनके सामने फीके पड़ने लगे हैं।

लगता है कि आईपीएल की इस जंग में सट्‌टे का ग्रहण लग गया है। फिक्सिंग भी बड़ी शिद्दत से हो रही है। सरकार चाहकर भी ऑनलाइन सट्‌टे पर कोई अंकुश नहीं लगा पा रही है। सट्‌टे का यह रोग देश के कोने-कोने तक फैल गया है। सुदूर गांवों में भी लोग आईपीएल के लिए होने वाले सट्‌टे में भाग लेकर अपनी जमा-पूंजी गंवा रहे हैं। 10 नवम्बर को आईपीएल का फाइनल है। इसी दिन देश बिहार विधानसभा के चुनाव और देश के अन्य राज्यों में उपचुनाव के परिणाम भी घोषित होंगे। एक तरह से 10 नवम्बर का दिन पूरे देश के लिए ऐतिहासिक होने जा रहा है। सरकार का ध्यान केवल चुनाव के नतीजों पर है, तो दूसरी ओर कई लोगों का ध्यान आईपीएल की ओर है। आईपीएल में सट्‌टा और फिक्सिंग की बात अब कोई नई नहीं रही। जिस तरह से कहीं शराब पकड़ी जाती है, जुआं खेलते लोग पकड़े जाते हैं, ठीक इसी तरह आईपीएल के लिए सट्‌टा खेलने वाले भी पकड़े जा रहे हैं। सट्‌टा खेलने वालों का एक वर्ग है, तो सट्‌टा खिलाने वालों का भी एक विशेष वर्ग है। देखा जाए, तो सट्‌टा वर्ली मटका का थोड़ा संशोधित रूप है। जिस तरह से शराबी को शराब पीने के लिए कोई न कोई बहाना चाहिए, ठीक उसी तरह समाज के हर वर्ग से सट्‌टा खेलने वाला कोई न कोई निकल ही आता है। सट्‌टा खेलना भले ही अपराध हो, पर इसमें किस्मत आजमाने से कोई चूकना नहीं चाहता। सब कुछ खो देने के बाद भी एक छोटी-सी आस लगी होती है, जीतने की, बस इसी आस के चलते लोग अपना सब कुछ गंवा बैठते हैं। जब सत्यवादी युधिष्ठिर को यह रोग लग गया, तो आम आदमी की क्या बिसात है?
महाभारत में साफ तौर पर दिखाया गया है कि जुआं खेलना एक बुरा व्यसन है, जिसमें हासिल कुछ भी नहीं होता। गंवाने के लिए सब कुछ होता है। इसके बाद भी लोग जुआं खेलते हैं। सट्‌टा खेलते हैं। जुआं खेलने के दौरान माहौल ही ऐसा बन जाता है कि लोग दोगुना लगाने के लिए भी तैयार हो जाते हैं। हारने के बाद भी अपने नसीब पर पूरा भरोसा रखते हैं। आखिर में यही नसीब उन्हें करोड़पति से रोड पति बना देता है।
इन दिनों जहां भी आईपीएल का सट्‌टा खिलाया जा रहा है, वहां सट्‌टा खेलने वाले हैं, तो सट्‌टा खिलाने वाले भी। सट्‌टा खिलाने वाले मुख्य बुकी के सर्वर से जुड़े होते हें। इनका लेन-देन नकद होता है। कहा यह जाता है कि आईपीएल का सीधा संबंध सट्‌टाबाजार से होता है। कई मैचों को देखने के बाद यह साफ दिखाई देता है कि कुछ तो गड़बड़ है। कहीं न कहीं यह बात फिक्सिंग वाली है। कितने चौके लगेंगे, किस ओवर में कितने छक्के लगेंगे। इस तरह के अनेक मुद्दों पर सट्‌टा खेला जाता है। मैच विनर, आईपीएल विनर के बिना भी सट्‌टा खेला खेला जाता है। सट्‌टे के इस नेटवर्क से पुलिस पूरी तरह से वाकिफ होती है। आईपीएल के मैच को दिलचस्प बनाने के लिए इसकी स्क्रिप्ट पहले से ही लिख ली जाती है। मैच देखने वाले ऐसे ही उत्तेजित होते रहते हैं, पर अनुभवी यह अच्छी तरह से जानते हैं कि यह पूरा मामला फिक्सिंग का है।

इन दिनों आईपीएल के मैदान में क्रिकेट कम पर एक्टिंग ज्यादा हो रही है। क्रिकेटरों की इस एक्टिंग पर हम सब फिदा हो गए हैं। कुछ देर के लिए हमने बॉलीवुड के सितारों को भुला दिया है। रन आउट होने, कैच आउट होते समय निराशा दिखने वाले क्रिकेटर वास्तव में एक्टिंग कर रहे होते हैं। इससे बेखबर होकर हम उनकी निराशा में ही डूबने लगते हैं। लोगों को सट्‌टा खेलने से रोका तो नहीं जा सकता, इनका नेटवर्क नशीली दवाओं की तरह होता है। पुलिस वाले बेवजह ही सट्‌टा खेलने वालों को पकड़ती रहती है। उधर ऑनलाइन सट्‌टाबाजार हमेशा गर्म रहता है।
यह तो तय है कि सट्‌टा बाजार ने केवल लाेगों को लूटा ही है। इससे वे ही अमीर हुए हैं, जो इसे चलाते आए हैं। एक मृगतृष्णा की तरह है यह कारोेबार। जिसमें हारकर भी लोग हारना नहीं चाहते। जिस तरह से लॉटरी पर किसी तरह की नियंत्रण नहीं है, ठीक उसी तरह सट्‌टे पर किसी का अंकुश नहीं है। ऑनलाइन सट्टा जिस तरह से लोगों को बरबाद कर रहा है, उससे सरकार पूरी तरह से गाफिल है। इसलिए लोग अब 10 नवम्बर को लुट जाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, क्योंकि उस दिन फाइनल मैच होना है। कुछ लोगों की किस्मत चमकेगी और बहुत से लोग बरबाद हो जाएंगे। उसी दिन बिहार और अन्य राज्यों में हुए चुनाव के परिणाम भी निकलेंगे, इससे देश में एक तरह से अराजकता की स्थिति होगी। इससे सरकार कैसे निबटेगी, यह अलग बात है, पर आईपीएल में क्रिकेटरों की एक्टिंग कितनों को बरबाद करेगी, यह कोई नहीं जानता। इस बार की दीवाली इन लोगों के लिए कैसी रहेगी, यह चुनाव और आईपीएल परिणाम पर निर्भर है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here