डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।प्रदेश की शिवराज सरकार अब नये बनने वाले कानूनों, नियमों एवं विनियमों को वेबसाईट के माध्यम से आम लोगों को समझायेगी भी। यही नहीं, इन्हें बनाते समय लोगों से दावे एवं आपत्तियां ली जायेंगी तथा जिसने जो बात कही है उसे और उसके किये गये निराकरण को भी विभागीय वेबसाईट के माध्यम से सार्वजनिक करना होगा।
राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सभी सरकारी कार्यालयों के प्रमुखों को नये दिशा-निर्देश जारी किये हैं। चार साल पहले भी 7 मई 2016 को इस संबंध में निर्देश जारी हुये थे परन्तु उनमें अनेक कमियां थीं। इसीलिये अब नये सिरे से ये दिशा-निर्देश किये गये हैं।
ये जारी हुये नये निर्देश :
एक, नये अधिनियम/नियम/विनियम लागू किये जाने से पूर्व उनका वैधानिक आधार, विभागों द्वारा आवश्यक्ता एवं नागरिकों को होने वाले लाभों के बारे में विस्तृत रुप से विभागीय वेबसाईट पर जानकारी दी जाये।
दो, लागू किये जाने से पूर्व अधिनियम/नियम/विनियम के प्रारुप को वेबसाईट
पर सार्वजनिक रुप से प्रकाशित कर इस सन्दर्भ में लोगों से टिप्पणियां/सुझाव आमंत्रित करना होगा।
तीन, इस प्रकार, प्राप्त टिप्पणी/सुझावों पर समुचित विचार करने के बाद ही प्रारुप को अंतिम रुप दिया जाये। आमंत्रित सुझावा एवं प्रारुप न्यूनतम तीस दिवस तक वेबसाईट पर लोगों के लिये उपलब्ध रहें।
चार, वेबसाईट पर सार्वजनिक रुप से यह भी प्रदर्शित किया जाये कि लोगों से कौन-कौन से सुझाव प्राप्त हुये हैं और अधिनियम/नियम/विनियम को अंतिम रुप देने की दिशा में उन सुझावों पर की गई कार्यवाही को भी दर्शाया जाये।

प्रदेश में सूचना का अधिकार कानून बेमानी

220 मामलों में नहीं वसूला जा
सकी 34 लाख की जुर्माना राशि

भोपाल। प्रदेश में सूचना का अधिकार कानून बेमानी हो गया है। भोपाल स्थित राज्य सूचना आयोग ने आम लोगों को सरकारी कार्यालयों द्वारा उक्त कानून के तहत जानकारी न देने संबंधी अपीलों पर 220 अफसरों पर 33 लाख 82 हजार रुपयों का जुर्माना लगाया परन्तु इन्हें अब तक वसूला ही न जा सका है।
आयोग ने इस जुर्माना राशि को वसूल किये जाने पर राज्य सरकार का ध्यान दिलाया है जिस पर सरकार ने सभी संबंधित सरकारी विभागों को सख्ती से इस राशि की वसूली एवं दोषी अधिकारियों के विरुध्द विभागीय कार्यवाही करने के लिये निर्देश जारी किये हैं।
यह है स्थिति :
प्रदेश के ऐसे 23 विभाग हैं जिनमें राज्य सूचना आयोग ने कानून के अनुसार लोगों को जानकारी न देने पर जुर्माना लगाया है। इनमें नगरीय प्रशासन विभाग के 40, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 83, स्वास्थ्य विभाग के 16, महिला एवं बाल विकास विभाग के 6, राजस्व विभाग के 29, गृह विभाग का 1, उच्च शिक्षा विभाग के 5, अजाजजा विभाग के 3, सहकारिता विभाग के 2, ऊर्जा विभाग के 3, कृषि विभाग के 2, उद्यानिकी विभाग का 1, परिवहन विभाग का 1, आवास विभाग का 1, खाद्य विभाग के 3, स्कूल शिक्षा विभाग के 11, लोक निर्माण विभाग के 2, वन विभाग के 4, जल संसाधन विभाग का 1, पिछड़ा वर्ग विभाग का 1, जनसम्पर्क विभाग के 3, जेल विभाग का 1, पर्यावरण विभाग का 1 मामला शामिल है।
डॉ. नवीन जोशी

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