मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया पैसा हम जुटा लेंगे, सरकार से कार्यों की अनुमति में विलंब न हो
इंदौौर/ कीर्ति राणा। बाकी जिलों के मुकाबले इंदौर को सेल्प डेवलप शहर यूं ही नहीं कहा जाता।इसी दिशा में अब जिले के मुखिया मनीष सिंह ने मुख्यमंत्री चौहान को गुड गवर्नेस की जो प्लॉनिंग बताई थी उसे मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी है।

भविष्य के इंदौर की योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री को कलेक्टर ने विश्वास दिलाया है कि इंदौर विकास प्राधिकरण, नगर निगम अपनी योजनाओं के लिए धनराशि जुटाने में सक्षम है। सरकार से एक धेला नहीं चाहिए, बस जिले में जितने भी विकास कार्य किए जाने हैं उसके लिए सरकार के संबंधित विभागों से अनुमति भी मिल जाए ताकि मास्टर प्लान में जरूरी संशोधन कर सकें।
ऐसे जुटाएंगे 500 करोड़
बीसीसी में मुख्यमंत्री को भविष्य के इंदौर का जो प्रेजेंटेशन मनीष सिंह ने दिया था उसमें एक वर्ष के दौरान किए जाने वाले कार्यों में करीब 500 करोड रु खर्च अनुमानित है। इसके लिए नगर निगम स्ट्रीट लाइट, एक्सटेंशन, वॉटर सप्लाय आदि कार्यों से और विकास प्राधिकरण अपनी विभिन्न स्कीम के 20 प्लॉट करीब एक लाख वर्ग फुट जमीन बेच कर 500 करोड़ रु जुटाएगा। सांसद लालवानी की मांग पर इस राशि से सीएम द्वारा मंजूर 5 ्फ्लाय ओवर सहित बायपास वाली सर्विस रोड को फोरलेन में बदलने सहित अन्य कार्य भी कराए जा सकेंगे।इसी पेटर्न पर अगले सालों में भी विकास कार्य आसानी से सम्पन्न हो सकेंगे।
आईडीए को फारेस्ट की 95 हेक्टर जमीन मिली इसका भाव ही डेढ़ से दो करोड़ रु बीघा
शहर के विकास में प्राधिकरण की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में नेनौद गांव की सर्वे नंबर 322 और 334 की करीब 95 हेक्टर जमीन का फैसला प्राधिकरण के पक्ष में हो गया है। जमीन पर अब तक फॉरेस्ट डिपार्टमेंट का कब्जा था।इस जमीन की अभी कीमत डेढ़ से दो करोड़ रु एकड़ है विकसित होने के बाद कीमत और बढ़ना तय है।
प्राधिकरण सीईओ विवेक श्रोत्रिय ने चर्चा में बताया इस जमीन के अलावा सुपर कॉरिडोर में करीब एक लाख वर्गफुट के 20 प्लॉट बेचकर राशि जुटाएंगे।इसके साथ ही प्राधिकरण की स्कीम के लिए जिन किसानों ने जमीन दी है उन्हें स्कीम नंबर 151, 169बी में 20 से 29फीसदी तक हाथोंहाथ प्लॉट देने के लिए सुपर कॉरिडोर पर शिविर लगा रखा है। हर दिन 5-7 प्रकरणों का निराकरण हो रहा है।90फीसदी डेवलपमेंट तो पहले कर चुके हैं, किसानों को प्लॉट देने के बाद बाकी 10 फीसदी विकास भी कर लेंगे।इस शिविर की सफलता रहेगी कि किसानों और प्राधिकरण को 50 एकड़ जमीन मिल जाएगी।

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