डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।पिछली कमलनाथ सरकार के उस आदेश को वर्तमान शिवराज सरकार ने बदल दिया है जिसमें ठेकेदारों को भुगतान की सुविधा दी गई थी।
राज्य के पिछली कमलनाथ सरकार के समय जल संसाधन विभाग ने 17 मई 2019 को आदेश जारी किया था कि टर्न की आधार पर परियोजना में संयुक्त रुप से यूनिट-1 एवं यूनिट-2 के पेमेंट शेड्यूल अनुबंध में यूनिट-2 में प्रेशर पाईप लगाने का भुगतान बिना डेम नींव/क्रेस्ट लेवल बनाये भी ठेकेदार को किया जा सकेगा। लेकिन अब वर्तमान शिवराज सरकार ने इस आदेश को बदल दिया है। अब ठेकेदार को डेम की नींव/क्रेस्ट लेवल निर्माण पर प्रेशर पाईप लगाने का भुगतान होगा। इस संबंध में आदेश जारी हो गये हैं।

जबरन निजी प्रयोगशालाओं में नहीं
भेजे जायेंगे कोविड टेस्ट के सेम्पल

अब प्रदेश के जिलों में कोविड-19 जांच के सेम्पल जबरन निजी प्रयोगशालाओं में नहीं भेजे जायेंगे। निजी प्रयोगशालाओं में तभी सेम्पल भेजे जायेंगे जबकि सरकारी प्रयोगशालाओं में क्षमता से अधिक सेम्पल एकत्रित हो जाते हैं।
राज्य के स्वास्थ्य आयुक्त ने सभी संभागायुक्तों एवं जिला कलेक्टरों को ताजा निर्देश जारी कर कहा है कि प्रदेश के जिलों में कोविड-19 जांच के सेम्पल यदि शासकीय लैबों की जांच क्षमता से अधिक एकत्रित किये जाते हैं तो केवल आठ चिन्हित जिलों भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, इंदौर, धार, सागर, उज्जैन एवं रीवा जिलों को सेम्पल निजी प्रयोगशालाओं को दिये जाने की अनुमति पूर्व में दी गई थी। परन्तु वर्तमान में यह संज्ञान में आया है कि जिलों से शासकीय लैबों की जांच क्षमता होने के बावजूद जांच सेम्पल निजी प्रयोगशालाओं को आरटी-पीसीआर हेतु दिये जा रहे हैं।
स्वास्थ्य आयुक्त ने कहा है कि संभागायुक्त एवं जिला कलेक्टर शीघ्र अपने जिले की समीक्षा कर यह सुनिश्चित करें कि शासकीय लैबों की जांच क्षमता से अधिक सेम्पल एकत्रित होने पर ही निजी प्रयोगशालाओं में भेजे जायें। यदि इस आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो संबंधित अधिकारी के विरुध्द आवश्यक कार्यवाही की जाये।

सीएम हेल्पलाईन : छबि धूमिल होने से
बचने समय पर अंतरित करें शिकायतें

सीएम हेल्पलाईन में आने वाली कई शिकायतों पर दूसरे विभागों को कार्यवाही करना होती है, यदि इन्हें समय से अंतरित कर दिया जाये तो विभागों की छबि को धूमिल होने से बचाया जा सकता है। यह कहना है सामाजिक न्याय विभाग के प्रमुख सचिव प्रतीक हजेला का।
हजेला ने सभी नगरीय निकायों एवं जनपद पंचायतों के सीईओ को नये निर्देश जारी कर कहा है कि सीएम हेल्पलाईन में विवाह सहायता योजना से संबंधित शिकायत प्राप्त हुई थी जो सामाजिक न्याय विभाग से संबंधित न होकर श्रम विभाग से संबंधित थी। इस शिकायत को समय-सीमा में संबंधित विभाग को अंतरित न करने के कारण यह शिकायत सामाजिक न्याय विभाग में ही प्रदर्शित होती रही। इससे इसका समय पर निराकरण भी नहीं हो पाया। अन्य विभाग की शिकायत लंबित रहने से उस विभाग की छबि धूमिल होती है।
हजेला ने निर्देश दिये कि सीएम हेल्पलाईन में विभाग अंतर्गत प्राप्त हो रही शिकायतें विशेषकर मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह/कल्याणी विवाह सहायता योजना एवं अंत्येष्टि सहायता योजना से संबंधित शिकायतों का विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के प्रावधानों के तहत गंभीरता से परीक्षण करें एवं विभाग से संबंधित न होने पर तत्काल संबंधित विभाग को हस्तांतरित करें जिससे समय-सीमा में उक्त शिकायतों का निराकरण व अनुश्रवण संबंधित विभाग द्वारा अविलंब किया जा सके।

मप्र में शुरु हुई पदोन्नति में आरक्षण की प्रक्रिया
जल संसाधन विभाग के 15 यंत्री बने सहायक यंत्री

मप्र में पदोन्नति में आरक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है तथा न्यायालय के निर्णय के अधीन पदोन्नति आदेश जारी किये जाने लगे हैं। जल संसाधन विभाग ने अपने पन्द्रह उपयंत्रियों को सहायक यंत्री के पद पर पदोन्नति देने के आदेश जारी कर दिये हैं। इनमें एक अनारक्षित, तीन अनुसूचित जाति एवं 11 अनुसूचित जनजाति के हैं।
पदोन्नति आदेश में साफ तौर पर लिखा गया है कि यह पदोन्नति मप्र लोक सेवा (अजाजजा एवं ओबीसी के लिये आरक्षण) अधिनियम 1994 तथा मप्र लोक सेवा पदोन्नति नियम 2002 के उपबंधों और इनके तहत जारी अनुदेशों के तहत की गई है। साथ ही यह पदोन्नति वर्तमान में प्रचलित न्यायालयीन प्रकरणों में पारित आदेशों के अध्यधीन होगी।
इन्हें मिली पदोन्नति :
अनारक्षित कोटे से गिरिश कुमार जोशी, अनुसूचित जाति कोटे से राजेश कुमार प्रजापति, करनलाल पाराशर एवं हेमंत कुमार डोंगरे, अनुसूचित जनजाति कोटे से सत्यप्रकाश सिंघाटिया, करण सिंह ठाकुर, दिलीप सिंह परिहार, देवराम मालवीय, शिवप्रसाद कोल, मनोज यादव, सखाराम डाबर, रघुनाथ चौहान, जगदीश चन्द्र वास्कले, रुमाल सिंह धार्वे तथा राजेश सिंह गौड।

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