डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।राज्य शासन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से भ्रष्टाचार के प्रकरणों में पूछताछ एवं अन्वेषण के लिये अब मप्र पुलिस, ईओडब्ल्यु एवं लोकायुक्त पुलिस संगठन को राज्य सरकार से पूर्वानुमति लेनी होगी। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने निर्देश जारी कर दिये हैं।
निर्देश में कहा गया है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के अनुसार किसी लोक सेवक के द्वारा शासकीय कृत्य या कत्र्तव्यों के निर्वहन में की गई सिफारिश या किये गये विनिश्चय के संबंध में अपराधों की जांच या पूछताछ या अन्वेषण किसी पुलिस अधिकारी द्वारा बिना राज्य शासन की पूर्वानुमति के नहीं किया जा सकता। ऐसी पूर्वानुमति प्राप्त करने के लिये प्रक्रिया निर्धारित की गई है। एक, राज्य शासन की अनुमति प्राप्त करने के लिये अन्वेषण एजेन्सी का प्रमुख समस्त वांछित दस्तावेजों सहित अपना प्रतिवेदन संबंधित प्रशासकीय विभाग को प्रेषित करेगा। दो, प्रशासकीय विभाग परीक्षण कर प्रकरण में अपने स्पष्ट अभिमत सहित सीएम-सीएस कोआर्डिनेशन में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा तथा कोआर्डिनेशन से प्राप्त आदेश के अनुसार, अन्वेषण एजेन्सी को पूर्वानुमति मान्य अथवा अमान्य करने की सूचना दी जायेगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस निर्देश का कड़ाई से पालन करने के लिये कहा है।

प्रदेश के वन क्षेत्रों में अब शुल्क अदा कर फिल्मांकन की सुविधा दी जायेगी

भोपाल।शिवराज सरकार ने वन क्षेत्रों में फिल्मांकन की सुविधा देने नये नियम जारी किये हैं। इसमें निर्धारित शुल्क अदा किये जाने पर वनाधिकारी अनुमति प्रदान करेंगे।
भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत बनाये गये मप्र वन फिल्मांकन नियम 2020 राज्य के सभी आरक्षित एवं संरक्षित वन क्षेत्रों पर लागू होंगे तथा अधिसूचित अभ्यारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों तथा टाईगर रिजर्व क्षेत्र में लागू नहीं होंगे। फिल्मांकन में स्टिल फोटोग्राफी, चलचित्र या चलचित्र निर्माण का अन्य प्रकार शामिल किया गया है। फिल्मांकन के लिये मप्र इको पर्यटन बोर्ड के सीईओ या संबंधित जिले के डीएफओ के समक्ष ऑनलाईन या ऑफलाईन आवेदन करना होगा।
यह रहेगा शुल्क :
वन क्षेत्रों में फिलमांकन के लिये प्रति कैमरामेन प्रतिदिन के हिसाब से शुल्क निर्धारित किया गया है। पहली कैटेगरी में भारतीय शैक्षणिक/अनुसंधान संस्थायें/समस्त राज्य एवं केंद्र शासन की स्थापनायें शामिल की गई हैं जबकि दूसार कैटेगरी में अन्य व्यक्ति/संस्थायें सम्मिलित की गई हैं। प्रथम सात दिन के लिये पहली कैटेगरी में 2 हजार रुपये एवं दूसरी कैटेगरी में 10 हजार रुपये प्रतिदिन, 8 वें से 15 वें दिन तक 1500 रुपये एवं 7 हजार 500 रुपये प्रतिदिन तथा 16 वें दिन और उससे अधिक दिनों के लिये क्रमश: 1 हजार रुपये एवं 5 हजार रुपये प्रतिदिन शुल्क रखा गया है। फिल्मांकन की पूरी अवधि के लिये फीस अग्रिम रुप से देनी होगी तथा दिन की गणना भारतीय समयानुसार 00.00 बजे से 24.00 बजे तक की होगी।
दर्शाना होगा वन क्षेत्र का नाम :
फिलमांकन करने वाले को अपनी फिल्म के प्रदर्शन पर संबंधित वन क्षेत्र का नाम दर्शाना होगा। वन क्षेत्र में कैमरामेन के साथ एक कर्मीदल को भी अनुमति दी जायेगी जिसका कोई शुल्क नहीं लिया जायेगा। डीएफओ का एक प्रतिनिधि कर्मचारी फिल्मांकन दल के साथ अनिवार्य रुप से रहेगा। अनुमति में दी गई शर्तों का उल्लंघन करने पर अनुमति रद्द कर दी जायेगी। फिल्मांकन के दौरान जीवन अथवा सम्पत्ति की किसी दुर्घटनावश हानि के लिये वन विभाग जिम्मेदार नहीं होगा।
—————

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here