सुदेश गौड़ 

 

मिलनाडु के एक ईसाई धर्म प्रचारक पॉल दिनाकरन के ठिकानों से 118 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का खुलासा होना वैसे तो भ्रष्टाचार के अथाह सागर में एक बूंद मात्र है, पर जब आप इसे भारत में चल रहे ईसाई धर्म परिवर्तन के लिए चल रहे षाड़यंत्रिक अभियान के तौर पर देखें तो आपके रोंगटे जरूर खड़े हो जाएंगे। दिनाकरन की संस्थाओं पर कर चोरी के आरोप में आयकर विभाग ने 25 ठिकानों पर छापा मारा था जिसमें 118 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है। तमिलनाडु के चेन्नई एवं कोयंबटूर में दिनाकरन की संस्था ‘ जीसस काल्स मिनिस्ट्रीज’ (जेसीएम) से जुड़े 25 ठिकानों पर 20 जनवरी को छापा मारा गया था।

पॉल दिनाकरन इस क्रिश्चियन मिशनरी के प्रमुख है। इसकी स्थापना इनके पिता डी जी एस दिनाकरन ने की थी और इसके कामकाज देखने वाले बोर्ड में सिर्फ़ इन्हीं के परिवार के ही सदस्य हैं। इनके संस्थान का कामकाज एक दर्जन दूसरे देशों में भी फैला हुआ है । यह परिवार एक डीम्ड यूनिवर्सिटी भी चलाता है जिसका नाम कारुण्य यूनिवर्सिटी है। इस यूनिवर्सिटी की चांसलरशिप भी पॉल दिनाकरन के पास ही है। शनिवार को समाप्त हुई को आयकर कार्रवाई में कोयंबटूर व चेन्नई में दिनाकरन के आवास व ठिकानों से 4.7 किलो सोना भी मिला है जिसे जब्त कर लिया गया है। इस कार्रवाई में लगभग 118 करोड़ की अवैध संपत्ति का भी पता चला है। आयकर विभाग यह भी जांच कर रहा है कि धर्म प्रचार से जुड़े संस्थान के पास यह पैसा कहां से आया और किस मद में खर्च किया जाना था। वैटिकन द्वारा चलाए जा रहे वैश्विक धर्मांतरण अभियान के एंगल से भी पूरे प्रकरण की अलग जांच चल रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मामले पर एनआईए भी सतत निगाह रखे हुए है।

दिनाकरन के जेसीएम से संबद्ध एक संस्था ‘शीशा’ भी गुजरात वन विभाग के राडार पर आ गई है। हुआ यूं कि शीशा ने अपने सोशल मीडिया प्रचार अभियान में खुद को गुजरात वन विभाग से संबद्ध व उनसे जुड़ा होने का भी दावा किया था। गुजरात वन विभाग ने भी ट्वीट कर के स्पष्ट कर दिया है कि उनका दिनाकरन की किसी भी संस्थान से कोई लेना देना या संबद्धता नहीं है। इस चारसौबीसी के ख़िलाफ़ गुजरात वन विभाग भी मामला दर्ज कराकर वैधानिक कार्रवाई कर रहा है।

इस पूरे प्रकरण को समझने के लिए हम यहां पर जिक्र कर रहे हैं सामाजिक मसलों पर अनुसंधान व सर्वे करने वाले वाशिंगटन स्थित प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) की। इस अमेरिकी संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार विश्व की जनसंख्या 2010 में 690 करोड़ थी जो एक अनुमान के मुताबिक़ 2050 में 930 करोड़ तक हो जाएगी। इस रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 2010 की विश्व जनसंख्या में 31.4% ईसाई हैं जो 2050 में भी इतने प्रतिशत ही रहेगी यानी जितनी विश्व आबादी बढ़ेगी उतनी ही इनकी भी वृद्धि होगी यानी समानांतर वृद्धि । वहीं मुस्लिम 2010 में  विश्व आबादी में 23.2% हैं जो 2050 तक बढ़कर 29.7% हो जाएंगे यानी जितनी विश्व आबादी बढ़ेगी उससे तेज गति से इनकी आबादी बढ़ेगी यानी गुणात्मक वृद्धि। इस रिपोर्ट का तीसरा आँकड़ा जो हिन्दूओं से जुड़ा है वह थोड़ा चिंता पैदा करने वाला है। 2010 में विश्व आबादी में 15% हिन्दू हैं जो 2050 में घटकर 14.9% रह जाएंगे यानी जितनी विश्व की आबादी बढ़ेगी उससे कम गति से हिन्दुओं की जनसंख्या बढ़ेगी यानी ऋणात्मक वृद्धि।

2010-2050 के दौरान ईसाई आबादी 217 करोड़ से बढ़कर 292 करोड़ होगी यानी 40 साल में 75 करोड़ बढ़ेगी। इसी दौरान मुस्लिम आबादी 160 करोड़ से बढ़कर 276 करोड़ हो जाएगी यानी 116 करोड़ की वृद्धि। इस तेज गति वृद्धि का कारण रणनीतिक हैं ताकि मुस्लिम आबादी ईसाई आबादी के बराबरी तक पहुंच सके फिर थोड़े ही समय में उससे आगे निकल सके। 2010 में विश्व में हिन्दू आबादी 103 करोड़ आंकी गई है जो 2050 तक 138 करोड़ हो सकती है। यह वृद्धि 35 करोड़ की होगी पर विश्व की औसत वृद्धि से काफी कम होगी।

अब प्रथम व द्वितीय स्थान के लिए ईसाई व मुस्लिम में कश्मकश चल रही है कि कैसे वे संख्या बल बढ़ाकर दूसरे पर अपना वर्चस्व साबित कर सकें। ईसाई धनबल का इस्तेमाल कर धर्मांतरण कराने के लिए दुनिया भर में जी तोड़ परिश्रम कर रहे हैं। तमिलनाडु में पॉल दिनाकरन उसी बड़ी साजिश का हिस्सा साबित हो तो हममें से किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इस प्रकरण में गहराई से जांच होगी तो पता चलेगा यह तो आइसबर्ग की टिप है यानी जितना सोचा था उससे दस गुना बड़ा मामला।

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