इंदौर । हम शरीर रूप में जिएंगे तो जन्म भी है और मृत्यु भी है लेकिन जब आत्म स्वरूप में जिएंगे तो अमृत रूप हो जाएंगे। जीवन में अच्छे काम हमेशा करते रहना चाहिए। हम समाज को कुछ सकारात्मक सोच दें यही प्रत्येक व्यक्ति की सोच होनी चाहिए।
ये विचार  जाल सभा गृह में आयोजित डा, बनवारी लाल जाजोदिया के अमृत महोत्सव पर आयोजित सम्मान समारोह में आधात्मिक गुरु स्वामी दिव्यानंद भिक्षु जी ने व्यक्त किए। आपने कहा कि शरीर की एक यात्रा है और वह जीवन के विभिन्न पड़ावों से गुजरकर पूरी होती है। प्रकृति की अपनी एक अलग ही यात्रा होती है जो निरंतर चलती रहती है। आपने कहा कि जन्मोत्सव मनाना चाहिए लेकिन हमारा भाव ऐसा होना चाहिए कि हमारी संतान हमें पति पत्नी के रूप में नहीं माता पिता के रूप में सम्मान दे ।
अवनि से अम्बर तक का विमोचन
कार्यक्रम में स्वामी दिव्यानंद भिक्षु जी सहित अतिथिगण प्रो, डा, राजीव शर्मा, शिक्षाविद पुरुषोत्तम अग्रवाल, रोटरी क्लब के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डा गजेन्द्र नागर आदि ने
“अवनि से अम्बर तक” ग्रंथ सहित पुस्तक अनुभवामृत, स्पंदन, हनीडयू(अमृत बूंद ) का लोकार्पण कर श्री जाजोदिया को शाल श्रीफल, स्मृति चिन्ह व अभिनंदन पत्र से सम्मानित किया। सम्मान पत्र का वाचन टोनी शुक्ला ने किया व प्रो, राजीव शर्मा ने पुस्तकों पर चर्चा की। इसके पूर्व माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन व पंडित भवानी शंकर शास्त्री द्वारा स्वस्ति वाचन किया गया व आशा जाकड़ ने सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की। स्वागत उदबोधन संजय मालवी ने दिया।
समारोह में डा, जाजोदिया के अतिरिक्त मीनल जाजोदिया, रमेश कश्यप, योगेश जिन्दल, अशोक द्विवेदी, विजय गोयनका, पुरुषोत्तम अग्रवाल आदि ने सम्बोधित किया। तरुण मिश्रा द्वारा संचालित समारोह में विभिन्न साहित्यिक व अन्य संस्थाओं की ओर से तथा व्यक्तिगत रूप से भी डा, जाजोदिया का सम्मान किया गया ।
जीवन के 75 वर्ष पूर्ण होने पर केक काटकर परिजनों सहित अन्य सभी ने अमृत महोत्सव को सार्थकता प्रदान की। आभार माना डा, स्वाति सिंह ने।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here