राम मोहन चौकसे

पत्रकारिता जगत का एक मजबूत स्तम्भ आज ढह गया।अपनी कलम के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर पहचान बनाने वाले राजकुमार केसवानी ने आज इस दुनिया को अलविदा कह दिया।राजकुमार केसवानी का इंदौर और भोपाल से गहरा नाता था।इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार रहे स्व. कमल दीक्षित जी के बेहद करीबी थे राजकुमार केसवानी जी।यही कारण था कि राजकुमार केसवानी इंदौर नवभारत के भोपाल स्थित संवाददाता थे। ठेठ भोपाली होने के कारण उनकी वरिष्ठ पत्रकार स्व.जगत पाठक से प्रगाढ़ मित्रता थी। दोनों हरफनमौला और फकीराना अंदाज के पत्रकार थे। केसवानी जी नवभारत भोपाल कार्यालय में अक्सर जगत पाठक जी मिलने आया करते थे।दोनों के ठहाकों की आवाज सड़क तक गूंजा करती थी। मेरे उस्ताद जगत पाठक जी ने ही 1982 में केसवानी जी से मेरा परिचय करवाया था।केसवानीजी ने पहली मुलाकात में मुझसे सवाल किया था कि मुझे जानते हो। मेरे इंकार करने पर पूरा परिचय देते हुए कहा था कि मैं नवभारत इंदौर का भोपाल संवाददाता भी हूँ।
अस्सी के दशक में केसवानी जी स्वम का साप्ताहिक अखबार शहरनामा निकाला करते थे।अखबार को चर्चा में लाने के लिए केसवानी जी ने जगत पाठक जी से एक लेख लिखने का निवेदन किया। लेख की शर्त थी कि वह लेख राजकुमार केसवानी के नाम से प्रकाशित होगा।उस समय भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड में गैस रिसन की दो वारदात हो चुकी थी।जिसे प्रशासन स्तर पर इस हादसे को दबा दिया गया था।जगत पाठक जी का लिखा लेख शहरनामा में छपा।प्रशासन ने साप्ताहिक अखबार ही बंद करवा दिया।इंदौर के मूर्धन्य पत्रकार प्रभाष जोशी के नेतृत्व में शुरू हुए जनसत्ता में भी ‘ मौत के मुहाने पर भोपाल ‘शीर्षक से लेख केसवानी जी ने जनसत्ता में छपने के लिए भेज दिया।प्रभाष जी ने इंदौर के सम्बन्धो के चलते लेख को प्राथमिकता से छापा।इस लेख के छपने के तीन दिन बाद दो और तीन दिसम्बर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कीटनाशक दवा फैक्ट्री से मिक गैस रिसी।हजारों लोग मौत के मुंह मे समा गए।केसवानी जी रातों रात अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छा गए।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और सिंधी साहित्यकार लक्ष्मण केसवानी के सुपुत्र राजकुमार जी नवभारत,न्यूयार्क टाइम्स,एशियन एज,स्टार टी वी के संवाददाता रह चुके है। दैनिक भास्कर में सिनेमा पर साप्ताहिक स्तंभ वर्षों से लिख रहे थे।हिंदी,उर्दू पर अच्छी पकड़ होने से उनके शब्दों में रवानी थी।वे हिंदी सिनेमा के चलते फिरते शब्दकोश थे।रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित केसवानी के परिवार में उनका बेटा रौनक,धर्मपत्नी,छोटा भाई शशि है।केसवानी जी एक माह से बीमार चल रहे थे। भोपाल के बंसल अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।कोरोना उन्हें लील गया।हकीकत में पत्रकारिता का राजकुमार चला गया।उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

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