विजय रांगणेकर
अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन की स्कोरिंग प्रणाली का 21 अंकों के तीन गेम का मौजूदा प्रारूप अपरिवर्तित रहेगा क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन संघ की वार्षिक आम बैठक में अंतर से अस्वीकृत हो गया है। स्कोरिंग पद्धति को 3×21 से 5×11 में बदलने के लिए एक प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन यह आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नही कर पाया। प्रस्ताव के अनुमोदन के लिए लगभग ६७% मतों की आवश्यकता थी, प्रस्ताव के पक्ष 66.31%और इसके विरुद्ध 33.69% मत प्राप्त हुए।
स्कोरिंग प्रणाली से संबंधित यह प्रस्ताव बैडमिंटन इंडोनेशिया और मालदीव बैडमिंटन एसोसिएशन द्वारा बैडमिंटन के कानूनों में संशोधन के लिए रखा गया था। बैडमिंटन एशिया, बैडमिंटन कोरिया एसोसिएशन और चीनी ताइपे बैडमिंटन एसोसिएशन द्वारा इसका समर्थन किया गया था। अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन संघ परिषद ने भी इस प्रस्ताव के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया था।
अंतर्राष्ट्रीय बेडमिंटन संघ ने बदलते समय के साथ तालमेल बनाये रखने और खेल में रोचकता व द्वन्द बढ़ाने के लिहाज से पूर्व में अनेक कदम उठाये है जिसमे स्कोरिंग पद्धति में परिवर्तन प्रमुख रहा है. सर्वप्रथम वर्ष 2002 में 15X3 सर्विस पाईंट के स्थान पर 7X5 सर्विस पाईंट को लागू किया गया. बाद में पुन: 15X3 सर्विस पाईंट अपनाते हुए वर्ष 2005 में वर्तमान रैली पद्धति लागू की गयी थी. शरुआत में इस अंक पद्धति का काफी विरोध हुआ लेकिन धीरे धीरे खिलाड़ी इसके अभ्यस्त हों गए. अब अंतर्राष्ट्रीय बेडमिंटन संघ पुन: स्कोरिंग पद्धति में नए विकल्पों पर विचार कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बेडमिंटन संघ की मान्यता है नवीन अंक पद्धति से खेल की जीवंतता बढ़ेगी. वैसे शटल की दुनिया का वास्तविक चैम्पियन तों वही होता है जो प्रत्येक परिस्थिति के अनुरूप अपने आपको ढ़ाल सके. परिवर्तन भले ही खेल उपकरण, नियम, मौसम, कोर्ट, विपक्षी खिलाड़ी की शैली या अंक पद्धति में ही क्यों न हों.

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here