किसी शो में एक खास क्षेत्र की वास्तविक पहचान और झलक को सामने लाने में काफी सारी चीजें महत्वपूर्ण भूमिकायें निभाती हैं। कलाकारों का चयन करने के अलावा, वहां की बोली, डायलाॅग, लोकेशन और काॅस्ट्यूम, पात्रों को खड़ा करने और दर्शकों के साथ एक रिश्ता कायम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसा ही कुछ एण्डटीवी के ‘और भई क्या चल रहा है?‘ के मामले में भी है, जो अपने सारे लखनवी अदब, अंदाज, रहन-सहन और मिजाज को अपनी मौज-मस्ती और मनोरंजन से भरपूर कहानी के माध्यम से सामने लेकर आया है।

यहां की असली खुशबू और खूबसूरती को साकार करने के लिये इस शो की टीम ने काफी रिसर्च की है। काॅस्ट्यूम की बारीकी पर खास ध्यान दिया गया है, जिससे मिर्जा और मिश्रा परिवारों की गंगा-जमुनी तहजीब बखूबी झलकती है। रेणु पित्वा, काॅस्ट्यूमर डिजाइनर, ‘और भाई क्या चल रहा है?‘ का कहना है, ‘‘चूंकि, इस शो में गंगा-जमुनी तहजीब को दिखाया गया है, इसलिये, हमने काॅस्ट्यूम के जरिये भी उस पहचान को सामने लाने की कोशिश की है। हमारा आइडिया ऐसा लुक तैयार करना था जो वास्तविक लगे और दर्शकों को वह अपना-सा लगे। इसलिये हमने किरदारांे के फाइनल लुक के क्रम और उसके काॅम्बिनेशन से लेकर जीरो तक उसमें कई सारे बदलाव किये। हमने उनकी आॅन-लाइन पर्सनालिटी के साथ लुक का तालमेल बिठाने की भी कोशिश की। जैसे, इस शो के मेल लीड, रमेश प्रसाद मिश्रा (अंबरीश बाॅबी) और जफर अली मिर्जा (पवन सिंह) के लुक को हमने सिंपल रखने के साथ उसे कुरता और पठानी के साथ ट्रेडिशनल भी रखा। रमेश प्रसाद मिश्रा के लिये हमने हल्के रंग के काॅटन कुरते के साथ नेहरू वेस्ट रखा। वहीं जफर अली मिर्जा के लिये हमने गहरे रंगों वाली पठानी के साथ चिकनकारी वर्क को चुना। हमने उनके लुक को आरामदायक, पारंपरिक और वास्तविक रखा है।‘‘ शांति मिश्रा (फरहाना फातिमा) का किरदार लखनऊ के ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखता है, जोकि चंदेरी और बनारसी साड़ियों में नजर आती है। अपने लुक के बारे में आगे फरहाना फातिमा कहती हैं, ‘‘मैं शांति की भूमिका निभा रही हूं, वह मुंहफट और दमदार स्वभाव की है। वह ज्यादातर साड़ियां ही पहनती है लेकिन उसके कलर्स काफी चटक होते हैं और बाॅर्डर के साथ काॅन्ट्रास्ट करते हुये उसके किरदार में और चार-चांद लगाते हैं। यह मटेरियल राॅ सिल्क, प्योर सिल्क, सिल्क काॅटन और चंदेरी काॅटन का मिला-जुला रूप है। बेहतरीन फेब्रिक के साथ बड़ी ही बारीकी से कलर पैलेट का चुनाव किया गया है। शांति का लुक वास्तविक रखने के साथ-साथ उसके किरदार की खूबियों के साथ पूरा न्याय किया गया है। लखनऊ में महिलायें जिस तरह से अपने सिर पर पल्लू रखते हुये साड़ियां पहनती हैं हमने उस खास अंदाज को रखने की कोशिश भी की है। इन सारी चीजों ने मिलकर शांति के किरदार को परदे पर साकार करने में मदद की है। साथ ही उसे वास्तविक और उसके अनुरूप बनाया है।‘‘ वहीं दूसरी तरफ सकीना मिर्जा (अकांशा शर्मा) ने कई सारे पेस्टल रंगों के पारंपरिक आउटफिट पहने हैं। मीठी जबान वाली सकीना मिर्जाका किरदार निभा रहीं, आकांशा शर्मा कहती हैं, ‘‘एक ठेठ लखनवी अंदाज पेश करने के लिये, हमारे काॅस्ट्यूम अमीनाबाद और हजरतगंज के बाजारों से खासतौर पर चुने गये हैं। लखनऊ अपने पारंपरिक पहनावे, घाघरे के लिये जाना जाता है, जिन्हें मुस्लिम महिलायें पहना करती हैं। दरअसल, घाघरा ढीले-ढाले ट्राउजर के साथ घुटनों के नीचे से प्लीट्स का एक पेयर होता है, जिसे घुटने की लंबाई तक वाले कुरते और दुपट्टे के साथ पहना जाता है। दुपट्टों पर जरी और जरदोजी के साथ गोटे का काम होता है, खासकर घुटनों के पास वाले हिस्से में। यह पारंपरिक पहनावा 24 मीटर के रेशम, ब्रोकेड और कामख्वाब से बने होते हैं। इससे मीठे स्वभाव और मीठी जबान वाली सकीना का व्यक्तित्व और निखरकर आता है। यह उस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को जीवंत करने का काम करते हैं।‘‘

लखनऊ की पृष्ठभूमि पर बना एण्डटीवी का ‘और भई क्या चल रहा है?‘ सिचुएशनल काॅमेडी की एक झलक पेश करता है। जब दो अलग-अलग संस्कृतियों से ताल्लुक रखने वाले परिवार एक ही छत के नीचे रहने को मजबूर हों तो इस तरह की सिचुएशनल काॅमेडी की स्थिति बनती ही है। ये दोनों परिवार छोटे शहरों में रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करते नजर आते हैं और उनकी पत्नियां मुकाबले के लिये हमेशा तैयार रहती हैं।

देखिये, मिर्जा और मिश्रा परिवारों के बीच हर दिन के मुद्दों और घटनाओं को लेकर रोजाना होने वाली नोंकझोंक और दिलचस्प हाथापाई, एण्डटीवी के ‘और भई क्या चल रहा है?‘ में हर सोमवार से शुक्रवार, रात 9.30 बजे सिर्फ एण्डटीवी पर!

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