इंदौर।  कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के चलते लम्बे समय से स्मार्ट सिटी डवलपमेंट लिमिटेड (Smart City Development Limited) की बोर्ड बैठक ही आयोजित नहीं हो सकी। कल 20वीं बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें अध्यक्ष के रूप में कलेक्टर और कार्यपालक निदेशक के रूप में निगमायुक्त (Municipal Commissioner) सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। स्मार्ट सिटी (Smart City) के धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर कलेक्टर ने कुछ नाराजगी भी जाहिर की और काम की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। वहीं यह भी तय किया गया कि शहर में जो 10 कचरा ट्रांसफर स्टेशन हैं वहां पर यूनिपोल लगाए जाएंगे। छप्पन दुकान पर 10 सीसीटीवी कैमरा सिस्टम (CCTV Camera System), बड़ा गणपति (Bada Ganpati) से कृष्णपुरा पुल सडक़ निर्माण (Krishnapura Bridge Road Construction), नेहरू पार्क (Nehru Park) में ऑल एबिलिटी पार्क (All Ability Park) सहित अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

लगभग पौने 2 घंटे तक चली बैठक में 2020-21 के वित्तीय विवरणों का अनुमोदन करते हुए कम्पनी बोर्ड में एक स्वतंत्र निदेशक की नियुक्ति पर भी निर्णय लिया गया।कल नेहरू पार्क स्थित स्मार्ट सिटी कार्यालय पर 20वीं बोर्ड की बैठक आयोजित हुई, जिसमें अध्यक्ष के रूप में कलेक्टर मनीष सिंह (Collector Manish Singh), निगमायुक्त श्रीमती प्रतिभा पाल, कम्पनी सीईओ ऋषभ गुप्ता (CEO Rishab Gupta) और बोर्ड के अन्य सदस्य व विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। स्मार्ट सिटी द्वारा चल रहे विभिन्न प्रोजेक्टों की समीक्षा की गई और 2020-21 के वित्तीय विवरणों का अनुमोदन के साथ ही कम्पनी बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक की नियुक्ति के प्रस्ताव पर विचार कर एक नाम पर सहमति दी गई। कलेक्टर श्री सिंह ने महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों पर चर्चा करते हुए कहा कि काम की गति बढ़ाई जाए और निर्धारित समय सीमा में इन कामों को पूरा किया जाए, ताकि जनता को इन प्रोजेक्टों का लाभ मिल सके। शहर में जो विभिन्न गारबेज ट्रांसफर स्टेशन हैं उन पर यूनिपोल लगाए जाएंगे। शहर में नगर निगम ने 10 कचरा ट्रांसफर स्टेशन बना रखे हैं, जो सिरपुर, लालबाग, राजशाही पैलेस के पास, आसाराम बापू चौराहा, एमआर-9 सहित अन्य स्थानों पर हैं। इसके अलावा नेहरू पार्क में ऑल एबिलिटी पार्क, कबीटखेड़ी के एसटीपी प्लांट पर बायो एनपीके का कार्य भी कराया जाएगा।

एमओजी लाइन (MOG Queue) का जीर्णोद्धार भी स्मार्ट सिटी (Smart City) प्रोजेक्ट के तहत होना है, जिसमें बाधक 350 सरकारी मकानों को तोडक़र कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनना है। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने इस पर स्टे दिया था, जिस पर अब शासन ने पुनरीक्षण यानी रिव्यू पिटीशन दायर कर दी है। इन मकानों में रह रहे कर्मचारियों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी, क्योंकि उन्हें खाली करने के नोटिस मिले थे।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here