वाशिंगटन.. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने साथ अमेरिका से 157 कलाकृतियां और पुरावशेष भी ला रहे हैं। इनमें कई हिंदू मूर्तियां बुद्ध व जैन प्रतिमाएं शामिल हैं। 56 मूर्तियां टेराकोटा की हैं जबकि 71 कलाकृतियों में 60 हिंदू, 16 बौद्ध व 9 जैन कृतियां हैं। ये मूर्तियां तस्करों और मूर्ति व्यवसायियों द्वारा चोरी-छुपे विदेश ले जाई गई थींं जिन्हें वापस लाने के प्रयास भारत सरकार द्वारा लगातार की जा रही थी। मोदी ने अमेरिका द्वारा भारत को पुरावशेषों की वापसी के लिए अपनी गहरी प्रशंसा व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति बाइडेन सांस्कृतिक वस्तुओं की चोरी, अवैध व्यापार और तस्करी से निपटने के अपने प्रयासों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

जो कलाकृतियां भारत वापस आ रही हैं, उनमें ज्यादातर ११वीं-१४वीं सीई के पुरावशेष शामिल हैं, जैसे २००० ईसा पूर्व की तांबे की मानव कृति, टेराकोटा फूलदान, बलुआ पत्थर में रेवांता के नटराज। 45 पुरावशेष बिफोर कॉमन एरा के हैं। इनका निर्माण धातु, पत्थर और टेराकोटा में फैला हुआ है। कांस्य संग्रह में मुख्य रूप से लक्ष्मी नारायण, बुद्ध, विष्णु, शिव पार्वती, 24 जैन तीर्थंकर और कंकलमूर्ति, ब्राह्मी और नंदिकेश के अलावा अन्य अज्ञात देवताओं और दिव्य आकृतियों की प्रसिद्ध मुद्राओं की अलंकृत मूर्तियां शामिल हैं56 टेराकोटा टुकड़े (फूलदान 2 सीई, हिरण की जोड़ी 12 वीं सीई, महिला 14 वीं सीई की बस्ट) और 18 वीं सीई तलवार है जिसमें शिलालेख के साथ फारसी में गुरु हरगोविंद सिंह का उल्लेख है)। यह मोदी सरकार द्वारा दुनिया भर से हमारी पुरावशेषों और कलाकृतियों को वापस लाने के प्रयासों का नतीजा है। इनमें कई धऱोहर मध्यभारत की हैं।

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