नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन. दिवंगत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के परिवार के आखिरी प्रमुख सदस्य ने भी कांग्रेस की राजनीति छोड़ दी। उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी दिल्ली में पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता थीं लेकिन अब उन्होंने कहा है कि वे सक्रिय राजनीति छोड़ रही हैं। हालांकि कांग्रेस की सदस्य बनी रहेंगी। लेकिन उनके ट्वीट ने भारी मन से संकेतों में कांग्रेस की कार्यप्रणाली की तरफ संकेत किया है। शर्मिष्ठा और उनके पहले भाई अभिजीत के कांग्रेस छोडने से गांधी परिवार की रीति-नीति पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं।

शर्मिष्ठा ने एक ट्विटर उपयोगकर्ता के जवाब में पद छोड़ने के अपने फैसले की घोषणा की, जिन्होंने उन्हें “अच्छा राजनेता” बताया। शर्मिष्ठा ने एक समाचार एजेंसी से कहा कि उनका निर्णय इस तथ्य में निहित है कि उन्हें एहसास हुआ कि वह “राजनीति के लिए नहीं हैं” और “उन चीजों को करने में समय बिताना चाहती हैं जो उन्हें पसंद हैं”। उन्होंने विरोध के लिए विरोध की राजनीति पर तंज कसा है।

उन्होंने इस बात से इनकार किया कि वह किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि राजनीति, विशेष रूप से विपक्षी राजनीति में, पेट में एक निश्चित आग की आवश्यकता होती है। मैंने महसूस किया कि मेरे पास वह नहीं है और मैं अब सक्रिय राजनीति में नहीं रह सकती। इस कथन में उनकी वेदना झलक रही है क्योंकि वह लगातार प्रमुख पदों पर रहीं। दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय प्रवक्ता तक बनाई गईं।

वरिष्ठ पत्रकार ओंकार चौधरी कहते हैं कि प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय जाना भारी पड़ा। प्रणब दा के इस कदम ने राजनीतिक क्षेत्रों में खासा भूचाल पैदा किया था और जाहिर है कि गांधी परिवार को यह बिल्कुल नहीं भाया था। उन्हें तो गांधी परिवार ने प्रधानमंत्री तक नहीं बनने दिया और राष्ट्रपति बनने के लिए पापड़ बेलने लगे। उन्हें अंतिम दिनों में अपमानित किया गया। जब 9 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति भवन में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया तब गांधी परिवार उक्त कार्यक्रम से ही गायब था। राजनीतिक विश्लेषक इसी तरह के व्यवहार के लिए पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहराव का भी जिक्र करते हैं जिन्हें गांधी परिवार ने उपेक्षित किया। उनकी समाधि तक के लिए दिल्ली में जगह देने में आनाकानी की गई।

यद्यपि शर्मिष्ठा की कांग्रेस में गहरी आस्था है। उन्होंने लिखा-मैं कांग्रेस क्यों छोड़ूं जो कि मेरा घर है। पार्टी ने उन्हें कई अवसर दिए। अब मुझे बोलने की ज्यादा आजादी मिल गई है। शर्मिष्ठा पार्टी की वर्तमान कार्यप्रणाली पर संकेत करती हैं। सोश्यल मीडिया पर एक टिप्पणी के जवाब में वे कांग्रेस के शिवसेना से हाथ मिलाने को इंगित करती हैं। यह विडंबना है कि कांग्रेस जब कम्युनिस्ट कन्हैया कुमार और निर्दलीय जिन्गनेश मेवाणी, प्रशांत किशोर जैसे बाहरी नेताओं को लाकर नई टीम बनाने की सोच रहा है वहीं कांग्रेस की विरासत से जुड़े लोग (ज्योतिरादित्य, जितिन प्रसाद, शर्मिष्ठा जैसे) छोड़कर जा रहे हैं, अपने लिए पार्टी में बेहतर जगह नहीं होने जैसे कारणों से।

परिवार ने पहले ही पार्टी छोड़ दी थी

कभी कांग्रेस के संकटमोचक माने जाने वाले प्रणब मुखर्जी को जिस तरह इंदिरा गांधी के बाद परिवार से उपेक्षा झेलनी पड़ी, उससे यह अनुमान कई राजनीतिक सयानों को था कि उनके बच्चों का भविष्य कांग्रेस में शायद ही सुरक्षित रह सकेगा। यही हुआ, इस साल जुलाई में, शर्मिष्ठा के भाई और प्रणब मुखर्जी के बेटे, अभिजीत मुखर्जी, जो खुद कांग्रेस के पूर्व सांसद थे, ने अपनी निष्ठा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में स्थानांतरित कर दी। उस समय, शर्मिष्ठा ने ट्विटर का सहारा लिया था और अपने कदम की ओर इशारा करते हुए एक रहस्यमय “उदास” लिखा था।

फिर अगस्त में, पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) की पूर्व महासचिव और प्रणब मुखर्जी की भाभी शुभ्रा घोष टीएमसी में शामिल हो गईं। 2014 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद, शर्मिष्ठा ने केवल एक चुनाव लड़ा – 2015 दिल्ली विधानसभा चुनाव, लेकिन आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार सौरभ भारद्वाज से हार गईं। सितंबर 2019 में, उन्हें कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में नियुक्त किया गया था। फरवरी 2019 में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) के संचार प्रमुख के पद से इस्तीफा देने के बाद, वह पिछले कुछ वर्षों से कम प्रोफ़ाइल रख रही थीं। हालाँकि उन्होंने अपनी शिकायत सार्वजनिक रूप से व्यक्त नहीं की थी, लेकिन DPCC से अपना इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने सितंबर 2020 में दिल्ली महिला कांग्रेस की प्रमुख का पद भी छोड़ दिया।

शर्मिष्ठा ने लिखा है- मैं कुछ समय से किसी राजनीतिक कार्यक्रम में भाग नहीं ले रहा थी। लेकिन मुख्य रूप से मेरे पिता के निधन के बाद, मैं उदास और उदास महसूस कर रहा थी। मैंने चिंतन करने के लिए कुछ समय निकाला और महसूस किया कि मुझे ऐसे काम करने की जरूरत है जो मेरे मूल के साथ अधिक तालमेल बिठा सके। मै 56 साल की हूँ। मेरे जीवन के मुश्किल से 10 सक्रिय, स्वस्थ वर्ष बचे हैं। मैं उस समय का उपयोग उन चीजों को करने के लिए करना चाहती हूं जो नृत्य और कला जैसे मेरे मूल से जुड़ती हैं। शर्मिष्ठा एक प्रशिक्षित कथक नर्तक है।

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