डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।प्रदेश में लोकायुक्त एवं उपलोकायुक्त के नाम से बजट हेड सात साल बाद बन पाया है। इससे पहले यह सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत अन्य प्रशासनिक सेवायें के नाम से था।
बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के मेजर से लेकर माईनर तक के बजट हेड के शीर्षक एवं उसके क्रमांक केंद्र सरकार के भारत के महालेखा नियंत्रक के अंतर्गत कार्यरत कण्ट्रोलर जनरल ऑफ अकाउण्ट-सीजीए तय करते हैं न कि राज्य सरकार। वर्ष 2014 में सीजीए ने राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग के अन्य प्रशासनिक व्यय के हेड में बदलाव कर इसे लोकायुक्त/उपलोकायुक्त कर दिया था। लेकिन इन सात सालों में पुराना बजट हेड अन्य प्रशासनिक व्यय ही चलता रहा।
हाल ही में भारत के महानियंत्रक लेखा ने इस गलती को पकड़ा और राज्य के वित्त विभाग को सूचित किया। वित्त विभाग ने सीजीए से पूछा कि उसने कब इस बजट हेड के परिवर्तन की सूचना दी, लेकिन सीएजी यह बता नहीं पाया। चूंकि वर्तमान साल का बजट तैयार हो गया था इसलिये अब वित्त विभाग ने बजट हेड में बदलाव कर इसे अगले वित्त वर्ष 2022-23 से इसे लागू करने का आदेश जारी कर दिया है। इस बजट हेड में लोकायुक्त संगठन के सभी वेतन-भत्ते एवं अन्य व्यय शामिल रहते हैं।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि सीजीए ने सात साल पहले बजट हेड में बदलाव किया था परन्तु इसकी विधिवत सूचना नहीं दे पाया था। अब इस बजट हेड में बदलाव कर दिया है। कोई आडिट आपत्ति न आये, इसलिये ऐसा किया गया है।

उपभोक्ता आयोग को शिकायत करते समय अब ई-मेल,मोबाईल नंबर व पासपोर्ट साईज फोटो भी देना होगा

राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के नये उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत अपने पुराने सभी नियमों में रद्द कर नये नियम जारी कर उन्हें प्रभावशील कर दिया है। नये नियमों के अनुसार, अब राज्य उपभोकता आयोग या जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत करने के दौरान शिकायतकत्र्ता को अपना नाम, विवरण, ई-मेल आईडी, मोबाईल नंबर एवं पासपोर्ट साईज फोटो भी देना होगा।
इसके अलावा शिकायतकत्र्ता को प्रतिपक्ष अथवा पक्षों के नाम एवं विवरण भी देने होंगे। इसी प्रकार, अब राज्य आयोग में एक अध्यक्ष एवं न्यूनतम चार सदस्य होंगे जबकि जिला आयोग में एक अध्यक्ष एवं न्यूनतम दो सदस्य होंगे जिनमें एक महिला शामिल होगी। जिला आयोग प्रत्येक तीन माह में अपनी रिपोर्ट राज्य आयोग को प्रस्तुत करेंगे। नये नियमों में राज्य आयोग एवं जिला आयोग की शासकीय मुद्रा (सील) एवं सम्प्रतीक भी तय कर दिया गया है जोकि इनकी आधिकारिक मोहर होंगी।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार के नये उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत पुराने नियमों को हटा कर नये नियम जारी किये गये हैं तथा अब इनके अनुसार ही राज्य एवं जिला आयोग कार्य करेंगे।

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