मप्र महिला अपराध शाखा ने राज्य में जारी किये निर्देश

घटना स्थल के क्षेत्राधिकार की परेशानी नहीं होगी

डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।प्रदेश में अब दहेज प्रताडऩा की शिकायतें मायके से भी हो सकेंगी, पुलिस थाने ससुराल क्षेत्र के थाने में जाकर शिकायत करने का बहाना नहीं बना पायेंगे।
पुलिस मुख्यालय में महिला अपराध शाखा की एडीजीपी प्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश भेजकर कहा है कि दहेज प्रताडऩा की धारा 498 ए भादवि के प्रकरणों में पुलिस मुख्यालय में शिकायतें आ रही हैं कि पति एवं उसके परिजनों द्वारा पीडि़त महिला जो ससुराल से निकाल दी गई हो या प्रताडऩा से तंग आकर स्वयं घर छोडक़र चली गई हो, अपने मायके में आश्रय ले लेती है तथा जब वह थाने जाती है तो उसे यह कहा जाता है कि आपको घटना स्थल (जहां ससुराल स्थित है) के क्षेत्राधिकार के थानों में जाकर अपराध पंजीबध्द कराना होगा। एडीजीपी ने इस प्रक्रिया को अनुूचित कहा है तथा निर्देश दिये हैं कि पीडि़ता के मायके के क्षेत्र के थाने में भी दहेज प्रताडऩा का अपराध पंजीबध्द किया जाये। यदि पीडि़त महिला प्रताडऩा उपरान्त किसी अन्य क्षेत्र में आश्रय ले रही है तो उस क्षेत्र के थाने में भी अपराध दर्ज किया जाये।
एडीजीपी ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के रुपाली देवी विरुध्द उप्र के मामले में 9 अप्रैल 2019 को दिये निर्णय का भी हवाला दिया गया है जिसमें उक्त बातें कही गई हैं।

अनुदान लेने वाली शैक्षणिक संस्थाओं के शिक्षकों को राज्य सरकार नहीं करेगी ग्रेच्युटी का भुगतान

राज्य की ऐसे स्कूल जो सरकारी अनुदान से संचालित होते हैं, उनके सेवानिवृत्त शिक्षकों को स्कूल शिक्षा विभाग ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं करेगी बज्कि इसका भुगतान करने की जिम्मेदारी संबंधित अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्था की होगी।
राज्य के लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक केके द्विवेदी ने इस संबंध में सभी संयुक्त संचालकों को निर्देश जारी कर कहा है कि ग्रेच्युटी का भुगतान करने के संबंध में उच्च न्यायालयों में लगी याचिकाओं पर शासन स्तर से आदेश जारी करने का आग्रह किया जाता है जबकि राज्य सरकार में ऐसी संस्थाओं के रिटायर्ड शिक्षकों के लिये कोई प्रावधान नहीं है।
निर्देश में यह भी बताया गया है कि उच्च न्यायालय ने 29 मई 2020 में आदेश दिया है कि ग्रेच्युटी राशि के भुगतान का दायित्व संबंधित अशासकीय संस्था का है, न कि मप्र शासन का। इसलिये उच्च न्यायालय में जवाबदावा प्रस्तुत करने के लिये किसी प्रकार के अन्य आदेश की आवश्यक्ता प्रतीत नहीं होती है। इसलिये शासन के पक्ष की ओर से याचिकाओं में यही जवाबदावा प्रस्तुत किया जाय।

निर्भया फण्ड से मप्र में महिलाओं के लिये सुरक्षित पर्यटन योजना

देश में पहली बार निर्भया फण्ड का उपयोग मप्र में महिलाओं के लिये सुरक्षित पर्यटन में किया जायेगा। इस योजना को न केवल केंद्र सरकार से मंजूरी मिली है बल्कि इसके लिये करीब सत्रह करोड़ रुपयों की राशि भी जारी कर दी गई है। इस राशि में राज्य सरकार भी 11 करोड़ रुपये की राशि खर्च करेगी तथा इस प्रकार कुल 28 करोड़ रुपये इस योजना में व्यय किये जायेंगे। इसी माह अक्टूबर के अंत में इस योजना की लांचिंग करने की तैयारी है।
इस योजना को प्रदेश के 30 पर्यटन कल्स्टरों के 50 डेस्टीनेशन में शुरु किया जायेगा। इनमें सांची, बांधवगढ़, कान्हा, खजुराहो, ओरछा, पचमढ़ी, पन्ना, पेंच, जबलपुर, अमरकंटक, भेड़ाघाट, चित्रकूट, दतिया, मैहर आदि भी शामिल हैं। इस योजना में पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग तथा पर्यटन विभाग भी भागीदारी करेगा।
इस योजना के तहत, पर्यटन स्थलों पर ऐसा माहौल तैयार किया जायेगा जहां पर महिलाएं अकेली भी सैर सपाटे के लिए आ सकें। उनको न सिर्फ सुरक्षा का अहसास कराया जायेगा बल्कि उनके आस-पास भी महिलाओं का ही साथ रहेगा। इन स्थानों पर पुलिस के साथ रिक्शा चालक से लेकर गाइड और होटलों का स्टॉफ भी महिला ही रहेगा। इसके लिए आसपास के गांवों की महिलाओं को पर्यटन से जोड़ा जा रहा है और उन्हें आत्मरक्षा की ट्रेनिंग भी दी जायेगी। इन पर्यटन केंद्रों पर महिला पुलिस की तैनाती भी की जाएगी।

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